खेल मनोविज्ञान का महत्त्व जनक तथा अर्थ Importence of sport psychology

खेल मनोविज्ञान का महत्त्व जनक तथा अर्थ Importence of sport psychology

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख खेल मनोविज्ञान का महत्त्व (Importence of sport psychology) में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप खेल मनोविज्ञान क्या है? खेल मनोविज्ञान का अर्थ, खेल मनोविज्ञान के जनक, के साथ अन्य कई महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जानेंगे। तो आइये शुरू करते है, यह लेख खेल मनोविज्ञान का महत्त्व:-


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खेल मनोविज्ञान का महत्त्व जनक तथा अर्थ


खेल मनोविज्ञान क्या है What is Sport psychology

मनोविज्ञान जिसे इंग्लिश में साइकोलॉजी (Psychology) कहा जाता है, वह मनुष्य के लगभग सभी पक्षों से संबंधित होता है।

इसी प्रकार से मनोविज्ञान की एक शाखा है खेल मनोविज्ञान जो प्रमुख रूप से व्यक्ति के शारीरिक तथा मानसिक स्थितियों पर अधिक प्रभाव डालता है।

साधारण शब्दों में कह सकते हैं, कि खेल मनोविज्ञान विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अंतर्गत जो खेल गतिविधियाँ होती हैं उनके दौरान खेल खेलने वालों की मानसिक स्थिति उनके भावात्मक पक्षों (Affective sides) आदि का अध्ययन किया जाता है।

वही हम कह सकते हैं, कि खेल मनोविज्ञान विज्ञान की वह शाखा है, जिसके द्वारा व्यक्ति अपनी शारीरिक तथा मानसिक स्थिति को मजबूत बनाते हैं,

इसीलिए व्यक्ति के सभी प्रकार के विकास के लिए सर्वांगीण विकास के लिए खेल मनोविज्ञान (Sport Psychology) आवश्यक होती है।

जब भी किसी भी प्रकार का खेल खेला जाता है तो खिलाड़ियों में यह भावात्मक पक्ष अवश्य ही उत्पन्न होता है, कि वह इस खेल में हार जाएंगे या फिर जीत जाएंगे और खिलाड़ियों के मन में एक प्रकार का तनाव तथा टेंशन कई ऐसी स्थितियाँ उत्पन्न हो जाती है,

जिससे वह अपने खेल में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते इस स्थान पर खेल मनोविज्ञान का होना बहुत ही आवश्यक होता है, क्योंकि खेल मनोविज्ञान उन परिस्थितियों खिलाडियों की समस्याओं को पहचानते है भावात्मक पक्ष को मजबूत बनाते है,

तथा खिलाड़ी को उचित सलाह मार्गदर्शन देते है, ताकि खिलाड़ी अपने प्रदर्शन (Performece) में बेहतर सुधार करके उस खेल में अव्वल आ सके।

इसलिए खेल मनोविज्ञान वह विज्ञान है, इसके अंतर्गत खेल तथा इसके अंतर्गत आने वाली क्रियाओं खिलाड़ियों के व्यवहार आदि का अध्ययन किया जाता है।


खेल मनोविज्ञान का अर्थ Meaning of sport psychology

मनुष्य का जीवन एक ऐसा जीवन है, जिसके लगभग सभी पक्षो पर मनोविज्ञान का लागू होना निश्चित रहता है, क्योंकि मनोविज्ञान के द्वारा मनुष्य की लगभग सभी क्रियाओं का अध्ययन हो जाता है

और उनको नियंत्रित भी किया जाता है। उन्हीं में से खेल मनोविज्ञान मनुष्य की शारीरिक योग्यता (Physical fitness) पर बल देता है

और इसी मनोविज्ञान के द्वारा मनुष्य शारीरिक तथा मानसिक योग्यताओं को बेहतर बनाने में सक्षम हो जाता है। इस प्रकार से खेल मनोविज्ञान का अर्थ मनुष्य के चहुंमुखी विकास के संदर्भ में लिया जाता है।


खेल मनोविज्ञान के जनक Father of sport psychology

ऐसा माना जाता है, कि जर्मनी यूरोप में खेल मनोविज्ञान का जन्म हुआ और खेल मनोविज्ञान प्रयोगशाला (Sports psychology lab) की स्थापना 1920 के दशक की शुरुआत में बर्लिन में डॉ. कार्ल डायम (Dr. Carl Diem) ने की

किन्तु, अमेरिकी खेल मनोवैज्ञानिक  कोलमैन रॉबर्ट्स ग्रिफ़िथ (Coleman Roberts Griffith) जिनका जन्म आयोवा में हुआ था वे ही अमेरिकी खेल मनोविज्ञान के संस्थापक थे।

