पाइला क्या है पाइला के लक्षण What is Pila Symptoms of Pila

पाइला क्या है पाइला के लक्षण

पाइला क्या है पाइला के लक्षण what is Pila Symptoms of Pila

हैलो दोस्तों नमस्कार आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख पाइला क्या है? पाइला के लक्षण में। दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप संघ मोलस्का संघ के

प्राणी पाइला के बारे में जानेगें की पाइला क्या है, पाइला के लक्षण क्या है, तथा वर्गीकरण। तो आइये दोस्तों करते है, शुरू यह लेख पाइला क्या है? पाइला के लक्षण:-

संघ मोलस्का का वर्णन

पाइला क्या है


पाइला क्या है What is Pila

पाइला संघ मोलस्का का एक जलीय जीव है, जिसका वैज्ञानिक नाम पाइला ग्लोबोसा तथा सामान्य नाम घोंघा है। घोंघा (पाइला) को समान्यतः नदी, तालाब, झील, पोखर, तथा समुद्र के किनारे देखा जा सकता है।

घोंघा का शरीर एक मजबूत कबच जो केलशियम का बना होता है, से ढँका रहता है। किन्तु इनका शरीर कोमल मुलायम होता है। पाइला उभयचर जंतु होता है, जो स्थल और जल दोनों जगह रहने के लिए अनुकूलित होता है।

घोंघा (पाइला) का वर्गीकरण classification of pila 

वर्गीकरण Classification

संघ Phylum - मोलस्का Mollusca

वर्ग Class - गैस्ट्रोपोडा Gaistropoda

उपवर्ग Sub-class - स्ट्रेप्टोन्यूरा Streptoneura

गण Order - मेसोगेस्ट्रोपोडा Mesogastropoda

वंश Genus - पाइला Pila

जाति Species - ग्लोबोसा Globossa

घोंघा (पाइला) के लक्षण Symptoms of Pila

स्वभाव तथा आवास

पाइला (घोंघा) उत्तरी भारत में अधिक पाया जाता है। जो तालाबों, झीलों, पोखरों के साथ दलदल वाले स्थानों पर भी मिल जाता है।

पाइला के ऊपर एक मजबूत कवच होता है, नदी का पानी सूखने पर पाइला कबच के अंदर कई दिनों जीवित रहता है। समान्यतः पाइला एक उभयचर प्राणी है, जो जल और थल दोनों स्थानों पर रह सकता है।

वाहय संरचना 

पाइला के शरीर का विभाजन सिर विसरल मास और पाद में होता है, सिर मुलायम जिस पर नेत्र, मुख, और स्पर्शक होते है, जबकि पाद तिकोनी संरचना के होते है।

शवशन जलीय और वायवीय दोनों प्रकार का होता है, कियोकि इनमें कई उभयचर प्राणी होते है। जलीय अवस्था में शवशन टीनिडियम के द्वारा जबकि स्थल पर वायवीय शवशन फेफड़े या पलमोनरी कोष के द्वारा होता है।

पाइला अमोनिया का उत्सर्जन करता है, उत्सर्जन अंग के रूप में एक वृक्काँग जिसे बेजोनेस का अंग कहते है, उपस्थित होता है।

पाइला एकलिंगी प्राणी होते है। इनमें नर और मादा अलग अलग होती है। नर का कवच मादा से बड़ा तथा नर का शिशन विकसित प्रकार का होता है।

पाइला का तंत्रिका तंत्र nervous system of pila 

पाइला के तंत्रिका तंत्र को हम निम्न प्रकार से समझते हैं:- 

सेरेब्रल गुच्छीकायें

सेरेब्रल गुच्छीकायें एक जोड़ी त्रिभुजाकार होती है। जो एक एक संख्या में पृष्ठ पाशर्व तल पर पाई जाती है। यह दोनों सेरेब्रल गुच्छीकायें एक मोटी सेरीब्रल संघानी और एक पतली लेबीयल संधानी से जुड़ी रहती हैं।

सेरीब्रोककल संयोजनी

यह संयोजनी तंत्रिकाएँ सेरेब्रल गुच्छीकायें को बक्कल गुच्छीकाओं से जोड़ने का कार्य करती हैं।

सेरीब्रो प्लूरल संयोजनी

यह भी एक जोड़ी तंत्रिकाये होती हैं। जिनका कार्य सेरीब्रल गुच्छीकाओं को प्लूरल गुच्छीकाओं से जोड़ना होता है।

