पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत Principles of Curriculum Building

पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत Principles of Curriculum Building

हैलो नमस्कार दोस्तों दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत में (Principles of Curriculum Building)।

दोस्तों इस लेख में आप पाठयक्रम निर्माण क्या है पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत पड़ेंगे। तो आइये दोस्तों करते है, शुरू यह लेख पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत:-


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पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत


पाठयक्रम निर्माण क्या है what is Curriculum Building

पाठयक्रम एक सुव्यवस्थित शिक्षण सामग्री होती है, जिसके अनुरूप बालकों के शिक्षण का कार्य किया जाता है। अर्थात पाठयक्रम के द्वारा ही बालक का सर्वांगीण विकास होता है।

इसलिए पाठयक्रम का निर्माण बहुत सोच समझकर छात्रों की रूचि, स्तर, आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाता है।

पाठयक्रम के निर्माण से पहले पाठयक्रम के उद्देश्य सुनिश्चित कर लिए जाते है। ताकि पाठयक्रम का निर्माण उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए ठीक प्रकार से हो सके।


पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत Principles of Curriculum Building 

पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत निम्नप्रकार से है:- 

  • जीवन से संबंधित होने का सिद्धांत Principle of relation with life 

पाठ्यक्रम में उन्हीं विषयों, अनुभवों को समाहित किया जाना चाहिए, जो विद्यार्थी के भावी जीवन से संबंधित हो, जिनके द्वारा विद्यार्थी अपनी समस्याओं को समझ सके और समस्याओं का समाधान कर सकें, इसलिए पाठयक्रम का निर्माण जीवन से संबंधित होने के सिद्धांत पर होना चाहिए। 

  • संस्कृति तथा सभ्यता के ज्ञान का सिद्धांत Principle of knowledge of culture and civilization 

पाठ्यक्रम के अंतर्गत उन विषयों को उन क्रियाकलापों को समावेश किया जाना चाहिए, जिनके द्वारा बालक अपनी संस्कृति के बारे में जान सके तथा संस्कृति के महत्व को समझ सके और उसे अपने भावी जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान दे सके।

  • अग्रदर्शिता का सिद्धांत Principle of Forward looking 

इस सिद्धांत के अनुसार पाठ्यक्रम के अंतर्गत उन सभी क्रियाकलापों, विषयों को समावेश किया जाना चाहिए, जिनके द्वारा बालक अपने जीवन में आगे बढ़ सके, जीवन की राह में आने वाली विभिन्न परिस्थितियों को समझ सके, उन परिस्थितियों से ज्ञान अर्जन कर सके और अपने जीवन यापन करने के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न न कर सके।

  • सृजनात्मक तथा रचनात्मक शक्तियों का सिद्धांत Principle of Creative and formative power 

पाठ्यक्रम में उन क्रियाकलापों को भी समावेश किया जाना चाहिए, जिनके द्वारा बालक में जन्मजात सृजनात्मक एवं रचनात्मक शक्तियों का विकास हो सके बालक उनका उपयोग कर सकें। 

  • खेल एवं कार्य का सिद्धांत Principle of play and work activities 

खेल बालक की सबसे प्रमुख प्रवृति होती है और खेल के द्वारा ही बालक का शारीरिक तथा मानसिक विकास संपन्न होता है। इसलिए पाठ्यक्रम के निर्माण में बालकों से जो भी कार्य कराने चाहिए, उन्हें सिखाने चाहिए, उन सभी को खेल प्रवृत्ति के आधार पर ही सिखाई जाने चाहिए। इससे बालक प्रेरित तथा स्वयं उस कार्य को खेल के साथ करने में आनंदित होगा।

  • सहसंबंध का सिद्धांत Principle of correlation 

पाठ्यक्रम का निर्माण सहसंबंध का सिद्धांत के आधार पर भी होना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि पाठ्यक्रम में जिन विषयों का समावेश किया जा रहा है, उन विषयों के मध्य में किसी न किसी प्रकार से कोई ना कोई संबंध अवश्य होना चाहिए। इससे बच्चे जो भी ज्ञान प्राप्त करते हैं, उस ज्ञान में परस्पर संबंध बना रहता है।

  • जीवन क्रियाओं का सिद्धांत Principle of life activities 

पाठ्यक्रम में उन सभी जीवन से संबंधित क्रियाकलापों, अनुभवों का समावेश किया जाना चाहिए, जिनके कारण बालक के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं का विकास होता हो,उनका शारीरिक विकास मानसिक विकास सामाजिक तथा नैतिक पक्ष भी मजबूत बनता हो।