उन्होंने 1915 तक ग्रीनविल कॉलेज में अध्ययन किया, और फिर इलिनोइस विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान का अध्ययन किया किया था, किन्तु सबसे अधिक महत्व खेल मनोविज्ञान को दिया था।

इलिनोइस विश्वविद्यालय में रहते हुए, ग्रिफ़िथ ने संयुक्त राज्य में पहली खेल मनोविज्ञान प्रयोगशाला होने का दावा किया है इसलिए खेल मनोविज्ञान के जनक कोलिमन ग्रिफिथ (father of sports psychology) को माना जाता है।


खेल मनोविज्ञान का महत्त्व Importence of psychology

खेल मनोविज्ञान खिलाड़ियों के व्यवहार से जुड़ा हुआ एक विज्ञान है जिसके द्वारा खिलाड़ियों के प्रदर्शन में सुधार लाया जाता है, इसलिए खेल मनोविज्ञान का सबसे अधिक महत्व खिलाड़ियों के लिए निम्न प्रकार से है:-

  1. खिलाड़ियों के लिए भावात्मक पक्ष में सहयोग:-  दुनिया भर में कई प्रकार की प्रतियोगिताएँ आयोजित की जाती है,जो देश विदेशों में होती हैं और इनमें हजारों खिलाड़ी देश विदेश के कोने-कोने से आकर भाग लेते हैं, इसीलिए विभिन्न खिलाड़ियों को देखकर उनके प्रदर्शन को देखकर खिलाड़ी के मन में निराशा डर तनाव आदि परिस्थितियाँ उत्पन्न होने लगती है और उनका भावात्मक पक्ष कमजोर होने लगता है, इसीलिए यहाँ पर खेल मनोविज्ञान के द्वारा खिलाड़ियों के भावात्मक पक्ष को मजबूत बनाया जा सकता है, जिससे वह खेल में अच्छा प्रदर्शन कर सकें।
  2. खिलाड़ियों का व्यवहार समझना :- खेल मनोविज्ञान के द्वारा खिलाड़ियों का व्यवहार समझा जाता है। खिलाड़ियों के व्यवहार के माध्यम से ही खिलाड़ियों को किसी खेल के प्रति प्रेरित करना आसान हो जाता है, यदि खेल शिक्षा के खिलाड़ियों के व्यवहार जैसे कि उनकी उत्सुकता उनकी क्षमता, रूचि, अभिवृति आदि को समझने में कामयाब हो जाता है, तो वह खिलाड़ियों को अच्छी प्रकार से निर्देशन करने में सक्षम हो जाता है।
  3. गति कौशलों को सीखना :- प्रत्येक व्यक्ति अपनी रूचि तथा क्षमता के अनुसार खेल का चुनाव करता है, यहाँ पर गति कौशलों को सीखने की मदद तथा खेल के चुनाव में खेल मनोविज्ञान का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान होता है।
  4. शरीर की क्रियात्मक क्षमता में विकास:- शरीर की क्रियात्मक क्षमता में विकास में खेल मनोविज्ञान का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है। खेल मनोविज्ञान के द्वारा ही व्यक्ति लचक गति शक्ति तथा मन की शक्ति को मजबूत बनाकर शारीरिक तथा मानसिक रूप से अपने आप को मजबूत बनाता है, ताकि वह खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
  5. भावनाओं के नियंत्रण में :- खेल मनोवैज्ञानिक के द्वारा खेल खेलने वाले लोगों का अध्ययन उनके व्यवहार का अध्ययन किया जाता है, जिससे उनको इतना मजबूत बना दिया जाता है, कि वह खेल खेलते समय भिन्न प्रकार की भावनाओं को नियंत्रण में कर सकें जैसे कि क्रोध तनाव टेंशन डर आदि पर वह नियंत्रण करके खिलाडी खेल में अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम हो जाते हैं।
  6. प्रतियोगिता की तैयारी :- राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएँ (Competitions) आयोजित की जाती है, जिनकी तैयारियाँ भी लंबे समय से जारी रहती है। अतः ऐसे स्थान पर खेल मनोवैज्ञानिक का होना जरूरी होता है, जो व्यक्ति को सही प्रकार से निर्देशन करता है और उसको प्रतियोगिता के लिए पूर्ण रुप से तैयार करने में उसकी मदद करता है। जब खिलाड़ियों को अच्छे खेल मनोवैज्ञानिक के द्वारा निर्देशन प्राप्त होता है, तो वह भावात्मक तथा शारीरिक पक्ष से मजबूत हो जाते हैं और खेलों में अच्छा प्रदर्शन करते हैं।

दोस्तों आपने यहाँ खेल मनोविज्ञान का महत्त्व जनक तथा अर्थ (Importence of sport psychology) के साथ अन्य तथ्यों के बारे में पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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