ह्वेनसांग का भारत विवरण Hvenasaang ka bhaarat vivaran

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत -बहुत स्वागत है, इस लेख ह्वेनसांग का भारत विवरण में। दोस्तों यहाँ पर आप ह्वेनसांग का भारत विवरण में सी-यू-की किसकी रचना है?

ह्वेनसांग कौन था जीवन परिचय ह्वेनसांग की भारत यात्रा के साथ विभिन्न तत्व जान सकेंगे। तो आइये दोस्तों करते है यह लेख शुरू ह्वेनसांग का भारत विवरण:-

समुद्रगुप्त का इतिहास

ह्वेनसांग का भारत विवरण


सी-यू-की किसकी रचना है Whose composition is Si-u-ki

चीनी यात्री ह्वेनसांग वर्धन वंश के महान शासक हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया था। ह्वेनसांग का भारत आना हर्ष के साम्राज्य की एक प्रमुख घटना माना जाता है। क्योंकि ह्वेनसांग ने भारत में रहकर

अपने यात्रा वृतांत में तत्कालीन राजनीति, सामाजिक, बौद्ध धर्म की स्थिति आदि के बारे में विस्तार से विवरण दिया है। ह्वेनसांग के इस ग्रंथ को सी-यू-की के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है,

कि ह्वेनसांग के वृतांत के बिना भारत का प्राचीन इतिहास अधूरा जान पड़ता है। बी. ए. स्मिथ ने हिंदुस्तान के विवरण पर ध्यान देते हुए कहा है

कि ह्वेनसांग की सी-यू-की रचना सच्चे समाचार का अमूल्य कोष है जिसका अध्ययन करने वाले विद्यार्थी प्राचीन खोजों के बारे में अच्छी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

इस ग्रंथ के द्वारा भारतीय इतिहास के बारे में विभिन्न तथ्य प्राप्त होते हैं। भारत के शासन काल की राजनीतिक, सामाजिक धार्मिक आदि स्थितियों का वर्णन इसमें मिलता है।

इसलिए भारतीय इतिहास की दृष्टि से चीनी यात्री हेनसांग का वृतांत एक मूल्यवान भूमिका रखता है, तथा हेनसांग को इस महान कार्य के कारण यात्रियों का राजकुमार और नीति का पंडित भी कहा जाता है। 

ह्वेनसांग कौन था जीवन परिचय Who was Hiuen Tsang Biography

ह्वेनसांग एक चीनी यात्री था, जिसका जन्म 600 ई. में चीन देश के शहर होनान फू के समीप हुआ था। उनके पिता का नाम चेन हुई था, जो कन्फूशियसवादी थे।

ह्वेनसांग के परिवार में उसके माता-पिता तथा 3 बड़े भाई थे। ह्वेनसांग ने 13 वर्ष की आयु में ही बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण करना शुरू कर दिया और बौद्ध धर्म की शिक्षा का प्रचार प्रसार किया।

20 वर्ष की अवस्था में हेनसांग बौद्ध भिक्षु बन गया, और चीन में रहकर बहुत साहित्यता से बौद्ध धर्म का गहन अध्ययन किया और बारीकी से समझने की कोशिश की।

किंतु बहुत सारी आशंकाओं को निवारण के लिए उसने भारत की यात्रा 629 ईसवी में प्रारंभ कर दी। कियोकि उस समय भारत बौद्ध धर्म से संपन्न देश था। भारत के बौद्ध भिक्षुओं का ज्ञान अन्य देशों से महान था।

इसलिए ह्वेनसांग ने भारत की यात्रा की तथा कई बौद्ध मठो में रहकर अपनी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया तत्पश्चात विभिन्न बौद्ध धर्म ग्रंथों, प्रतिलिपियों को अपने वतन ले 645 ईस्वी में लेकर पहुँचा। ह्वेनसांग की मृत्यु 664 ईसवी में उसके वतन चीन में हो गई। 

ह्वेनसांग की भारत यात्रा Hiuen Tsang's visit to India

ह्वेनसांग बचपन से ही बौद्ध धर्म के प्रति आकर्षित था इसलिए उसने 13 वर्ष की अवस्था में ही बौद्ध धर्म की शिक्षा प्रारंभ कर दी और शिक्षा ग्रहण करके बौद्ध भिक्षु बन गया।

किंतु अपनी विभिन्न आशंकाओं के चलते उनका हल ढूंढने के लिए वह भारत की यात्रा के लिए प्रस्थान कर गया। उसने 629 ईस्वी में भारत की ओर प्रस्थान किया, तथा 630 ईस्वी में भारत पहुँच गया।

