तक्षशिला विश्वविद्यालय का इतिहास

तक्षशिला विश्वविद्यालय का इतिहास history of Taxila University 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है इस लेख तक्षशिला विश्वविद्यालय का इतिहास मे। दोस्तों इस लेख मे आप तक्षशिला विश्वविद्यालय क्या है? तक्षशिला विश्वविद्यालय की स्थापना

तक्षशिला विश्वविद्यालय के संस्थापक कौन है? तक्षशिला विश्वविद्यालय का विध्वंस आदि के बारे मे पड़ेंगे। तो आइये दोस्तों करते है यह लेख शुरू तक्षशिला विश्वविद्यालय का इतिहास:-

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तक्षशिला विश्वविद्यालय क्या है what is Taxila University 

तक्षशिला विश्व का सबसे पहला और बड़ा विश्वविद्यालय है, जो पाकिस्तान में रावलपिंडी से 18 किलोमीटर दूर स्थित है। यह एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय था जहां पर लगभग 60 से अधिक विषयों को पढ़ाया जाता था

और 10,000 से अधिक छात्र यहां पर रहकर अध्ययन किया करते थे। इस विश्वविद्यालय मे विश्व के कोने-कोने से विद्यार्थी और विद्वान आते थे।

तक्षशिला विश्वविद्यालय को कई राजा महाराजाओं का संरक्षण प्राप्त हुआ जिस कारण उसका विकास हुआ। तक्षशिला में विश्व के कई विद्वानों ने अपने आश्रम बनाए तथा विश्व के हर जगह हर वर्ग वाले विद्यार्थियों

को शिक्षा प्रदान की। तक्षशिला विश्वविद्यालय मे भौतिक तथा आध्यात्मिक सभी प्रकार के विषयों की शिक्षा प्रदान की जाती थी। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि उस समय तक्षशिला विश्वविद्यालय चिकित्सा का एक महान केंद्र हुआ करता था। 

तक्षशिला विश्वविद्यालय की स्थापना foundation of Taxila University 

तक्षशिला विश्वविद्यालय वर्तमान में पाकिस्तान के रावलपिंडी से लगभग 18 किलोमीटर दूर क्षेत्र में स्थित है जिसे तक्ष के नाम से जाना जाता है।

माना जाता है कि इस क्षेत्र की स्थापना भगवान श्री राम के छोटे भाई भरत के पुत्र तक्ष ने की थी। इसलिए इस प्रदेश को तक्ष प्रदेश को तक्ष प्रदेश कहा गया है।

इसलिए वहाँ पर स्थापित विश्वविद्यालय को तक्षशिला विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है। तक्षशिला विश्वविद्यालय की स्थापना लगभग 700 ईसवी पूर्व हुई थी। जो एक बड़े क्षेत्र में फैला हुआ विश्वविद्यालय है।

यहाँ पर कोई निश्चित पाठ्यक्रम नहीं हुआ करते थे ना ही शिक्षकों के लिए कोई विशेष सुविधा उपलब्ध थी। इस विश्वविद्यालय मे सभी विद्वान शिक्षक

अपने आश्रम बना कर रहा करते थे और अपने सभी शिष्यों को उनकी रूचि और आवश्यकता के अनुसार शिक्षा प्रदान करते थे। 

तक्षशिला विश्वविद्यालय के संस्थापक कौन था who was founder of Taxila University 

तक्षशिला विश्वविद्यालय के संस्थापक भगवान श्री राम के छोटे भाई भरत के पुत्र तक्ष को माना जाता है। यह क्षेत्र पाकिस्तान के रावलपिंडी से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित है।

पौराणिक ग्रंथों में भी इसका उल्लेख मिलता है। तक्षशिला का नाम ही रामायण के प्रमुख पात्र भगवान श्रीराम के छोटे भाई भरत के पुत्र तक्ष के नाम पर ही पड़ा और तक्ष ही वहाँ के प्रथम शासक थे।

महाराज तक्ष ने उस प्रदेश में कई वर्षों तक शासन किया और तक्षशिला को अपनी राजधानी बनाया। इस कारण वह प्रदेश शिक्षा की दृष्टि से प्रमुख केंद्र बन गया।

जहाँ पर कई विषयों की शिक्षा दी जाती थी। जिनमें वेद-वेदान्त, अष्टादश विद्याएँ, दर्शन, व्याकरण, युद्धविद्या अर्थशास्त्र, राजनीति चिकित्सा के साथ लगभग साठ विषय थे।

वहाँ पर विद्यार्थी को लगभग 12 वर्षों तक अध्ययन करना पड़ता था। पाणिनी,  चाणक्य, जीवक आदि कई विद्वानों ने तक्षशिला विश्वविद्यालय से ही शिक्षा प्राप्त की थी। 

तक्षशिला विश्वविद्यालय का विध्वंस Destroy of Taxila University 

तक्षशिल विश्वविद्यालय एक ऐसी भौगोलिक स्थिति पर स्थापित हुआ था, जहाँ से पूर्व और पश्चिम से आने जाने के मार्ग खुला करते थे।

इसी मार्ग के द्वारा विदेशी आक्रमण भी भारत में प्रवेश करने लगे। चतुर्थ शताब्दी ईसा पूर्व तक्षशिला विश्वविद्यालय आक्रमणकारियों की चपेट में आने लगा।

इतिहासकारों का कहना है कि एशिया की खानाबदोश जनजाति ने तक्षशिला विश्वविद्यालय पर आक्रमण करके इसे तहस-नहस कर दिया था।

जबकि हूण आक्रमण भी तक्षशिला विश्वविद्यालय का विध्वंस करने के लिए उत्तरदाई है। छठवीं शताब्दी में अरबी आक्रमण और तुर्क आक्रमणकारियों ने भी तक्षशिला विश्वविद्यालय में प्रलयंकारी

स्थिति उत्पन्न कर दी। आज भी वहाँ पर बौद्ध धर्म से संबंधित टूटी हुई और विध्वंसित मूर्तियाँ प्राप्त होती है। यूनेस्को ने 1980 में तक्षशिला विश्वविद्यालय को इसकी विशाल संस्कृति ख्याति तथा इतिहास के कारण इसको विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है। 

तक्षशिला विश्वविद्यालय से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य important factor to related Taxila University 

तक्षशिला विश्वविद्यालय गुरु शिष्य परंपरा पर आधारित विश्वविद्यालय था।

तक्षशिला विश्वविद्यालय में राजनीति और शस्त्र शिक्षा महत्वपूर्ण रूप से दी जाती थी।

तक्षशिला में बौद्ध शिक्षा के कुल 18 विषय शामिल थे।

तक्षशिला विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण करने वाले आयुर्वेद के महान ज्ञाता जीवक थे।

पाणिनि और कौटिल्य तक्षशिला के शिष्य थे इसके साथ ही उन्होंने वहाँ का गुरु होने का सौभाग्य भी प्राप्त किया।

तक्षशिला से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्वानों में पाणिनि जीवक वसुमित्र पिसेन्नचित लिच्छवी शासक शासक चंद्रगुप्त ऊँगलीमान आदि थे।

दोस्तों इस लेख में आपने तक्षशिला विश्वविद्यालय का इतिहास पढ़ा आशा करता हूँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा। 

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