पत्ती किसे कहते है इसके प्रकार

पत्ती किसे कहते है इसके प्रकार what is leaf its type 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख पत्ती किसे कहते है, इसके प्रकार में। दोस्तों इस लेख में आप पत्ती किसे कहते है?

पत्ती की संरचना, पत्ती के प्रकार, रूपान्तरण तथा पत्ती के कार्यों के बारे में जान पायेंगे। तो आइये दोस्तों पढ़ते है, यह लेख पत्ती किसे कहते है, इसके प्रकार:-

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पत्ती किसे कहते है what is leaf 

पत्ती पौधों का वह हरा पाशर्व भाग है, जो चौड़ा तथा पौधों की भोजन की फैक्ट्री कहा जाता है। कियोकि पौधों का पत्ती वाला भाग ही प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा भोजन अर्थात करबोहाइड्रेट का निर्माण करते है।

पत्तियाँ क्लोरोफिल के कारण हरे रंग की होती है, जिनमें छोटे-छोटे छिद्र होते है, जिनको स्टोमेटा कहा जाता है, जिसकी सहायता से गैसीय विनिमय का कार्य होता है।

पत्ती कितने प्रकार की होती है Type of leaf 

पत्ती को उनकी संरचना पर्णतट के आधार पर निम्न दो प्रकार में बांटा गया है:- 

सरल पत्ती किसे कहते है what is simple leaf 

सरल पत्ती वह पत्ती होती है जिसका फलक बड़ा होता है तथा इस फलक में कटाव नहीं होते किंतु कुछ पत्तियों में कटाव होते हैं

लेकिन वह कटाव मध्य शिरा तक नहीं जाते।  जबकि इनमें केवल एक ही पर्ण फलक होता है तथा शाखा पर अग्रभिसारी क्रम में लगे होते है,

उस पति को सरल पत्ती कहा जाता है। सरल पत्ती के उदाहरण:- आम, बरगद, पीपल आदि 

संयुक्त पत्ती किसे कहते है what is compound leaf 

संयुक्त पत्ती पत्ती का वह प्रकार होता है जिसमें पत्र फलक मैं कटाव विभिन्न जगह से मध्य शिरा तक पहुंचता है,

इसलिए यह पत्र फलक कई पर्णकों में बंट जाता है। इसके एक शाखा पर पर्ण फलक एक साथ होते है उस पति को संयुक्त पत्ती कहा जाता है। संयुक्त पत्ती के उदाहरण:- नीम 

पत्तियों को शिराविन्यास के आधार पर भी निम्न दो प्रकार में बांटा गया है:-

जालिकावत पत्ती - जिलाकावत पत्तियाँ उन पत्तियों को कहा जाता है जिनका शिरा विन्यास जालि के जैसा होता है। अधिकतर द्वीबीजपत्री पौधों में यह विन्यास दिखाई देता है। जैसे :- जामुन, आम, वरगद, पीपल आदि की पत्ती।

सामान्तर पत्ती - सामान्तर पत्ती उन पत्तियों को कहते है। जिनका शिरा विन्यास सामान्तर प्रकार का होता है। इस प्रकार का विन्यास एकबीजपत्री पौधों में दिखाई देता है। जैसे :-  गेंहूँ, धान, केला आदि की पत्तियाँ। 

पत्ती की संरचना Structure of leaf 

पत्तियों को निम्न भागों में बांटा गया है:- 

प्रर्णाधार या पत्राधार - यह पत्ती का वह भाग होता है, जो पत्ती को तना से जोड़ता है, अर्थात तना और पत्ती के पत्रवृंत के जुड़ने वाले भाग को पत्राधार कहते है।

पत्रवृंत - पत्राधार से एक लम्बा डंठल जैसी संरचना निकलती है जो पत्रफलक को आधार प्रदान करती है, उसे पत्रवृंत कहते है।

किन्तु कुछ पौधों में यह संरचना नहीं पायी जाती जैसे एक बीजपत्री पौधे। पत्रवृंत का मुख्य कार्य पत्रफलक को सहारा देना और प्रकाश के लिए उठाये रखना होता है।

पत्रफलक - पत्ती का वह चौड़ा भाग जो चारों ओर से फैला और चपटा दिखाई देता है। उसे पत्रफलक कहा जाता है। फलक के बीच में एक मोटी शिरा होती है

