मकतब और मदरसा में अंतर Difference between Maktab and Madrasa

मकतब और मदरसा क्या है What is Maktab and Madrasa

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख मकतब और मदरसा क्या है मकतब और मदरसा में अंतर (What is Maktab and Madrasa) में।

दोस्तों इस लेख में आप मकतब क्या है? मदरसा क्या है? के साथ ही इनका अर्थ शिक्षण विधियाँ पाठयक्रम आदि के बारे में जानेंगे। तो आइये दोस्तों करते है, शुरू यह लेख मकतब और मदरसा क्या है:-


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मकतब और मदरसा क्या है


मकतब क्या है What is Maktab

मकतब मध्यकाल में मुस्लिम कालीन शिक्षा के वे प्रमुख केंद्र हुआ करते थे, जहाँ पर मुस्लिम बालकों की शिक्षा का प्रबंध हुआ करता था। यहाँ पर बालकों को केवल प्राथमिक शिक्षा ही दी जाती थी,

कियोकि मकतबों को विकसित करने का उद्देश्य मुस्लिम बालकों को कुरान के विशिष्ट अंगों को कंठस्थ कराना था, किंतु यह कार्य आंशिक रूप से ही सफल हो सका।

 

मकतब का अर्थ और परिभाषा Meaning and definitions of Maktab

मकतब शब्द अरबी भाषा के कुतुब शब्द से बना हुआ है, जिसका अर्थ होता है 'उसने लिखा' अतः कह सकते हैं, कि मकतब का अर्थ होता है, वह स्थान जहाँ पढ़ना लिखना सिखाया जाता हो।

मकतब मुस्लिम कालीन शिक्षा का वह स्थान हुआ करते थे, जहाँ पर मुस्लिम बच्चों की शिक्षा का प्रबंध होता था। यहाँ पर शिक्षा मौलाना दिया करते थे। मकतब को स्थापित करने का उद्देश्य था,

कि समस्त मुस्लिम बालकों को प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना, जिससे कि वह कुरान से विशिष्ट अंगों को कंठस्थ कर लें तथा उनका दैनिक धार्मिक कृत्यों में प्रयोग करें।


मकतब में प्रवेश Addmission in Maktab 

मकतब में प्रवेश के समय एक विशेष प्रकार की रस्म होती थी, जिस रस्म को बिस्मिल्लाह के नाम से जाना जाता था। बिस्मिल्लाह की रस्म उस वक्त होती थी, जब बालक 4 वर्ष 4 माह और 4 दिन का हो जाता था।

इस अवसर पर बालक को नए कपड़े पहनाए जाते थे और उसके सामने लिपि कुरान की भूमिका एवं उसका 55वाँ और 87वाँ अध्याय प्रस्तुत किया जाता था। इसके बाद जो मौलवी साहब होते थे,

वह कुरान की आयातें पढ़ते थे और बालक उनको दोहराने का कार्य करता था, किंतु अगर बालक उन आयतों को नहीं दोहरा पाता था, तो वह बिस्मिल्लाह ही कह देता था और ऐसा कहना है

ही उसके लिए प्रवेश माना जाता था। बिस्मिल्लाह की रस्म पर रात बालक के सभी सगे संबंधी उपस्थित होते थे तथा अच्छी जश्न ए दावत भी होती थी।


मकतब का पाठ्यक्रम Syllabus of Maktab 

मकतब का पाठ्यक्रम बड़ा ही सरल तथा मुस्लिम संस्कृति से ओतप्रोत था। सबसे पहले बालकों को वर्णमाला के अक्षरों का ज्ञान कराया जाता था।

इसके बाद उन्हें अच्छी लेख लिखना और उच्चारण करने पर अधिक बल देते थे। इसके बाद उन्हें सामान्य गणित भी पढ़ाई जाती थी। फिर लिपि का ज्ञान और लिपि के ज्ञान के बाद उन्हें कुरान की

आयतें कंठस्थ कराई जाती थी। मकतब में फारसी एवं व्याकरण की शिक्षा भी प्रदान की जाती थी। चारित्रिक तथा नैतिक विकास के लिए कई प्रकार की प्रसिद्ध पुस्तकें जैसे कि गुलदस्ता तथा बोस्ताँ आदि का अध्ययन भी कराया जाता था।