सबसे पहले वह काशगर, शकरकंद और वल्ख से होते हुए वनियान तक पहुँच गया। इसके बाद वनियान से चलते हुए अफगानिस्तान, पुरुषपुर के सहारे सिंधु नदी को पार करते हुए प्रसिद्ध बौद्ध नागरी तक्षशिला पहुँचा

उसने रास्ते में विभिन्न बौद्ध मठ, स्तूप, चैत्य और बौद्ध विहारों को देखा तथा वहाँ पर रहकर बौद्ध धर्म का अध्ययन भी किया। तक्षशिला के पश्चात् वह कश्मीर पहुँचा जहाँ 631 ईसवी से 633 ईसवी तक रहा

 तथा कश्मीर के बाद उसने विभिन्न बौद्ध स्थलों की यात्रा की और अपनी आशंकाओं को समाप्त करता गया। कन्नौज में हर्षवर्धन द्वारा ह्वेनसांग का भव्य स्वागत किया गया तथा कन्नौज व प्रयाग के सम्मेलनों में

उसे विशेष तौर पर सम्मानित भी किया गया। 644 ईसवी तक भारत में रहने के पश्चात उसने चीन की ओर जाना प्रारंभ कर दिया तथा अफगानिस्तान, काशगर और खोतान होता हुआ

वह 645 ईसवी में चीन अपने वतन पहुंच वापस आ गया। इस यात्रा के बीच हेनसांग ने भारत के विभिन्न बौद्ध धर्म संबंधित स्थलों का भ्रमण किया और बौद्ध धर्म से संबंधित ग्रंथ, प्रतिलिपि,

महात्मा बुद्ध की मूर्तियाँ स्मारक चिन्ह अपने साथ चीन ले गया। हवेनसंग भारतवर्ष में लगभग 10 वर्षों तक रहा जिसमें उसने 6 वर्ष तक नालंदा विश्वविद्यालय में रहकर अध्ययन किया था।  

ह्वेनसांग का भारत विवरण Hiuen Tsang's India Overview

बताया जाता है कि ह्वेनसांग का यात्रा वृतांत तीन रूपों में उपलब्ध है। पहला हेनसांग द्वारा लिखा गया सी-यू-की ग्रंथ दूसरा ह्वेनसांग की जीवनी जो उसके मित्र शयन ली ने लिखी तथा तीसरा ग्रंथ

ह्वेनसांग का यात्रा वृतांत माना जाता है जिसे उसके एक शिष्य ने लिखा था जिसका नाम कांचू था। ह्वेनसांग का भारत विवरण के प्रमुख तथ्य निम्न प्रकार से हैं:- 

राजनीतिक दशा Political situation

चीनी यात्री ह्वेनसांग हर्षवर्धन के शासनकाल में भारत आया था इसलिए उसने तत्कालीन समय की राजनीतिक दशा का वर्णन अपने ग्रंथ में किया है।

उसने बताया है, कि हर्ष का शासन उदार सिद्धांतों पर आधारित था और हर्ष भी एक अत्यंत उदार शासक हुआ करता था। उसके शासन के समस्त कार्य जनहित में ही हुआ करते थे।

उस समय राजा का समय भी तीन भागों में बटाँ हुआ था जिसमें दिन का पहला भाग शासन के मामलों में तथा शेष भाग धार्मिक कार्यों में व्यतीत हो जाता था।

हर्षवर्धन अपनी प्रजा को सभी प्रकार से सुख और समृद्धि प्राप्त कराने में अपना समय व्यतीत करते थे। हर्ष के शासनकाल में प्रजा विरोधी कर उपलब्ध नहीं थे

न्याय व्यवस्था भी उत्तम और अत्यंत सक्षम थी, जो अपराधी होते थे, उनके लिए कठोर दंड निर्धारित किए जाते थे। इसलिए उनके शासनकाल में अपराध जैसे कार्य बहुत ही कम होते थे।

ह्वेनसांग के अनुसार हर्षवर्धन की राजधानी कन्नौज थी उन्होंने बताया है, कि हर्ष की एक बहुत ही विशाल शक्तिशाली सेना थी, जिसमें 60000 हाथी और 10 लाख से ऊपर घुड़सवार थे। 

आर्थिक स्थिति Economic condition

ह्वेनसांग की यात्रा वृतांत से हर्षवर्धन के शासनकाल की आर्थिक स्थिति के बारे में भी जानकारी पर्याप्त मात्रा में प्राप्त होती है। हर्षवर्धन के समय कृषि मुख्य रूप से आर्थिक स्थिति का आधार थी।

जनता के द्वारा कृषि की जाती थी जो उनकी रोजी-रोटी का साधन हुआ करता था। खेती राज्य के सभी भागों में होती थी इसके साथ ही अन्य फल फूल अधिक मात्रा में पैदा किए जाते थे।

