पादप कोशिका किसे कहते हैं, पादप कोशिका का वर्णन What is plant cell

पादप कोशिका किसे कहते हैं, वर्णन What is plant cell 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख पादप कोशिका किसे कहते हैं, पादप कोशिका का वर्णन (What is plant cell, description) में। दोस्तों यहाँ पर आप पादप कोशिका

के सभी अंगों आदि के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे। तो आइये शुरू करें यह लेख पादप कोशिका किसे कहते हैं, पादप कोशिका का वर्णन:-

पादप कोशिका किसे कहते हैं

पादप कोशिका किसे कहते हैं What is plant cell 

संसार में विभिन्न प्रकार के जीव जंतु पाए जाते हैं, जिनकी रचना और आकार में हमेशा भिन्नता देखने को मिलती है। इन जीवो के अंतर्गत सूक्ष्मजीव, जीवाणु से लेकर विशालकाय पेड़ पौधे और जंतु शामिल होते हैं।

यह सभी जीव विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं, जो एक तथा अनेक संख्या में होती है तथा रचना और आकार की क्षमता के कारण भिन्नता भी प्रदर्शित करती हैं। कुछ जीव ऐसे होते हैं, जो एक कोशिका से निर्मित होते हैं,

किंतु कुछ जीव एक से आधिक कोशिकाओं से मिलकर बने होते हैं ऐसी ही एक कोशिका है पादप कोशिका जो पेड़ पौधों की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई (Structural and functional unit) होती है अर्थात पादप कोशिका पेड़ पौधों की सूक्ष्मतम क्रियात्मक और संरचनात्मक इकाई है,

जिनका आकार अंडाकार, आयताकार, बेलनाकार, घनाकार आदि जबकि आकार  0.5u से 20u तक हो सकता है। पादप कोशिका भी जंतु कोशिका के समान इतनी छोटी होती है, कि इसे बिना सूक्ष्मदर्शी के द्वारा नहीं देखा जा सकता। इसका अध्ययन करने के लिए इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की आवश्यकता होती है।


पादप कोशिका किसे कहते हैं

पादप कोशिका की संरचना Structure of plant cell 

पादप कोशिका विभिन्न प्रकार के अंगों से मिलकर बनी होती है, जिन्हें हम निम्न प्रकार से समझते हैं:- 

  • कोशिका भित्ति Cell wall

पादप कोशिका के चारों ओर कोशिकाओं के जीवद्रव (Protoplasm) द्वारा स्रावित निर्जीव परत बनी होती है, जो प्लाज्मा झिल्ली के चारों ओर रहकर प्लाज्मा झिल्ली की रक्षा करती है, उसे कोशिका भित्ति कहा जाता है, जो अत्यंत मजबूत और मोटी होती है।

यह कोशिका भित्ति केवल पादप कोशिका में ही देखने को मिलती है, जो रासायनिक संगठन के अनुसार पॉलिसैचेराइड, प्रोटीन, लिपिडस, पेक्टिन, लिगनेन और सेल्यूलौज से मिलकर बनती है।

कोशिका भित्ति पादप कोशिका को एक निश्चित आकार और दृढ़ता प्रदान करती है और पौधों के बाह्य कंकाल के रूप में कार्य करती है। वह कोशिका की पारगम्य सीमा को भी निर्मित करती है तथा जल और विलेय को कोशिका के अंदर जाने देती है।

  • कोशिका झिल्ली Cell membrane

कोशिका झिल्ली शब्द का सबसे पहले प्रयोग सी. नागेली तथा सी क्रेमर (C. Nageli and C. Kramer) ने किया था जो सभी प्रकार की कोशिकाओं प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाई जाती है, जिसको प्लाज्मा झिल्ली, प्लाज्मालेमा, जैविक कला, जैव कलाएँ कोशिकाद्रव्यी झिल्ली आदि के नाम से भी जाना जाता है।

यह कोशिकाद्रव्य को उसके चारों ओर के कोशिकीय वातावरण से अलग रखती है। कोशिका झिल्ली अत्यंत पतली लचीली अपारगम्य प्रकार की होती है, जो प्रोटीन लिपिड और कार्बोहाइड्रेट के द्वारा निर्मित होती है।

कोशिका झिल्ली चयनात्मक पारगम्य झिल्ली होती है क्योंकि यह कोशिका के अंदर और बाहर प्रवेश करने वाले आयनों अणुओ के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, इसके अलावा यह बैक्टीरिया व अन्य जीवों में परासरण करने का कार्य करती है।

  • रिक्तिका Vacuole

रितिका नाम की संरचना केवल पादप कोशिका में ही पाई जाती है, जो आकार में गोल चौकोर और बड़ी होती है। इसके चारों ओर भी एक झिल्ली पाई जाती है, जिसको टोनोप्लास्ट (Tonoplast) के नाम से जाना जाता है। रितिका कोशिका द्रव्य के कॉलोयडी मेट्रिक्स को यांत्रिक बल प्रदान करती हैं,

