वन्य जीव संरक्षण Wild life conservation

वन्य जीव संरक्षण Wild life conservation

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख वन्य जीव संरक्षण (Wild life conservation)  में। दोस्तों यहाँ पर आप वन्य जीव क्या है? वन्य जीवन क्या है?

वन्य जीव संरक्षण, वन्य जीवन संरक्षण, वन्य जीव संरक्षण योजना आदि के बारे में पड़ेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख वन्य जीव संरक्षण:-

वन्य जीव संरक्षण

वन्य जीव क्या है What is wild life 

वन्य जीव के अंतर्गत उन सभी प्राणियों और पादपों को रखा गया है, जो मनुष्य की पहुंच से दूर होते हैं। साधारण शब्दों में कह सकते हैं, कि वन्य जीवन से मतलब उन सभी प्रकार के प्राणियों और पादपों से होता है, जिन पर मनुष्य का नियंत्रण नहीं होता

और वह मनुष्य की पहुंच से काफी दूर होते हैं, अर्थात प्राकृतिक आवासों (Natural habitats) में रहते हैं उनको वन्य जीव के नाम से जाना जाता है। वन्य प्राणियों को पालतू नहीं बना सकते, जबकि वन्य पादप किसी के योग्य नहीं होते हैं।

भारत जैव विविधता की दृष्टि से एक अति संपन्न देश माना जाता है, इसीलिए भारत में संपूर्ण विश्व का लगभग 5% वन्य जीव देखने को मिलते हैं। 1947 में भारत की कुल भूमि का 40% भाग वनों के रूप में था,

जो अब 33% की अपेक्षा मात्र घटकर 19% ही रह गया इस प्रकार से वन भूमि कम होने के कारण वन्य जीवन तीव्रता से प्रभावित हो रहा है और वन के अनेक जंतु और पादप संकटापन्न (Endangered) अवस्था में पहुंच गए हैं, जबकि कुछ विलुप्त हो गए हैं।

वन्य जीव संरक्षण

वन्य जीव संरक्षण Wild life conservation 

वन्य जीवन पर्यावरण के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि जीवन तथा पर्यावरण के मध्य संतुलन को बनाए रखने के लिए वन्य जीवन का अस्तित्व भी हमेशा बनाए रखना चाहिए, किंतु कम होते प्राकृतिक परिवेश अवैध शिकार और विभिन्न प्रकार की औद्योगिक गतिविधियों के कारण वन क्षेत्र लगातार कम होते जा रहे हैं और जंतुओं का लगातार शिकार होता जा रहा है।

जंतुओं से विभिन्न प्रकार के उत्पाद प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तसकरी की जा रही है, इसीलिए भारत सहित विश्व के विभिन्न भागों से विभिन्न प्रकार के जंतु या तो विलुप्त हो चुके हैं या फिर विलुप्त होने की सीमा पर हैं,

इसीलिए आज वन्य जीवन संरक्षण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा विषय बन गया है, क्योंकि आने वाले समय में अगर पूरी निष्ठा और नियम से वन्य जीवन का संरक्षण नहीं किया तो मनुष्य को भयानक प्राकृतिक दुर्घटनाओं प्राकृतिक आपदाओं (Natural disasters) का सामना करना पड़ सकता है। 


वन्य जीव संरक्षण के उपाय योजना Plan for wild life conservation 

विभिन्न देशों के संरक्षण विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन में वन्य जीवन संरक्षण की एक व्यापक योजना बनाई, इसके क्रियान्वयन के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाना और सभी की सहमति होना अति आवश्यक है:- 

