प्रयोजनवाद के अनुसार शिक्षा के उद्देश्य Objectives of education according to pragmatism

प्रयोजनवाद के अनुसार शिक्षा के उद्देश्य Objectives of education according to pragmatism

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख प्रयोजनवाद के अनुसार शिक्षा के उद्देश्य (Objectives of education according to pragmatism) में।

दोस्तों यहाँ पर आप प्रयोजनवाद के अनुसार शिक्षा के उद्देश्य के साथ प्रयोजनवाद के अनुसार पाठ्यक्रम तथा प्रयोजनवाद के अनुसार शिक्षण पद्धति भी जानेंगे। तो आइये करते है, शुरू यह लेख प्रयोजनवाद के अनुसार शिक्षा के उद्देश्य:-


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प्रयोजनवाद के अनुसार शिक्षा के उद्देश्य


प्रयोजनवाद के अनुसार शिक्षा के उद्देश्य Objectives of education according to pragmatism

प्रयोजनवाद के अनुसार शिक्षा के निम्न प्रकार के उद्देश्य हैं:-


पूर्व निश्चित उद्देश्य का विरोध opposition to pre-determined aim

प्रयोजनवादी विचारधारा के लोग मानते हैं, कि सत्य हमेशा परिवर्तनशील होता है, इसीलिए वह सत्य पर विश्वास ना करके निर्माण की प्रक्रिया पर विश्वास करते हैं। प्रयोजनवाद शिक्षा के किसी भी पूर्व निश्चित उद्देश्य को नहीं मानते हैं और बच्चों पर प्राचीन काल के उद्देश आदेश और नियम को थोपना भी नहीं चाहते प्रयोजनवाद आदर्शवाद से पूरी तरह से भिन्न होता है।


नवीन मूल्यों के निर्माण का उद्देश्य Aim of formation of new values

प्रयोजनवादियों का मानना है, कि शिक्षक को एक ऐसी स्थिति उत्पन्न करनी चाहिए एक ऐसा वातावरण उत्पन्न करना चाहिए, कि बालक का मस्तिष्क हमेशा क्रियाशील रह सके और वह नवीन मूल्यों और आदर्शों का निर्माण करने में सक्षम हो जाएँ। शिक्षा के इस प्रयोजनवादी उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए रॉस ने भी कहा है, कि प्रयोजनवाद शिक्षा का सबसे सामान्य उद्देश्य मूल्यों का निर्माण करना होता है। शिक्षा का प्रमुख कर्तव्य यह होता है, कि वह शिक्षार्थी अर्थात विद्यार्थी को ऐसा वातावरण प्रदान करें जिसमें रहकर वह नवीन मूल्यों का विकास करने के लिए सक्षम हो जाएं।


सामाजिक व्यवस्था की उन्नति Importance of social order

प्रयोजनवादियों का मानना होता है, कि शिक्षा का उद्देश्य मानव कल्याण और सामाजिक व्यवस्था की उन्नति करना होता है, इसीलिए शिक्षा हमेशा सामाजिक और मानव केंद्रित होनी चाहिए इसके लिए उनके अनुसार विज्ञान का पढ़ना आवश्यक है, शिक्षा के इस सामाजिक उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बटलर ने भी कहा है, शिक्षा के सामाजिक उद्देश्य का तात्पर्य संसार का तैयार सुसंगठित वातावरण माना जा सकता है।


सामाजिक निपुणता Social efficiency

महान विचारक जॉन डीवी का मानना है, कि सामाजिक निपुणता शिक्षा का उद्देश्य है, उनका मानना है, कि सामाजिक निपुणता हर प्रकार के सामाजिक संबंधों को विभिन्न रूपों में मधुर संबंध बनाए रखने की एक विभिन्न प्रकार की कुशलता है। व्यापक रूप से प्रयोजनवादी सामाजिक कुशलता तथा सांस्कृतिक उद्देश्य में समानता समझते हैं, परंतु सूक्ष्म रूप से देखने पर दोनों में अंतर स्पष्ट दिखाई देता है।


बालक का विकास Child's growth

बालक का विकास शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य माना जाता है, किंतु बहुत से विचारक इस उद्देश्य की आलोचना भी करते हैं, क्योंकि वे मानते हैं, कि इस विकास का ना तो कोई लक्ष्य होता है और ना ही कोई अंत होता है, सिवाय इसके विकास का और भी अधिक विकास हो प्रयोजनवादियों ने विकास की कोई दिशा नहीं बताई संभव है, कि यह विकास गलत दिशा की ओर भी हो सकता है।


गतिशील निर्देशन Dynamic direction

प्रयोजनवादी शिक्षाशास्त्रियों के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य बालकों का गतिशील अध्ययन करना है, किंतु अमेरिका शिक्षा के इस उद्देश्य में गतिशील निर्देशन की व्याख्या के अभाव में कुछ दोष भी आए हैं। बॉयड बोड ने इस ओर हमारा ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा है, कि आज की अमेरिका की शिक्षा का मुख्य दोष हैं, कि उसमें कार्यक्रम अथवा निर्देशन के ज्ञान का अभाव इसका ना तो कोई उपयुक्त कार्यक्षेत्र है और ना कोई सामाजिक सिद्धांत।


प्रयोजनवाद के अनुसार पाठ्यक्रमCurriculum according to Pragmatism

प्रयोजनवाद के अनुसार पाठ्यक्रम निम्न प्रकार के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए:-

