प्रयोजनवाद तथा आदर्शवाद में अंतर Difference between pragmatism and idealism

प्रयोजनवाद तथा आदर्शवाद में अंतर Difference between pragmatism and idealism

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख प्रयोजनवाद तथा आदर्शवाद में अंतर (Difference between pragmatism and idealism) में।

दोस्तों यहाँ आप प्रयोजनवाद तथा आदर्शवाद में अंतर के साथ प्रयोजनवाद क्या है? आदर्शवाद क्या है? उनके प्रतिपादकों के बारे में जान पायेंगे, तो आइये शुरू करते है, यह लेख प्रयोजनवाद तथा आदर्शवाद में अंतर:-


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प्रयोजनवाद तथा आदर्शवाद में अंतर


प्रयोजनवाद क्या है what is pragmatism

प्रयोजनवाद एक नवीनतम् दार्शनिक विचारधारा है। वर्तमान युग में दर्शन एवं शिक्षा के विभिन्न विचारधाराओं में इस विचारधारा को सबसे अधिक मान्यता प्राप्त है।

इस विचारधारा को अर्थक्रियावाद, व्यवहारवाद, कारणवाद, अनुभववाद आदि के नाम से भी जाना जाता है। इसके प्रतिपादक अमेरिका के पंडित विलियम जेम्स शिक्षाशास्त्री जॉन ड्युई तथा ग्रेट ब्रिटेन के डाक्टर एफ. सी. एस. शिलर हैं,

जबकि प्रयोजनवाद को आधुनिक रूप को जन्म अमेरिका के सुप्रसिद्ध विचारक चार्ल्स सैन्डर्स पियर्स ने दिया है। यह विचारधारा आत्मा और परमात्मा को नहीं मानती और सत्य को परिवर्तनशील मानते है।


आदर्शवाद क्या है what is idealism

आदर्शवाद एक दार्शनिक विचारधारा है जिसका प्रतिपादन प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात और उनके शिष्य प्लूटो ने किया था। इस विचारधारा के अनुसार सम्पूर्ण ब्रम्हांड भगवान ने बनाया है,

वे ही इस संसार के नियामक और नियंत्रणकर्ता है। यह विचारधारा ईश्वर को अंतिम सत्य और आत्मा को उनका अंश मानती है इसलिए वह शाश्वत मूल्यों और सत्य में विश्वास रखते है।


आदर्शवाद और प्रयोजनवाद में अंतर Difference between pragmatism and idealism

  1. प्रयोजनवादी विचारधारा के के विद्वान अनेक सत्ताओं और तत्वों के आधार पर विश्व की व्याख्या करते हैं, जबकि आदर्शवादी विचारधारा के विद्वान एक ही सत्ता को अंतिम मानते हैं और उसके आधार पर ही विश्व की व्याख्या करते हैं।
  2. प्रयोजनवादियों का कहना होता है, कि सत्य हमेशा परिवर्तनशील होता है, जबकि यथार्थवादियों का मानना है, कि शाश्वत मूल्यों तथा सत्यो पर विश्वास मुख्य होता है।
  3. प्रयोजनवादी किसी पूर्व निश्चित मूल्य को स्वीकार ना कर मनुष्य की क्रिया द्वारा मूल्यों की सृष्टि बताते हैं, जबकि आदर्शवादी सत्यम शिवम सुंदरम को शाश्वत मूल्य समझते हैं, जो संसार की व्यवस्था के पहले से ही उपस्थित हैं।
  4. प्रयोजनवादी व्यवहार में ईश्वर की आवश्यकता को अनुभव करते हैं, तभी ईश्वर के अस्तित्व को वह स्वीकार करते हैं, जबकि आदर्शवाद के अनुसार अंतिम सत्ता ईश्वर ही होती है, जो संपूर्ण जगत का नियंत्रक और पालन करता होता है।
  5. प्रयोजनवादी विचारधारा के लोग लौकिक और भौतिक जीवन को अधिक महत्व देते हैं, जबकि, आदर्शवादी विचारधारा के लोग पारलौकिक जीवन को अधिक महत्व देते हैं।
  6. प्रयोजनवादी विचारधारा के लोग विचार को कम महत्व देते हैं, जबकि क्रिया को अधिक महत्व देते हैं, किंतु आदर्शवादी विचारधारा के लोग विचार को ही अधिक महत्व देते हैं।
  7. प्रयोजनवादी बुद्धि के स्थान पर भावना और परिस्थितियों को मुख्य स्थान देते हैं, जबकि आदर्शवादी बुद्धि को अधिक महत्व देते हैं।
  8. प्रयोजनवादियों के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य सामाजिक तथा व्यवहारिक जीवन उचित रूप से बिताने के लिए तत्संबंधी गुणों को विकसित करना होता है, जबकि आदर्शवादियों के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य शाश्वत मूल्यों को प्राप्त करना होता है। इसीलिए प्रयोजनवादी पाठ्यक्रम में व्यवहारिक जीवन को अधिक महत्व देते हैं, जबकि आदर्शवादी पाठ्यक्रम में शाश्वत मूल्यों को।
  9. प्रयोजनवादी शैक्षिक परिस्थितियों के सृजन के लिए शिक्षक को आवश्यक बताते हैं, जबकि आदर्शवादी शिक्षक को ही सबसे महत्वपूर्ण स्थान लेते हैं।
  10. प्रयोजनवाद शिक्षण विधियों को सबसे अधिक महत्व देते हैं, इसीलिए प्रोजेक्ट विधि का निर्माण भी हुआ है, जिसमें अनुभव तथा निरीक्षण को अधिक महत्व दिया जाता है, जबकि आदर्शवादी विशेष शिक्षण पद्धतियों को नहीं अपनाते हैं, वह केवल व्याख्यान और प्रश्नोत्तर विधि को ही महत्व देते हैं।
  11. प्रयोजनवादी शिक्षा में गतिशीलता व परिवर्तनशीलता देखने को मिलती है, जबकि आदर्शवाद में शिक्षा स्थाई रहती है।
  12. प्रयोजनवादी बालक के मनोवैज्ञानिक तथ्यों तथा मूल प्रवृत्तियों शक्तियों आवश्यकताओं को शिक्षा का आधार स्वीकार करते हैं, जबकि आदर्शवादी मनोविज्ञान को अपूर्ण विषय के रूप में मानते हैं, क्योंकि मनोविज्ञान में आदर्शों का कोई स्थान नहीं होता।

दोस्तों आपने यहाँ पर प्रयोजनवाद तथा आदर्शवाद में अंतर (Difference between pragmatism and idealism) पढ़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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