सिंचाई की भी व्यवस्था थी इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के व्यवसाय संबंधित कार्य भी होते थे। चंदन की लकड़ी, जड़ी बूटियाँ, गरम मसाले, कपड़े तथा अन्य वस्तुएँ भारत से निर्यात होती थी तथा भारत को घोड़े, हाथी दांत आदि वस्तुओं का आयात भी होता था।

ह्वेनसांग के अनुसार उस समय भारत में मसाले, रेशम कपड़ा बहुत अधिक तैयार किया जाता था जो पड़ोस के देशों के लिए निर्यात होता था, जिन से विदेशी मुद्रा तथा अन्य विदेशी सामग्री प्राप्त होती थी।

धार्मिक स्थिति Religious status

ह्वेनसांग के वृतांत के आधार पर पता चलता है, कि उस समय भारत में बौद्ध धर्म के साथ ही विभिन्न धर्म के अनुयायी रहा करते थे। किंतु हर्षवर्धन बौद्ध धर्म का अनुयाई था। उसके शासनकाल में बौद्ध धर्म अपने विकास के चरमोत्कर्ष पर पहुँच गया था।

ह्वेनसांग की यात्रा वृतांत में बताया गया है, कि उस समय कुछ लोग तो अपने सिर पर मोर का पंख धारण करते थे, तो कुछ लोग मुंडमाल जबकि कुछ लोग बिना वस्त्रों के भी रहा करते थे

और कुछ लोग घास, लकड़ी के तख्तों से अपने शरीर को ढका करते थे। कुछ धर्म के लोग अपने बालों को उखाड़ते थे और कुछ मूंछो को कटवाते थे, जबकि कुछ ऐसे लोग भी हुआ करते थे

जो अपने बालों को जटाओं में परिवर्तित कर लेते थे और घुमावदार चोटी धारण करते थे। इन सभी से स्पष्ट होता है, कि हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान भारत में विभिन्न धार्मिक संप्रदाय दार्शनिक सन्यासी रहा करते थे

जिनमें सबसे शक्तिशाली शैव संप्रदाय को माना जाता था। किन्तु ह्वेनसांग ने बौद्ध धर्म को अपनाया और उसका प्रचार प्रसार किया। 

सामाजिक स्थिति Social status

तत्कालीन समय में सामाजिक स्थिति पर भी व्यापक प्रकाश ह्वेनसांग के द्वारा डाला गया। ह्वेनसांग के यात्रा वृतांत में बताया गया है, कि जाति के आधार पर नियम बनाए गए थे।

चार प्रकार की जातियाँ ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र उस समय हुआ करती थी। इस ग्रन्थ में ब्राह्मणों की अत्यंत प्रशंसा की गई है।

ब्राह्मण अपने नियम से रहते तथा ब्राह्मणो द्वारा बनाये सिद्धांतों का पालन सभी करते थे। ब्राह्मण कठोरता से शुद्ध आचरण करते अनुष्ठान करते थे।

ह्वेनसांग ने क्षत्रियों को भी अधिक प्रशंसनीय बताया है जो प्रजा की रक्षा करते और मितव्ययी थे। ह्वेनसांग ने कहा है, कि उस समय वैश्य जाति के लोगों का भी राजनीति पर अच्छा प्रभाव होता था,

कियोकि उनके हाथों में राष्ट्र की आर्थिक शक्ति निहित होती थी। ह्वेनसांग ने शूद्रों के विषय में कहा है, उस समय पर शूद्र हुआ करते थे जो विभिन्न प्रकार की छोटी मोटी गतिविधियों में लगे रहते थे।

शूद्र को छोटे-मोटे सफाई से लेकर अन्य लोगों की सेवा जैसे विषयों में संलग्न होना पड़ता था। ह्वेनसांग के अनुसार अंतरजाति विवाह उस समय प्रचलित नहीं थे। स्त्रियों का पुनर्विवाह नहीं होता था किंतु उस समय समाज में सती प्रथा प्रचलित थी।

समाज में बहुविवाह की भी प्रथा चलती थी। स्त्री पुरुष दोनों की शिक्षा पर विशेष ध्यान होता था। प्रजाजन शाकाहारी शुद्ध भोजन ग्रहण करते थे प्याज, लहसुन, मांस मदिरा का बिल्कुल प्रयोग नहीं होता था।

लोग सादा मकानों में रहते थे। नाटक, नौटंकी विभिन्न प्रकार के खेल मनोरंजन के साधन उस समय पर उपलब्ध थे।

दोस्तों आपने इस लेख में ह्वेनसांग का भारत विवरण पड़ा आशा करता हूँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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