रक्त कणिकाएँ क्या है प्रकार तथा कार्य what is blood cell type and function

रक्त कणिकाएँ क्या है

रक्त कणिकाएँ क्या है प्रकार तथा कार्य what is blood cell type and function

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख रक्त कणिकाऐं क्या है प्रकार तथा कार्य (what is blood cell type and function) में।

दोस्तों इस लेख में आप रक्त कणिकाएँ किसे कहते है, रक्त कणिकाओं के प्रकार, तथा रक्त कणिकाओं के कार्य जानेंगे। तो आइये दोस्तों करते है, यह लेख शुरू रक्त कणिकाओं क्या है प्रकार तथा कार्य:-

रक्त क्या है संघठन तथा कार्य

रक्त कणिकाएँ क्या है what is blood cell 

रक्त कणिकाएँ किसे कहते है - जीव धारियों में पाए जाने वाले रक्त में बहती हुई अवस्था में छोटी-छोटी कणिकाएँ पाई जाती हैं, जिन्हें रक्त कणिकाएँ (Blood Cells) कहते हैं। रक्त कणिकाएँ रक्त का सॉलिड पार्ट (Solid Part) होती हैं,

जो लगभग संपूर्ण रक्त का 45% हिस्सा बनाती हैं। रक्त में पाई जाने वाली रक्त कणिकाएँ मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं लाल रक्त कणिका,श्वेत रक्त कणिका तथा बिम्बाणु। 

रक्त कणिकाओं के प्रकार Type of blood cells 

रक्त कणिकाएँ निम्न तीन प्रकार की होती हैं:-

रक्त कणिकाएँ क्या है

लाल रक्त कणिका Red blood cell 

आरबीसी क्या है - लाल रक्त कोशिका को अंग्रेजी में Red blood cell और Erythrocyte के नाम से भी जाना जाता है, जो रक्त या लहू में पायीं जाने वाली सबसे प्रमुख कणिकाएँ हैं

और रक्त में सबसे अधिक मात्रा में लगभग 40% पायीं जाती है। यह कणिकाएँ सभी कशेरुकी (Vertibrate) प्राणियों के रक्त में पायी जाती है, जो आकार में चपटी, अवतल लेंस की तरह होती है,

तथा इनकी संख्या एक क्यूबिक मिलीमीटर में लगभग 4 लाख पचास हजार से 5 लाख पचास हजार तक होती है। लाल रक्त कणिकाओं का रंग पीला होता है,

किन्तु हीमोग्लोबिन (Heamoglobin) की उपस्थिति के कारण यह लाल रंग की दिखाई देती है। लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण प्रोटीन, लोहा और अमीनो एसिड के मिलने से होता है।

लोहा का कार्य लाल रक्त कणिका में उपस्थित रहकर गर्भवती महिलाओं तथा बालिकाओं में रक्त की कमी को पूरा करना तथा रक्त को लाल रंग देना होता है।

लाल रक्त कणिकाओं का निर्माण बड़ी हड्डियों में पाए जाने वाले अस्थि मज्जा (Bone marrow) नामक पदार्थ में होता है, तथा जीवनकाल 20 से 120 दिन तक का हो सकता है।

अपना जीवनकाल पूरा होने पर यह यकृत (Liver) तथा प्लीहा (Spleen) में नष्ट हो जाती है। इसलिए प्लीहा को लाल रक्त कणिकाओं का कब्रगाह भी कहते है। लाल रक्त कणिकाओं की मृत्यु से मुक्त हुआ

आयरन तथा प्रोटीन ऊतकों (Tissues) द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है, जबकि हीमोग्लोबिन अमीनो एसिड्स्टो में तथा बिलरुबिन में परिवर्तित हो जाता है।

लाल रक्त कणिकाएँ मनुष्य तथा अन्य जीव धारियों में केंद्रक रहित होती हैं, किंतु कुछ ऐसे जीव हैं, जिनकी लाल रक्त कोशिकाओं में केंद्रक भी पाया जाता है, जिनमें प्रमुख रूप से ऊँट, जिराफ आदि है।

मनुष्य तथा कई विभिन्न जीवधारियों की लाल रक्त कोशिकाओं में केंद्रक नहीं पाया जाता, किंतु केंद्रक के स्थान पर हीमोग्लोबिन पाया जाता है, इसलिए मनुष्य की रक्त कणिकाओं में केंद्रक नहीं होता।

