सामाजिक मूल्य क्या है प्रकार what is social value its type

सामाजिक मूल्य क्या है प्रकार what is social value its type 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख सामाजिक मूल्य क्या है प्रकार (what is social value its type) में।

दोस्तों यहाँ पर आप सामाजिक मूल्य क्या है सामाजिक मूल्य की परिभाषा, सामाजिक मूल्य के प्रकार जानेंगे। तो आइये शुरू करते है यह लेख सामाजिक मूल्य क्या है प्रकार:-

विकलांगता के मॉडल

सामाजिक मूल्य क्या है प्रकार

सामाजिक मूल्य क्या है what is social value 

समाज के वह मूल्य जो समाज के विकास उसकी प्रगति समाज में शांति, प्रेम सद्भावना आदि के लिए आवश्यक होते है सामाजिक मूल्य कहलाते है।

साधारण शब्दों में कह सकते है, कि सामाजिक मूल्य एक तरह से वह मापदंड है जो किसी समाज की उन्नति और अवनति के लिए जिम्मेदार होते है।

सामाजिक मूल्य के द्वारा ही समाज की प्रगति का निर्धारण होता है, इन्ही मूल्यो के आधार पर ही समाज में अच्छी और बुरी चीज को समझा जाता है, कियोकि सामाजिक मूल्यो से ही समाज का हर पक्ष प्रभावित होता है। 

सामाजिक मूल्यो की परिभाषा Definition of Social value 

  1. एच0 एम0 जॉनसन (H. M. Johnson) के शब्दों में:-मूल्य को एक धारणा या मानक के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह सांस्कृतिक हो सकता है या केवल व्यक्तिगत और इसके द्वारा चीजों की एक-दूसरे के साथ तुलना की जाती है, इसे स्वीकृति या अस्वीकृति प्राप्त होती है, एक-दूसरे की तुलना में उचित-अनुचित, अच्छा या बुरा, ठीक अथवा गलत माना जाता है।” 
  2. रॉबर्ट बीरस्टीड (Robert Bierstedt) के शब्दों में-”जब किसी समाज के स्त्री-पुरुष अपने ही तरह के लोगों के साथ मिलते हैं, काम करते हैं या बात करते हैं, तब मूल्य ही उनके क्रमबद्ध सामाजिक संसर्ग को सम्भव बनाते हैं।”

सामाजिक मूल्य के प्रकार Type of Social value 

अचौर्य 

यह एक प्रमुख सामाजिक मूल्य है, जिसका अर्थ होता है चोरी ना करना। चोरी एक बहुत बड़ा पाप है जो समाज में बहुत फैला हुआ है। किसी की आज्ञा लिए बिना उसकी वस्तु को उठाना अपने पास रखना और अपनी बताना चोरी कहलाता है।

गलत तरीके से दूसरे लोगों का धन हड़पना लेना चोरी कहलाता है। रास्ते में गिरी हुई वस्तु को उठाना और उठाकर दूसरों को दे देना भी चोरी की श्रेणी में आता है। दूसरों की धरोहर अपने पास रखना और फिर देने से मुकर जाना भी चोरी होती है।

अगर व्यक्ति खुद चोरी नहीं करता है और दूसरों से चोरी करवाता है, तो वह भी चोर बन जाता है। चोर व्यक्ति हमेशा संशय में रहता है और वह धर्म, पुण्य कर्म आदि के बारे में नहीं जानता है। मिलावट करना, रिश्वतखोरी यह सब चोरी की श्रेणी में ही आते हैं।

इसके अलावा अपने अधिकारों का गलत उपयोग करना, परीक्षा में नकल करना, किसी को धोखा देना, कर्तव्य पालन ठीक प्रकार से ना करना, चोरी के अंतर्गत आने वाले हैं। इसीलिए चोरी समाज का वह मूल्य है,

जो समाज में शांति के लिए आवश्यक होती है। इसलिए स्वस्थ समाज के लिए चोरी जैसे अपराध को दूर करना ही उत्तम होता है।

अघृणा

यह बात सत्य है कि पाप से घृणा करो पापी से मत करो कियोकि पाप बुरा होता है बल्कि पापी बुरा नहीं होता। यदि हम पाप दूर करने के लिए प्रेरित हो जाएँ तो पापी स्वयं ही पापमुक्त हो जाएगा।

अगर एक मनुष्य सड़क के किनारे दुर्घटना में मौत के समीप अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और आप यदि उसे अछूत समझकर एक गरीब समझकर सड़क पर मरता छोड़कर आगे बढ़ जाएंगे

तो आप अक्षम्य पापी प्राणी हैं। मानवता के प्रति कर्तव्यविमूड़ता का सबसे बड़ा पाप माना जाता है। सभी प्राणी चाहे वह किसी जाति, धर्म किसी कुल के क्यों ना हो समान होते हैं।

उनका जीवन में समानता का अधिकार है। यही हमारे भारतीय संविधान में भी कहा गया है, सभी के लिए समान नियम और कानून भी बनाए गए हैं। जैन धर्म में भगवान महावीर के जीवन से संबंधित भी एक घटना है।