व्यवहारिक शिक्षा भी बालकों को प्रदान की जाती थी, जिनमें बातचीत का ढंग, तौर तरीका, पत्र लेखन कला आदि का प्रमुख स्थान होता था, जो शहजादे होते थे, उनको अरबी फारसी के साथ ही सैनिक शिक्षा, कानून, न्याय तथा धर्म की भी शिक्षा दी जाती थी।


मकतब की शिक्षण विधि Teaching Method of Maktab 

मकतब में मौखिक और प्रथम शिक्षण विधि का उपयोग अधिक होता था। जब शुद्ध शुद्ध उच्चारण करने लग जाता था, तो उसको कलमा रटाया जाता था। इसके बाद उसे कुरान की आयातें रटवाई जाती थी।

पहाड़े भी सिखाए जाते थे, पहाड़े उच्च स्वर में सभी लोग आनंद में एक साथ सीखते थे, जबकि लेखन कार्य के लिए मोटी सरकंडे की कलम तथा पतली तख्तीयों का उपयोग किया जाता था।


मदरसा क्या है What is Madrasa

मदरसा मुस्लिम कालीन उच्च शिक्षा के वे केंद्र हुआ करते थे, जहाँ पर धार्मिक तथा लौकिक दोनों प्रकार की शिक्षाओं का शिक्षण कार्य किया जाता था।

मदरसे में सभी विषयों के अध्ययन की व्यवस्था तो नहीं होती थी, किंतु प्रमुख विषयों का अध्ययन जरूर उपलब्ध होता था। मदरसा में प्रवेश मकतब से शिक्षण प्राप्त करने के पश्चात ही होता था।


मदरसा का अर्थ तथा परिभाषा Meaning and definitions of madrasa

मदरसा शब्द फारसी भाषा का शब्द है, जो फारसी भाषा के शब्द परम से बना हुआ है, जिसका अर्थ 'भाषण देना' होता है। मदरसा मुस्लिम कालीन शिक्षण का वह स्थान होता है, जहाँ पर प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात बालक उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश लेते थे।

मदरसा में भिन्न-भिन्न विषयों के लिए भिन्न-भिन्न शिक्षक होते थे और इनकी नियुक्ति प्रबंध समिति के द्वारा की जाती थी। यहाँ पर अध्ययन का काल 10 से 12 वर्ष तक का होता था।


मदरसा का पाठ्यक्रम Syllabus of Madrasa 

मदरसा का पाठ्यक्रम दो भागों में विभाजित था

  • धार्मिक शिक्षा Religious education

धार्मिक शिक्षा के अंतर्गत मदरसा में कुरान की आयातों को कंठस्थ कराया जाता था। उनका गहन आलोचनात्मक अध्ययन भी करना पड़ता था।

इसके अलावा इस्लाम का इतिहास, इस्लाम का कानून, मोहम्मद साहब की परंपरा एवं सूफी सिद्धांतों का अध्ययन धार्मिक शिक्षा के अंतर्गत किया जाता था।

  • लौकिक या सांसारिक शिक्षा Secular or worldly education

इस शिक्षा के अंतर्गत अरबी, फारसी भाषाओं का व्याकरण साहित्य, इतिहास तथा गणित, भूगोल, ज्योतिष, अर्थशास्त्र, कानून, तर्कशास्त्र, नीतिशास्त्र, दर्शनशास्त्र, यूनानी चिकित्सा, कृषि आदि विषयों का अध्ययन कराया जाता था।


मदरसा की शिक्षण विधि Teaching Method of Madrasa 

मदरसा में भी मकतबा की तरह मौखिक शिक्षण विधि होती थी, यहाँ पर शिक्षक भाषण प्रणाली तथा व्याख्यान प्रणाली द्वारा शिक्षण कार्य करते थे,

तथा शिक्षा का माध्यम अरबी भाषा थी। धर्म, दर्शनशास्त्र, तर्कशास्त्र आदि विषयों के शिक्षण में तर्क विधि का भी उपयोग होता था।

शिक्षक विद्यार्थियों को स्वअध्यायन के लिए प्रेरित किया करते थे। यहाँ शिल्पकला, चिकित्सा संगीत आदि शिक्षा भी उपलब्ध थी। अध्यापक की अनुपस्थिति या उसकी आज्ञा से अग्रशिक्षा प्रणाली का प्रयोग होता था।

दोस्तों आपने यहाँ मकतब और मदरसा में अंतर (What is Maktab and Madrasa) पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

इसे भी पढ़े:-

  1. वैदिककालीन शिक्षा प्रणाली की विशेषताएँ
  2. हंटर आयोग 1882
  3. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968



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