कृषि के बारे में जानकारी Information about agriculture

कृषि के बारे में जानकारी


कृषि के बारे में जानकारी Information about agriculture

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख कृषि के बारे में जानकारी (Information about Agriculture) में। इस लेख के माध्यम से आप जानेंगे कृषि किसे कहते हैं? कृषि विज्ञान की शाखाएँ कौन-कौन सी है?

कृषि के प्रकार तथा महत्त्व। दोस्तों यहाँ से आप कृषि के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कर सकते है, जो कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पूँछी जाती है। तो आइये दोस्तों करते है, यह लेख शुरू कृषि के बारे में जानकारी:-

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कृषि किसे कहते हैं What is agriculture

कृषि ऐसा आधारभूत व्यवसाय तथा माध्यम है जिसके द्वारा जीवन संभव होता है। इसलिए लंबे समय से ही मनुष्य के द्वारा कृषि की जा रही है कृषि से प्राप्त उत्पाद के द्वारा मनुष्य अपना पोषण करके शरीर की वृद्धि और विकास करता है।

साधारण शब्दों में कहा जा सकता है।  कृषि एक परंपरागत देशी पद्धति है, जिसके अंतर्गत भूमि को जोतकार उनमें बीज बोकर, सिंचाई आदि करके फसल उत्पादित की जाती है।

इसके अंतर्गत आने वाली समस्त क्रियाओं को कृषि कहा जाता है। समान्यत: कहा जा सकता है कि कृषि एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें देसी तथा वैज्ञानिक पद्धति के द्वारा में बीज बोकर

विभिन्न प्रकार की फसलों को उगाया जाता है। पशुपालन डेयरी फार्मिंग को भी शामिल किया गया है क्योंकि यह भी किसी के आधारभूत अंग है।

मिट्टी के आधार पर विदेशों में विभिन्न प्रकार की कृषि की जाती हैं, तथा फसलों का उत्पादन किया जाता है। भारत की लगभग 60% से भी अधिक जनसंख्या अपनी आजीविका

कृषि से ही प्राप्त करती है इसलिए भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ (backbone of india's economy) कृषि को ही कहा जाता है। 

कृषि के बारे में जानकारी

कृषि विज्ञान की शाखाएँ Branches of agricultural science

शस्य विज्ञान - इसके अंतर्गत कृषि फसलों तथा मृदा प्रबंधों का अध्ययन किया जाता है। 

मृदा संरक्षण विज्ञान - कृषि विज्ञान की वह शाखा जिसमें मृदा को अपरदन से बचाने और उसकी उर्वरता को कायम रखने का अध्ययन किया जाता है।

पादप दैहकी - कृषि विज्ञान की यह वह शाखा है, जिसके अंतर्गत पौधों में होने वाली विभिन्न प्रकार की दैहिक क्रियाओं का अध्ययन होता है।

हॉर्टिकल्चर - हॉर्टिकल्चर कृषि विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अंतर्गत फल फूल वाली फसलों का अध्ययन किया जाता है।

मृदा विज्ञान - मृदा विज्ञान कृषि विज्ञान की वह एक शाखा है, जिसके अंतर्गत मृदा के समस्त पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।

पादप रोग विज्ञान - पादप रोग विज्ञान में पौधों में होने वाले विभिन्न प्रकार के रोग उनके कारण, लक्षण तथा निदान का अध्ययन होता है।

पादप आनुवंशिकी - पादप अनुवांशिकी के अंतर्गत पादपों में प्रजनन तथा नए पदपों का विकास और उनका अध्ययन किया जाता है।

कीट विज्ञान - कीट विज्ञान कृषि विज्ञान की वह शाखा है, जिसके अंतर्गत पौधों में लगने वाले कीट तथा उनके रोकथाम के उपायों का अध्ययन होता है।

कृषि अभियंत्रण - कृषि में प्रयुक्त मशीनों तथा कल पुर्जों का अध्ययन कृषि अभियंत्रण के अंतर्गत आता है। 

कृषि के प्रकार Types of agriculture

स्थानांतरित कृषि Shifting agriculture

स्थानांतरित कृषि को प्राचीन कृषि के नाम से भी जाना जाता है। इस कृषि में कुल्हाड़ी तथा अन्य उपकरणों के द्वारा पहले वनो को साफ किया जाता है।

झाड़ियों को और वृक्षों को काट दिया जाता है तथा जलाकर भूमि को कृषि के योग्य बनाते हैं और उस पर कृषि (Agriculture) करते हैं।

कुछ वर्षों तक उस पर लगातार कृषि की जाती है और जब उस भूमि की उर्वरता (Fertility) खत्म हो जाती है तब उसको छोड़कर और किसी वन क्षेत्र पर यही के क्रिया दोहराई जाती है।

स्थानांतरित कृषि में वन को काटना, जलाना तथा उस पर कुछ समय के लिए कृषि करना आदि सम्मिलित किया जाता है।

