सस्वर पठन क्या है गुण दोष what is recitation

सस्वर पठन क्या है गुण दोष what is recitation 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख सस्वर पठन क्या है गुण और दोष (what is recitation merit demerit) में

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आज आप सस्वर वाचन का अर्थ के साथ ही सस्वर वाचन के गुण और दोष के बारे में जानेंगे, तो आइए दोस्तों बढ़ते हैं, इस लेख में और जानते हैं, सस्वर पठन क्या है गुण और दोष:-

सस्वर पठन क्या है

सस्वर पठन क्या है what is recitation 

सस्वर वाचन का अर्थ है जोर से या फिर स्वर के साथ  पठन करना अर्थात शुद्ध उच्चारण के साथ किसी विषयवस्तु का श्रोताओं के सामने तर्कपूर्ण और प्रभावशाली ढंग से पड़ना

या वाचना सस्वर पठन कहलाता है। सस्वर पठन प्रयोग आप लोगों ने प्रमुख रूप से विभिन्न प्रकार के अनेक औपचारिक अवसरों पर देखा होगा

कियोकि व्याख्यान देते समय वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में गोष्ठियों में अपनी बात को प्रभावशाली ढंग से कहने के लिए इस प्रकार के वाचन का उपयोग अधिक होता है। शुद्ध प्रभावपूर्ण वाचन से श्रोताओं पर विशेष प्रभाव डालने का यही एक रास्ता होता है।

यही नहीं इससे वक्ता का व्यक्तित्व निखरता है। किसी भी अवसर पर बातचीत करते समय जिसका वाचन अच्छा होता है, वह अन्य की उपेक्षा दूसरों को शीघ्र प्रभावित करने में सक्षम होता है।

यदि कहीं किसी छात्र को कहीं पर किसी सम्मलेन या वाद-विवाद के बीच में बोलना हो और वह अशुद्ध और प्रभावपूर्ण तरीके से नहीं बोल पाता है तो वह वहाँ उपहास का कारण बन जाता है

और उसकी हंसाई भी होती है। इस स्थिति को देखकर वह लड़का अपने वाचन को मन ही मन अवश्य कोसेगा। किसी भी प्रकार का सेमिनार हो किसी भी प्रकार का सम्मेलन हो कोई सामाजिक

या पारिवारिक उत्सव ही क्यों ना हो चाहे कोई अखंड रामायण का आयोजन किया जा रहा हो ऐसा व्यक्ति जिसका वाचन अच्छा ना हो वहाँ जाने का साहस ही नहीं कर पाता है। सस्वर पठन से बचपन से ही

व्यक्ति में आत्मविश्वास की भावना प्रबल हो जाती है, तथा भाषा प्रयोग की क्षमता उसमें विकसित होने लगती है, उसका संकोच भी समाप्त हो जाता है, और नेतृत्व के गुणों का विकास होने लगता है।

सस्वर वाचन के प्रकार Types of recitation

सस्वर वाचन दो प्रकार के है:- 

  1. आदर्श वाचन :- आदर्श वाचन वह वाचन होता है, जो शिक्षक के द्वारा किया जाता है।
  2. अनुकरण वाचन :- अनुकरण वाचन वह वाचन होता है, जो विद्यार्थियों के द्वारा किया जाता है।

कर्ता के अनुसार भी सस्वर वाचन निम्न दो प्रकार का होता है:- 

  1. व्यक्तित्व वाचन :- आप लोगों ने अक्सर देखा होगा, कि माध्यमिक स्तर पर व्यक्तित्व वाचन का उपयोग अधिक होता है, क्योंकि छात्रों की कमियों को व्यक्तिगत रूप में इसके द्वारा आसानी से दूर किया जा सकता है।
  2. सामूहिक वाचन:- सामूहिक वाचन वह वाचन होता है, जो समूह में रहकर किया जाता है। यह सत्य है, कि छोटी कक्षाओं में पढ़ने वाले बालक बोलने में घबराते हैं, इसीलिए उनके लिए सामूहिक वाचन उपयोग में लाया जाता है। धीरे-धीरे  अभ्यास हो जाने पर उनका संकोच भी दूर होने लगता है और वे अकेले पढ़ने में भी कठिनाई का सामना नहीं करते हैं। वाचन केवल 13 से 14 वर्ष तक के बालकों को ही कराया जाना चाहिए, किंतु विद्यालय के अनुशासन और पास पड़ोस की कक्षा में शांति भंग ना हो इस बात पर भी अवश्य ध्यान देना चाहिए। 

सस्वर वाचन के उद्देश्य Purpose of recitation

वाचन किसी भी प्रकार का हो यदि बचपन से ही छात्र और छात्रा के माता पिता और शिक्षक ठीक प्रकार से उन पर ध्यान देते हैं, तो उनका वाचन त्रुटिरहित और प्रभावी बन जाता है। अच्छे वाचन के लिए निम्नलिखित प्रकार की बातें होना बहुत ही आवश्यक होती है:- 

बालक को वाचन के समय बार बार बीच में रुकना नहीं चाहिए, इससे पाचन में प्रवाह नहीं रहता और बच्चे में आत्मविश्वास भी नहीं उत्पन्न हो पाता।

