अनावृतबीजी पौधों के प्रमुख लक्षण Main characteristics of Gymnosperm

अनावृतबीजी पौधों के प्रमुख लक्षण

अनावृतबीजी पौधों के प्रमुख लक्षण Main characteristics of Gymnosperm

दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख अनावृतबीजी पौधों के प्रमुख लक्षण में। दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप अनावृतबीजी पौधे क्या है,

अनावृतबीजी का आर्थिक महत्व तथा अनावृतबीजी पौधों के प्रमुख लक्षण के बारे में जान पायेंगे। तो आइये दोस्तों करते यह लेख शुरू अनावृतबीजी पौधों के प्रमुख लक्षण:-

वायु प्रदूषण क्या है

अनावृतबीजी पौधों के प्रमुख लक्षण

अनावृतबीजी पौधे क्या है what is Gymnosperm

अनावृतबीजी पौधे पादप जगत के उन पादपों का समूह होता है, जिसमें बीजों का निर्माण तो होता है किंतु बीज किसी भी प्रकार के खोल के द्वारा ढके हुए नहीं होते हैं, अर्थात बीज नग्न अवस्था में होते हैं।

इसलिए मुख्य रूप से अनावृतबीजी पौधों को बीजीय पौधों का समूह कहा जाता है। अनावृतबीजी पौधों में अंडाशय पूर्ण रूप से अनुपस्थित होता है। पादप के इस वर्ग में अभी तक कुल 900 प्रजातियाँ ज्ञात हैं। 

अनावृतबीजी पौधों के प्रमुख लक्षण Main characteristics of Gymnosperm

अनावृतबीजी पौधों के प्रमुख लक्षण निम्नप्रकार से है:- 

  1. अनावृतबीजी पौधों को बहुवर्षीय पौधे कहा जाता है। यह पौधे बड़े - बड़े होते है।
  2. अनावृतबीजी पौधे वे पौधे होते है, जो शुष्क स्थानों पर अधिक उगते है। इसलिए इनको मरुदभिद पौधे कहा जाता है।
  3. इन पादपों में स्पष्ट वार्षिक वलय तो बनते है,किन्तु बीजों पर किसी प्रकार का खोल नहीं होता, बीज नग्न अवस्था में होते है।
  4. साधारणतया अनावृतबीजी पौधों को नग्नबीजी और आशाखित पौधे कहा जाता है।
  5. अनावृतबीजी पौधों में विकसित प्रकार के संवहन ऊतक पाए जाते है, जो खनिज लवण, जल भोजन आदि का संवहन करते है।
  6. इन पौधों में साधारण तथा बहुभ्रूणता होती है। किन्तु परागण वायु द्वारा होता है।
  7. सबसे बड़ा अंडाणु और शुक्राणु साइकस अनावृतबीजी का होता है।
  8. साइकस की कोरेलाइड जड़ो से नील हरित शैवाल नॉस्टॉक, एनाबीना आदि शैवाल सहजीवी संबंध के रूप में जुड़े रहते हैं।
  9. अनावृतबीजियों में जननांग कोंस या स्ट्रोविलाई के रूप में सामूहित होते है, जिनमें कोंस एकलिंगी जबकि नर शंकु माइक्रोस्पोरोफिल या लघुबीजाणु पर्ण तथा मादा शंकु गुरुबीजाणुपर्ण का निर्माण करते है।

अनावृतबीजी का आर्थिक महत्व Economic importance of Gymnosperm

अनावृतबीजी पौधे मनुष्य के लिए आर्थिक महत्व की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होते है, अनावृतबीजियों का आर्थिक महत्व निम्न प्रकार से है:- 

साबूदाने का निर्माण अनावृतबीजी पौधे साइकस के तनो से मंड निकालकर किया जाता है, जिसका उपयोग भोजन सामग्री के लिए होता है।

चीड़, देवदार, सिकोया, स्प्रूस आदि की लकड़ी टिकाऊ होती है। इसलिए इनका उपयोग फर्नीचर बनाने के लिए फर्नीचर उद्योग में किया जाता है।

चीड़ के पेड़ से तारपीन का तेल, देवदार के पेड़ से सेड्रस का जूनीपेरस से सेडकाष्ठ का तेल प्राप्त होता है। जिनका उपयोग विभिन्न प्रकार की दवाइयाँ, एंटीसेप्टिक तथा अन्य कई उद्योगों में किया जाता है।

बहुत से ऐसे अनावृतबीजी पौधे होते हैं, जिनका उपयोग ऑफिस सजावट के तौर पर घरों में घरों की छतों पर भी किया जाता है।

साइकस की पत्तियों से बत्ती तथा झाड़ू का निर्माण किया जाता है, जबकि साइकस के बीजों का भोजन के रूप में भी उपयोग होता है।

टेनिन का उपयोग चमड़ा और स्याही के निर्माण में होता है, जबकि कुछ शंकु पौधे रेजिन प्रदान करते हैं।

कागज उद्योग में उपयोग की जाने वाली लुगदी कोनिफर नामक अनावृतबीजी से प्राप्त की जाती है।

इफेड्रा नामक अनावृतबीजी से इफेड्रिन नामक ओषधि प्राप्त होती है, जिसका उपयोग खाँसी के रूप में किया जाता है।

दोस्तों इस लेख में आपने अनावृतबीजी पौधों के प्रमुख लक्षण पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख पसंद आया होगा।

इसे भी पढ़ो:-

  1. कोशिका किसे कहते है
  2. लिवर फ्लूके के लक्षण
  3. पादप जगत का वर्गीकरण


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