जैविक खेती किसे कहते हैं, सिद्धांत विधि what is organic farming

जैविक खेती किसे कहते हैं, सिद्धांत विधि

जैविक खेती किसे कहते हैं, सिद्धांत विधि what is organic farming

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, इस लेख जैविक खेती किसे कहते हैं, सिद्धांत विधि (what is organic farming Principle and Method) में। दोस्तों इस लेख में

आप जैविक खेती के सिद्धांत, जैविक खेती की आवश्यकता, जैविक खेती की विधि आदि जानेंगे। तो आइये दोस्तों करते है शुरू यह लेख जैविक खेती किसे कहते हैं, सिद्धांत विधि:-

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जैविक खेती किसे कहते हैं, सिद्धांत विधि

जैविक खेती किसे कहते हैं what is organic farming

जैविक खेती भारत के इतिहास में कोई एक नई बात नहीं है, क्योंकि जैविक खेती की जड़े परंपरागत रूप से भारतीय कृषि (Indian Farming) से प्राचीन काल से ही जुड़ी हुई है,

क्योंकि जैविक खेती खेती की पद्धतियों में से वह एक प्राचीन पद्धति है जो एक विस्तृत और विविधिकृत होने के साथ मनुष्य, जीव जंतुओ तथा प्रकृति के लिए केवल लाभप्रद (Beneficial) होती है।

इस कृषि में टिकाऊपन अधिक होता है, वातावरण को सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही जैव विविधता को बढ़ावा देना शामिल किया जाता है।

इसके साथ ही इस कृषि में अन्य कृषि पद्धतियों की तुलना में लागत भी कम आती है। साधारण शब्दों में कहा जा सकता है, कि जैविक खेती वह खेती होती है,

जिसमें कार्बनिक खादों का प्रयोग करना तो चाहिए किंतु सिंथेटिक उर्वरकों (Synthetic Fertilizer) और रासायनिक कीटनाशकों (Chemical Pestiside) का बिल्कुल प्रयोग नहीं करना चाहिए।

लैम्पकिन (lampkin) नामक महोदय ने भी इस संदर्भ में कहा है, कि जैविक खेती में उत्पादन के लिए सिंथेटिक उर्वरक, रासायनिक कीटनाशक, वृद्धि नियंत्रक तथा पशु खाद्य संमिश्रण आदि

का उपयोग पूरी तरह से बंद कर दिया जाता है। जैविक खेती फल चक्र, फसल के अवशेष पशुओं से प्राप्त होने वाली खाद कार्बनिक पदार्थों के प्रयोग पर टिकी होती है,

जिसमें भूमि की उर्वरता (Fertility) को कायम बनाए रखना, पौधों की वृद्धि तत्वों की पूर्ति करने तथा कीट व्याधियो एवं खरपतवारों के नियंत्रण करने के लिए जैव पीडक प्रणाली पर विश्वास करने योग्य होती है।

जैविक खेती के अंतर्गत कार्बनिक खादों (Organic fertilizers) का अधिक से अधिक उत्पादन और उनका ठीक प्रकार से प्रयोग किया जाता है,

जैसे की गोबर की खाद, कंपोस्ट खाद, खरपतवार की खाद, कंपोस्ट हरी खाद, वर्मी कंपोस्ट और नीली हरी काई का उपयोग आज विभिन्न फसलों की खेती के लिए बहुत आवश्यक और लाभदायक होता चला जा रहा है।

इसके साथ ही साइनोबैक्टीरिया कल्चर जैसे कि एजोला एजोटोबेक्टर, राइबोजियम, एजोस्पाईरिलम फास्फेट सॉल्युबलाइजिंग बैक्टीरिया आदि का उपयोग भी फसलों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में लाभदायक है।

जैविक खेती अपनाने की जरूरत क्यों Why the need to adopt organic farming

मृदा अर्थात मिट्टी में लंबे समय तक उर्वरता बनाए रखने के लिए रासायनिक उर्वरकों (Chemical Fertilizer) के साथ या उनका कम प्रयोग करके कार्बनिक खादों (Organic fertilizers) के मिश्रण का उपयोग आवश्यक हो गया है,

क्योंकि सिंचित क्षेत्रों में लगातार रसायनों पर आधारित सघन खेती से भूमि का उपजाऊपन धीरे-धीरे लगातार कम होता जा रहा है, जो टिकाऊ खेती के लिए उपयुक्त नहीं है, क्योंकि कृषि योग्य भूमि जल स्रोत वनस्पति व जैव विविधता कृषि के लिए आधारभूत संसाधन है।

