फसलों का वर्गीकरण

फसलों का वर्गीकरण Classification of crops

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के हमारे इस लेख फसलों का वर्गीकरण में। दोस्तों इस लेख में आज आप फसलों का वर्गीकरण

विभिन्न प्रारूपों के आधार पर जान पाएंगे जो परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। तो आइए दोस्तों पढ़ते हैं, आज का यह लेख फसलों का वर्गीकरण:-

भारत में फसल उत्पादन में प्रथम राज्य

जीवन चक्र के आधार पर वर्गीकरण Classification on basis of life cycle

जीवन चक्र के आधार पर फसलों को निम्न तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है:-

एकवर्षीय फसलें - एकवर्षीय फसलें उन फसलों को कहा जाता है, जो अपना जीवन चक्र करने में पूरा 1 वर्ष का समय ले लेते हैं अर्थात यह फसलें एक वर्ष में एक बार ही उगाई जाती हैं। उदाहरण :- गेहूं, धान,  मक्का, ज्वार बाजरा, आदि।

द्विवर्षीय फसलें - द्विवर्षीय फसलें उन फसलों को कहते हैं, जिनका जीवन चक्र पूर्ण होने में 2 वर्षों का समय लग जाता है। उदाहरण :- चुकंदर आदि। 

बहुवर्षीय फसलें - बहुवर्षीय फसलें वे फसलें होती हैं, जो अपना जीवन चक्र 2 से अधिक वर्षों में पूर्ण कर पाती हैं। उदाहरण :- नेपियर, घास, रिजका आदि।

ऋतुओं के आधार पर वर्गीकरण Classification by Seasons

ऋतुओं के आधार पर भी फसलों को निम्न तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है:-

खरीफ की फसल - वे फसलें जो जून-जुलाई में बोयी जाती हैं तथा सितंबर अक्टूबर में काटी जाती है, उन फसलों को खरीफ की फसल कहते है। 

इन फसलों के लिए उच्च ताप और आद्रता की आवश्यकता होती है। उदाहरण :- धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, कपास, मूँगफली, उड़द आदि।

रबी की फसल - रबी की फसले वे फसलें होती हैं, जो अक्टूबर-नवंबर में बोई जाती है तथा मार्च, अप्रैल तक पक कर तैयार हो जाती हैं।

इन फसलों के लिए प्रारंभ में कम ताप की आवश्यकता होती है तथा पकने के लिए उच्च ताप की आवश्यकता होती है। उदाहरण :- गेहूं, चना, मटर, जौ, मसूर, सरसों, आलू आदि।

जायद फसलें - जायद फसलों की बुबाई फरबरी,मार्च के महीने में होती है, कियोकि इनके लिए अधिक ताप और प्रकाश की जरूरत होती है। उदाहरण :- तरबूज, खरबूज, ककड़ी, सब्जियाँ आदि।

विशेष उपयोग के आधार पर वर्गीकरण Classification on basis of special use

विशेष उपयोग के आधार पर फसलों को निम्न पाँच प्रकार में वर्गीकृत किया गया है:-

नकदी फसलें - नकदी फसलें वे फसलें होती है, जो किसानो को कई आवश्यकताओं के लिए धन की पूर्ती करती है। उदाहरण :- आलू, गन्ना, कपास, तम्बाकू आदि।

अंतरवर्ती फसले - अंतरवर्ती फसले वे फसलें होती हैं, जो दो फसलों के बीच में समय अंतराल बचने पर उनके मध्य उगाई जाती हैं। उदाहरण :- मूंग, जीरा आदि।

कीट आकर्षक फसलें - मुख्य फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए मुख्य फसलों के चारों तरफ उगायी जाने वाली फसलें कीट आकर्षक फसले कहीं जाती है। ये फसले कीटों को आकर्षित करती है, जिनके कारण की प्रमुख फसलों को हानि नहीं पहुंचा पाएँ।

