नेपोलियन के पतन के कारण Napoleon ke Patan Ke Karan 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख नेपोलियन के पतन के कारण में। दोस्तों नेपोलियन बोनापार्ट के बारे में तो सभी जानते हैं आज हम नेपोलियन बोनापार्ट के बारे में

इस लेख में बताने जा रहे हैं, कि नेपोलियन के पतन के मुख्य कारण क्या थे? तो आइए दोस्तों करते हैं, यह लेख शुरू नेपोलियन बोनापार्ट के पतन के कारण:-

नेपोलियन के पतन के कारण

समुद्रगुप्त का इतिहास

नेपोलियन बोनापार्ट कौन था who was Napoleon Bonapart 

नेपोलियन जिसे नेपोलियन बोनापार्ट कहते है, यूरोप का ही नहीं बल्कि विश्व इतिहास का एक महान व्यक्तित्व रहा है। यूरोप में उसका जितनी जल्दी से पदार्पण हुआ उतनी जल्दी ही वह विलुप्त भी हो गया।

नेपोलियन 1799 ईस्वी से 1814 ईसवी के बीच संपूर्ण यूरोप पर छाया रहा और उसने अपने कार्यों तथा विजयों के द्वारा अपने व्यक्तित्व का लोहा संपूर्ण विश्व में स्थापित कर दिया।

नेपोलियन एक साधारण से परिवार में जन्मा था और सिपाही के रूप में उसने अपना जीवन प्रारंभ किया था। किन्तु वह एक बहुमुखी प्रतिभा वाला व्यक्ति था, इसलिए वह फ्रांस के सम्राट के पद पर आसीन हो सका।

1807 में नेपोलियन बोनापार्ट उन्नति की चरम सीमा पर पहुँच गया था। नेपोलियन बोनापार्ट के लिए ग्रांट एंड टेंपरले ने लिखा है, कि 1807 में नेपोलियन अपनी शक्ति की चरम सीमा पर था

यदि वह उसी समय मर जाता तो उसका जीवन यूरोप के इतिहास एवं विश्व के इतिहास में सबसे चमत्कारपूर्ण बन जाता। नेपोलियन बोनापार्ट ने जो 1800 से 1807 ईसवी के बीच जो उन्नति की थी उतनी ही जल्दी वह पतन की ओर अग्रसर हो गया था।

नेपोलियन के पतन के कारण Napoleon ke Patan Ke Karan 

नेपोलियन के पतन के कई कारण हैं जिनमें से प्रमुख प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष कारणों को यहाँ पर उल्लेखित किया गया है:- 

असीमित महत्वकांक्षी

महत्वकांक्षी होना हर एक व्यक्ति का गुण होता है और सफलता भी महत्वकांक्षी होने पर ही प्राप्त होती है, किंतु जब महत्वकांक्षाएँ व्यक्ति की क्षमता से अधिक बढ़ जाती है, तब उसका पतन निश्चित ही होने लगता है और यही घटना नेपोलियन के साथ भी हुई।

नेपोलियन के पतन के लिए अन्य बाहरी कारणों से अधिक उसकी महत्वकांक्षाएँ जिम्मेदार मानी जाती हैं। नेपोलियन एक ऐसा शासक था जो अपनी सभी प्रकार की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किसी भी प्रकार की बाधा को नहीं चाहता था

और किसी भी हद तक जा सकता था। नेपोलियन एक ऐसा व्यक्ति था जो एक साधारण सिपाही से फ्रांस का सम्राट बन गया किंतु उसकी अभिलाषा और महत्वकांक्षा समाप्त नहीं हुई।

फ्रांस का सम्राट बनने के बाद भी वह संपूर्ण विश्व पर राज करना चाहता था। यही उसका पतन का कारण बन गया क्योंकि यूरोप के देशों ने उसके विरूद्ध संगठन स्थापित किया और उसके पतन के बीज बोना आरंभ कर दिए।

स्वयं की योग्यता पर आधारित राज्य 

नेपोलियन वास्तव में महान था और उसमें कई प्रकार की योग्यताएं थी। उसने अपनी योग्यता के दम पर ही फ्रांस का शासक होने का गौरव भी प्राप्त किया था, किंतु किसी भी राज्य को चलाने के लिए परामर्शदाताओं की आवश्यकता होती है,

लेकिन नेपोलियन किसी का भी परामर्श नहीं चाहता था, वह समझता था, कि वह सभी योग्यताओं से युक्त है और उसे किसी के भी परामर्श की आवश्यकता नहीं है।

नेपोलियन बोनापार्ट ने तालीरों और फूशे जैसे योग्य व्यक्तियों की सलाह भी त्याग दी। और अपनी मन की मनमानी करने लगा है, जो उसके पतन का कारण हो गया।

