विटामिन डी क्या है कमी रोग कैप्सूल what is vitamin-D

विटामिन डी क्या है कमी रोग कैप्सूल

विटामिन डी क्या है कमी रोग कैप्सूल what is vitamin-D

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख विटामिन डी क्या है कमी रोग कैप्सूल (what is vitamin-D) में। दोस्तों इस लेख में आप विटामिन डी क्या है, के साथ विटामिन डी का रासायनिक नाम,

विटामिन डी के आहार, विटामिन डी के कार्य, विटामिन डी की कमी के रोग तथा अन्य तथ्य जानेंगे। तो आइये दोस्तों करते है शुरू यह लेख विटामिन डी क्या है कमी रोग कैप्सूल:-

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विटामिन डी क्या है what is vitamin-D

विटामिन डी विटामिन ए की तरह वसा में घुलनशील (Fat Soluble) विटामिन तथा एक कार्बनिक यौगिक (Organic Compound) होता है, जिसे सनशाइन विटामिन के नाम से भी जाना जाता है।

विटामिन डी की खोज 1992 में मैककालम (McCallum) नामक वैज्ञानिक ने की थी। विटामिन डी दो रूपों में देखने को मिलता है

पहला विटामिन D2 जिसे अर्गोकेलसीफेरोल (Ergocalciferol) कहा जाता है, यह विटामिन विभिन्न प्रकार के प्लांट से उत्पादित भोज पदार्थों में पाया जाता है,

तथा उन्हीं के रूप में शरीर द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है। दूसरा विटामिन D3 जिसे कोलेकेलसीफेरोल (Cholecalciferol) के नाम से जाना जाता है, यह धूप से प्राप्त होने वाला विटामिन है।

विटामिन डी शरीर में कैल्शियम और फास्फोरस की उपापचय, हड्डियों की सामान्य वृद्धि, मिनरलीकरण (Minralification) के लिए बहुत आवश्यक होता है, इसका निर्माण जब व्यक्ति की त्वचा सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आती है उस समय होता है।

विटामिन डी का रासायनिक नाम Chemical Name of Vitamin-D 

विटामिन डी स्वास्थ्य और मजबूत शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक विटामिन होता है, क्योंकि यह शरीर की हड्डियों  और दांतो का निर्माण और मजबूती प्रदान करता है। विटामिन डी का रासायनिक नाम कैल्सीफेरोल (calciferol) होता है,

जबकि यह रिकेट्स नामक रोग से बच्चों की रक्षा करता है इसीलिए इस विटामिन को एंटीरिकेटिक विटामिन (Anti- Rickets Vitamin) के नाम से

भी जाना जाता है। विटामिन डी का रासायनिक फार्मूला (Chemical Formula) C28H44O, जबकि गलनांक 85 डिग्री सेंटीग्रेड तथा क्वथनांक लगभग 496 डिग्री सेंटीग्रेड के आसपास होता है। 

विटामिन डी के आहार Vitamin-D Rich Foods 

विटामिन डी शरीर की वृद्धि विकास के लिए महत्वपूर्ण विटामिन होता है, जिसका सबसे प्रमुख स्रोत सूर्य का प्रकाश है। जब व्यक्ति की त्वचा सूर्य प्रकाश के संपर्क में आती है तो सूर्य के प्रकाश में उपस्थित पराबैगनी किरणों (Ultraviolet Ray) के फलस्वरुप त्वचा में उपस्थित

आर्गेस्टीरोल की मदद से विटामिन डी का संश्लेषण (Synthesis) होता है। इसके अलावा भी विटामिन डी विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों में भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जैसे कि मछली के यकृत का तेल

कुछ विशेष प्रकार की मछलियाँ जैसे कॉड, हैंलिक्ट या शार्क मछलियों के यकृत से निकला हुआ तेल, विटामिन डी का प्रचुर स्रोत होता है। इसके अलावा मक्खन, अंडा का पीला भाग दूध में भी विटामिन डी पाया जाता है।