हरी खाद फसलें - मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने के लिए जिन फसलों को उगाया जाता है, उन्हें हरी खाद फसने कहते हैं। इन फसलों को उगाकर जमीन में ही दबा देते हैं। उदाहरण :- मूंग, उड़द, लोबिया, मोठ, बरसीम, सनई आदि।

आर्थिक महत्त्व के आधार पर वर्गीकरण Classification on basis of economic importance

आर्थिक महत्व के आधार पर फसलों को निम्न 12 प्रकारों में बांटा गया है:-

धान्य फसलें - धान्य फसलें वे फसलें होती हैं, जिनका उपयोग सबसे अधिक भोजन के लिए किया जाता है। जैसे कि धान, गेहूँ, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि।

दलहनी फसलें - दलहनी फसलें वे फसलें होती हैं, जिनमें प्रोटीन सबसे अधिक मात्रा में होता है, तथा इनके द्वारा ही मनुष्य प्रोटीन की पूर्ति सबसे अधिक मात्रा में करता है। उदाहरण:-  मूंग, चना, मसूर, उड़द, सोयाबीन आदि।

तिलहनी फसलें - तिलहनी फसलें वे फसलें होती हैं, जिनके बीजों से तेल की प्राप्ति की जाती है। उदाहरण:- सरसों, राई, तोरी, सूरजमुखी, मूंगफली, कुसुम, अलसी, सोयाबीन, तेल आदि।

रेशेदार फसलें - जिन फसलों का उपयोग रेशे प्राप्त करने के लिए किया जाता है, उन्हें रेशेदार फसलें कहा जाता है, जिनसे विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का निर्माण होता है। उदाहरण:-  कपास, जूट, पटसन, सनई आदि।

चारे की फसलें - चारे की फसलें मुख्यत: पशुओं के लिए चारा उपलब्ध करने के लिए उगाई जाती हैं। उदाहरण:- बाजरा, ज्वार, लोबिया, सौंठ, मक्का, बरसीम, जाई, नेपियर घास, गिनी घास आदि।

शर्करा की फसलें - इन फसलों का उत्पादन मुख्य रूप से शक्कर तथा गुड़ उत्पादन करने के लिए किया जाता है। उदाहरण :- चुकंदर, गन्ना आदि।

जड़ तथा कंद वाली फसलें - कुछ फसलें ऐसी होती हैं जिनके जड़ और तने को खाने के लिए उपयोग में लाया जाता है, उन्हें जड़ तथा कंद वाली फसलें कहा जाता है। उदाहरण :- आलू, शकरकंद, चुकंदर, गाजर, मूली आदि।

मसाले की फसलें - जिन फसलों से प्राप्त उत्पाद का प्रयोग खाद्य पदार्थों में स्वाद तथा खुशबु के लिए किया जाता है, उन फसलों को मसाले की फसलें कहा जाता है। उदाहरण :- जीरा, धनिया, अजवाइन,पुदीना, हल्दी, अदरक, मेथी, प्याज, लहसुन, इलायची आदि।

फल वाली फसलें - फल वाली फसलों के अंतर्गत तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा आदि आती है।

औषधि वाली फसलें - इन फसलों से प्राप्त उत्पादों का उपयोग विभिन्न प्रकार के रोगों में औषधि के रूप में होता है। उदाहरण :- तुलसी, सिनकोना, पुदीना आदि।

सब्जी वाली फसलें - इन फसलों से प्राप्त उत्पादों का उपयोग नित्य प्रति सब्जी के रूप में किया जाता है। उदाहरण :- भिंडी, कद्दू, करेला, गोभी, चुकंदर, बैगन, टमाटर, मटर, सलाद, पालक आदि।

दोस्तों इस लेख में आपने विभिन्न प्रकार के फसलों का वर्गीकरण बड़ा आशा करता हूँ आपको यह अच्छा लगा होगा।

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