खराब स्वास्थ्य

किसी भी व्यक्ति का शरीर निश्चित समय तक ही उसका साथ देता है। बढ़ती उम्र होने के कारण नेपोलियन का स्वास्थ्य भी खराब होने लगा था और जब वाटरलू का अंतिम युद्ध हुआ था।

उस समय नेपोलियन का स्वास्थ्य खराब था, इसीलिए वह अपनी सेना का नेतृत्व ठीक प्रकार से नहीं कर पाया। जब उसने रूस का अभियान किया था, उस समय भी उसका स्वास्थ्य खराब था।

नेपोलियन के पतन के समस्त कारण एक ही शब्द थकान में निहित है। विभिन्न युद्धों में रत रहने के कारण उसमें थकान उत्पन्न हो गई थी और उसकी कार्यक्षमता, कार्य कुशलता भी समाप्त होने लगी थी जो उसका पतन का कारण बन गया। 

सैनिकवादी नीति

नेपोलियन की नीति सैनिकवादी नीति थी। इस नीति के आधार पर उसने अपने जीवन में बहुत उन्नति प्राप्त की। नेपोलियन मानता था, कि सैन्य बल ही उन्नति का मुख्य आधार है, तथा सभी प्रकार की उन्नति और

अभिलाषाओं की प्राप्ति के लिए सैन्य बल मजबूत होना अधिक आवश्यक है। नेपोलियन कहता था कि मैं और अधिक विजय और यश प्राप्त नहीं करूंगा तो मेरी सत्ता भी समाप्त हो जाएगी, क्योंकि आज मैं जो हूँ वह मुझे विजयों से ही प्राप्त हुआ है।

नेपोलियन मानता था, कि उसका सम्मान और यश विजय के द्वारा ही सुरक्षित रह सकता था, इसलिए वह हमेशा युद्ध में ही रत रहा। नेपोलियन का विचार था, कि जो सेना महानतम है, ईश्वर भी उनका साथ देता है।

किंतु नेपोलियन को यह ध्यान नहीं रहा कि सैन्यनीति किसी एक सीमित उद्देश्य की पूर्ति के लिए ठीक हो सकती है, किंतु प्रत्येक स्तर पर सेना का प्रयोग करना ठीक नहीं होता,

तथा सैनिक शक्ति के द्वारा राज्य को अधिक दिनों तक सुरक्षित भी नहीं रखा जा सकता। अतः कुछ समय के पश्चात नेपोलियन की सैन्य आवश्यकताएँ इतनी बढ़ गई कि उनको पूरा करना भी मुश्किल होने लगा था।

उसने अन्य देशों के सैनिक भी अपनी सेना में लिए जो उसके लिए घातक सिद्ध हुआ इसप्रकार स्वयं ही उसने अपने पतन के बीज बोने शुरू कर दिए। 

नेपोलियन के संबंधी

नेपोलियन के अपने सभी भाइयों बहनों तथा अन्य संबंधियों के साथ व्यवहार बहुत अच्छे और मधुर थे। नेपोलियन ने अपने भाइयों को सभी प्रकार की सहायता और उच्च पद प्रदान किए थे।

उसने अपने भाइयो लुई नेपोलियन को हॉलैंड जोसेफ़ को स्पेन जेरोम को वेस्टफेलिया का शासक नियुक्त किया था।

किंतु जब बात आई नेपोलियन की मदद करने की तब यह तीनों भाई मुकर गए और उन्होंने नेपोलियन की मदद नहीं की जो उसका पतन का कारण माना जाता है।

पोप के साथ दुर्व्यवहार

नेपोलियन एक उदार व्यक्ति भी था इसलिए उसके बहुत से व्यक्तियों के साथ अच्छे संबंध थे। किंतु अपनी महत्वकांक्षाओं के कारण उन संबंधों में विकार उत्पन्न होने लगे।

नेपोलियन के पोप के साथ भी प्रारंभ में अच्छे संबंध थे किंतु जब बात महाद्वीपीय व्यवस्था की आई तब पोप और नेपोलियन के संबंध में कड़वाहट आ गई और उसने अपनी शक्ति के आवेश में आकर

पोप को बंदी भी बना लिया, जिस कारण संपूर्ण कैथोलिक वर्ग नेपोलियन के विरुद्ध खड़ा हो गया। पोप को बंदी बनाना नेपोलियन की बहुत बड़ी भूल मानी जाती है।

महाद्वीपीय व्यवस्था

नेपोलियन की महाद्वीपीय व्यवस्था भी नेपोलियन के पतन का कारण मानी जाती है। नेपोलियन चाहता था, कि इंग्लैंड उसके सामने अपने घुटने टेक दे। इसलिए नेपोलियन ने महाद्वीपीय व्यवस्था लागू की।

नेपोलियन मानता था, कि इंग्लैंड व्यापारियों का देश है, अगर इंग्लैंड के साथ व्यापार को बंद कर दिया जाए तो इंग्लैंड आर्थिक दृष्टि से टूट जाएगा और नेपोलियन के सामने घुटने टेक देगा।

