मधुमक्खी पालन के लाभ Benefits of beekeeping

मधुमक्खी पालन के लाभ Benefits of beekeeping

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है इस लेख मधुमक्खी पालन के लाभ (Benefits of beekeeping) में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप मधुमक्खी पालन के लाभ ,मधुमक्खी के उत्पाद के बारे में जनेगे। तो आइये करते है शुरू यह लेख मधुमक्खी पालन के लाभ :-

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मधुमक्खी पालन के लाभ

मधुमक्खी पालन के लाभ Benefits of beekeeping 

मधुमक्खी पालन से मधुमक्खियों के ऊपर बाद प्राप्त होते हैं जिनसे कई प्रकार का लाभ और मुनाफा कमाया जा सकता है मधुमक्खी से दो प्रकार के उत्पाद प्राप्त होते हैं

शहद या मधु Honey

शहद स्वाद में मीठा गाड़ा चिपचिपा तरल पदार्थ होता है, जो देखने में रंगहीन या फिर गहरे बादामी रंग का दिखाई देता है। इसकी सुगंध विभिन्न फूलों से

एकत्रित किए गए मकरंद के अनुसार अलग-अलग होती है। शहद में कई पोषक तत्व पाए जाते है इसलिए इसका रासायनिक संगठन निम्न प्रकार से हैं:-

संघटक                प्रतिशत
जल                    17%
फ्रुक्टोज               38%
ग्लूकोज               32%
सुक्रोज                1.3 %
अन्य शर्कराऐं        9%
सभी अम्ल            0.57%
ऐश                     0.17%
नाइट्रोजन             0.64%
एंजाइम विटामिन लवण  2.92%

शहद में कई सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे कि कैल्शियम, सोडियम, पोटैशियम, मैग्निशियम, सल्फेट, फास्फोरस, लोहा, आयोडीन, कॉपर, सिलीकान उपस्थित होते हैं, जबकि विटामिनों में विटामिन बी समूह तथा विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

मधुमक्खी पालन के लाभ

शहद का निर्माण Formation of Honey 

मधुमक्खी के छत्ते में जो श्रमिक मधुमक्खियाँ होती है, वह फूलों की मकरंद ग्रंथियों से स्रावित होने वाले मकरंद को चूसती है और उनसे शहद का निर्माण करती है।

श्रमिक मधुमक्खियाँ अपने काटने और चूसने वाले मुखागों से फूलों का मकरंद में चूस लेती हैं और उसे अन्नपुट में एकत्रित कर लेती हैं।

अब अन्नपुट में लार ग्रंथियों से लार भी आ जाता है, जो मकरंद में मिल जाता है। लार में कुछ एंजाइम भी उपस्थित होते हैं, जो मकरंद के साथ रासायनिक क्रिया करने लगते हैं और शहद में मकरंद

को परिवर्तित कर देते हैं। अगर रासायनिक दृष्टि से देखा जाए तो मकरंद में सुक्रोज नामक शर्करा होती है और यह शर्करा इनवर्टेज एंजाइम की उपस्थिति के द्वारा जो लार में पाया जाता है,

डेक्सट्रोज या ग्लूकोज में या फिर फ्रक्टोज में परिवर्तित कर दी जाती है। इसके अलावा इसमें से जल की मात्रा भी कम हो जाती है। अब यह श्रमिक मधुमक्खियाँ अपने छत्ते में जाती हैं और उस शहद को छत्ते में उगल देती है।

अब यह श्रमिक मधुमक्खियाँ शहद को पंखों से हवा करती है, जिससे शहद से जल वाष्प वन उड़ जाता है और शहद गाड़ा हो जाता है। अब इस शहद वाले कक्ष को मोम के ढक्कन से बंद कर दिया जाता है। 

शहद का उपयोग Use of Honey 

शहद एक पौष्टिक पदार्थ होता है, जिसमें ग्लूकोस फ्रुक्टोज जैसे कार्बोहाइड्रेट मनुष्य और अन्य प्राणियों के लिए ऊर्जा के सबसे अच्छे स्रोत माने जाते हैं।

मनुष्य के रक्त में पाए जाने वाले अधिकतर खनिज तत्व भी शहद में उपस्थित होते हैं, इसके साथ ही इसमें विटामिन बी और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, इसीलिए बच्चों और बुजुर्गों के लिए