देश में प्राकृतिक संसाधनों (Natural Resource) का अविवेकपूर्ण दोहन एवं प्रदूषण के कारण उर्वरता की कमी के साथ-साथ मौलिक रूप में भी बिगड़ता जा रहा है। असंतुलित मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग भूमि की भूख को बताता बढ़ाता जा रहा है,

जिसके परिणामस्वरूप फसल की पैदावार और गुणवत्ता पर असर पड़ रहा है, इसीलिए जैविक खेती अपनाने की जरूरत आ गई है।

जैविक खेती के सिद्धांत Principles of organic farming

जैविक खेती करने के लिए निम्न प्रकार के प्रमुख सिद्धांत प्रस्तुत किए गए हैं:- 

  1. खेती के लिए हर संभव प्राकृतिक संसाधनों (Natural Resource) का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए, जिससे अधिक से अधिक उत्पादन (Production) किया जा सके। 
  2. भूमि का आवश्यक और जीवंत उपयोग प्राकृतिक सूझबूझ पर आधारित कर्षण क्रियाएँ होना चाहिए, जिससे पर्यावरण (Environment) को किसी भी प्रकार की हानि ना हो।
  3. जैविक प्रणाली पर आधारित सिंचाई जल, फसल सुरक्षा के लिए उपाय एवं पोषण प्रबंध होना चाहिए। 
  4. पर्यावरणीय मित्रवत प्रौद्योगिकी (Eco friendly technology) अपनाकर अर्थात पर्यावरण हितेषी अधिकतम खाद उत्पादन करना चाहिए।
  5. भूमि में टिकाऊ उर्वरता एवं उचित पोषण (Nutrition) आधारित खाद उत्पादन करना।

जैविक खेती में बाधाएँ  Barriers to organic farming

वर्तमान समय में यह सभी जानते हैं, कि अधिक से अधिक रसायनों (Chemicals) के प्रयोग से जो फसलें उत्पादित की जा रही हैं, उनकी गुणवत्ता (Quality)  में कमी आती जा रही है।

इसके साथ ही फसलों का टिकाऊपन भी नष्ट होता जा रहा है फिर भी आधुनिक खेती को छोड़कर जैविक खेती अपनाने के लिए कम ही किसान तैयार हो रहे हैं,

क्योंकि किसानों को यह डर है, कि कहीं प्रति हेक्टेयर फसल उत्पादन इतना कम ना हो जाए, कि लागत भी ना निकल पाए। दूसरी जैविक खेती को करने के लिए जैविक खादों की आपूर्ति कहांँ से की जाएगी

फिर भी किसान बायोगैस संयंत्र से निकली गोबर की खाद, हरी खाद, फसल अवशेष, वर्मी कंपोस्ट, पत्तियों की खाद आदि का प्रयोग फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए कर सकते हैं। वैसे भी जैविक खेती कोई कठिन नहीं है, इससे लोग भलीभांति परिचित हैं। 

जैविक खेती करने की विधि Organic farming method

मृदा प्रबंधन Soil management

जब एक ही प्रकार की फसलों की खेती एक जगह की मृदा में की जाती है, तब उस मृदा की गुणवत्ता कम होने लगती है। इसके आलावा विभिन्न प्रकार के

रासायनिक उर्वरकों (Chemical Fertilizer) और कीटनाशकों (Pestside) का प्रयोग करने से मृदा अपनी गुणवत्ता खोने लगती है, इसीलिए जैविक कृषि में मिट्टी के स्वास्थ्य (Healthy Soil) को

अधिक मजबूत करने के लिए प्राकृतिक तरीकों (Natural way) का उपयोग किया जाता है, जिसमें जानवरों के कचरे में मौजूद बैक्टीरिया,

सूक्ष्मजीवों के उपयोग पर भी विशेष बल दिया जाता है, क्योंकि यह मिट्टी के पोषक तत्व अधिक बनाने और उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

फसल विविधता Crop diversity

आजकल एक नई प्रथा सामने आई है, जैसे कि पॉलिकल्चर (Polyculture) अर्थात या एक ऐसी कृषि, जिसके अंतर्गत एक ही समय में एक ही स्थान पर एक साथ विभिन्न प्रकार की फसलों की खेती करना

और इसकी मांग भी आज दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। प्राचीन प्रथा के विपरीत जो मोनोकल्चर (Monoculture) थी,

जिसमें एक विशेष स्थान पर केवल एक ही फसल की खेती की जाती है, किंतु आज के समय में पॉलिकल्चर का प्रयोग करके लोग अधिक उत्पादन भी कर रहे हैं। 

