लाइकेन के सामान्य लक्षण lichens ke Samanya Lakshan

लाइकेन के सामान्य लक्षण


लाइकेन के सामान्य लक्षण lichens ke Samanya Lakshan 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख लाइकेन के सामान्य लक्षण ( lichens ke Samanya Lakshan) में।

दोस्तों यहाँ पर आप जान पायेंगे कि लाइकेन क्या है? लाइेकन के सामान्य लक्षण क्या है? लाइकेन का आर्थिक महत्व क्या है? तो आइये दोस्तों करते है, यह लेख शुरू लाइकेन के सामान्य लक्षण:-

जीव विज्ञान किसे कहते है

लाइकेन क्या है what is lichen 

लाइकेन किसे कहते है - लाइकेन एक विशेष प्रकार की वनस्पति है, जो थैलोफाइटा (Thallophyta) के अंतर्गत आती है। इसकी विशेषता है,

कि यह कवक (fungus) और शैवाल (Algae) के मिलने से बनती है। इसप्रकार लाइकेन वनस्पति में कवक और शैवाल दोनों सहजीवी (Symbiotic) संबंध के साथ जीवन यापन करते हैं।

जिसमें से कवक का कार्य जल, खनिज लवण तथा विटामिन प्राप्त करके शैवाल को देना होता है, जबकि शैवाल प्रकाश संश्लेषण क्रिया के द्वारा कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करते हैं

तथा भोजन के रूप में कार्बोहाइड्रेट कवक को प्रदान करते है। इस प्रकार से कवक और शैवाल दोनों सहजीवी संबंध बिताते हैं। सबसे पहले लाइकेन शब्द का प्रयोग ग्रीक दार्शनिक थियोफ्रेस्ट्स (Theophrastes)

ने किया जो वनस्पति विज्ञान के पिता हैं। लाइकेन के वैज्ञानिक अध्ययन को लाइकेनोलॉजी (Lichenology) कहा जाता है। वर्तमान में लाइकेन के 400 वंश और 15000 जातियाँ ज्ञात हैं।

लाइकेन के सामान्य लक्षण

लाइकेन के मुख्य लक्षण Main symptoms of lichens

लाइकेन की उत्पत्ति कवक और शैवाल के संयोग से हुई है, किन्तु यह थैलोफाइटा के अंतर्गत आता है।

लाइकेन एक ही जैसा पौधा होता है, जो शैवाल और कवक के सहजीवी सम्बन्ध से बनता है। कवक शैवाल पर थैले की समान रहता है। 

लाइकेन वायु प्रदूषण (Air pollution) वाले स्थानों पर नहीं उगते यह वायु प्रदूषण का सूचक (Indicator) है।

लाइकेन ऐसी वनस्पतियाँ है जो वृक्षों की पत्तियों पर वृक्षों की छालों पर दीवारों पर पुराने खंडहरों पर चट्टानों और सभी प्रकार की शिलाओं पर उगे हुए रहते हैं।

लाइकेन का रंग धवल, भूरा, नारंगी, बैंगनी तथा नीला हो सकता है, जबकि कुछ लाइकेन चितकबरी रंग के भी होते हैं।

लाइकेन का शरीर जड़ पत्ती तना में विभाजित नहीं रहता यह थैलस के रूप में दिखाई देते हैं।  

लाइकेन के प्रकार का वर्णन Type of lichens

आकार और संरचना के आधार पर लाइकेन तीन प्रकार के होते है:- 

क्रस्टोस लाइकेन (Crustos lichen) - इन लाइकेन की आकृति में थैलस चपटा होता है, जबकि इसका आधार लंबा होता है।

यह अधिकतर (Mostaly) वृक्ष की छाल और शिलाओं से चिपके हुए पाए जाते हैं। जिन पर भूरे रंग की धारियाँ दिखाई देती हैं। 

फेलिओस लाइकेन (Felios lichen) - इस लाइकेन के थैलस (Thallus) में शाखित पत्तियों के जैसी अतिवृद्धियाँ होती हैं।

साधारण तौर पर यह मुड़ी हुई पत्तियों की भांति दिखाई देते हैं। इनमें छोटे छोटे से मूलभास होते इनकी सहायता से यह वृक्षों पर और चट्टानों पर चिपके रहते हैं। 

फ्रूटीकोज लाइकेन (Fruticose lichen) - इस लाइकेन में थैलस विकसित होता है और जननांग भी उपस्थित होते हैं। यह लाइकेन बेलनाकार और फीते की तरह दिखाई देते हैं। 

प्रजनन Reproduction 

लाइकेन में प्रजनन तीन प्रकार का होता है, कयिक प्रजनन (Somatic reproduction) लैंगिक प्रजनन (Sexual reproduction) और अलैंगिक प्रजनन (Asexual reproduction) 

लाइकेन का आर्थिक महत्व Economic importance of lichens

लाइकेन से विभिन्न प्रकार के रोगों के लिए औषधियाँ प्राप्त होती हैं, जैसे कि डायरिया (Diarrhea) पीलिया (Jaundice) काली खांसी (Hooping cough) हाइड्रोफोबिया (Hydrophobia) आदि।

कुछ लाइकेन ऐसे होते हैं, जिनसे एंटीबायोटिक्स (Antibiotics) भी प्राप्त की जाती है, जैसे असनिया नामक लाइकेन से असनिक एसिड प्राप्त किया जाता है।

कुछ लाइकेन सुगंधित होते हैं इसलिए इनसे इत्र का भी निर्माण किया जाता है जैसे कि लोबेरिया (Lobaria) एर्बेनिया (Ervenia) रेमेनिला (Ramanila) लाइकेन

लिटमस पेपर जो प्रयोगशाला में उपयोग में आता है उसका निर्माण रोसेला (Rocella) नामक लाइकेन से किया जाता है।

कुछ लाइकेन ऐसे होते हैं, जिनका उपयोग खाने के लिए भोजन के तौर पर किया जाता है, जैसे के आइसलैंड मॉस (Iceland moss) नामक लाइकेन का

उपयोग यूरोपीय देशों में केक का निर्माण करने में किया जाता है। जबकि दक्षिण भारत में दी परमेलिया (Permelia) नामक लाइकेन का उपयोग सालन बनाने में करते हैं।

लाइकेन मृदा के निर्माण में भी सहायक होते हैं, लाइकेन से मृदा को कई पोषक तत्व प्राप्त होते हैं जिससे मृदा का उपजाऊ पन बढ़ता है।

लाइकेन वायु प्रदूषण का महत्वपूर्ण संकेत देते हैं, क्योंकि लाइकेन की यह विशेषता होती है किस जहाँ पर वायु प्रदूषण अधिक होता है

वहाँ लाइकेन नहीं उग सकते है इसलिए लाइकेन का उपयोग करके वायु प्रदूषण संबंधित क्षेत्रों का ज्ञान प्राप्त होता है

कुछ लाइकेन पेड़ों की छालों पर उग जाते हैं उनको कोर्टिसोल लाइकेन तथा चट्टानों पर उगने वाले लाइक इनको सेक्सीकोल्स लाइकेन कहा जाता है।

दोस्तों आपने इस लेख में लाइकेन किसे कहते है what is lichens) लाइकेन के मुख्य लक्षण (Main symptoms of lichens) के बारे में पड़ा। आशा करता हूँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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