विटामिन डी की दैनिक आवश्यकता Daily Requirement of Vitamin-D

विटामिन डी शरीर को विभिन्न प्रकार के रोगों से लड़ने के लिए सुरक्षा प्रदान करने के साथ मजबूत शरीर देता है, इसलिए विटामिन डी लोगों को प्रतिदिन लेना चाहिए।

अगर बात करें एक सामान्य व्यक्ति की तो उसके लिए विटामिन डी की दैनिक आवश्यकता 100I.U से 300I.U जबकि छोटे बच्चों को

लगभग 200I.U और गर्भवती तथा स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए विटामिन डी की दैनिक आवश्यकता 400 से 800I.U तक जरूरी होती है।

विटामिन डी के कार्य Function Of Vitamin-D

  1. विटामिन डी आँत से कैलशियम के अवशोषण (absorption)  के साथ ही फास्फोरस के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  2. दातों की वृद्धि मजबूती (Strongness) के साथ ही हड्डियों की सामान्य वृद्धि तथा विकास (Growth andDevelopment) के लिए विटामिन डी उत्तरदाई होता है।
  3. विटामिन डी के द्वारा ही रक्त में कैल्शियम और फास्फोरस के परिवहन Transportation को नियंत्रित किया जाता है।
  4. यह आँत के विभिन्न भागों के पीएच (Power of Hydrogen Ions) को कम करने का कार्य करता है जबकि यूरिनरी पीएच को बढ़ा देता है।
  5. विटामिन डी पेशीय गति,  पेशीय मजबूती तथा अन्य पेशीय कार्य के लिए उत्तरदाई माना जाता है।
  6. यह रक्त में कैल्शियम की मात्रा को नियंत्रित करता है, क्योंकि विटामिन D का कार्य कैल्शियम का अवशोषण करना होता है।

विटामिन डी की अधिकता के रोग Vitamin-D Exsess Defficiency 

अगर रक्त में विटामिन D की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है, तो शरीर में विभिन्न प्रकार की अनियमितताएँ देखने को मिलती हैं, जिन्हें हम निम्न प्रकार से समझते हैं:-

  1. जब शरीर में विटामिन D सामान्य से अधिक मात्रा में हो जाता है, तो व्यक्ति के भार में धीरे-धीरे कमी होने लगती है व्यक्ति का शरीर कमजोर (Body weak)  हो जाता है और उसे सुस्ती सी महसूस रहती है।
  2. कैल्शियम और फास्फोरस का उत्सर्जन (Excreation)  कम होने लगता है, जिस कारण हड्डियाँ कमजोर और छिद्रित हो जाती हैं तथा हड्डियों में बार-बार Frecture जैसी समस्याएँ उत्पन्न होने लगती है।
  3. विटामिन डी की मात्रा अधिक होने पर व्यक्ति को उल्टी होना, चक्कर होना, आलस महसूस करना तथा अनिद्रा की शिकायतें होने लगती है।
  4. शरीर के विभिन्न जो अंग (Organ) होते हैं उनमें विटामिन डी की कमी के कारण कैल्शियम जमा होने लगता है।
  5. विटामिन डी की अधिकता के कारण किडनी में कैल्शियम की मात्रा अधिक होने लगती है, जिस कारण रिनल फैलियर (Renal failure) जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

विटामिन डी की कमी से रोग Vitamin-D Deficiency 

अगर शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है, तो विभिन्न प्रकार के विकार उत्पन्न हो जाते हैं जो निम्न प्रकार से है:-

रिकेटस - रिकेट्स विटामिन डी की कमी से होने वाला एक सबसे प्रमुख रोग है, जो सबसे अधिक 6 से 18 माह आयु वर्ग के बच्चों में देखने को मिलता है।

यह रोग उन बच्चों को होता है, जो ऐसे स्थान पर रहते हैं, जहाँ पर उन्हें विटामिन डी प्राप्त नहीं हो पाता अर्थात उन तक सूर्य का प्रकाश, धूप पहुँच नहीं पाती है।