खरपतवार प्रबंधन Weed management

खरपतवार कृषि क्षेत्रों में उगने वाले अवांछित पौधे होते हैं, जिनका प्रयोग किसी भी फसल हेतु अनावश्यक होता है, तथा यह फसल को हानि और लाभ भी पहुँचाने का कार्य करते हैं, इसीलिए जैविक कृषि खरपतवार को पूरी तरह से हटाने के बजाय उसे कम करने पर जोर देती है

अन्य जीवो को नियंत्रित करना Controlling other organisms

यह बात भी सत्य है, कि कृषि फार्म में दो प्रकार के जीव अवश्य होते हैं। एक वह जीव होते हैं, जो फसल को लाभ पहुंचाते हैं और एक वो जीव होते हैं, जो फसल को हानि पहुंचाते हैं,

इसीलिए प्राकृतिक जड़ी बूटियों (Natural Herbs) और कीटनाशकों का उपयोग करके उन जीवो को नष्ट किया जाता है, जो कृषि को हानि पहुंचाने का कार्य करते हैं और उन जीवो को बचाए रखने का भी कार्य किया जाता है, जो फसलों को लाभ पहुंचाते हैं। 

जैविक खाद Organic Fertilizer 

जैविक खेती के तरीके जैसे खाद और जैव उर्वरक का उपयोग अच्छी फसल विकास के लिए और मिट्टी की समृद्धि को बढ़ाने के लिए उपयुक्त होती है।

प्राकृतिक रूप से मिट्टी में महत्वपूर्ण पोषक तत्वों (Nutrients) को प्रेषित करने का एक और उत्कृष्ट तरीका वर्मी कंपोस्ट (Vermi compost) कहलाता है। वर्मी कंपोस्ट द्वारा कार्बनिक पदार्थों से खाद

बनाने की प्रक्रिया की जाती है, जिसमें केचुआँ कार्बनिक पदार्थों जैसे कि घरेलू कचरा, कृषि अवशेष, औद्योगिक अवशेष आदि को एवं मृदा को खाते हैं

और खाए हुए कार्बनिक पदार्थों का आहार नाल में पहुंचकर पाचन हो जाता है और शेष पदार्थ मल के रूप में उत्सर्जित कर दिया जाता है।

केंचुआ के द्वारा उत्सर्जित इन पदार्थों को ही वर्मी कंपोस्ट के नाम से जाना जाता है। इसमें केंचुए की पूरीष अवशेष, मल, अंडे, कोकून लाभप्रद जीवाणु आदि का मिश्रण सीमित रहता है।

इसके प्रयोग से मृदा में लाभदायक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि हो जाती है और रोग फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों में कमी आने लगती है,

जिसके फलस्वरूप मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ जाती है। केंचुआँ की वैज्ञानिक तरीके से नियंत्रित दशा में प्रजनन, पालन को कृषि संवर्धन या वर्मी कल्चर (Vermiculture) के नाम से जाना जाता है। 

वर्मी कंपोस्ट का महत्व Importance of vermi compost

  1. गोबर की खाद के मुकाबले वर्मी कंपोस्ट की गुणवत्ता (Quality) लगभग 8 से 10 गुना अधिक मानी जाती है।
  2. इसमें काफी नमी होने की वजह से सूक्ष्मजीवों की गतिविधियों से पौधों को आवश्यक पोषक तत्व (Nutrients) प्राप्त होने की संभावना भी बढ़ जाती है।
  3. वर्मी कंपोस्ट के कण मृदा के कणों के साथ मिलकर मृदा की जल धारण क्षमता (water holding capacity) को बढ़ाने का कार्य करते हैं।
  4. वर्मी कम्पोष्ट के उपयोग से मृदा प्रदूषण और जल प्रदूषण भी नहीं होता है, जय वातावरण (Environment) के लिए उत्तम रहती है। 
  5. साधारण खाद की तुलना में इसमें नाइट्रोजन (Nitrogen)  की मात्रा 5 गुना अधिक फास्फोरस (Phosphorus) की मात्रा 7 गुना अधिक और पोटेशियम (Potassium) 11 गुना अधिक पाया जाता है। इसीलिए यह पेड़ पौधों की वृद्धि के लिए सबसे उपयुक्त खाद मानी जाती है।
  6. यह प्राकृतिक खाद (Natural Fertilizer) होती है, इसलिए इसका आसानी सूक्ष्मजीवों द्वारा जैव निम्नीकरण हो जाता है। 
  7. इसके द्वारा कचरे (Garbage) की समस्या को दूर कर सकते हैं, क्योंकि इसमें कचरे का उपयोग करके इस खाद को आसानी से कम लागत में बनाया जाता है। 

दोस्तों यहाँ पर आपने जैविक खेती किसे कहते हैं, सिद्धांत विधि (what is organic farming) के साथ अन्य तथ्य पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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