ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्या है प्रभाव तथा उपाय What is Solid Waste Management

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्या है प्रभाव तथा उपाय

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्या है प्रभाव तथा उपाय What is Solid Waste Management

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्या है प्रभाव तथा उपाय (What is Solid Waste Management Impact and Measure) में।

दोस्तों इस लेख के माध्यम से आज आप ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के बारे में जानेंगे, कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्या है? ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रकार ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के वातावरण पर प्रभाव

के साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के उपाय क्या है? तो आइए दोस्तों बढ़ते हैं, इस लेख में और शुरू करते है आज का यह लेख ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्या है प्रभाव तथा उपाय:-

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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्या है प्रभाव तथा उपाय

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्या है what is solid waste management

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का तात्पर्य उस प्रक्रिया से है जिसके अंतर्गत घरों से फैक्ट्रीयों से तथा अन्य स्रोतो से निकला ठोस अपशिष्ट जो मनुष्य जीव-जंतुओ तथा पर्यावरण के लिए हानिकारक होता है

उसको उपचारित (Treated) करके फिरसे उपयोग करने योग्य, तथा उन्हें उस स्थिति में परिवर्तित कर देते है जिनसे पर्यावरण तथा पर्यावरण के जीवों कों किसी भी प्रकार की हानि नहीं होती है।

अर्थात उनको उपचार करके फिर से उस लायक बना दिया जाता है, कि वह वाह वातावरण को दूषित ना करने पाए। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के अंतर्गत अपशिष्ट का इकठ्ठा करना, परिवहन, उपचार एवं निपटान के साथ-साथ क्रियाकलापों की निगरानी

और नियमन भी सम्मिलित किया जाता है। इसके अतिरिक्त अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित विभिन्न नियामक ढांचे और पुनर्चक्रण (Recycling) संबंधी मार्गदर्शन को भी उपयोग में लाया जाता है।

अपशिष्ट किसी भी प्रकार का हो सकता है, चाहे वह ठोस रूप में हो द्रव्य रूप में भी हो प्रत्येक के निपटान प्रबंधन की विधि अलग-अलग होती है। अपशिष्ट प्रबंधन सभी प्रकार के अपशिष्टों से संबंधित रहता है,

चाहे वह किसी भी प्रकार से उत्पन्न क्यों ना हो रहा हो चाहे वो घरेलू सीवेज हो या फिर औद्योगों द्वारा उत्पन्न किया हुआ किसी भी प्रकार का कचरा कुल मिलाकर हम यह कहना चाहते हैं,

कि अपशिष्ट प्रबंधन का आशाय पर्यावरण तथा जीव जंतुओ के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को रोकना उनको कम करना होता है।

ठोस आपशिष्ट के प्रकार Types of Solid Waste

मानवीय क्रियाकलापों एवं उपयोग के कारण उत्पन्न अपशिष्ट पदार्थों को निम्न प्रकारों में बांटा गया है

  1. जैव निम्नीकरण अपशिष्ट - जैव निम्नीकरण अपशिष्ट वह अपशिष्ट होते हैं, जिनको सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) के द्वारा निम्नीकरण अथवा विघटित किया जा सकता है। यह अपशिष्ट सरल प्रकार के अपशिष्ट होते हैं। इन अपशिष्टों के अंतर्गत सब्जियों के छिलके फसलों के अवशेष फेंके गये खाद्य पदार्थों के कवच आदि को शामिल किया गया है।
  2. पुनरावर्तन अपशिष्ट - इस प्रकार के अंतर्गत उन अपशिष्ट को रखा गया है, जिनको उपयोग करने के बाद फिर से प्रोसेसिंग करके उपयोग में लाया जा सकता है। इसीलिए इन्हे रीसाइक्लिंग अपशिष्ट (Recycling waste) कहा जाता है। इन अपशिष्ट के अंतर्गत एलमुनियम के डिब्बे, रद्दी कागज,प्लास्टिक आदि को शामिल किया गया है।
  3. अनिम्नीकरण अपशिष्ट - अनिम्नीकरण अपशिष्ट वे अपशिष्ट होते हैं, जिनका निम्नीकरण करना बिल्कुल आसान या फिर असंभव ही होता है। इस प्रकार के अपशिष्ट वातावरण तथा जीव जंतुओं के लिए बहुत ही हानिकारक होते हैं। इस अपशिष्टों के अंतर्गत पॉलीथिन, प्लास्टिक, सेरेमिक कांच, एस्बेस्टोज को शामिल किया गया है।

