मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली के गुण और दोष Merits and Demerits of Medieval Muslim Education System

मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली के गुण और दोष Merits and Demerits of Medieval Muslim Education System

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली के गुण और दोष (Merits and Demerits of Medieval Muslim Education System) में। दोस्तों इस लेख के माध्यम से आज आप

मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली क्या है? मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली के गुण और मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली के दोष के बारे में जानेंगे, तो आइए दोस्तों करते हैं। आज का यह लेख शुरू मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली के गुण और दोष:-


इसे भी पढ़े:-वैदिक काल और बौद्ध काल में स्त्री शिक्षा


मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली के गुण और दोष


मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली क्या है What is Medieval Muslim Education System

मध्यकाल में जो शिक्षा प्रणाली थी उस शिक्षा प्रणाली को ही मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली कहा जाता है, जो प्रमुख रूप से शासकों तथा धनी लोगों पर निर्भर करती थी। मध्यकाल में मुस्लिम शिक्षा के प्रमुख केंद्र मकतब तथा मदरसा हुआ करते थे।

मकतब में प्राथमिक शिक्षा तथा उच्च शिक्षा मदरसा में दी जाती थी, जो पूरी तरह से निशुल्क होती थी। उस समय मकतब तथा मदरसा में छात्रों के रहने और खाने पीने की व्यवस्था भी होती थी।

किंतु यह शिक्षण केंद्र अस्थाई होते थे, इन्हें किसी मुस्लिम शासक या अमीर लोगों का संरक्षण आर्थिक सहायता ना मिलने के कारण यह बंद हो जाते थे।


मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली के गुण Merits of Medieval Muslim Education System

मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा के प्रमुख गुण निम्न है:-

नि:शुल्क शिक्षा की व्यवस्था Arrangement for free education

मध्यकाल में जो भी मुस्लिम शिक्षा प्रणाली थी, उसके जो शिक्षा के केंद्र मकतब और मदरसा हुआ करते थे, उनमें छात्त्रों से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता था। छात्रों को निवास करने के लिए छात्रावासों

और भोजन की भी व्यवस्था बिल्कुल निशुल्क होती थी। कियोकि उस समय शिक्षा पर जो खर्च होता था वह राज्य का शासक तथा समाज के धनी वर्ग के लोग दोनों मिलकर उठाते थे।


शिक्षा को राज्य का संरक्षण प्राप्त होना Education enjoying state production 

मध्यकाल में मुस्लिम शिक्षा के केंद्र मकतब तथा मदरसा को मुस्लिम शासकों का संरक्षण प्राप्त हुआ करता था। कई मुस्लिम शासको तथा अमीरों के द्वारा मकतबों, मदरसों तथा पुस्तकालयों का निर्माण कराया जाता था

तथा उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी। मुसलमान शासक उच्च कोटि के मदरसों के लिए बड़ी-बड़ी जागीरे देते थे, छात्रों को विशेष प्रकार की सुविधा भी प्राप्त हुआ करती थी।


छात्रवृत्तियों का आरंभ Beginning of scholarship 

मुस्लिम शिक्षा प्रणाली में इस्लाम, साहित्य, धर्म, दर्शन और कला कौशल के क्षेत्र में विशेष सम्मान दिया जाता था। उन्हें अपने ज्ञान एवं कला कौशल में निरंतर वृद्धि

करने के लिए आर्थिक सहायता और छात्रवृत्ति आदि जाती थी। आधुनिक छात्रवृत्ति का प्रारंभ भी मदरसों से ही हुई है यह भिन्न-भिन्न स्तर पर भिन्न - भिन्न प्रकार की हो सकती है।


प्राथमिक एवं उच्च शिक्षा की व्यवस्था Separate of primary and higher education 

मध्यकाल में मुस्लिम शिक्षा प्रणाली में प्राथमिक और उच्च शिक्षा की अलग-अलग व्यवस्था हुआ करती थी। प्राथमिक शिक्षा मकतबों में दी जाती थी, जबकि उच्च शिक्षा मदरसों में दी जाती थी। 

प्राथमिक शिक्षा के अंतर्गत बच्चों को वर्णमाला का सामान्य ज्ञान तथा कुरान के कुछ विशिष्ट भागो को कंठस्थ कराया जाता था, जबकि उच्च शिक्षा में धार्मिक, लौकिक विभिन्न विषयों का अध्ययन इस्लामी धर्म साहित्य आदि का ज्ञान प्राप्त होता था।


ज्ञान के समुचित विकास पर बल Emphasis on proper development of education 

पैगंबर मोहम्मद साहब ज्ञान को अमृत मानते थे, इसलिए मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली में इस्लाम धर्म एवं संस्कृति के विकास के साथ-साथ ज्ञान के विकास पर भी बल दिया गया। आधुनिक भारत में भौतिक विज्ञान के विकास और देश के आधुनिकीकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है।


मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली के दोष Demerits of Medieval Muslim Education System

मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली के प्रमुख दोष निम्न है:-


अस्थाई विद्यालय Temporary school

मुस्लिम कालीन शिक्षा प्रणाली का सबसे प्रमुख दोष था, कि उस समय जो विद्यालय मकतब मदरसे हुआ करते थे वह अस्थाई होते थे, क्योंकि यह केवल राज्य तथा अन्य धनी लोगों पर आश्रित हुआ करते थे।

