स्वास्थ्य शिक्षा की परिभाषा Definition of Health Education

स्वास्थ्य शिक्षा की परिभाषा Definition of Health Education

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख स्वास्थ्य शिक्षा की परिभाषा (Definition of Health Education) में।

दोस्तों इस लेख के अंतर्गत आप स्वास्थ्य शिक्षा क्या है, स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र, स्वास्थ्य शिक्षा के उद्देश्य तथा स्वास्थ्य शिक्षा का महत्व जानेंगे। तो आइये दोस्तों करते है, शुरू यह लेख स्वास्थ्य शिक्षा की परिभाषा:-

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स्वास्थ्य शिक्षा की परिभाषा

स्वास्थ्य शिक्षा क्या है what health education

वह शिक्षा जिसके द्वारा मनुष्य स्वास्थ्य रहने के नियम, जानकारी तथा उन साधनों के बारे में प्रमुख रूप से जानता है जिससे वे अपने शरीर को स्वस्थ रख सके हैं वह शारीरिक शिक्षा कहलाती है।

शारीरिक शिक्षा के द्वारा व्यक्ति स्वास्थ्य से संबंधित सभी प्रकार की जानकारी प्राप्त करता है और उन जानकारियों को अमल में भी लाता है,

जिससे व्यक्तिगत तथा सामूहिक रूप से वह स्वस्थ रह सकता है और अपना योगदान स्वस्थ्य समाज के निर्माण में तथा देश के निर्माण में भी दे सकता है।

इसलिए भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा देश में विभिन्न स्वास्थ्य केंद्र तथा स्वास्थ्य समितियाँ स्थापित की गई है जो प्रचार-प्रसार के माध्यम से

स्वास्थ्य संबंधित शारीरिक शिक्षा स्वास्थ्य शिक्षा की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं, और उन्हें स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाते है।

स्वास्थ्य शिक्षा की परिभाषा

स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र Scop of Health Education 

स्वास्थ्य शिक्षा का क्षेत्र बड़ा ही व्यापक और गहरा क्षेत्र होता है, इसके अंतर्गत वह सभी बाह्य और आंतरिक परिस्थितियां शामिल की जाती हैं

जो मनुष्य के स्वास्थ्य को किसी ना किसी रूप से प्रभावित अवश्य करती हैं। इसलिए स्वास्थ्य शिक्षा का सबसे पहला लक्ष्य व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन के स्तर को अधिक ऊंचा उठाना है,

जिससे प्रत्येक व्यक्ति व संपूर्ण समाज स्वास्थ्य रहे सके और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होकर समाज और देश के विकास में अपना अहम योगदान दे सके।

व्यक्ति के जीवन में उत्पन्न विभिन्न प्रकार की परिस्थितियाँ स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती है और स्वास्थ्य शिक्षा इन विभिन्न परिस्थितियों के नियंत्रण में उत्तरदाई होती है,

इसप्रकार मानव शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से स्वस्थ रहता है, क्योंकि विभिन्न प्रकार की परिस्थितियों और घटनाओं के फलस्वरूप जब मानव के शरीर में कोई भी अनियमितता उत्पन्न होती है

तो वह अनियमितता विभिन्न प्रकार की बीमारियों को जन्म देने लगती है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने शरीर की रचना और कार्य का ज्ञान अवश्य होना चाहिए, इसके साथ ही उसे यह भी जानना आवश्यक होना

चाहिए, कि वातावरण के साथ शरीर का उचित प्रकार से क्रियाकलाप समायोजन कैसे कर सकें उपर्युक्त ज्ञान का संबंध स्वयं स्वास्थ्य शिक्षा के अंतर्गत ही आता है, जबकि दूसरा भाग प्रत्येक मानव के बाहर हैं,

जिसमें सामाजिक वातावरण की बात करते हैं, उसके स्वास्थ्य से संबंधित हैं, इसलिए उसका भी अध्ययन आवश्यक हो जाता है, अर्थात स्वास्थ्य शिक्षा को समाज से सामाजिक संबंध कह सकते हैं।