स्थानांतरित कृषि में खेतों का आकार छोटा होता है और एक समय में एक से अधिक भी फसल उगाई जाती हैं। स्थानांतरित कृषि को वियतनाम में रे, पश्चिमी अफ्रीका में लोगन, वेनेजुएला में कोनूको श्रीलंका में चेना, उत्तर पूर्वी भारत में झूम के नाम से जाना जाता है। 

स्थानबद्ध पद्धति कृषि Local farming

स्थानबद्ध कृषि स्थानांतरित कृषि के विपरीत कृषि पद्धति कही जाती है, क्योंकि इस पद्धति में एक ही स्थान पर रहकर स्थाई रूप से कृषि की जाती है।

स्थानबद्ध कृषि पद्धति विश्व के समस्त भागों में प्रचलित कृषि पद्धति है जिसमें खेतों का आकार बड़ा होता है और उत्पादन क्षमता भी अत्यधिक होती है। 

जीविका कृषि Subsistence agriculture

जीविका कृषि वह कृषि है जिसमें संपूर्ण रूप से खेती करने वाले परिवार या उसी क्षेत्र में खप जाती है। इसलिए उसे जीविका कृषि के नाम से जाना जाता है।

इसके अंतर्गत धान, गेहूँ, दाल, मक्का, ज्वार, बाजरा, गन्ना,  सोयाबीन, कंदमूल वाली फसलें साग सब्जी की फसलें सिम्मिलित की गई हैं।

गहन कृषि Intensive farming

गहन कृषि का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक उत्पादन करना होता है, इसलिए इसका आकार भी बड़ा होता है और पूंजी तथा श्रम भी अधिक मात्रा में लगाना पड़ता है। इस कृषि का क्षेत्र बड़ा होने पर इसमें उर्वरक,

सिंचाई तथा उत्पादन के लिए वैज्ञानिक पद्धति (Scientific Method) से खेती की जाती है। इसमें अच्छी किस्म के बीज, कीटनाशक और खाद का उपयोग प्रचुर मात्रा में किया जाता है, ताकि उत्पादन अधिक से अधिक मात्रा में किया जा सके। 

विस्तृत कृषि Extensive agriculture

विस्तृत कृषि भी वैज्ञानिक तरीके तथा विभिन्न प्रकार के यांत्रिक उपकरणों का उपयोग करके बड़े आकार में की जाने वाली कृषि होती है। इस प्रकार की कृषि में श्रमिकों का प्रयोग बहुत ही कम किया जाता है, किंतु उत्पादन बहुत अधिक मात्रा में होता है।

पूर्व सोवियत संघ का स्टेफी क्षेत्र, यूएसए का मध्यवर्ती तथा पश्चिमी मैदानी भाग,  कनाडा का प्रेयरी क्षेत्र, अर्जेंटीना का पंपास और ऑस्ट्रेलिया का डांउन्स क्षेत्र विस्तृत कृषि के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र हैं।

मिश्रित कृषि Mixed Agriculture

मिश्रित कृषि कृषि का वह प्रकार है, जिसके अंतर्गत किसी एक फसल की कृषि तो की जाती है, किंतु इसके साथ अन्य कृषि संबंधित व्यवसाय, पशु पालन, मुर्गी पालन, मछली पालन भी किया जाता है।

उस कृषि को मिश्रित किसी के नाम से जाना जाता है। संपूर्ण यूरोप महाद्वीप में, यूएसए के पूर्वी भाग में, दक्षिणी पूर्वी ऑस्ट्रेलिया, में अर्जेंटीना का पंपास क्षेत्रों में, दक्षिण अफ्रीका तथा न्यूजीलैंड के कुछ क्षेत्रों में इसका अधिक प्रचलन होता है।

रोपण बागानी कृषि Planting Plantation Agriculture

बागानी या रोपण कृषि व्यापारिक उद्देश्य से की जाने वाली कृषि होती है। इस कृषि के अंतर्गत नगदी फसलें अधिक पैमाने पर उपजाई जाती हैं। इनका निर्यात विदेशों में भी किया जाता है।

इस कृषि के अंतर्गत बड़े-बड़े फॉर्म (Farm) बने होते हैं, जहाँ पर यह कृषि की जाती है, जिसमें रबड़, कोको, कहवा, नारियल, चाय, कपास, पटसन आदि को समाहित किया गया है।

डेयरी फार्मिंग Dairy farming

डेयरी फार्मिंग भी कृषि का ही एक विशेष प्रकार है जिसमें दूध देने वाले पशुओं के प्रजनन उनके पालन और उनका विशेष ध्यान रखा जाता है। अच्छी दुधारी नस्लों को उत्पन्न किया जाता है।

ग्रेट ब्रिटेन, आयरलैंड, डेनमार्क, नीदरलैंड, बेल्जियम, स्विटजरलैंड, फ्रांस, उत्तरी अमेरिका के साथ विश्व के कई क्षेत्रों में डेयरी फार्मिंग (Dairy Farming) बड़े पैमाने पर की जाने वाली कृषि है। 