अगर राज्य तथा अमीर लोगों से इनको आर्थिक सहायता प्राप्त नहीं होती थी, तो यह बंद हो जाया करते थे, क्योंकि उस समय शिक्षा विभाग तथा

शिक्षा व्यवस्था का कोई समुचित प्रारूप नहीं था, जबकि कुछ शिक्षक शिक्षार्थियों को घर पर ही शिक्षा देते थे, लेकिन वहाँ पर शिक्षकों का उद्देश्य ही मूल और अलग होता था।


लौकिक पक्ष पर अधिक बल More force on the Laukik side 

मुस्लिम कालीन शिक्षा में धार्मिक शिक्षा अर्थात मुस्लिम शिक्षा पर अधिक बल दिया जाता था। उस समय इस्लामी शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य भौतिक सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती थी।

इसलिए विद्यार्थी राज्य में मान पद नौकरी पाने की लालसा से ही विद्या अध्ययन करते और छात्र जीवन के दर्शन की उस गहराई तक पहुंचने में असमर्थ थे, जो प्राचीन भारतीय संस्कृति की एक विशेषता रहा करती थी।


अध्यापन में कठिनाई Difficulty in teaching

मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली का दोष यह था, कि उस समय शिक्षण अधिक प्रभावी नहीं था। शिक्षण का माध्यम फारसी और अरबी भाषा हुआ करती थी। इन भाषाओं को समझने में छात्रों को कठिनाई होती थी। इसलिए छात्र ठीक प्रकार से अध्ययन नहीं कर पाते थे।


दमनात्मक अनुशासन पर बल Repressive discipline

मुस्लिम शिक्षा में कठोर शारीरिक दंड प्रचलित था। वहाँ पर विद्यार्थियों को लात, घुसा और डंडों से मारा जाता था। कभी-कभी उनको गठरी बनाकर खूंटी से भी टांग देते थे, मुर्गा बनाते थे,

आदि कई शारीरिक और मानसिक दंड वहाँ पर प्रचलित थे, जिस कारण से बहुत से विद्यार्थियों का रुख शिक्षा से अलग हो जाता था और वह शिक्षा में रुचि नहीं लेते थे।


छात्रों में विलासिता का व्याप्त होना Luxuries among students

प्राचीन काल में जो शिक्षा आश्रमों में दी जाती थी, उस समय छात्रों का जीवन पवित्रा से ओतप्रोत था। उन्हें गुरुदेव के समीप रहना पड़ता था और ब्रह्मचर्य का पालन करना पड़ता था।

बहुत सी चीजों का प्रयोग करना उनके लिए उचित नहीं था। लेकिन मुस्लिम कालीन शिक्षा में विद्यार्थियों की मनोदशा बदलती गई छात्र छात्रावासों में रहकर हर एक चीज का प्रयोग करते थे।

वे इंद्रिय सुख प्रदान करने वाली चीजों का भी उपयोग किया करते थे। उनका जीवन त्यागी ना होकर बिलासी और बन गया था।


स्त्री शिक्षा की उपेक्षा Neglect of female education

मुस्लिम परिवारों में पर्दा प्रथा सबसे अधिक प्रचलित होती थी। उस समय मुसलमान स्त्रियों को शिक्षा प्राप्त करने के समुचित अवसर नहीं थे।

मदरसा और मकतबों में केवल बालकों को ही प्रवेश मिलता था। जो धनी लोग होते थे, अमीर लोग होते थे उनकी स्त्रियों की शिक्षा का प्रबंध उनके घर पर हो जाता था, उन्हें मौलवी साहब उनके घर पर ही पढ़ाते थे,

जबकि कुछ स्त्रियाँ तथा लड़कियाँ मदरसों तथा मकतबों में शिक्षा प्राप्त करने वाले लड़कों से ही थोड़ा बहुत पढ़ना-लिखना सीख लेती थी।


रटने पर बल देना Stress on rote

मुस्लिम शिक्षा प्रणाली में बालकों को बिना समझाऐं कुरान की आयतें रटने पढ़ती थी। इसके अतिरिक्त मदरसे की शिक्षा विषय के तथ्यों को भी विद्यार्थियों को रटना पड़ता था। यह ज्ञान वास्तविक ज्ञान नहीं होता था।

परिणाम स्वरूप शिक्षा का अर्थ सीखना ना होकर सूचना प्राप्त करना हो गया था। इससे छात्रों में तर्क विचार मनन कल्पना आदि की शक्तियों का विकास नहीं हो पाता था।


पढ़ने लिखने में अंतर Difference between reading and writing

उस समय अलग प्रकार की स्कूल शिक्षा पद्धति थी, इसमें कई दोष व्याप्त थे। उस समय पहले छात्रों को पढ़ना सिखाया जाता था

और बाद में लिखना सिखाया जाता था अक्षरों के बिना ज्ञान प्राप्त किए कहाँ तक कोई चीज पढ़ी जा सकती है, यह एक हास्यास्पद चीज है।

दोस्तों आपने इस लेख में मध्यकालीन मुस्लिम शिक्षा प्रणाली के गुण और दोष (Merits and Demerits of Medieval Muslim Education System) पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

इसे भी पढ़े:-

  1. वैदिक कालीन शिक्षा की विशेषताएँ Feature of vadic period education
  2. बौद्धकालीन शिक्षा की विशेषताएँ Features of buddhist education
  3. शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 RTE act 2009



Post a Comment

और नया पुराने
close