ब्रायोफाइटा के मुख्य लक्षण Main characteristics of Bryophyta

ब्रायोफाइटा के मुख्य लक्षण

ब्रायोफाइटा के मुख्य लक्षण Main characteristics of Bryophyta

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आजके हमारे इस लेख ब्रायोफाइटा के मुख्य लक्षणों (Main Characteristics of Bryophyta) में। दोस्तों इस लेख के द्वारा आप ब्रायोफाइटा के मुख्य लक्षण के साथ ब्रायोफाइटा क्या है,

ब्रायोफाइटा का वर्गीकरण तथा ब्रायोफाइटा के आर्थिक महत्व के बारे में पड़ेंगे। तो आइए दोस्तों करते हैं, आजका यह लेख शुरू ब्रायोफाइटा के मुख्य लक्षण:-

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ब्रायोफाइटा क्या है what is bryophyta

ब्रायोफाइटा पादप जगत (Plant Kingdom) का द्वितीय समूह कहलाता है।  यह थोड़ा विकसित प्रकार का तथा बड़ा पादप समूह होता है। इसके नाम से स्पष्ट होता ब्रायों अर्थात भ्रूण का निर्माण इनमें होता है।

ब्रायोफाइटा के अधिकतर पौधे आद्रता वाले स्थानों में नम स्थानों में तथा छायादार स्थानों में पाए जाते हैं। इस पादप वर्ग के प्राणी छोटे-छोटे होते हैं।

जिनमें हरित लवक (Chlorophyl) पाया जाता है। इस प्रकार से यह अपने भोजन का निर्माण स्वयं करते हैं और स्वपोषी (Autotrophic) होते हैं। किन्तु यह संवहन ऊतक रहित होते है। इस वर्ग में अभी तक ज्ञात प्रजातियों की संख्या 230000 है।

ब्रायोफाइटा के मुख्य लक्षण

ब्रायोफाइटा के सामान्य लक्षण General characteristics of Bryophyta

ब्रायोफाइटा भ्रूण का निर्माण करने वाले पादप कहे जाते हैं, इस पादप वर्ग को वनस्पति जगत का एफीबियन (Amphibian) भी कहा जाता है। ब्रायोफाइटा के सामान्य लक्षण निम्न प्रकार से हैं:-

ब्रायोफाइटा के समस्त पादप नमी युक्त वाले स्थानों पर छायादार स्थानों पर तथा आद्रता (Humidity) वाले स्थानों पर उगते हैं।

ब्रायोफाइटा पादप छोटे-छोटे होते हैं, तथा भ्रूण का निर्माण करते हैं।

ब्रायोफाइटा के पादपों के मूलाभासों में हरित लवक नहीं पाया जाते, जबकि अन्य सभी भागों में हरित लवक पाए जाते हैं।

ब्रायोफाइटा के पादप स्वपोषी होते हैं, यह अपने भोजन का निर्माण स्वयं करते हैं।

ब्रायोफाइटा के पौधे सूक्ष्म होते है, जिनका आकार थैलस (Thallus )के समान दिखाई देता है।

पादप के इस वर्ग के पौधों में जड़े पूरी तरह से अनुपस्थित तथा पत्तियाँ तथा तने जैसी संरचना निकलने लगती है।

इनमें जनन लैंगिक (Sexual) जल में अलैगिक (Asexual) और कयिक जनन (Somatic reproduction) विखंडन द्वारा होता है। 

ब्रायोफाइटा का वर्गीकरण Classification of Bryophyta

ब्रायोफाइटा को उनके लक्षणो के आधार पर निम्न तीन प्रकारों में बांटा गया है:-

हिपेटोकोप्सिड़ा (Hepatocopsida) - इसको लिवरवर्ट के नाम से भी जाना जाता है। इसमें मुख्यत: रिक्सिया, मार्केसिया, पोरेला आदि को शामिल किया गया है।

एंथोसेरोटोप्सीडा (Anthoceratopsida) - इसे हनवर्ट भी कहा जाता है। जिसमें एन्थोरोसिस को शामिल किया गया है।

ब्रायोप्सिडा (Bryopsida) - इसको मॉस के नाम से जाना जाता है। इसके अंतर्गत स्फैग्नम, फयुनेरिया जैसे ब्रायोफाइटा आते हैं।

ब्रायोफाइटा के आर्थिक लाभ Economic benefits of Bryophyta

ब्रायोफाइटा के पौधे मनुष्य के लिए अधिक उपयोगी तो नहीं होते किन्तु प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मनुष्य तथा अन्य जीवों के लिए निम्नप्रकार लाभदायक होते है:- 

ब्रायोफाइटा पादप वर्ग के पौधे छोटे-छोटे होते हैं और इनकी जल को सोखने की क्षमता अधिक होती है। इसलिए ब्रायोफाइटा के पौधे में मुख्य रूप से मृदा अपरदन (Soil Erosion) को कम करते हैं।

कुछ ब्रायोफाइट्स जैसे स्फैग्नम (Sphagnum) आदि का उपयोग ईंधन (Fuel )के रूप में भी किया जाता है। 

कुछ ब्रायोफाइट्स ऐसे होते हैं, जिनका प्रयोग एंटीसेप्टिक (Antiseptic) के रूप में होता है। जैसे की मॉस

ब्रायोफाइट्स का उपयोग शाकाहारी भोजन के रूप में स्तनधारी पशु पक्षियों के द्वारा किया जाता है।

स्फैग्नम ब्रायोफाइट्स का उपयोग बत्ती के रूप में भी किया जाता है।

दोस्तों आपने इस लेख में ब्रायोफाइटा के मुख्य लक्षण, ब्रायोफाइटा क्या है, ब्रायोफाइटा के आर्थिक लाभ, तथा ब्रायोफाइटा का वर्गीकरण पड़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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