  1. वन्य जीवन का संरक्षण प्राकृतिक आवास स्थलों में ही नहीं अपितु जंतु शालाओं, वनस्पति उद्यानों और कृत्रिम आवास स्थलों में भी किया जाना चाहिए।
  2. सभी प्रकार की संकटग्रस्त जीव जंतुओं और पौधों का संरक्षण का प्रयास होना चाहिए, किंतु ऐसी जीव जातियों को अधिक वारीयता देना चाहिए जो अपने वर्गीकरण समूह के अकेले प्रतिनिधि ही बचे हो।
  3. हमारे घरेलू पशुओं और लाभदायक पादपों से मिलती-जुलती सभी प्रकार की जंगली जातियों का संरक्षण होना चाहिए, ताकि यह जातियाँ आवश्यकता पड़ने पर लाभदायक जातियों की उन्नत प्रजातियों को विकसित करने में जीनी बैंक के रूप में काम आ सके।
  4. उन सभी प्राथमिक क्षेत्रों को संरक्षित किया जाना चाहिए जो प्रवासी जंतुओं के मार्गों में आते हो प्रवासी जंतुओं के विभिन्न देशों में स्थित आवास स्थलों हेतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मिलित प्रयास किए जाने चाहिए।
  5. सभी प्रकार के संरक्षक क्षेत्रों के समस्त अजैविक कारकों जैसे कि जल, वायु, प्रकाश मिट्टी की गुणवत्ता आदि पर भी ध्यान देना चाहिए कियोकि वन जीव और उनका जीवन इससे प्रभावित होता है।
  6. विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक आवास स्थलों को आरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए और सरकार के द्वारा इनकी सुरक्षा के लिए कठोर से कठोर नियम बनाए जाने चाहिए और उनका पालन भी होना चाहिए।
  7. वन्य जंतुओं के शिकार पर पूरी तरह से रोक लगा देनी चाहिए और अवैध शिकार के लिए कठोर से कठोर दंड और कड़े से कड़े जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए।
  8. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई गई योजनाओं के क्रियान्वयन नियंत्रण और नियमन के लिए उपयुक्त समितियों एवं संगठनों की स्थापना होनी चाहिए और उनकी वर्ष में एक बार बैठक अवश्य होनी चाहिए। 

भारत में वन्य जीव संरक्षण Wild life conservation in india 

भारत में अंग्रेजी शासन काल से ही वन्य जीवन संरक्षण प्रारंभ हो गया था। अंग्रेजी शासन काल से ही भारत में विभिन्न प्रकार के अधिनियम एक्ट वन्य जीव संरक्षण के लिए बनाए गए हैं, जो निम्न प्रकार से हैं:- 

  1. मद्रास वाइल्ड एलीफैंट प्रिजर्वेशन एक्ट (Madras wild elephant preservation act 1873) 
  2. ऑल इंडिया एलीफेंट प्रिजर्वेशन एक्ट (All India Elephant Preservation act 1879) 
  3. द वाइल्ड बर्ड्स एंड एनिमल्स प्रोटेक्शन एक्ट (The wild birds and animals Protection Act 1912) 
  4. द बंगाल राइनोसेरॉस प्रिजर्वेशन एक्ट (The Bengal rhinoceros Preservation act 1932) 

इनके अलावा विभिन्न प्रकार के वाइल्डलाइफ संरक्षण अधिनियम एक्ट बनाए गए, किंतु वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण प्रयास भारत में आजादी प्राप्त होने के बाद ही हुए। भारत को आजादी प्राप्त होने के बाद 1939 में केंद्र सरकार ने देश के वन्य जीवन संसाधनों के संरक्षण के लिए सरकार को उपयुक्त सुझाव देने के लिए वन्यजीवन केंद्रीय परिषद का गठन किया,

जिसे 1952 में वन्य जीवन भारतीय परिषद का नाम प्राप्त हो गया। इसके पश्चात केंद्र सरकार ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 बनाया, जिसे 1991 में एक बार संशोधित भी किया गया। इस अधिनियम के अंतर्गत भारत सरकार में वन्य जीवन के वैधानिक संरक्षण अभयारण्यों के राष्ट्रीयकरण राष्ट्रीय उद्यानों और प्राणी विहारों की स्थापना और वन्य जंतुओं की चोरी से शिकार करने वालों को कठोर दंड देने के लिए विभिन्न प्रकार के प्रावधान बनाए गए।

भारतीय संविधान में 42वां संशोधन करके वन्य जीवन के संरक्षण और जंगलों के अधिग्रहण संबंधी अधिकार प्राप्त किए गए और 1980 में वन्य जीव संरक्षण विधेयक द्वारा केंद्र सरकार की अनुमति के बिना किसी भी जंगल का किसी भी कार्य के लिए विनाश करना प्रतिबंधित कर दिया गया। 


वन्य जीव संरक्षण संस्थाएँ Wild life conservation organizations

राष्ट्रीय स्तर पर उठाए गए विभिन्न प्रकार के कदमों के साथ हमारे भारत देश में सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के साथ वन्य जीव संरक्षण की क्रियाकलापों में सतर्कतापूर्वक भागीदारी की। यहाँ पर कुछ अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय वन्यजीव संरक्षण संस्थाएं बताई गई है, जो निम्न प्रकार से हैं:- 

  • अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ International organizations

IUCN :- IUCN का पूरा नाम International Union for the conservation of nature and natural resources अर्थात हिंदी में प्रकृति एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ है। इस संस्था की स्थापना

स्विट्जरलैंड के मॉर्गेज में 1948 में की गई थी और यह संस्था लाल आंकड़ा बुक जिसे रेड डाटा बुक (Red Data Book) कहा जाता है निकालती है, जो उन जीव जातियों के विषय में सूचनाएँ प्रदान करती हैं, जो विरल संकटपन या विलुप्त हो चुकी है।