भीड़-भाड़ वाले इलाकों में, बर्फीले इलाकों में रहने वाले लोगों में अधिक विटामिन डी की कमी से होने वाला रोग रिकटस देखने को मिलता हैं।

रिकेटस में बच्चों की हड्डियाँ (Bones) विकृत हो जाती है, खोपड़ी की हड्डियाँ, (Skull Bones) कोमल होने लगती है और कपाल आगे की ओर निकल जाता है।

उनका सिर बक्से की तरह दिखाई देने लगता है, छाती की हड्डियाँ आगे की ओर झुक जाती है और सीना कबूतर के जैसा होने लगता है, रीड की हड्डी झुकने लगती है और छाती बाहर निकल जाती है,

इसके साथ ही कलाई घुटने और एड़ी की हड्डी चौड़ी हो जाती है, मांसपेशियों का विकास ठीक से नहीं होता और दांत भी जल्दी गिर जाते हैं,

हड्डिया कोमल हो जाती है, जिसके कारण टूटने लगती है बच्चे का पेट बड़ा हो जाता है और बच्चा देर से चलना सीख पाता है। 

ओस्टियोमलेशिया - यह रोग प्रमुख रूप से उन महिलाओं को होता है, जो गर्भवती है, इसके अलावा स्तनपान कराने वाली महिलाओं में भी ओस्टियोमलेशिया (Osteomalacia) नामक रोग देखने को मिलता है।

यह रोग उन महिलाओं में अधिक देखने को मिलता है, जो प्रमुख रूप से घरों में अर्थात पर्दों में ही रहती हैं, उन्हें बाहर निकलने की इजाजत नहीं होती या फिर वह उन क्षेत्रों में रहती है,

जहाँ पर उन्हें सूर्य का प्रकाश ही नहीं मिल पाता है, जैसे कि भीड़भाड़ वाले इलाके, बर्फीले, जंगल के इलाके आदि। ओस्टियोमलेशिया में हड्डियाँ कोमल हो जाती हैं, शरीर झुक जाता है,

क्योंकि रीड की हड्डी कोमल हो जाती है। गर्भवती महिलाओं को यह रोग हो जाता है, तो गर्भ का ठीक से विकास नहीं हो पाता है,

हाथों, कलाइयों की हड्डियाँ चौड़ी हो जाती है, हड्डियाँ कमजोर होने लगती हैं और कई बार फ्रैक्चर जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

डेंटल कैरीज - डेंटल कैरीज नामक रोग भी विटामिन डी की कमी से होने वाला रोग है, जो अधिकतर उन क्षेत्रों में देखने को मिलता है,

जहाँ पर सूर्य का प्रकाश नहीं पहुँचता। इस रोग में बच्चों में देरी से दांत निकलते हैं और दांत का ठीक प्रकार से निर्माण भी नहीं हो पाता और टूट जाते है।

विटामिन डी क्या है कमी रोग कैप्सूल

विटामिन डी के कैप्सूल Vitamin-D Capsules

अगर व्यक्ति को विटामिन डी की कमी अधिक महसूस हो रही है तथा उसे विभिन्न प्रकार के विटामिन डी की कमी के लक्षण भी महसूस हो रहे हैं तो उसे अवश्य ही किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए

और विटामिन डी टेस्ट भी करवाना चाहिए। विटामिन डी की पूर्ति के लिए विभिन्न प्रकार के सप्लीमेंट्स (Suppliments) उपलब्ध, उनसे विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में प्राप्त नहीं होता है

अगर शरीर में विटामिन डी की कमी अधिक है तो उसके लिए विटामिन डी 60k कैप्सूल या विटामिन डी 60 k टेबलेट किसी भी मेडिकल स्टोर पर उपलब्ध है

और यह विटामिन डी का प्रचुर मात्रा में सप्लीमेंट (Suppliment) होता है किंतु इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह पर ही किया जाना चाहिए।

दोस्तों आपने इस लेख विटामिन डी क्या है कमी रोग कैप्सूल (what is vitamin-D) आदि तथ्य पड़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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