जबकि यह कोशिकीय जीवो में जैसे कि पैरामीशियम में परासरण नियमन का कार्य करती है। इसके अलावा इसका अन्य कार्य उत्सर्जित पदार्थों का भंडारण करना तथा प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) में भी मदद करना होता है।

  • जीवद्रव्य Protoplasm 

कोशिका के अंदर जिसमें विभिन्न प्रकार के अंगक तैरती हुई अवस्था में होते हैं, उस प्लाज्मा को जीव द्रव्य के नाम से जाना जाता है, जिसको हक्सले (Huxley) ने जीवन का भौतिक आधार की संज्ञा प्रदान की,  जबकि पुरकिंजे (Purkinje) नामक वैज्ञानिक ने 1837 में इसको प्रोटोप्लास्म का नाम दिया।

जीव द्रव्य का वह भाग जो केंद्रक को चारों ओर से घेरे रहता है, उसको कोशिका द्रव्य कहते है, जबकि केंद्रक के अंदर पाए जाने वाले द्रव्य को केंद्रक द्रव्य के नाम से जाना जाता है। जीव द्रव्य कोशिकीय अंगको को जलीय माध्यम उपलब्ध कराकर उन्हें सूखने से बचाता है।

  • लवक या प्लास्टिड Plastids

प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं और कवकों को छोड़कर सभी पादप कोशिकाओं की कोशिका में पाए जाने वाले सबसे बड़े किंतु केंद्रक से छोटे कोशिकांग लवक या प्लास्टिड कहलाते हैं, जिसकी खोज ई. हैकल (E.hackle) नामक वैज्ञानिक ने की थी।

हरित लवक (Chloroplast) सबसे महत्वपूर्ण लवक होता है, क्योंकि हरित लवक के अंदर प्रकाश संश्लेषण की क्रिया होती है, जिनमें प्रकाश अभिक्रिया हरित लवक के ग्रेना में तथा अप्रकाशीय अभिक्रिया हरित लवक के स्ट्रोमा में होती है।

  • माइटोकॉन्ड्रिया Mitochondria

माइटोकॉन्ड्रिया की खोज सबसे पहले कोलीकर (kolikar)  नामक वैज्ञानिक ने 1880 में की थी, जबकि फ्लेमिंग (Fleming) ने उनको फायला का नाम दिया और अल्टमान (Altman) ने बायोप्लास्ट।

कोशिका के कोशिका द्रव्य में पाए जाने वाले वे अंगक जो जो छड़ों के समान होते हैं, उनको माइट्रोकांड्रिया कहा जाता है, जो लाल रक्त कोशिकाओं को छोड़कर सभी प्रकार की कोशिकाओं में पाए जाते हैं।

माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का शक्ति ग्रह या पावर हाउस ऑफ द सेल के नाम से जाना जाता है, क्योंकि यहाँ पर ऊर्जा का उत्पादन होता है, जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार की कोशिशकीय गतिविधियों में हो जाता है। माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका का शक्ति ग्रह कहलाता है,

क्योंकि यहां पर खाद्य पदार्थों का ऑक्सीकरण होता है, जिसके फलस्वरूप ऊर्जा उत्पन्न होती है। माइटोकांड्रियल डीएनए भी कोशिकाद्रव्यी अनुवांशिकता आदि को दर्शाता है, जबकि शुक्राणु जनन के दौरान माइटोकॉन्ड्रिया द्वारा माइटोकांड्रियल वलय का निर्माण होता है।

  • एंडोप्लास्मिक रेटिकुलम Endoplasmic reticulum

एंडोप्लास्मिक रेटिकुलम भी कोशिका का एक महत्वपूर्ण भाग होता है, इसको सबसे पहले गारनियर (Garnier) नामक वैज्ञानिक ने 1897 में देखा, जबकि पोरटर (Porter) नामक वैज्ञानिक ने इसको 1945 में एंडोप्लास्मिक रेटिकुलम नाम प्रदान किया।

एंडोप्लास्मिक रेटिकुलम को कोशिकाद्रव्यी घानी तंत्र के नाम से भी जाना जाता है, जो सभी प्रकार की प्रोकैरियोटिक युकेरियोटिक कोशिकाओं किंतु लाल रक्त कोशिकाओं को छोड़कर सभी में पाई जाती है। एंडोप्लास्मिक रेटिकुलम कोशिका में अन्तःकंकाल की तरह कार्य करती है और कोशिका को यांत्रिक बल प्रदान करती है।

  • गॉलजी बॉडी Golgi body

कोशिका की कोशिका द्रव्य में एंडोप्लास्मिक रेटिकुलम से लगी हुई थैली जैसी संरचनाएँ पाई जाती है, जिनको गॉलजीकाय कहा जाता है,