स्वास्थ्य शिक्षा के उद्देश्य Objective of Health Education 

स्वास्थ्य शिक्षा के लक्ष्य प्राप्त करने हेतु कुछ विशेष प्रकार के उद्देश्यों का पालन करना होता है, जिनके कारण स्वास्थ्य शिक्षा का लक्ष्य को पाना बहुत ही सरल हो जाता है। स्वास्थ्य शिक्षा के उद्देश्य यहाँ पर निम्न प्रकार से बताए गए हैं:-

  1. स्वास्थ्य रक्षा संबंधी आवश्यकताओं का ज्ञान - मनुष्यों को स्वास्थ्य के सिद्धांतों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए, क्योंकि इनके द्वारा मनुष्य के स्वास्थ्य की रक्षा होती है। इसीलिए मनुष्य को स्वास्थ्य रक्षा के लिए आवश्यक जानकारी प्राप्त होनी चाहिए, कियोकि स्वास्थ्य शिक्षा के द्वारा ही मनुष्य अपने जीवन को सुखी सम्पन्न और अपने शरीर को विभिन्न रोगों से कोसों दूर रख सकता है।
  2. स्वास्थ्य निर्देशन एवं निरीक्षण - स्वास्थ्य शिक्षा में स्वास्थ्य निर्देशन और निरीक्षण का महत्व होता है, क्योंकि इसके द्वारा स्वास्थ्य से संबंधित विभिन्न प्रकार की चीजों का निरीक्षण परीक्षण और निर्देशन किया जाता है और स्वास्थ्य शिक्षा अधिक प्रभावी हो जाती है तथा व्यक्तिगत स्वास्थ्य अधिक मजबूत हो जाता है। जैसे कि माता-पिता अपने छोटे बच्चों के कपड़े उनकी विभिन्न वस्तुओं का नियमित परीक्षण करते हैं, कि वह साफ-सुथरी है या नहीं है। माता-पिता को अपने बच्चों की मनोवृति, अवस्था के आधार पर विभिन्न परिस्थितियों को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य के बारे में दिशानिर्देश भी देते रहना चाहिए, ताकि वह स्वास्थ्य को समझें और उस को अपने जीवन में लागू करना सीखें।
  3. बालक के स्वास्थ्य को अच्छा बनाने का प्रयास- स्वास्थ्य शिक्षा के अंतर्गत बालक को अच्छे से अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करने के लिए कार्य किया जाता है, जिसके अंतर्गत माता-पिता को हमेशा ही बालक के स्वास्थ्य के बारे में जागरूक होना चाहिए। बालक को हमेशा पौष्टिक आहार देना चाहिए, उन्हें शारीरिक स्वास्थ्य की जानकारी देनी चाहिए, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विभिन्न गतिविधियों को अपनाना चाहिए, जिससे बच्चों का स्वस्थ्य अच्छा रह सके हैं। बहुत से बालक बचपन में स्वास्थ्य शिक्षा के आभाव में अस्वस्थ रहते हैं, जिसका प्रभाव उन्हें भविष्य में भी झेलना पड़ता है।
  4. संक्रामक रोगों से बचाव- संक्रामक रोग वातावरण में होता है और यह प्रमुख रूप से दूषित वातावरण के द्वारा अधिक फैलता है, इसीलिए स्वास्थ्य शिक्षा के अंतर्गत दूषित वातावरण द्वारा स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभाव के बारे में बताया जाता है, जिससे लोग दूषित वातावरण से दूर रह सकें और अपने स्वास्थ्य को और उत्तम बना सकें तथा विभिन्न संक्रामक रोगों से बचाव कर सकें।
  5. स्वास्थ्य गतिविधियों का विकास- स्वास्थ्य गतिविधियाँ वह गतिविधियाँ होती हैं, जिनके द्वारा शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य उत्तम बनता है, इसीलिए विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य गतिविधियों का ज्ञान माता-पिता और उनके शिक्षक को अवश्य होना चाहिए, क्योंकि माता-पिता और शिक्षक ही बालकों के पास अधिक समय व्यतीत करते हैं इसलिए माता-पिता और शिक्षक ही बालकों में विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य गतिविधियों का विकास कर सकते हैं जिससे छात्र-छात्राएँ सभी बच्चें हमेशा स्वस्थ रहकर अपना विकास कर सकें।
  6. प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान-माता-पिता शिक्षक आदि लोगों को प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान अवश्य होना चाहिए क्योंकि माता-पिता और शिक्षक के संरक्षण में ही बालक अपना विकास करते हैं, विभिन्न प्रकार की गतिविधियाँ भी करते हैं। अगर उन गतिविधियों को करते वक्त उन्हें चोट लगना, जल जाना हड्डी टूट जाना आदि की घटनाएँ होती हैं, तो ऐसी परिस्थितियों में माता-पिता और अध्यापकों को प्राथमिक सहायता प्राथमिक चिकित्सा के लिए तैयार रहना पड़ता है, जिस कारण बालक के स्वास्थ्य पर अधिक प्रभाव नहीं पड़ता है।