सस्वर वाचन में बड़ी कुशलता की आवश्यकता मानी जाती है, इसलिए उच्चारण में भावा अनुकूल उतार-चढ़ाव एवं शुद्धता अपेक्षित होती है।

सस्वर वाचन के कुछ विशेष उद्देश्य निम्न प्रकार से है:- 

शुद्ध एवं स्पष्ट उच्चारण के साथ पढ़ना छात्र और छात्राओं के लिए बहुत ही आवश्यक होता है, इसलिए अध्यापकों को बच्चों के शुद्ध उच्चारण पर ध्यान देना चाहिए।

विराम चिन्हों पर विशेष ध्यान देना चाहिए और उनका ठीक प्रकार से उपयोग, उच्चारण करते समय भी उनका उपयोग किया जाना चाहिए।

भावा अनुकूल उतार-चढ़ाव के साथ ही पठन कराया जाना चाहिए, इससे पठन प्रभावी बनता है।

श्रोताओं की संख्या के अनुसार अपने स्वर को तीव्र और मन रूप से पढ़ना चाहिए जिससे श्रोता आपके पठन के प्रति आकर्षित होते हैं।

उच्चारण पर स्थानीय प्रभाव और ग्रामीण प्रभाव नहीं पड़ने देना चाहिए।

सस्वर पठन के गुण Qualities of recitation

  1. शुद्ध उच्चारण और भाषा का ज्ञान, उच्चारण का शुद्ध अभ्यास होना चाहिए।
  2. सही शब्दों पर बालाघात किस शब्द पर कितना बल दिया जाना है, इस बात का ज्ञान आवश्यक होता है।
  3. शब्दों की अस्पष्टता बहुत से लोग शब्दों को चबा-चबा कर बोलते हैं, अथवा उनके के मुख में शब्द गिरते निकलते पड़ते हैं, जो इस प्रकार का वाचन करते हैं, उनका प्रारंभ से ही वाचन नियंत्रित किया जाना चाहिए।
  4. उचित विराम चिन्ह का प्रयोग होना चाहिए, भाषा में प्रवाह ठीक प्रकार से होनी चाहिए।
  5. बहुत शीघ्रता से ना बोलना चाहिए धीरे-धीरे रुक रुक कर बोलना चाहिए।
  6. स्वर में रचनात्मकता होनी चाहिए सतर्कता से परे शब्दों को श्रोता बिल्कुल पसंद नहीं करते।
  7. वाचन करते समय आनंद की अनुभूति होनी चाहिए, जब वक्ता रुचि नहीं लेगा तो श्रोता कैसे रूचि लेगा।
  8. वाचन में मुद्रा का अपना विशेष महत्व होता है, अनावश्यक अंग संचालन से बचना चाहिए, आंखें झपकना, उंगलियाँ चलाना, चबाना, जमीन को देखना पाठक पुस्तक को ठीक प्रकार से पकड़ना, पढ़ना आदि का भी अच्छा प्रभाव वाचन पर पड़ता है। 

सस्वर पठन के दोष Defect in Recitation 

  1. मनोवैज्ञानिक कारण :- कुछ बच्चे डर के कारण धीरे-धीरे से पढ़ते हैं जबकि कुछ बच्चे जोर-जोर से और जल्दी-जल्दी पढ़ते हैं और कुछ बच्चे चिल्ला चिल्ला कर पढ़ते हैं इनके इस पठान में शिक्षक को सुधार करना चाहिए वरना यह मनोवैज्ञानिक कारण बन सकता है।
  2. वाणी संबधित कारण :- कुछ बालकों में नाक कान मुंह जीभी के कारण वाणी संभावित दोष हो जाते हैं, वे जो भी विषयवस्तु पढ़ते हैं, उसका ठीक प्रकार से उच्चारण भी नहीं कर पाते हैं। इसलिए माता-पिता को शिक्षा के साथ मिलकर इस कारण का समाधान खोजना चाहिए।
  3. ज्ञान संबंधी कारण :- अगर बालकों को वर्णमाला का ठीक प्रकार से ज्ञान नहीं है, अक्षरों का ठीक प्रकार ज्ञान नहीं है, विराम चिन्हों की ठीक से जानकारी नहीं है, तो उच्चारण ठीक से नहीं कर पाते हैं, और उनका पठन बेकार हो जाता है।
  4. अभ्यास संबंधी कारण :- जब कभी बच्चे अक्षरों को ठीक प्रकार से नहीं पहचानते हैं, तो उनका उच्चारण गलत करने लगते हैं, जैसे कुछ बच्चे अ को अं समझ कर उच्चारण कर देते हैं तो अभ्यास से संबंधित कारण भी सस्वर वाचन का दोष बन जाता है।

दोस्तों आपने यहाँ सस्वर पठन क्या है गुण दोष (what is recitation) के साथ अन्य तथ्य पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

इसे भी पढ़े:-

  1. पाठयक्रम का अर्थ और परिभाषा Meaning and Definition of Curriculum
  2. कोर पाठ्यक्रम क्या है परिभाषा What is core curriculum definition




Post a Comment

और नया पुराने
Blogger sticky
close