ठोस अपशिष्ट के स्रोत Sources of solid waste

वर्तमान समय में ठोस अपशिष्ट विभिन्न प्रकार के स्रोतों द्वारा उत्पन्न होते हैं, जिनमें कुछ प्रमुख प्रकारों का यहाँ पर वर्णन किया गया है

नगरपालिका अपशिष्ट Municipal waste

नगरपालिका अपशिष्ट के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाला विभिन्न प्रकार का अपशिष्ट, होता है, जो प्रमुख रूप से घरों से निकला हुआ कचरा कार्यालय, व्यावसायिक ठिकानों, अस्पतालों से निकलने वाला कचरा, सड़क आदि के झाड़ने से निकलने वाला कूड़ा

कचरा, नगर पालिकाओं के द्वारा इकट्ठा किया जाता है। इनमें कूड़ा कचरा,रसोई घर का कचरा, प्लास्टिक, पॉलीथिन, चमड़ा, कांच, कागज, टायर, बैटरी, जैव चिकित्सा अपशिष्ट जैसे की पट्टीयाँ, दस्ताने आदि प्रमुख रूप से सम्मिलित होते हैं। 

औद्योगिक अपशिष्ट Industrial waste 

औद्योगिक अपशिष्ट बड़े-बड़े तथा छोटे-छोटे उद्योगों से विभिन्न प्रकार की वस्तुओं को निर्मित करने के फलस्वरूप उत्पन्न होता है।

इस प्रकार के अपशिष्ट में विभिन्न प्रकार का रासायनिक कचरा, भट्टी का लावा, धातु स्क्रैप, पैकेजिंग अपशिष्ट, गाद,  राख आदि सम्मिलित होते हैं।

खनन अपशिष्ट Mining waste

पृथ्वी में खनन करके कई धातुओं तथा कोयला को निकला जाता है इसलिए यहाँ से निकलने वाले अपशिष्ट खनन अपशिष्ट होते है. इनके अतर्गत खान की धूल, चट्टानों के अवशेष धातु मल कोयले का चूरा आदि आते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट Electronic waste

इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्टों के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रिकल स्रोतों से निकले हुए कंप्यूटर, मोबाइल लेपटॉप आदि से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण संबंधित

सामग्री आती है। यह इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट विकसित देशों के द्वारा विभिन्न विकासशील देशों में रीसाइक्लिंग के लिए पहुँचाए जाते हैं, निर्यात किए जाते हैं।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के दुष्प्रभाव Side effects of solid waste management

ठोस अपशिष्टों के कारण मनुष्य के साथ ही वातावरण, पशु पक्षियों जीव जंतु तथा पेड़ पौधों पर भी विपरीत प्रभाव देखने को मिलता है और यह समस्या प्रमुख रूप से नगर पालिका अपशिष्ट की

अनियंत्रित डंपिंग (uncontrolled dumping) के द्वारा उत्पन्न होती है, क्योंकि इस डंपिंग में विभिन्न प्रकार के जैव निम्नीकरण पदार्थ होते हैं, जो कुछ समय बाद सड़ने गलने लगते हैं और कुछ दिनों के

पश्चात विभिन्न प्रकार की विषैली दुर्गंध उत्पन्न करते हैं, जिससे मनुष्य तथा जीव जंतुओं के साथ पेड़ पौधे तथा वनस्पतियाँ भी प्रभावित होने लगती हैं।

मनुष्यों में स्वांस, ह्रदय, फेफड़े सम्बन्धी रोग हो जाते है, पर्यावरण प्रदूषित हो जाता है, पेड़ पौधों तथा अन्य जंतुओ में कई रोग उत्पन्न होने लगते है।

जब औद्योगिक इकाइयों (Industrial waste) से अपशिष्ट निकलता है, तो अपशिष्ट की प्रकृति के आधार पर वह कम खतरनाक किंतु कभी-कभी अधिक खतरनाक होता है।

कुछ उद्योगो के ठिकानों के द्वारा वातावरण में बिजली, धातु तत्व छोड़ दिए जाते हैं, जो जैविक और अजैविक भौतिक समस्याएँ उत्पन्न करने के लिए उत्तरदाई होते हैं।

उद्योगो का रासायनिक जल (Chemical Water) नदी नालों में बहा दिया जाता है, जिसके कारण नदी नालों के विभिन्न प्रकार के जीव जंतु मर जाते हैं, तथा उनमें विभिन्न प्रकार की व्याधियों उत्पन्न होने लगती हैं।

औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला ठोस पदार्थ खेतों में डाल दिया जाता है, इनसे निकली हुई राख, कचरा खेतों में डाल दिया जाता है जिससे वहां की मिट्टी उर्वरा शक्ति को खो देती है।

इसके आलावा विभिन्न प्रकार का रासायनिक कचरा, इलेक्ट्रॉनिक कचरा, सीसा, जिंक, बैटरीयाँ, रेडियोधर्मी पदार्थ, इलेक्ट्रॉनिक अवशिष्ट आदि के द्वारा खतरनाक किरणे निकलती है, जो विभिन्न प्रकार के कैंसर जैसी घातक बीमारियाँ उत्पन्न करने के लिए उत्तरदाई होती हैं।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के उपाय Solid Waste Management Measures

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए आजकल अनेक प्रकार की विधियाँ उपयोग में लाई जाती हैं, किंतु यहाँ पर कुछ प्रचलित विधियों का वर्णन किया गया है:- 

सफाई हेतु गड्ढों की भराई Filling of pits for cleaning

यह विधि वर्तमान में सबसे अधिक प्रचलित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की विधि है। इस विधि के अंतर्गत कचरे को पतली परतों में फैला दिया जाता है, इसके बाद उसे ऊपर से मिट्टी और प्लास्टिक फॉर्म से दबा दिया जाता है। इसके बाद गड्ढों की भराई की

आधुनिक विधि में गड्ढों की तली को मोटी प्लास्टिक तथा बालू की कई परतों से ढक देते हैं, जिससे अगम्य स्तर बन जाता है। इस अगम्य स्तर के कारण भूमिगत

जल का संदूषण नहीं होने पाता और गड्डा भर जाने के उपरांत उसे बालू चिकनी मिट्टी तथा बजरी से ढक देते हैं, ताकि जल का रिसाव ना होने पाए।

कंपोस्टिंग Composting

कंपोस्टिंग विधि के अंतर्गत गड्ढों की भराई के लिए पर्याप्त स्थान ना होने के कारण जैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों को सूक्ष्म जीवों के द्वारा ऑक्सीजन की उपस्थिति में अपघटन कराया जाता है,

जिसके परिणामस्वरूप उच्च गुणवत्ता वाली खाद बन जाती है और इस खाद का उपयोग विभिन्न कृषि कार्यों में कर लिया जाता है।

इसीप्रकार से शहर वाले क्षेत्रों में निकलने वाले ठोस अपशिष्ट को जैव प्रौद्योगिकी आधारित अनाक्सीकारक पाचन क्रिया द्वारा भी अपघटित किया जा सकता है,

इस प्रक्रिया में कार्बनिक खाद का निर्माण होता है, साथ ही मीथेन गैस का भी निर्माण होता है और उनका उपयोग विभिन्न प्रकार से कर लिया जाता है।

कृमि संवर्धन worm culture

कृमि संवर्धन को केंचुआ फार्मिंग के नाम से जाना जाता है। इस तकनीक में केंचुआ की सहायता से मल, कीचड़ एवं घरेलू अपशिष्ट को अपघटित करके कंपोस्ट खाद में बदल दिया जाता है। 

पुनर्चक्रण Recycling

इस प्रक्रिया द्वारा उपयोग के उपरांत जो वस्तुएँ उपयोग के लिए नहीं होती उनको फिर से उपयोग में लाने के लिए उनको पुनर्चक्रण किया जाता है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की यह एक बहुत ही पर्यावरण हितैषी विधि होती है। इसमें परंपरागत रूप से पुनर्चक्रण के पूर्व वस्तु को संशोधित कर दिया जाता है।

उदाहरण तौर पर हम कागज को उपयोग करने के बाद फिरसे अन्य कागज उपयोगी उत्पाद बना लेते हैं। इस क्रिया के अंतर्गत ऊर्जा की हानि कम होती है और गड्ढों की भराई कम होती है।

भस्मीकरण Incineration

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की इस विधि के अंतर्गत ठोस अपशिष्ट को अधिक उचित तापमान पर जला दिया जाता है, जब तक कि वे राख में नहीं बदल जाते।

इस विधि के लिए बड़े-बड़े भट्टीयों का निर्माण किया जाता है जिसमें अपशिष्टों का 20 से 30% की कमी हो जाती है, जिसे आसानी से निपटा दिया जाता है।

दोस्तों इस लेख में आपने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन क्या है प्रभाव तथा उपाय (What is Solid Waste Management) तथा अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को पढ़ा आशा करता हूँ, आपको यह अच्छा लगा होगा।

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