  • व्यक्तिगत विभिन्नताओं का सिद्धांत Principle of individual differences 

सभी बच्चों की रूचियाँ, प्रवृतियाँ, ज्ञान अर्जन क्षमताएँ अलग-अलग होती हैं, इसलिए पाठ्यक्रम का निर्माण इस प्रकार से किया जाना चाहिए, कि उनमें बालक की योग्यताओं उनके ज्ञान अर्जन की क्षमताओं रुचियों आदि के आधार पर उस पाठ्यक्रम में समय-समय पर परिवर्तन भी किया जा सके अर्थात पाठ्यक्रम कठोर ना होकर लचीला होना चाहिए।

  • स्वास्थ्य आचरण के आदर्शों की प्राप्ति का सिद्धांत Principle of achievement of wholesome behaviour pattern 

क्रो एंड क्रो के अनुसार पाठ्यक्रम में इस प्रकार के विषयों क्रियाएँ और वस्तुओं का स्थान होना चाहिए, जिससे बालक स्वास्थ्य आचरण के आदर्शों की प्राप्ति कर सके।

  • बाल केंद्रीयता का सिद्धांत Principle of child centred 

पाठ्यक्रम का स्वरूप बाल केंद्रित होना चाहिए, अर्थात पाठ्यक्रम का निर्माण प्रमुख रूप से बालकों की आवश्यकता और उनकी क्षमता बुद्धि आयु प्रवृत्तियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए।

उपर्युक्त सिद्धांतों के साथ अन्य कई सिद्धांत होते हैं, जो पाठ्यक्रम के निर्माण में प्रयोग किए जाते हैं,जिसके कारण पाठ्यक्रम अत्यंत लचीला तथा उद्देश्य युक्त बनता है, तथा अधिगम उद्देश्यों को आसानी से प्राप्त किया जाता है।


पाठ्यक्रम का विकास development of Curriculum 

पाठ्यक्रम का विकास निरंतर चलता रहता है, अर्थात पाठ्यक्रम का विकास एक अनवरत प्रक्रिया है, जो हमेशा ही चलती रहती है।

यह प्रमुख रूप से छात्रों की आवश्यकता समाज की आवश्यकता के ऊपर निर्भर करता है। प्रारंभ में कोई भी पाठ्यक्रम होता है, जो अपने प्रारंभिक रूप में ही एक निश्चित क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है,

किंतु धीरे-धीरे इसमें अनेक प्रकार की शैक्षिक सामाजिक और राष्ट्रीय आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए इसको परिवर्तित भी किया जाता रहता है

और यह विकास निरंतर चलता रहता है। कियोकि पाठ्यक्रम समाज की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण साधन बन जाता है।


पाठ्यक्रम विकास के सोपान steps of Curriculum development 

पाठ्यक्रम विकास की एक ऐसी प्रक्रिया है, जो व्यापक तथा विस्तृत है, क्योंकि पाठ्यक्रम अनेक तथ्यों पर आधारित होता है और इसमें समय तथा आवश्यकता के अनुसार परिवर्तन भी होता रहता है।

पाठ्यक्रम में अनेक तथ्य उपस्थित होते हैं, जो शैक्षिक व्यवस्था से तथा सामाजिक विकास के साथ ही बालक के विकास से संबंधित रहते हैं।

इस शैक्षिक व्यवस्था में लक्ष्य, उद्देश्य अधिगम अनुभव एवं विषय वस्तु आदि का चयन महत्वपूर्ण योगदान होता है। पाठ्यक्रम के विकास में प्रमुख सोपानों को निम्नलिखित रुप में स्पष्ट किया जा सकता है:- 

  1. लक्ष्य एवं उद्देश्य Goals and aims
  2. अधिगम अनुभवों का चयन Selection of learning experience 
  3. विषय वस्तु का चयन Selection of subject material 
  4. अधिगम अनुभव एवं विषय वस्तु का अंतरण Transference of learning experience and content 
  5. मूल्यांकन Evaluation

दोस्तों इस लेख में आपने पाठ्यक्रम निर्माण के सिद्धांत (Principles of Curriculum Building) के साथ पाठयक्रम निर्माण क्या है, पाठ्यक्रम का विकास तथा अन्य तथ्य पड़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

  • इसे भी पढ़े:-
  1. पाठयक्रम के प्रकार Type of curriculum
  2. कोर पाठयक्रम क्या है परिभाषा what is core curriculum
  3. राष्ट्रीय पाठयक्रम संरचना 2005 के सिद्धांत Principle of NCF 2005
  4. राष्ट्रीय पाठयक्रम संरचना 2005 के उद्देश्य Aims of NCF 2005





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