वर्तमान पाठ्यक्रम के दोष समस्याएँ Demerits of present curriculum

वर्तमान पाठ्यक्रम के दोष समस्याएँ Demerits of present curriculum 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख वर्तमान पाठ्यक्रम के दोष समस्याएँ (Demerits of present curriculum) में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप वर्तमान में जो पाठयक्रम चल रहें है उनमें कौनसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही है, अर्थात वर्तमान शिक्षा प्रणाली के दोष के बारे में जानेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख वर्तमान पाठ्यक्रम की समस्याएँ:-

वर्तमान पाठ्यक्रम के दोष समस्याएँ

वर्तमान पाठ्यक्रम के दोष Demerits of present curriculum

वर्तमान में जो पाठ्यक्रम भारत में चल रहा है, वह पाठ्यक्रम शैक्षिक उद्देश्यों को प्राप्त नहीं कर पा रहा है अर्थात हम कह सकते हैं, कि वर्तमान का जो पाठ्यक्रम है उनमें विश्व अनुभवों और क्रियाओं का आभाव

देखने को मिलता है, इसीलिए बालक एक उत्तम नागरिक बनने में सक्षम नहीं हो पाता है। माध्यमिक शिक्षा आयोग के द्वारा पाठयक्रम का गहन अध्ययन करने पर वर्तमान पाठ्यक्रम की निम्न प्रकार की समस्याएँ बताई गई है, जिन्हें हम निम्न प्रकार से समझते हैं:- 

  • संकुचित आकार Compressed size

वर्तमान में जो पाठ्यक्रम प्रस्तुत है, वह पाठ्यक्रम उच्च दार्शनिक तत्वों सामाजिक आवश्यकताओं बालकों की क्षमताओं और वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं है।वर्तमान में जो पाठ्यक्रम चल रहा है,

उस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को विश्वविद्यालय में प्रवेश दिलाना तो है, लेकिन वह बालक के लिए ऐसी दशाऐं निर्मित नहीं कर पाते हैं, जिससे उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके ऐसे पाठ्यक्रम के द्वारा छात्र अंधकार में रहते हैं और बिना किसी लक्ष्य की शिक्षा ग्रहण करते हैं।

  • पुस्तकीय एवं सैद्धांतिक ज्ञान Book and theoretical knowledge

वर्तमान में जो प्रचलित पाठ्यक्रम है, वह बालक के सर्वागीण विकास से संबंधित नहीं है। आज के समय में जो पाठ्यक्रम प्रचलित है, उसमें पुस्तकीय ज्ञान और सैद्धांतिक ज्ञान को प्रधानता दी गई है, जो छात्रों के तथ्यों का ज्ञान तो प्रदान करता है,

किंतु वह तथ्य व्यवहारिक जीवन में अनुपयोगी साबित होते हैं, इसीलिए बालक व्यवहारिक जीवन में आने वाली समस्याओं का सामना नहीं कर पाते हैं और वह अपने जीवन में होने वाली आवश्यकता की पूर्ति करने में अयोग्य हो जाते हैं।

  • विषयों की अधिकता Plethora of subjects

वर्तमान के पाठ्यक्रम में यह भी है, कि विषयों की अधिकता हो गई है। वर्तमान में छात्र तथा छात्राओं को कई विषयों का अध्ययन करना पड़ता है, इसलिए वह सभी विषयों को ठीक प्रकार से नहीं समझ पाते और ना ही एक विषय पर अपना फोकस बना पाते हैं।

इस प्रकार से सभी विषयों में से किसी एक विषय पर भी इस प्रकार से दक्षता हासिल नहीं कर पाते हैं और अनेक विषयों को रखने के चक्कर में चिंतन और तर्क की शक्ति खो देते हैं और विषयों के बोझ के तले दब जाते हैं।

  • जीवन से संबंधित Related to life

वर्तमान में जो ज्ञान दिया जाता है, वह वास्तविक जीवन से संबंधित नहीं है। परिणाम स्वरूप शिक्षा तथा उनके जीवन के बीच एक गहरी खाई बन जाती है। बालक वास्तविक जीवन की समस्याओं और आवश्यकताओं को नहीं समझ पाते हैं,

इसलिए बालक ठीक प्रकार जीवन की कलाओं को नहीं सीख पाते हैं और उन्हें एक अच्छा जीवन जीने में कई प्रकार की असफलताओं का सामना करना पड़ता है।

  • तकनीकी एवं व्यवसायिक शिक्षा का अभाव Lack of technical and vocational education

आज विश्व के समस्त देश उद्योग विकास से जुड़े हुए हैं, और उन्नति कर रहें है, इसलिए भारत भी इसकी ओर कदम तो बढ़ा रहा है, किंतु वर्तमान में जो पाठ्यक्रम है उसकी सबसे बड़ी समस्या है, कि वह औद्योगिक और व्यवसायिक शिक्षा को ना ठीक से नहीं दे पा रहें है।

शिक्षा के इतिहास में समय-समय पर अनेक शिक्षा आयोगों ने व्यवसायिक शिक्षा पर बल तो दिया, किंतु पर्याप्त समय तथा कठोर नियम के अभाव में ठीक प्रकार से ध्यान नहीं दे सके, इसीलिए तकनीकी तथा व्यवसायिक शिक्षा के अभाव में शिक्षा बेरोजगारपरक होती जा रही है।

