थॉर्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत Thorndike's theory of effort and error

थॉर्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत


थॉर्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत Thorndike's theory of effort and error

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख थॉर्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत (Effort and Error theory of thorndike) में। दोस्तों आज आप इस लेख के माध्यम से बाल विकास का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत पड़ेंगे।

दोस्तों इस सिद्धांत के बारे में यूपीटेट, सीटेट तथा अन्य शिक्षक सम्बन्धी परीक्षाओं में पूँछा जाता है। तो आइये दोस्तों करते है शुरू यह लेख थॉर्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत:-

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थॉर्नडाइक कौन था Who was Thorndike's

थार्नडाइक जिनका पूरा नाम एडवर्ड ली थार्नडाइक (Edward Lee Thorndike) है, का जन्म सन 1876 में विलियम्सबर्ग (मैसाचुसेट्स) में हुआ था। थॉर्नडाइक बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे।

इन्होने अपने जीवन का पूरा समय कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के शिक्षक महाविद्यालय में पशु व्यवहार तथा सीखने की कला के अनुसन्धान पर ही व्यतीत किया। वे यूएसए के एक महान मनोवैज्ञानिक थे। इनके ही अथाह प्रयास से शैक्षिक मनोविज्ञान की नीव पड़ी।

थॉर्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत

थॉर्नडाइक का सिद्धांत इन हिंदी Theory of Thorndike in hindi 

सीखने का प्रयास और त्रुटि का सिद्धांत के प्रतिपादक जाने-माने व्यवहारवादी थॉर्डाइक हैं। इस सिद्धांत को उत्तेजना (Stimulus) और प्रतिक्रिया (Respons)  का सिद्धांत अर्थात S-R theory के नाम से भी जाना जाता है।

इस सिद्धांत के द्वारा थॉर्नडाइक ने बताया है, कि जब किसी व्यक्ति के सामने कोई उद्दीपन होता है, तब वह विभिन्न प्रकार की अनुक्रिया करने लगता है। इस दौरान वह कई अनुक्रियायें गलत करता है और गलत करते-करते वह एक अनुक्रिया सही कर बैठता है

और प्राणी अपने को कुछ सही अनुक्रिया से जोड़ लेता है, तथा व्यक्ति उस अनुक्रिया को सही से करना सीख जाता है इस प्रकार से अनुक्रिया का संबंध उद्दीपन के साथ हो जाता है।

प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत का प्रयोग Pryas and truti ka sidhant ka Prayog 

थार्नडाइक ने कहा कि कोई भी प्राणी चाहे वह पशु या मनुष्य हो भूल करने के बाद जरूर सीखता है। उन्होंने अपना प्रयोग बिल्ली (Cat) पर किया इसके साथ ही उन्होंने कई अन्य जानवरों पर भी अपने प्रयोग कीए।

थार्नडाइक ने एक पिंजरे (Cage) में भूखी बिल्ली को बंद किया जिसका दरवाजा एक खटके से खुलता था। पिंजरे के बाहर भोजन रख दिया जो बिल्ली के लिए उद्दीपन का कार्य कर रहा था।

जिसको देखकर बिल्ली उद्दीप्त हो गई और भोजन खाने के लिए पिंजरे से बाहर निकलने के लिए प्रयत्न करने लगी। प्रयत्न करने के दौरान उसका पैर पिंजरा खुलने वाले खटके पर पड़ गया और पिंजरा खुल गया।

थार्नडाइक ने इस प्रयोग को बार-बार किया और अंत में बिल्ली पिजरें का दरवाजा खोलने में बिना किसी गलती के ही सक्षम हो गई। इस प्रकार से उद्दीपक और प्रतिक्रिया में संबंध स्थापित हो गया।

थार्नडाइक ने अपने इस सिद्धांत (Theory) में समझाने का प्रयास किया है, कि कोई कार्य करने में भूल अवश्य होती है, किंतु बार-बार उसे दोहराने पर गलतियों की संख्या बहुत ही कम हो जाती है और वह व्यक्ति उस कार्य को करना सीख जाता है। 

कक्षा शिक्षण में उपयोगिता Importence in classroom teaching 

थार्नडाइक के इस सिद्धांत से सीखने की क्रिया अत्यंत सरल हो जाती है।

यह सिद्धांत करके सीखने पर बल देता है जो आधुनिक समय में बहुत उपयोगी सिद्ध हो रहा है।

यह सिद्धांत मुख्य रूप से बड़े और बुद्धि वाले बालकों के लिए अधिक उपयोगी और महत्वपूर्ण है। 

थार्नडाइक के इस सिद्धांत के द्वारा शुद्ध भाषाई उच्चारण आसानी से सीखा जा सकता है।

इस सिद्धांत के द्वारा धैर्य और परिश्रम के गुणों का विकास संभव होता है।

दोस्तों आपने इस लेख में थॉर्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि का सिद्धांत (Effort and Error theory of thorndike) पड़ा। आशा करता हुँ आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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  3. हंटर आयोग 1882

1 टिप्पणियाँ

  1. इसमे बहुत सारे अच्छी इन्फॉर्मेशन दे गई जो युजफुल रहेगी ब्लॉग बहुत पसंद आ गया.Thank you so much

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