सेरीब्रो पीडल संयोजनी

इन तंत्रिकाओं का कार्य सेरेब्रल गुच्छीकाओं को पीडल गुच्छीकायें से जोड़ना होता है।

सेरेब्रल गुच्छीकाओं से निकलकर कुछ तांत्रिकायें आगे की ओर जाती है, जैसे,- त्वचा, मुख पिंडक, स्पर्शक आदि। जबकि कुछ तांत्रिकायें पीछे की ओर से भी निकलती है और स्पर्शकों,नेत्रों, स्टेटॉसिस्ट तक जाती है।

बक्कल गुच्छीका

यह त्रिकोण के आकार की होती है। जो मुख पुंज और ग्रसिका दोनों जगह पृष्ठ पाशर्व स्थानों पर पाई जाती हैं, तथा आंशिक रूप से पेशियों मे धंसी रहती हैं।

दोनों बक्कल गुच्छीका बक्कल संधानी तथा सेरीब्रल बक्कल संयोजनी द्वारा सेरीब्रल गुच्छीकाओं से जुडी रहती है। बक्कल गुच्छीकाओं से तांत्रिकायें निकलकर लार ग्रंथियाँ, ग्रासनाल,पिंडक ग्रसिका रेडुला तक पहुँचती है।

प्लूरो पीडल गुच्छीका

यह 1 जोड़ी होती हैं। जिनका निर्माण प्लुरल तथा पीडल गुच्छीकाओं के मिलने से होता है। प्लूरो पीडल गुच्छीका मुख पुंज के अधर पाशर्वो पर एक एक संख्या में स्थित होती हैं।

जिनमें से दाएं ओर की गुच्छीका अधोआंत गुच्छीका से संयोजित रहती है। अब दोनों ओर की पीडल गुच्छीका अधर तल से जाती हैं और एक जोड़ी मोटी तंत्रिका पीडल संधानी से जुड़ी होती है।

ऐसे ही प्लूरो गुच्छीका एक पतली तंत्रिका आवंत्र तंत्रिका द्वारा जुड़ी रहती है। जो पीडल संयोजिका के पीछे होती है। दोनों पीडल गुच्छीका से बहुत सी तंत्रिका निकलती है और पाद तक जाती है.

जबकि बाएँ वाली प्लुरल गुच्छीका से कुछ तांत्रिकायें ओसफ्रेडियम, बायाँ न्यूकल पाली, मेन्टल पैराइटल भित्ति, कोल्यूमेलर पेशियाँ, और कलोयका तक पहुँचती है।

इसी तरह दायाँ प्लुरल गुच्छीका से कुछ तांत्रिकायें निकलती है जो पैराइटल भित्ति, दायाँ न्यूकल पाली, एपीटीनिया, मलाशय और मैथुन अंग तक पहुँचती है। 

विसरल गुच्छीका

विसरल गुच्छीका दो प्रकार की गुच्छीकाओं के संयोजन से बनती हैं, तथा पाचन ग्रंथि के आगे वाले सिरे पर स्थित होती हैं. विसरल गुच्छीकाओं से दो मुख्य तांत्रिकाओं के साथ कई शाखाएँ निकलती है, जो पाचन ग्रंथियाँ, वृक्को तथा हृदय के अंगों तक और जनन अंगों तक पहुंचती हैं.

विसरल गुच्छीका से कुछ तांत्रिकायें पेरिकॉर्डिंयम, अामाशय तक भी जाती है।

सुप्रा अंत्रीय गुच्छीका

सुप्रा अंत्रीय गुच्छीका प्लूरो पीडल गुच्छीका के पीछे औसफ्रेडियम के निकट स्थित होती है। जो ऊपर प्लूरो पीडल गुच्छीका से जुडी होती है.

तथा दायी तरफ प्लूरो पीडल इंटेस्टाइनल गुच्छीका पुंज द्वारा उधर्व अंत्रीय प्लुरल संयोजक से जुडी रहती है। तथा उधर्व अंत्रीय गुच्छीका से एक तंत्रिका दायी ओर मेन्टल ओर टेनिडियम तक जाती है।

दोस्तों इस लेख में आपने पाइला क्या है पाइला के लक्षण तथा अन्य तथ्यों को पड़ा। आशा करता हुँ आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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