  • छात्रों की आवश्यकता व रुचियों की उपेक्षा Ignoring the needs and interests of the students

वर्तमान में जो पाठ्यक्रम हैं, उनमें छात्रों की रूचियाँ विशेष प्रकार से नहीं होती हैं। जब बालक किशोरावस्था में आ जाता है तो किसी एक विषय के प्रति अधिक लगाव प्रदर्शित करता है,

इसलिए वर्तमान में पाठ्यक्रम में इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है, कि बालक किस विषय के प्रति अधिक जिज्ञासा रखता है और जिज्ञासाओं को शांत कोई करता है या नहीं करता है।

  • व्यक्तिगत विभिन्नता की उपेक्षा Ignoring individual differences

वर्तमान में जो पाठ्यक्रम है, वह बालकों में पाई जाने वाली व्यक्तिगत विभिन्नता के आधार पर नहीं है। समस्त बालकों के लिए एक ही प्रकार का पाठ्यक्रम बनाया जाता है, इसीलिए वैज्ञानिक दृष्टि से इसको अनुचित माना जाता है, क्योंकि सभी प्रकार के बालक एक ही प्रकार के नहीं होते हैं,

उनमें विभिन्नताएँ देखने को मिलती हैं, जाति, धर्म, स्थान के आधार पर कई प्रकार की विविधताऐं पाई जाती हैं, इसीलिए छात्र-छात्राएँ अनुकूल शिक्षा प्राप्त न होने के कारण पढ़ने से वंचित रह जाती हैं और बहुत से बालक अनुशासनहीनता अपराध तथा अन्य समाज विरोधी भावनाओं का शिकार बन जाते हैं।

  • नैतिक शिक्षा की उपेक्षा Neglect of moral education

वर्तमान में जो पाठ्यक्रम प्रचलित है, उसमें नैतिक शिक्षा को किसी भी प्रकार का स्थान नहीं दिया गया है। फलस्वरूप आजकल के छात्र छात्र छात्राओं में आत्मविश्वास, ईमानदारी, आत्म अनुशासन, सद्भावना जैसे कई गुणों का आभाव देखने को मिलता है। इसप्रकार वर्तमान पाठ्यक्रम बालकों के क्षेत्र के विकास में किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं कर पाते हैं।

  • प्रजातांत्रिक व्यवस्था के लिए अयोग्य Unfit for democracy

इस पाठ्यक्रम में उन विषयों और क्रियाओं को स्थान नहीं दिया गया है, जो छात्रों में प्रजातंत्र की भावनाओं का विकास करने में सक्षम हो, जब तक बालक समाज तथा अपने देश के प्रति उत्तरदायित्व को नहीं समझेंगे तब तक उस देश का भविष्य उज्जवल नहीं हो सकेगा।

  • छात्रों के सर्वागीण विकास के लिए अयोग्य Unfit for all round development of students

वर्तमान में जो पाठ्यक्रम प्रचलित हैं, वह बालक को मजबूत करने में सक्षम नहीं है अर्थात कह सकते हैं, कि वर्तमान का पाठ्यक्रम बालकों के सर्वागीण विकास के लिए पर्याप्त पाठ्यक्रम नहीं है। इसलिए पाठ्यक्रम में उस विषय वस्तु का समावेश किया जाना चाहिए, जो शिक्षा के मुख्य उद्देश्यों को प्राप्त करने में सक्षम हो।

  • परीक्षा की प्रधानता Priority of the exam

वर्तमान में जो पाठ्यक्रम प्रचलित हैं, वह पाठ्यक्रम परीक्षाओं से बुरी तरह से प्रभावित पाठ्यक्रम माना जाता है। विद्यालय में जो कुछ पढ़ाया जाता है, वही परीक्षा उत्तीर्ण करने के उद्देश्य से ही पढ़ाया जाता है, अर्थात हम कह सकते हैं, कि जो वर्तमान का पाठ्यक्रम है, उसका मुख्य उद्देश्य परीक्षा पास करना होता है।

अध्यापक छात्र व अभिभावक सभी का मुख्य पॉइंट परीक्षा को पास करना होता है, इसलिए वर्तमान शिक्षा का एकमात्र उद्देश्य होता है, कि बालकों को परीक्षा के लिए तैयार करना इस उद्देश्य को ध्यान में रखकर ही प्रचलित पाठ्यक्रम का निर्माण किया जाता है, जिसमें विद्यार्थी परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर लेते हैं, किंतु वह उस सामग्री से डरते हैं, उस सामग्री को ठीक प्रकार से समझ नहीं पाते और उस सामग्री को अपने दैनिक जीवन में उपयोग नहीं कर पाते हैं।

दोस्तों यहाँ पर आपने वर्तमान पाठ्यक्रम के दोष (Demerits of present curriculum) समस्याएँ  आदि के बारे में पढ़ा, आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

  • इसे भी पढ़े:-
  1. पाठयक्रम निर्माण के सिद्धांत
  2. राष्ट्रीय पाठयक्रम संरचना 2005 के उद्देश्य
  3. राष्ट्रीय पाठयक्रम संरचना 2005 के सिद्धांत
  4. पाठयक्रम क्या है पाठयक्रम के प्रकार





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