विश्व वन्य कोष :- इसको अंग्रेजी में वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (World wildlife fund) WWF के नाम से भी जाना जाता है, जो 1961 में स्विट्जरलैंड के मॉर्गेज में स्थापित हुई थी। इसका सबसे प्रमुख उद्देश्य संपूर्ण विश्व में वन्य जीवन संरक्षण की

गतिविधियों के लिए फंड् का संग्रह करना और उसका वितरण करना है। सन 1969 में इस कोष की स्थापना भारत के मुंबई शहर में की गई, इसी वर्ष इस संस्था की सहायता से भारत में बाघ संरक्षण परियोजना का भी शुभारंभ किया गया।

  • राष्ट्रीय संस्थाएँ National institutions

राष्ट्रीय संस्थाओं के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की ऐसी संस्थाएँ हैं जो गैर सरकारी संस्थाएं हैं, जबकि कुछ संस्थाएं सरकारी संस्थाएं भी हैं जो वन्य जीव संरक्षण के विषय में काफी महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं:- 

  • गैर सरकारी संस्थाएँ NGOs 

बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी :- इस संस्था की स्थापना 1883 में मुंबई के सात निवासियों के द्वारा की गई थी। यह सोसाइटी भारत सहित म्यांमार, श्रीलंका के पादप जात और प्राणी जात के संग्रह उनके अन्वेषण तथा शैक्षिक सूचनाओं से संबंधित क्रियाकलापों का निष्पादन करने का कार्य करती है, जबकि यह एक पत्रिका के माध्यम से वन्य जंतु और पादप संबंधित जानकारियाँ प्रकाशित करती रहती है।

भारतीय वन्य जीवन परिरक्षण सोसायटी:- इस सोसाइटी की स्थापना देहरादून में 1958 में की गई थी, जो अनेक शैक्षणिक और अन्वेषण संबंधित क्रियाकलापों के साथ चीतल नामक द्विभाषी त्रेमासिक पत्रिका भी निकालती है, जिसके माध्यम से वह वन्य जीव संरक्षण तथा वन्य जीव से संबंधित सूचनाएँ प्रदान करती रहती है।

  • सरकारी संस्थाएँ Government Agencies

जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया :- जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (Zoological Survey of India) की स्थापना 1916 में कोलकाता में की गई थी, जिसका प्रमुख उद्देश्य प्राणी जात का सर्वेक्षण पर्यवेक्षण और अनुसंधान करना था।

वर्गकीय अध्ययन संकटापन्न जातियों की अव्यवस्था का सर्वेक्षण और परिणामों को शोध पत्रिकाओं तथा भारत की जंतु संपदा के रूप में प्रकाशन इसके प्रमुख गतिविधियों के अंतर्गत आता है। संपूर्ण भारत में लगभग उसकी 36 शाखाएँ (Branches) कार्य कर रही हैं। 

भारतीय वन्य जीवन परिषद :- भारतीय वन्य जीवन परिषद की स्थापना 1949 में केंद्रीय वन्य जीवन परिषद के नाम से की गई थी, फिर 1952 में इसका नाम परिवर्तित करके भारतीय वन्य जीवन परिषद कर दिया गया। इसके द्वारा 1972 में वन्य जीवन संरक्षण अधिनियम बनाया गया,

जो सभी राज्यों में भी लागू कर दिया गया है और इसका संशोधन करके 1991 में संविधान के 44 वें संशोधन अधिनियम के रूप में लागू किया गया है। सन 2003 में सरकार ने वन्य जीवन संरक्षण अधिनियम 1972 को एक बार फिर से संशोधन करते हुए भारतीय वन्य जीवन परिषद को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया है और इसका नाम राष्ट्रीय वन्य जीवन परिषद कर दिया गया है।

भारत का वन्य जीवन संस्थान :- भारत का वन्य जीवन संस्थान की स्थापना वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 1982 में देहरादून में की थी। वन्य जीवन के क्षेत्र में शोध करना संस्थान की सबसे प्रमुख गतिविधि है।

यह संस्था भारत में वन्य जीवन विज्ञान को विकसित करने तथा इसके उपयोग आर्थिक एवं सामाजिक सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के अनुसार करने का लक्ष्य रखती है। यह संरक्षण अभीमुखीकरण पाठयक्रम के साथ निजी संस्थाओं को वन्य जीवन के विषय में सेवाएँ और परामर्श उपलब्ध कराती है।

दोस्तों यहाँ पर आपने वन्य जीव संरक्षण (Wild life conservation) के बारे में पड़ा, आशा करता हुँ, आपको यह लेख पसंद आया होगा।

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