ऑकलैंड का विवरण पत्र Auckland's Minute

ऑकलैंड का विवरण पत्र Auckland's Minute

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख ऑकलैंड का विवरण पत्र (Auckland's Minute) में। दोस्तों इस लेख द्वारा आप मैकाले मिनट

के पश्चात् आने वाले शिक्षा में सुधार जिसे Lord Auckland Ki Shiksha Niti ऑकलैंड का विवरण पत्र कहते है पड़ेंगे। तो आइये दोस्तों शुरू करते है, यह लेख ऑकलैंड का विवरण पत्र:-

ऑकलैंड का विवरण पत्र


ऑकलैंड का विवरण पत्र क्या है what is Auckland's Minute

लॉर्ड विलियम बैटिंग के समय में मैकाले मिनट अर्थात मैकाले का विवरण पत्र आया था और उसी के आधार पर शिक्षा नीति की घोषणा कर दी गई, किंतु घोषणा करने के 13 दिन के पश्चात ही लॉर्ड विलियम बैटिंग ने अपने गवर्नर जनरल के पद से त्यागपत्र दे दिया

और वह अपने स्वदेश के लिए रवाना भी हो गए, इसलिए वो प्राच्यवादी जो मैकाले का विवरण पत्र से असंतुष्ट थे उनको इस विषय पर बोलने का मौका मिल गया और जैसे ही भारत में नए गवर्नर जनरल लॉर्ड ऑकलैंड आए तो भारत के प्राच्यवादियों ने उग्र आंदोलन करना प्रारंभ कर दिया।

तत्कालीन गवर्नर लॉर्ड ऑकलैंड ने 1835 से 1839 तक की सभी गंभीर शैक्षिक परिस्थितियों का ठीक प्रकार से मूल्यांकन किया और प्राच्यवादियों को उनके उद्देश्य के अनुकूल थोड़ी धनराशि की अलग से व्यवस्था कर दी। लॉर्ड ऑकलैंड ने 24 नवंबर 1839 को अपने विवरण पत्र में निम्न प्रकार की बातें स्पष्ट कर दी:-


लॉर्ड ऑकलैंड विवरण पत्र की बातें Things of lord auckland brochure

  1. प्राच्य विद्यालयों को यथावत सुचारू रूप से चलने दिया जाए और उनको दी जाने वाली आर्थिक सहायता वही रखी जाए जो गवर्नर जनरल बैटिंग से पूर्व दी जाती थी।
  2. प्राच्य विद्यालय अपने विद्यालयों में शिक्षण कार्यों में आधुनिकता का समावेश करने के लिए स्वतंत्र हैं, अगर यह विद्यालय चाहते हैं, कि वह अंग्रेजी का शिक्षण कर सकते हैं, तो उन्हें ऐसा करने के लिए स्वतंत्र किया जाता है, किंतु अंग्रेजी के शिक्षण के लिए उन्हें प्रतिबंधित भी नहीं किया जा सकता।
  3. प्राच्य विद्यालयों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को उचित छात्रवृत्ति प्रदान की जाएंगी, ताकि उन्हें अपनी शिक्षा में कुछ सहायता प्राप्त हो सके।
  4. प्राच्य पाठ्य पुस्तकों के मुद्रण तथा प्रकाशन हेतु अतिरिक्त धनराशि भी प्रदान की जाएगी, जबकि इन विद्यालयों में योग्य शिक्षकों को उचित पारिश्रमिक देकर नियुक्त किया जाएगा।

लॉर्ड ऑकलैंड के इस विवरण पत्र के संदर्भ में डॉक्टर एसएन मुखर्जी ने कहा है, कि लॉर्ड ऑकलैंड को इस बात का अभिज्ञान था, कि उसने ₹31000 सालाना की मामूली रकम देकर ही उत्तेजित दीर्घकाल तक चलने वाले विवाद को समाप्त कर दिया है।

वास्तविक रूप में ऑकलैंड पाश्चात्यवादियों का ही समर्थक था। ऑकलैंड ने प्राच्यवादियों के आंदोलन को बंद करने के लिए बड़ी ही कूटनीति से यह कार्य किया था। बाद में उसने अपनी अभिरुचि का प्रदर्शन

करते हुए ढाका, पटना, बनारस, इलाहाबाद, आगरा, दिल्ली जैसे विभिन्न प्रतिष्ठित शहरों में अंग्रेजी कॉलेजों की स्थापना भी की, जो की अंग्रेजी शिक्षा के उच्च शिक्षा केंद्रों के रूप में विख्यात हो गए।

दोस्तों आपने यहाँ पर ऑकलैंड का विवरण पत्र (Auckland's Minute) पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

  • इसे भी पढ़े:-
  1. हंटर आयोग 1882 Hunter commission 1882
  2. माध्यमिक शिक्षा आयोग Secondary Education Commission
  3. सैडलर आयोग 1917 Sadler Commission 1917
  4. कोठारी आयोग क्या है जानकारी what is Kothari Commission

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