  1. उपयोगिता का सिद्धांत :- प्रयोजनवादियों का मानना है, कि पाठ्यक्रम के अंतर्गत इस प्रकार के विषयों का स्थान होना चाहिए, जो बालकों को भावी जीवन में काम देता हैं उन्हें ज्ञान देता है और जीवन में उन्हें सफलता प्रदान कर सकें, इस दृष्टि से उनके अनुसार पाठ्यक्रम में भाषा, स्वास्थ्य विज्ञान, शारीरिक प्रशिक्षण, इतिहास, भूगोल, गणित, विज्ञान बालिकाओं के लिए गृह विज्ञान, कृषि विज्ञान आदि विषयों को स्थान देना चाहिए।
  2. सानुबंधित का सिद्धांत :- प्रयोजनवादियों का कहना है, कि जो विषय पाठ्यक्रम में समाहित किए गए हैं, उन सभी का आपस में संबंध होना चाहिए, क्योंकि ज्ञान का  विभाजन करना संभव नहीं होता, इसीलिए उनका विचार होता है, कि बालकों को समस्त विषय एक दूसरे से संबंधित करके पढ़ाये जाने चाहिए, जिससे बालकों को भी ज्ञान प्राप्त करने में आसानी होगी और शिक्षकों को भी ध्यान देने में भी आसानी होगी।
  3. बाल केंद्रित पाठ्यक्रम का सिद्धांत:- प्रयोजनवादियों का मानना है, कि पाठ्यक्रम का संगठन किस प्रकार से किया जाना चाहिए, कि उसमें बालक की प्राकृतिक अभिरुचियों का स्थान हो बालक की अभिरुचि नियम मुख्य प्रकार से बातचीत करना खोज करना कलात्मक अभिव्यक्ति और रचनात्मक कार्य करना से संबंधित होती हैं। इस दृष्टि से पाठ्यक्रम में लिखने, पढ़ने, गणना करने, प्रकृति विज्ञान, हस्तकार्य एवं ड्राइंग का अध्ययन करने के साधनों को स्थान दिया जाना चाहिए।
  4. बालक के व्यवसाय क्रियाओं एवं अनुभव का सिद्धांत :- प्रयोजन वादियों का विचार है, कि पाठ्यक्रम का संगठन बालक के व्यवसाय एवं अनुभवों पर आधारित किया जाना चाहिए। उनका मानना है, कि किताबों को केवल रट लेना शिक्षा नहीं होती है बल्कि है वह एक विचार एक प्रक्रिया होती है। फलस्वरुप पाठ्यक्रम में शिक्षालय के विषयों के अतिरिक्त सामाजिक स्वतंत्र एवं उद्देश्य पूर्ण क्रियाओं को स्थान दिया जाना चाहिए, जिससे कि बालकों में नैतिक गुणों का विकास होगा। स्वतंत्रता की भावना का संचार होगा और बालकों को नागरिकता का प्रशिक्षण मिलेगा और उनमें आत्म अनुशासन की भावना उत्पन्न होगी।

प्रयोजनवाद के अनुसार शिक्षण पद्धति Teaching method according to Pragmatism

प्रयोजनवाद के अनुसार शिक्षण पद्धति के आधारभूत सिद्धांत निम्न प्रकार से हैं:-

  1. बाल केंद्रित शिक्षा पद्धति का सिद्धांत :- प्रयोजनवादियों का मानना होता है, कि प्रत्येक शिक्षा पद्धति को बालक केंद्रित किया जाना चाहिए, क्योंकि शिक्षा पद्धति इस प्रकार की होनी चाहिए जो बालक की अभिरुचियों आवश्यकताओं उद्देश्यों आदि के अनुकूल हो, जिससे बालक प्रसन्नता पूर्वक अपने जीवन में काम आने वाली शिक्षा ग्रहण सके और अपने जीवन को सार्थक बना सके।
  2. करके सीखने और अनुभव से सीखने का सिद्धांत:- प्रयोजनवाद विचार की अपेक्षा क्रिया पर अधिक जोर देते हैं, उनका विचार होता है, कि बालकों को पुस्तकों की अपेक्षा क्रियाओं और अनुभवों से अधिक सीखना चाहिए, जिससे कि उनके ज्ञान का व्यवहारिक मूल्य अधिक हो फल स्वरुप वह करके सीखने अथवा अनुभव द्वारा सीखने पर विशेष बल देते हैं।
  3. सानुबंधुता का सिद्धांत :- प्रयोजनवादियों का विचार है कि सानुबंधुता का सिद्धांत भी शिक्षण पद्धति का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत होता है, और यह सिद्धांत  प्रयोजनवाद में विभिन्नता में एकता के सिद्धांत का समर्थन करते हुए कहते हैं, की समस्त विषयों को परस्पर सम्बंधित करके बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे बालक जो ज्ञान और कौशल सीखते हैं, उनमें एकता स्थापित हो जाती है, प्रयोजनवादी शिक्षा पद्धति के आधार को सिद्धांत को मानकर प्रयोजनवाद विचारक जॉन डीवी के परममित्र किलपैट्रिक ने प्रोजेक्ट पद्धति और योजना पद्धति का आविष्कार किया।

दोस्तों यहाँ पर आपने प्रयोजनवाद के अनुसार शिक्षा के उद्देश्य (Objectives of education according to pragmatism) पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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  1. प्रयोजनवादी शिक्षा की विशेषताएँ Feature of Pryojanvadi Education
  2. प्रयोजनवाद के जनक कौन है Who was father of pragmatism




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