एक बार भगवान महावीर बिहार करते हुए पोलासपुर पहुंचे। वहाँ पर एक कुम्हार की प्रार्थना पर महावीर स्वामी ने उनके निज निवास पर मिट्टी के घडो के दृष्टांत बताकर धर्म उपदेश दिया

भविष्य में वही कुमार भगवान महावीर के श्रावको में मुख्य श्रावक सम्मानित हुआ और श्रावक संघ में बहुत आदर से उसको देखा गया। महावीर स्वामी का उसके यहाँ आकर खाना दलित वर्ग के प्रति अगाध प्रेम प्रतिष्ठा का परिचय होता है।

समय पालन

सभी कार्य नित्य समय पर करना बहुत ही उत्तम माना जाता है। ऐसा करने वाले व्यक्ति समाज में सम्मान के योग्य होते हैं। नित्य समय पर उठना और हर कार्य नियत समय पर करना मन को शांत

और चित को प्रसन्न रखता है। यदि हम समय बर्बाद करेंगे तो समय हमें भी बर्बाद कर देगा ऐसा कहा भी जाता है, कि समय किसी का इंतजार नहीं करता है और वास्तव में यह सत्य है, इसीलिए समय का सदुपयोग करना बहुत ही अच्छा होता है।

समय का महत्व पहचान कर उसका सदुपयोग करने वाला ही व्यक्ति महान पुरुष बनता है। दुनिया में सभी व्यक्तियों के पास निश्चित 24 घंटे होते हैं, परंतु जो व्यक्ति उनका ठीक प्रकार से उपयोग करता है।

वह महान आदरणीय और समाज में सम्मान का पात्र होता है, जबकि बेकारी का जीवन जीने वाले लोग समाज में तुच्छ निगाहों से देखे जाते हैं और वह समाज के किसी भी काम में नहीं आते हैं।

इसीलिए सभी को समय पर कार्य करना चाहिए जब छोटे बड़े काम इकट्ठे हो जाते हैं, तो वे एक बड़ा काम बन जाते हैं। अतः छोटे कामों को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए और उन्हें तुरंत निपटा देना चाहिए।

विनम्रता

विनम्रता सामाजिक मूल्यों में एक सबसे विशिष्ट मूल्य माना जाता है, क्योंकि कहा जाता है, कि विनम्रता के अंदर ही अनेक गुणों का वास होता है। अपनी बातों को सीधे रूप में एवं स्पष्ट करें पर उसमें अकड़ता ना हो

उसे विनम्रता कहते हैं और जो व्यक्ति इस गुण को प्रदर्शित करता है उसे विनम्र व्यक्ति कहा जाता है। जैसे फलों से लदा हुआ वृक्ष विनम्रता का सूचक होता है, जिस प्रकार से वृक्ष में फल आ जाने से वह झुक जाता है

उसी प्रकार सज्जन व्यक्तियों में जब सद्गुण आ जाते हैं तो वह विनम्र व्यक्ति बन जाता है। संस्कृत में भी विनम्र व्यक्तियों के बारे में कई प्रकार से बताया गया है, कि व्यक्ति जब नम्रता आ जाती है

तब वह विनम्र बन जाता है और उसके व्यक्तित्व का समुचित विकास होता है, इसीलिए कहा भी गया है, विद्या ददाति विनयं विनयाद्याति पात्रताम्।।

बड़ों का आदर करना

बड़ों का आदर करना भी एक विशिष्ट सामाजिक मूल्य होता है। समाज में हमसे बड़े कई लोग होते हैं जैसे माता-पिता बड़े भाई-बहन गुरु बूढ़े बुजुर्ग हमें इन सबका हमेशा आदर करना चाहिए,

इन सबका कहना मानना चाहिए। उनका सत्कार करना चाहिए, अगर हम ऐसा करेंगे तो कहा गया है, कि टिट फोर टेट (Tit for tat) अर्थात जैसे को तैसा अर्थात हम अगर दूसरों को सम्मान देंगे

तो हमें भी आदर सम्मान प्राप्त होगा हमें बड़ों का प्यार स्नेह भी प्राप्त होगा। उपर्युक्त बिंदु के आधार पर आम नागरिक अपने जीवन में इन सभी सामाजिक मूल्यों को अपनाते हैं, तो वे समाज राष्ट्र में विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जूझने से बच जाते हैं

हमें ना केवल आयु में बड़े लोगों को सदा नमस्कार  सत्कार और सम्मान प्रदान करना चाहिए, बल्कि अपने से बड़ों के चरण स्पर्श भी करना चाहिए इससे उन महापुरुषों के शरीर में प्रभाहित ऊर्जा चक्र उनके चरणों से छूता हुआ हमारे मस्तिष्क तक पहुँचता है और हम उन्नति करते हैं।

दोस्तों आपने यहाँ पर सामाजिक मूल्य क्या है प्रकार (what is social value its type) के साथ अन्य तथ्यों को पड़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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