स्वास्थ्य शिक्षा का महत्व क्यों है why health education is importent

स्वास्थ्य रहना जीवन का सबसे प्रमुख विषय है, क्योंकि स्वास्थ्य ही जीवन होता है और यह भी कहा गया है, कि जान है तो जहान है,

क्योंकि अगर व्यक्ति स्वस्थ रहेगा तो वह विभिन्न प्रकार की गतिविधियाँ करने में सक्षम रहेगा और अगर वह स्वस्थ नहीं रहेगा तो वह किसी भी कार्य को करने में अपने आप को सक्षम नहीं समझ पाएगा,

इसीलिए किसी भी कार्य को करने के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ दिमाग तथा शरीर की आवश्यकता होती है, इसीलिए स्वास्थ्य शिक्षा को जीवन में सर्वोपरि और सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

  1. यदि व्यक्ति स्वस्थ नहीं रहता है, तो वह किसी भी कार्य को करने में सक्षम नहीं होता है। स्वास्थ्य व्यक्ति ही समाज का एक स्थान माना जाता है और जो व्यक्ति अस्वस्थ होता है, उस व्यक्ति को समाज का बोझ माना जाता हैं क्योंकि वह समाज के विकास में किसी भी प्रकार की भूमिका अदा नहीं कर पाता और स्वयं दूसरे लोगों पर आश्रित रहता है। 
  2. जो व्यक्ति स्वस्थ्य होता है, वह अपने जीवन का पूरी तरह से आनंद लेता है स्वास्थ्य व्यक्ति अपने परिवार के लिए, समाज के लिए, देश के लिए, एक बहुत ही मूल्यवान हीरा होता है।
  3. सभी लोगों का स्वस्थ्य रहना बहुत ही आवश्यक होता है, क्योंकि लोगों का स्वस्थ्य रहना समाज के लिए भी कई प्रकार से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि कई प्रकार के ऐसे संक्रामक रोग होते हैं, जो एक दूसरे से फैलते रहते हैं, इसीलिए व्यक्ति को स्वस्थ होना चाहिए, जिससे उन्हें संक्रामक रोग छू भी ना पाए और इसका प्रभाव समाज पर और समाज के अन्य लोगों पर ना पड़ने पाए। 
  4. जिस व्यक्ति का स्वास्थ्य उत्तम होता है, वह संतोषजनक स्थिति में होता है, उसका मस्तिष्क भी शांत तथा चित्त प्रसन्न होता है, सभी रोगों से दूर रहता है, उसमें चिड़चिड़ापन नहीं होता है, सभी से अच्छे से बात करता है और सभी बातों को समझता है।
  5. स्वास्थ्य का महत्व प्रत्येक जीवधारी के लिए होता है, अगर बच्चा स्वस्थ है, तो उसका मस्तिष्क भी स्वस्थ रहता है और मस्तिष्क स्वस्थ होने पर वह विभिन्न प्रकार की क्रियाओं में पूर्ण रूप से योगदान देता है। पढ़ने में भी अव्वल होता है तथा विभिन्न प्रकार के खेलकूद में भी अव्वल ही आता है।

दोस्तों आपने यहाँ स्वास्थ्य शिक्षा की परिभाषा (Definition of Health Education) के साथ अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को पड़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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  1. स्वास्थ्य क्या है इसके प्रकार
  2. स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक



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