जिसकी सबसे पहले खोज 1867 में कैमिलो गॉलजी (Camillo golgi) ने की। गोलगी बॉडी से लाइसोसोम आदि का निर्माण होता है, जबकि यह जंतुओं में शुक्राणु के परिपक्व के लिए भी उत्तरदाई होती हैं।

  • राइबोसोम Ribosome 

कोशिका द्रव्य में छोटे-छोटे सूक्ष्म प्रकार के कण पाए जाते हैं, जो राइबोन्यूक्लियोप्रोटीन के छोटी-छोटी से बने होते है, उन्हें राइबोसोम के नाम से जाना जाता है,

जिनकी खोज पैलेडे (Paleday) नामक वैज्ञानिक ने 1955 में की थी। राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण के सबसे प्रमुख केंद्र होते हैं इसीलिए इन्हें कोशिका की प्रोटीन की फैक्ट्री के नाम से जाना जाता है।

  • लाइसोसोम Lysosome 

कोशिका के कोशिकाद्रव्य में छोटे बारीक और गोल अनियमित आकार के एंजाइमयुक्त कण दिखाई देते हैं, जिन्हें लाइसोसोम के नाम से जाना जाता है, जिनकी खोज डी.डूबे (D.dubey) नामक वैज्ञानिक ने 1948 में की थी। लाइसोसोम में

विभिन्न प्रकार के लगभग 24 हाइड्रोलिटिक एंजाइम्स (Hydrolytic enzymes) पाए जाते हैं, जो पाचन के लिए उत्तरदाई होते हैं लाइसोसोम का सबसे प्रमुख कार्य कोशिकीय पाचन होता है।

  • तारककाय या सेंट्रोसोम Centrosome

सेंट्रोसोम की खोज बॉन बेंडन (Bon bandon) नामक वैज्ञानिक ने 1880 ने की थी, जो केंद्रक की अंतराअवस्था के निकट पाई जाने वाली एक संरचना है और यह कोशिकाओं में समसूत्री विभाजन के समय तारे की भांति संरचना बनाने का कार्य करती हैं।

सेंट्रोसोम अधिकतर जंतु कोशिकाओं में, किन्तु कुछ निम्न पादपों में भी मिल जाती है। सेंट्रोसोम का सबसे प्रमुख कार्य जंतु कोशिका में कोशिका विभाजन के समय तुर्क तंतुओं का निर्माण करना होता है।

  • काशाभिका या पक्षमाभिका Celia or Flagilla 

इनको अंग्रेजी में फ्लैजेला और सीलिया के नाम से जाना जाता है, जो प्लाज्मा झिल्ली के नीचे धंसे आधार कण के धागे के समान संरचनाएं लेकर निकलते हैं और उन्ही से जीव को गति प्रदान करने का कार्य करते हैं। इसके अलावा इनका कार्य पोषण जबकि स्वशन आदि में सहायता प्रदान करना होता है।

  • परऑक्सीसोम Peroxisome

यह गोलाकार अथवा अंडाकार संरचनाएं होती हैं, जिनका ब्यास 0.2u से 1.5u तक होता है। इन संरचनाओं की सबसे पहले खोज ब्यूफे एवं बर्थर (Buffet and berther) नामक वैज्ञानिक ने 1963 में यकृत कोशिकाओं में की थी

इसके बाद टालबर्ट (Talbert) नामक वैज्ञानिक ने इसका अध्ययन किया और यह बताया कि यह संरचना पादप और जंतु दोनों प्रकार की कोशिकाओं में पाई जाती है। परऑक्सीसोम प्रकाश श्वसन की क्रिया में भाग लेते हैं, जबकि वसा उपापचाय के लिए जंतु कोशिकाओं में उत्तरदाई होते हैं।

  • केंद्रक Nucleus

केंद्रक कोशिका का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है, क्योंकि यह कोशिका की विभिन्न प्रकार की क्रियाओं को संचालित और नियंत्रित करने का कार्य करता है, जिसकी खोज रॉबर्ट ब्राउन (Robert brown) वैज्ञानिक ने 1831 में की थी।

केंद्रक के अंदर केंद्रकद्रव्य केंद्रिका और क्रोमेटेड जैसी रचनाएं भी देखने को मिलती है, जो विभिन्न प्रकार के लक्षणों और कार्यों के लिए उत्तरदाई होती है। केंद्रक का सबसे प्रमुख कार्य कोशिका में होने वाली सभी प्रकार की क्रियाओं को नियंत्रित करना है, आरएनए, डीएनए का निर्माण कोशिका विभाजन आदि में भी महत्वपूर्ण स्थान केंद्रक ही लेता है।

दोस्तों आपने यहाँ पर पादप कोशिका किसे कहते हैं, पादप कोशिका का वर्णन (What is plant cell, description) आदि के बारे में पढ़ा, आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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