यह एक प्राकृतिक पौष्टिक टॉनिक की तरह कार्य करने वाला पोषक तत्व होता है। आहार अथॉरिटी के रूप में शहद का कई तरह से उपयोग किया जाता है।

शहद को 15 डिग्री सेंटीग्रेड से कम ताप पर इकट्ठा करके रखना चाहिए, अन्यथा हाइड्रोक्साइड परफ्यूरल के निर्मित होने की संभावना रहती है, और फिर जीवन के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।

शहद का ऑषधीय रूप में उपयोग दो प्रकार से किया जाता है। एक तो इसका उपयोग औषधि निर्माण में एक संगठन के रूप में होता है, फिर इसे एक विशुद्ध औषध के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।

शहद में विभिन्न प्रकार के गुण जैसे कि मृदुकारी, मृदुरेचक, शामक, ज्वरहारी भी होते हैं, जबकि यह बैक्टीरिया को रोकने में भी उत्तरदाई होता है।

अमेरिका के वैज्ञानिकों ने प्रयोग करके यह भी निष्कर्ष निकाला, कि टाइफाइड, निमोनिया, पेचिश जैसी अन्य जीवाणु से होने वाली बीमारी में शहद बहुत ही अच्छा प्रतिजैविक के रूप में कार्य करता है।

इसका उपयोग दवाई बनाने में भी किया जाता है, शरीर में चोट लगने पर, जल जाने पर शहद का उपयोग कीटाणुरोधक और प्रतिजैविक के रूप में मरहम के रूप में होता है, लेकिन मिठाई उद्योग में भी

इसका उपयोग भरपूर मात्रा में किया जाता है, जबकि त्वचा को सुंदर बनाने के लिए भी इसका उपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।

मधुमक्खी मोम Bee wax

मधुमक्खियों के उदर के अधर तल के पास विशेष प्रकार की ग्रंथियाँ होती हैं, जिन्हें मोम ग्रंथियाँ कहा जाता है और इन मोम ग्रंथियों से ही मोम स्रावित होता है, जो हल्के पीले रंग का दिखाई देता है।

इसका विशिष्ट घनत्व लगभग 0.955 होता है, जबकि इसका गलनांक 62 से 65 डिग्री सेंटीग्रेड, अम्लीय मान 15-19 और ईस्टर मान 70 से 80 होता है।

मधुमक्खी मोम का उपयोग Use of Bee wax 

संपूर्ण विश्व में जितना भी मधुमक्खी मोम उत्पादित होती है, उसका लगभग 70% से अधिक भाग का प्रयोग कॉस्मेटिक प्रोडक्ट बनाने में किया जाता है।

इसके अलावा इसका उपयोग औषधीय उद्योग में भी होता है, मलहम बनाने में, कैप्सूल के खोल आवरण बनाने में, घरेलू मोमबत्ती, विभिन्न प्रकार की जूतों और स्नेहक, जलरोधी कार्बन, बिजली का सामान आदि बनाने में भी मधुमक्खी मॉम का उपयोग बहुत ही बड़ी मात्रा में किया जाता है। 

मधुमक्खी विष Bee venom

श्रमिक मधुमक्खी और रानी मधुमक्खी के डंक ग्रंथि या विषग्रंथि में विष का निर्माण होता है और यह विष डंक की सहायता से दुश्मन के शरीर में पहुंचा दिया जाता है

और इस प्रकार से वह स्वयं की रक्षा करती हैं। मधुमक्खी विष से मधुमक्खियों में उत्तेजना फैल आती है और वे अत्यंत उग्र हो जाती हैं।

मधुमक्खी विष का उपयोग Use of Bee venom 

मधुमक्खी के विष को विभिन्न प्रकार की औषधियों के निर्माण में उपयोग में लाया जाता है। होम्योपैथी दवा, एलोपैथिक दवा और प्राकृतिक उपचार की विभिन्न पद्धतियों में इसका उपयोग होता है।

संधिवात एवं संधिशोध के कारण होने वाले दर्द के लिए, यह विष एक उत्तम औषधि का कार्य करती है। इसी तरह न्यूराइटिस न्यूराल्ज़िया शियाटिक रोग में भी मधुमक्खी विष का उपयोग अधिक लाभकारक होता है।

दोस्तों इस लेख में आपने मधुमक्खी पालन के लाभ (Benefits of beekeeping) पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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