लाल रक्त कणिकाओं का साइज विभिन्न जीवधारियों में अलग - अलग होता है जिसमें सबसे बड़ी लाल रक्त कणिका हाथी की तथा सबसे छोटी लाल रक्त कणिका कस्तूरी मृग की होती है। 

हीमोग्लोबिन (Heamoglobin) - हीमोग्लोबिन स्तनधारियों का श्वशन वर्णक हैं, कियोकि यह ऑक्सीजन  (O2) को शरीर के विभिन्न भागों में पहुँचाने का कार्य करता है।

हीमोग्लोबिन दो भागों से निर्मित है, पहला है हीम (Heam) जिसका अर्थ है "लोहा" अर्थात हीम भाग लोहा (Iron) धातु से मिलकर बना है, जबकि दूसरा भाग ग्लोबिन (Globin) जो एक तरह की प्रोटीन है। 

इस प्रकार हीमोग्लोबिन लोहा और प्रोटीन से मिलकर बना होता है। हीमोग्लोबिन का निर्माण एक प्रोटीन ग्लोबिन 96 प्रतिशत तथा एक रंजक हीम 4 प्रतिशत के मिलने से होता है,

जिसमें हीम अणु के केंद्र में लोहा आयरन होता है, जो ऑक्सीजन को बांधने और मुक्त करने की क्षमता रखता है। हीमोग्लोबिन के पास विशेष प्रकार की शक्ति बंध

बनाने की शक्ति से वह ऑक्सीजन के साथ बंध बना लेता है जिसे ऑक्सीहीमोग्लोबिन (Oxiheamoglobin) कहते है।

हीमोग्लोबिन का कार्य ऑक्सीजन को फेफड़ों से शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाना तथा कार्बनडाईऑक्साइड को फेफड़ों तक लाना होता है। हीमोग्लोबिन की मात्रा एक स्वस्थ व्यक्ति मे लगफग 100ml रक्त मे 15 ग्राम तक होती है।

आरबीसी के कार्य Function of RBC 

आरबीसी अर्थात लाल रक्त कणिका का मुख्य कार्य गैसीय विनिमय (Gases Transport) का होता है, क्योंकि लाल रक्त कणिका में हीमोग्लोबिन श्वसन वर्णक पाया जाता है,

जो ऑक्सीजन (O2) को फेफड़ों से विभिन्न भागों तक पहुंचाने का कार्य करता है, तथा विभिन्न भागों में बनी कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) को फेफड़ों तक लाने में सहयोग करता है।

रक्त कणिकाएँ क्या है

श्वेत रक्त कणिका white blood cell 

ल्यूकोसाइट क्या है - श्वेत रक्त कणिका को अंग्रेजी में वाइट ब्लड सेल या Leucocytes कहा जाता हैं, कियोकि यह रंग में सफेद होती हैं।

इनका आकर लाल रक्त कणिका से बड़ा किंतु यह मात्रा में लाल रक्त कणिकाओं से कम होती हैं। सफेद रक्त कणिका लगभग संपूर्ण रक्त का एक प्रतिशत होती है जो लगभग 1 क्यूबिक एमएम

रक्त में 6 हजार से 10 हजार के आसपास पाई जाती हैं, इनका जीवनकाल 10 से 20 दिन तथा कभी-कभी वर्षों तक भी होता है। श्वेत रक्त कणिकाओं को अध्ययन की दृष्टि से दो भागों में बांटा गया है।

ग्रेन्यूलोसाइट Granulocyte 

ग्रेन्यूलोसाइट वे श्वेत रक्त कणिकाएँ होती हैं, जिनके जीवद्रव्य मे छोटे-छोटे से ग्रेन्यूल्स (कण) पाए जाते हैं। इसलिए इन्हें ग्रेन्यूलोसाइट कहते हैं।

इन कोशिकाओं में उपस्थित केन्द्रक कई पालियों (Lobes) में बंटा होता है। रक्त में ग्रेन्यूलोसाइट की कमी से ग्रेन्यूलोसाइटोपेनिया नामक रोग हो जाता है। ग्रेन्यूलोसाइट भी तीन प्रकार की कोशिकाएँ होती है।

न्यूट्रोफिल Neutrophil 

न्यूट्रोफिल श्वेत रक्त कणिका की सबसे बड़ी और सबसे अधिक मात्रा में पाई जाने वाली कणिकाएँ होती हैं, जो समस्त श्वेत रक्त कणिकाओं की 66 % होती है।