किंतु ऐसा नहीं हुआ क्योंकि इंग्लैंड यूरोप के विभिन्न देशों को कई आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करता था। इंग्लैंड के साथ व्यापार बंद होने पर यूरोप के देशों में उन वस्तुओं का आयात होना बंद हो गया

जिस कारण नेपोलियन की महाद्वीपीय व्यवस्था का विरोध होने लगा। आक्रामक युद्ध जैसी स्थितियाँ उत्पन्न होने लगी और नेपोलियन के यूरोपीय देशों से संबंध खराब होते चले गए। 

स्पेन से युद्ध

स्पेन से युद्ध करना नेपोलियन की एक सबसे बड़ी भूल मानी जाती है, जिसे नेपोलियन ने भी स्वीकार किया था। नेपोलियन का स्पेंन युद्ध लंबे समय तक हुआ था जिसमें उसकी सैन्य क्षति सबसे अधिक हुई। नेपोलियन ने स्वयं कहा था कि स्पेन का युद्ध उसके लिए एक नासूर जैसा था।

रूसी अभियान

रूसी अभियान भी नेपोलियन के लिए एक विनाशकारी अभियान के रूप में साबित हुआ। नेपोलियन तथा रूस के मध्य 1807 में टिलसिट की संधि हुई थी और दोनों देशों में मधुर संबंध स्थापित हुए।

किंतु महाद्वीपीय व्यवस्था के कारण यह संबंध खराब होने लगे और 1812 ईस्वी में नेपोलियन ने अपने लगभग 500000 सैनिको के साथ रूस की ओर प्रस्थान कर दिया किंतु जब वह वापस फ्रांस पहुंचा तो उसके पास मात्र 20000 ही सैनिक थे।

इस पर यह हनुमान आराम से लगाया जा सकता है, कि नेपोलियन को कितनी अधिक क्षति का सामना करना पड़ा था और उसकी सैन्य शक्ति भी कमजोर हो गई।

नेपोलियन का स्वभाव

नेपोलियन का स्वाभाविक भी उसके पतन का कारण है नेपोलियन एक हठी और महत्वकांक्षी व्यक्ति था। वह अपने विचारों के सामने किसी की चलने ही नहीं देता था। उसने कई विद्वान लोगों के महत्वपूर्ण सुझावों को भी नकार दिया था।

उसने कई ऐसी नीतियाँ और ऐसे कार्य किये जो उसके लिए घातक सिद्ध होने लगे थे। नेपोलियन खुद अपनी नीतियाँ बनाता था तथा उन नीतियों के बारे में किसी भी विद्वान व्यक्ति से सलाह नहीं लेता था।

उसे जो करना है, वह अपने मन की करता था। उसने अपने जीवन में अनेक युद्ध किए इस बात को उसने स्वीकार किया है, कि उसे अनेक युद्ध नहीं करने चाहिए थे। कई युद्ध करने पर उसकी सैन्य शक्ति भी कम होने लगी थी। 

नेपोलियन की कई भूलें

नेपोलियन के पतन के कारण में उसकी कई भूलें जिम्मेदार मानी जाती हैं:- जैसे कि महाद्वीपीय व्यवस्था को लागू करनास्पेन पर आक्रमण करना, रूस पर आक्रमण करना

और किसी भी देश की शत्रु सेना को कमजोर समझना, वाटरलू के युद्ध के समय देश पर आक्रमण करना आदि के कारण उसका पतन हुआ है।

इंग्लैंड से दुश्मनी

इंग्लैंड एक शक्तिशाली राष्ट्र था। इसके साथ ही वह मानता था, कि इंग्लैंड एक व्यापारियों का देश है।नेपोलियन शुरू से इंग्लैंड को परास्त करना चाहता था किंतु इग्लैंड चारों ओर से समुद्र से घिरा था

जबकि उसकी समुद्री सेना भी विशाल और ताकतवर थी, इसलिए नेपोलियन इंग्लैंड को जीत नहीं कर पाया। और उसने अपनी कूटनीतिक रचना रचते हुए इग्लैंड को आर्थिक दृष्टि से कमजोर करना चाहा,

कि इंग्लैंड उसके सामने झुक जाए। किंतु नेपोलियन की यह कूटनीतिक रचना उसके ऊपर ही गलत प्रभाव डालने लगी।

जब उसकी महाद्वीपीय व्यवस्था के कारण यूरोप के देशों में इंग्लैंड से आयात होने वाली वस्तुऐं बंद हो गई तथा यूरोप के देशों तथा नेपोलियन के मध्य संबंध खराब होते चले गए। 

दोस्तों आपने यहाँ पर नेपोलियन बोनापार्ट के पतन के कारण पड़े आशा करता हूँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा। 

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