प्रयोजनवादी शिक्षा की विशेषताऐं Features of Pryojanvadi Education

प्रयोजनवादी शिक्षा की विशेषताऐं Features of Pryojanvadi Education

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख प्रयोजनवादी शिक्षा की विशेषताऐं (Features of Pryojanvadi Education) में।

दोस्तों यहाँ पर आप प्रयोजनवादी शिक्षा की विशेषताऐं जानेंगे जो मूल रूप से शिक्षा तथा शिक्षार्थी के विकास से सम्बंधित है, तो आइये शुरू करते है, यह लेख प्रयोजनवादी शिक्षा की विशेषताऐं:-


प्रयोजनवादी शिक्षा की विशेषताऐं


प्रयोजनवादी शिक्षा की विशेषताऐं Features of Pryojanvadi Education

प्रयोजनवादी शिक्षा की प्रमुख विशेषताऐं निम्नप्रकार से है:-


शिक्षा दर्शन की प्रयोगशाला के रूप में Education is the laboratory of philosophy

जॉन डीवी महोदय का विचार है, कि दर्शन एवं शिक्षा दोनों एक दूसरे के पूरक तथा अन्योनाश्रित होते हैं। एक तरफ तो दर्शन इस बात को ठीक प्रकार से स्पष्ट करता है, कि वर्तमान परिस्थिति में कौन-कौन से सामाजिक मूल्य वांछनीय है

और दूसरी ओर से उनको प्रयोग की कसौटी में करते हुए उनकी उपयोगिता की परीक्षा करती है इसलिए कहा जा सकता है, कि शिक्षा दर्शन की प्रयोगशाला होती है, जिसमें दार्शनिक कल्पनाओं की व्यवहारिक प्रमाणिकता की परख होती है।


शिक्षा सामाजिक प्रक्रिया के रूप में Education as a social process

जॉन डीवी का कहना है, कि शिक्षा एक ऐसी प्रक्रिया होती है, जिसमें बालकों का सामाजिकरण होता है। दूसरे शब्दों में कह सकते हैं, कि शिक्षा द्वारा बालक को ऐसा वातावरण किया जाता है,

जिससे वह समाज की सभ्यता समाज की संस्कृति से भलीभांति परिचित हो जाता है, जिससे वह सामाजिक जागृति में भाग लेने के अभाव से समाज का अस्तित्व संभव नहीं है। जैसा कि डीवी ने लिखा है,

जो भोजन ग्रहण एवं संतान उत्पादन की क्रिया शारीरिक जीवन के लिए कार्य करती है, वही शिक्षा सामाजिक जीवन के लिए भी कार्य करती है।


शिक्षा विकास की प्रक्रिया के रूप में Education is the process of growth

जॉन डीवी महोदय ने शिक्षा का विकास से सम्बंध दर्शाते हुए कहा है, कि विकास जीवन की एक विशेषता होती है। इसीलिए शिक्षा पूरी तरह से विकास से तादात्मय रखती है,  इससे परे उसका कोई प्रयोजन ही नहीं हो सकता शिक्षालय की शिक्षा

के मूल की कसौटी उस मात्रा पर निर्भर करती है, जो निरंतर विकास की इच्छा को उत्पन्न करती है, एवं इच्छा को प्रभावशाली बनाने के लिए साधनों को उपलब्ध भी कराती है।


शिक्षा प्रजातांत्रिक समाज के निर्माण के रूप में Education as  building of democratic society

जॉन डीवी महोदय का विचार है, कि वर्तमान प्रजातांत्रिक युग में शिक्षा का प्रमुख कार्य प्रजातांत्रिक समाज का निर्माण करना होता है। इसके लिए समाज में ऐसी स्थितियाँ उत्पन्न करनी चाहिए,

जिससे व्यक्ति-व्यक्ति का भेद समाप्त हो जाए और सभी व्यक्तियों को अपने व्यक्तित्व का स्वाभाविक विकास करने का समुचित अवसर भी प्राप्त हो जाए व्यक्ति हित तथा समाज हित में किसी भी प्रकार का भेद ही ना रहे नागरिकों में परस्पर संपर्क

तथा सहयोग की भावना का विकास होना सभी में अपने अधिकारों तथा कर्तव्य का निर्वाह करने की क्षमता उत्पन्न होना और सभी की समाज की प्रगति के लिए प्रबल इच्छा होना बहुत ही आवश्यक है।


शिक्षा द्विमुखी प्रक्रिया के रूप में Education as a bipolar process

जॉन डीवी ने शिक्षा को एक ऐसी प्रक्रिया बताया है, जिसके निम्नलिखित दो प्रकार के भाग होते हैं:- 

  1. मनोवैज्ञानिक :- इसका तात्पर्य बालक का विकास उसकी मूल प्रवृत्तियों और शक्तियों तथा इच्छाओं से संबंधित होता है। इस प्रकार शिक्षक को चाहिए, कि वह बालक की इन मूल प्रवृत्तियों शक्तियों तथा दोषों का अध्यापन करें तथा उनके अनुकूल शिक्षा सामग्री का ज्ञान प्राप्त कर बालक की शिक्षा प्रारंभ करें तभी वह बालक के व्यक्तित्व के विकास में सहायक सिद्ध हो सकती हैं और बालक का विकास ठीक प्रकार से हो सकता है।
  2. सामाजिक :- इसका अभिप्राय सामाजिक प्राणी होने के फलस्वरूप व्यक्ति समाज में ही क्रियाशील रहकर शिक्षा प्राप्त कर सकता है। बालक अपने माता-पिता पड़ोसियों मित्रों तथा अन्य व्यक्तियों से कुछ ना कुछ हमेशा सीखता ही रहता है। यही उसकी शिक्षा होती है। वास्तव में बालक का सामाजिक प्राणी होने के नाते सामाजिक जागृति में सफलतापूर्वक भाग लेना ही उसकी शिक्षा समझी जाती है।

दोस्तों आपने यहाँ पर प्रयोजनवादी शिक्षा की विशेषताऐं (Features of Pryojanvadi Education) पढ़ी। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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