इन कणिकाओं नेचुरल डाई या फिर एसिड और अलकालाइन स्टैन से रंगने पर इन्हे सूक्ष्मदर्शी में देखने पर पर्पल रंग की दिखाई देती हैं। इनका केन्द्रक तीन से चार पालियों मे बटा रहता है। 

इसिनोफिल Eosinophil 

यह वे रक्त कणिकाएँ होती हैं, जो सबसे कम मात्रा में ही पाई जाती हैं। ये श्वेत रक्त कणिका की 3% पायी जाती है, इन्हें इओसिन नामक रंग से रंगने पर सूक्ष्मदर्शी से देखने पर लाल रंग की नजर आती है।

बेसोफिल Basophil 

ये कणिकाएँ भी कम मात्रा में पाई जाती हैं, जो समस्त श्वेत रक्त कणिका की 1% ही होती है। इन्हें क्षारीय रंग से रंगने पर सूक्ष्मदर्शी में नीले रंग की दिखाई देती है।

अग्रेन्यूलोसाइट Agranulocyte 

वे कोशिकाएँ जिनके जीवद्रव्य मे छोटे -छोटे ग्रेन्यूल्स (कण) नहीं पाए जाते वे अग्रेन्यूलोसाइट कहलाती है यह भी दो प्रकार की होती हैं।

लिंफोसाइट Limphocyte

ये वे कणिकाएँ होती हैं, जिनका विकास अस्थिमज्जा प्लीहा और लिम्फ में होता है। ये समस्त श्वेत रक्त कणिकाओं की 25% के आसपास पाई जाती हैं।

मोनोसाइट Monocyte 

मोनोसाइट कम ही मात्रा में पायी जाने वाली श्वेत कणिका  है, जो सम्पूर्ण श्वेत रक्त कणिका की 5% ही पायी जाती है। इनके अंदर जीवाणुओं को खाने की प्रक्रिया होती है, जिसे फेगोसाइटोसिस (Phagocytosis) कहते है। 

श्वेत रक्त कणिका के कार्य Function of white blood cell 

श्वेत रक्त कणिकाएँ ग्रेन्यूलोसाइट और मोनोसाइट जीवधारियों के शरीर को बाहरी संक्रमण से बचाने का कार्य करते हैं अर्थात श्वेत रक्त कणिकाओं का कार्य मुख्य रूप से विभिन्न प्रकार के रोग और जीवाणुओं से बचाने का होता है।

श्वेत रक्त कणिका शरीर को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली का निर्माण करते हैं अर्थात श्वेत रक्त कणिकाएं फगोसाइटोसिस की क्रिया के द्वारा मनुष्य को बाहरी संक्रमण से बचाने (Phagocytosis) का कार्य करती है।

रक्त कणिकाएँ क्या है

प्लेटलेट्स Thrombocyte  

प्लेटलेट्स क्या है- प्लेटलेट्स रक्त में पाई जाने वाली तीसरे नंबर की छोटी-छोटी कणिकाएँ है, जिनको बिम्बाणु कहते है। ये आकार में लाल रक्त कणिका तथा श्वेत रक्त कणिका से भी छोटी होती हैं

और एक क्यूबिक मिलीमीटर में 2 लाख पचास हजार से 5 लाख के आसपास पाई जाती हैं। यह अनियमित आकार की तथा केंद्रक रहित कोशिकाएं होती हैं, जिनका व्यास 2 से 3 माइक्रोन का तथा जीवनकाल 5 से 15 दिन तक का हो सकता है।

प्लेटलेट्स का क्या कार्य है Function of Platelets

प्लेटलेट जो शरीर के रक्त में सबसे छोटी अनियमित आकार की कोशिकाएँ/कणिकाएँ होती हैं, इनका मुख्य कार्य शरीर में रक्त का थक्का (Blood Clotting) जमाने का होता है,

जब कभी भी शरीर में चोट लग जाती है और वहां से रक्त निकलने लगता है, तो वहाँ पर कुछ ही समय में रक्त का थक्का जम जाता है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका प्लेटलेट्स की होती है।

दोस्तों आपने इस लेख में रक्त कणिकाऐं क्या है प्रकार तथा कार्य (what is blood cell type and function) आदि तथ्य पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

इसे भी पढ़े:-

  1. हीमोग्लोबिन क्या है हीमोग्लोबिन टेस्ट नॉर्मल रेंज
  2. थायराइड क्या है थायराइड टेस्ट नॉर्मल रेंज



 

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