ट्रक फार्मिंग Truck farming

ट्रक फार्मिंग में वह कृषि आती हैं जो व्यापारिक स्तर पर उगाई जाती है। इसमें उत्पादन इतना अधिक होता है, कि इस कृषि से प्राप्त उपज को ट्रकों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुँचाया जाता है, इसलिए इस कृषि को ट्रक फार्मिंग के नाम से जाना जाता है।  

कृषि के विशेष प्रकार Special types of agriculture

एपीकल्चर - एपीकल्चर मधुमक्खियों के पालन से संबंधित हैं, जिसमें मधुमक्खियों को व्यापारिक स्तर पर तथा वैज्ञानिक पद्धतियों के द्वारा पाला जाता है।

आरबरीकल्चर - आरबरीकल्चर में विभिन्न प्रकार के वृक्षों और झाड़ियों का संरक्षण उनका संवर्धन किया जाता है।

फ्लोरीकल्चर - व्यापारिक स्तर पर की जाने वाली फूलों की खेती को फ्लोरीकल्चर कहा जाता है।

मैरीकल्चर - विभिन्न प्रकार के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए व्यापारिक स्तर पर समुद्री जीवो का उत्पादन मैरीकल्चर कहलाता है।

हॉर्सीकल्चर - सवारी, यातायात तथा परिवहन के उद्देश्य से घोड़ों और खच्चरों का व्यापारिक स्तर पर पालना हॉर्सीकल्चर कहलाता है।

ओलेरीकल्चर - जमीन पर विभिन्न प्रकार की सब्जियों की कृषि ओलेरीकल्चर कहलाती है।

पिसी कल्चर - व्यापारिक स्तर पर तथा वैज्ञानिक पद्धति से मछलियों को पालने की क्रिया पिसीकल्चर कहलाती है।

सेरीकल्चर - उत्पादन के लिए रेशम कीट को शहतूत के पेड़ पर पालने की कृषि को सेरीकल्चर कहा जाता है।

विटीकल्चर - खेती के इस प्रकार में व्यापारिक स्तर पर अंगूर का उत्पादन किया जाता है।

सिल्वीकल्चर - वनों के संरक्षण संवर्धन को ही सिल्वीकल्चर के नाम से जाना जाता है।

मोरिकल्चर - व्यापारिक स्तर पर शहतूत की कृषि को ही मोरिकल्चर के नाम से जानते हैं।

ओलिवीकल्चर - जैतून की खेती व्यापारिक स्तर पर की जाती है, उस खेती को ओलिवीकल्चर के नाम से जाना जाता है।

वर्मीकल्चर - वर्मी कल्चर में केंचूआँ का उत्पादन व्यापारिक स्तर पर तथा वैज्ञानिक पद्धति से किया जाता है।

वेजीकल्चर - आदिमानव के द्वारा दक्षिण पूर्व एशिया में की गई वृक्षों की आदिम कृषि को वेजीकल्चर कहते हैं। 

भारतीय कृषि का महत्व Importance of Indian Agriculture

कृषि का महत्व सभी देश के मनुष्यों के लिए है, क्योंकि कृषि के उत्पाद ही मनुष्य खाद्य के रूप में उपयोग करता है और अपने शरीर की वृद्धि और विकास करता है।

देश विदेश में वहाँ की जलवायु मिट्टी की उर्वरा क्षमता आदि के आधार पर कृषि की जाती है। बहुत सी फसलों का निर्यात और आयात भी किया जाता है,

इसीलिए मानव जीवन में कृषि का महत्व सबसे अधिक माना गया है। कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है, क्योंकि 60% से अधिक जनसंख्या कृषि पर ही निर्भर करती है,

तथा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कृषि से अपनी आजीविका चलाती है। भारत की जीडीपी (Gross Domestic Product) में भी कृषि का लगभग 22% के आसपास हिस्सा आता है।

कृषि के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को रोजगार प्राप्त होता है और कृषि से प्राप्त कच्चे उत्पादों से विभिन्न प्रकार के उद्योगों को भी चलाया जा रहा है।

कपास, चीनी, पटसन, जूट, तंबाकू आदि ऐसे कई उद्योग हैं, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलाए जाते हैं, जिनका मुख्य आधार कृषि है।

कई मुख्य उद्योगों को आधारभूत शक्ति कृषि प्रदान करती है,  तथा रोजगार के अवसर प्रदान करती है। कृषि के अंतर्गत पशुपालन, डेयरी फार्मिंग, मत्स्य पालन के द्वारा भी मनुष्य रोजगार प्राप्त कर रहा है,

तथा आजीविका का साधन भी प्राप्त करता जा रहा है। इसलिए कृषि एक आधारभूत और एक महत्वपूर्ण उद्योग माना जाता है।

दोस्तों इस लेख में आपने कृषि के बारे में जानकारी (Information about agriculture) पढ़ी। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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