जिसे मध्य शिरा कहते है, इस शिरे से दोनों तरफ पतली शिरायें निकलती है, जो आगे जाकर और छोटी और पतली शिराओं में विभक्त हो जाती है।

प्रर्णाग्र - पत्ती का अंतिम पतला नुकीला भाग प्रर्णाग्र कहलाता है।

पत्तियों का रूपान्तरण Metamorphosis of leaves

पतियों का रूपांतर कुछ विशेष प्रकार के कार्य करने के लिए स्थिति मौसम के अनुसार अनुकूलन के हिसाब से हो जाता है:-

पर्णकंटक / सुरक्षा हेतु - जब पौधे मरुस्थल या शुष्क स्थानों में उगते है, तो वहाँ जल की क्षति को रोकने के लिए पौधों की पत्तियाँ काँटों में परिवर्तित हो जाती जिन्हे पर्णकंटक कहते है। उदाहरण :- नागफनी

पर्णप्रतान / सहारा देने हेतु - पौधों को आरोहण प्रदान करने के लिए जब पौधों की पत्तियाँ लंबे पतले कुंडलित तारनुमा संरचना में बदल जाते हैं, तब उसको पर्णप्रतान कहते है। उदाहरण :- मटर

पर्णाभवृंत - यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब पौधों में प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होने लगता है, उस समय पर्णवृंत और रेकिस का कुछ भाग हरा और पर्णफलक जैसा हो जाता है। और प्रकाश संश्लेषण में मदद करता है। उदाहरण : ऑस्ट्रेलियन बबूल

घटपर्णी - यह एक कीटभक्षी पौधा होता है जो नाइट्रोजन की कमी पूरी करने के लिए कीटों का भक्षण करता है। इसमें इसमें पत्ती का पर्णवृंत प्रतान का और फलक एक घड़े का तथा फलक का नुकीला हिस्सा

ढक्कन का रूप ले लेता है, जैसे ही इस पर कीट बैठता है, वह घड़े में गिर जाता है और ढक्कन बंद हो जाता है, फिर कीट का पाचन होता है। 

पत्ती के कार्य Function of leaf 

पत्तियाँ पौधे का विशिष्ट अंग होती हैं, इसलिए यह पौधे के सबसे महत्वपूर्ण कार्य करती हैं जिनमें से कुछ प्रमुख कार्य निम्न प्रकार से हैं:-

पत्तियों का मुख्य प्रकाश संश्लेषण होता है, पत्तियाँ क्लोरोफिल जल कार्बन डाइऑक्साइड तथा सूर्य प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया करती है

जिससे पौधों के लिए भोजन का निर्माण होता है। तथा मनुष्य और जीव जंतुओं के लिए प्राणवायु ऑक्सीजन का उत्पादन।

पत्तियों का मुख्य कार्य गैसो का विनिमय करना होता है जो इनमें उपस्थित संरचना स्टोमेटा के द्वारा होता है। पत्तियाँ कार्बनडाई ऑक्साइड का अवशोषण करती है तथा ऑक्सीजन को वातावरण में छोड़ती है।

मरुस्थल के पौधों में पत्तियाँ काँटों में रूपातंरित होकर जल के वाष्पीकारण को रोककर जल संरक्षण तथा जानवरो से फूलों फलों और कलियों की रक्षा करती है।

पत्तियाँ वाष्पीकरण के द्वारा पौधों से आवश्यकता से अधिक जल को बाहर निकालती है।

पत्तियों में निर्मित भोजन पौधों के अन्य भागो में जल में धूलित अवस्था में पहुँचता है। तथा आवश्यकता से अधिक भोजन को संग्रहित करने का कार्य पत्तियाँ ही करती है।

पत्तियाँ वाष्पोत्सर्जन की क्रिया करके पौधों की रक्षा सर्दी में पत्तियाँ गिराकर ऊष्मा को रोकती है और पतझड़ में पत्तियाँ गिराकर जल के वाष्पी कारण को रोककर पौधों में ऊष्मा और जल की मात्रा बनाये रखती है।

दोस्तों इस लेख में आपने पत्ती किसे कहते है, इसके प्रकार तथा कार्य पढ़े। आशा करता हुँ आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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