शुंग वंश सामान्य ज्ञान shung vansh samanya gyan

शुंग वंश सामान्य ज्ञान

शुंग वंश सामान्य ज्ञान shung vansh samanya gyan 

हैलो दोस्तों आपका बहुत - बहुत स्वागत है, इस लेख शुंग वंश सामान्य ज्ञान में। दोस्तों इस लेख के माध्यम से आप शुंग वंश के बारे में उन सभी महत्वपूर्ण तथ्यों को जान सकेंगे

जो विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूंछे जाते है। इस लेख में आप शुंग वंश का संस्थापक कौन था, शुंग कौन थे,

शुंग वंश का अंतिम शासक कौन था, शुंग वंश का पतन आदि के बारे में जानेंगे। तो आइये दोस्तों पड़ते है। यह सम्पूर्ण लेख शुंग वंश सामान्य ज्ञान:-

वैदिक काल का इतिहास

शुंग वंश की स्थापना shung vansh ki sthapana 

शुंग वंश की स्थापना उस समय हुई थी जब मौर्य साम्राज्य का पतन पूरी तरह से हो गया था। चारों तरफ राजनीतिक एकता समाप्त हो गई थी।

इसलिए भारत पर विदेशी जातियाँ आक्रमण करने लगी भारत के कई भूभाग पर उन्होंने अपना साम्राज्य स्थापित कर दिया।

ऐसे समय में शुंग वंश भारतीय राजनीतिक पटल पर उत्पन्न हुआ। जिसने विदेशी शक्तियों से भारत को बचाया। शुंग वंश का संस्थापक पुष्यमित्र शुंग था।

पुष्यमित्र शुंग मौर्य वंश के अंतिम शासक बृहद्रथ का सेनापति भी था। पुष्यमित्र शुंग ने ही अपने शासक बृहद्रथ का वध कर राजगद्दी हथिया ली थी।

बृहद्रथ मौर्य वंश का सबसे अंतिम शासक था और वह एक निर्बल शासक भी था। अतः पुष्यमित्र शुंग ने बृहद्रथ को सेना का प्रदर्शन देखने के लिए आमंत्रित किया और संपूर्ण सेना के सामने उसका वध कर दिया।

कियोकि संपूर्ण सेना का सहयोग भी पुष्यमित्र शुंग को प्राप्त था। बहुत से इतिहासकार पुष्यमित्र शुंग द्वारा मौर्य सम्राट बृहद्रथ की हत्या उचित मानते हैं, क्योंकि बृहद्रथ एक अयोग्य शासक भी था।

पुष्यमित्र शुंग ने 184 ई• पूर्व में बृहद्रथ की हत्या करके शुंग वंश की स्थापना की और अपनी राजधानी पाटलिपुत्र से उज्जैनी स्थानांतरित की पुष्यमित्र शुंग के राजपुरोहित पतंजलि था। जिसके मार्गदर्शन में पुष्यमित्र शुंग ने दो बार अश्वमेघ यज्ञ भी किया।

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शुंग वंश का संस्थापक कौन था founder of shung vansh 

शुंग वंश का संस्थापक पुष्यमित्र शुंग था। जो मौर्य साम्राज्य के अंतिम शासक बृहद्रथ का सेनापति तथा महान कूटनीतिज्ञ व्यक्ति था।

पुष्यमित्र शुंग वैष्णव धर्म का समर्थक था। पुष्यमित्र शुंग का उत्तराधिकारी अग्निमित्र था। अग्निमित्र के जीवन पर ही कालिदास ने मालविकाग्निमित्रम् नामक नाटक लिखा था।

अग्निमित्र का पुत्र था वसुमित्र जिसने इंडो यूनानी शासक मिनांडर को पराजित किया था। जबकि शुंग वंश का अंतिम शासक देवहूति था।

देवभूति की हत्या उसके सेनापति वसुदेव ने की थी और कण्ड वंश की स्थापना की। शुंग वंश के शासन काल में ही मनु स्मृति, विष्णु स्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति ग्रंथों की रचना हुई। इसी समय पतंजलि ने अष्टाध्यायी पर टीका महाभाष्य लिखी थी।

शुंग कौन थे who was shung 

शुंग कौन थे यह एक विवाद वाला प्रश्न है, इसीलिए विभिन्न विद्वानों ने शुंगो के विषय में अपने-अपने अलग-अलग मत दिए हैं।

हरप्रसाद शास्त्री मानते हैं, कि शुंग पारसीक थे। क्योंकि पारसीक लोग सूर्य देवता की आराधना करते थे और शुंग अपने नाम के अंत में मित्र शब्द लगाते हैं। जबकि मित्र शब्द का अर्थ ही सूर्य होता है।

लेकिन बहुत से इतिहासकार इस विचारधारा से संतुष्ट नहीं हुए। दिव्यावादन नामक ग्रंथ के आधार पर यह ज्ञात होता है, कि पुष्यमित्र शुंग मौर्य ही था।

किंतु इस तर्क को भी अस्वीकार कर दिया गया। अधिकांश ब्राह्मण शुंगो को ब्राह्मण मानते हैं और कालिदास की रचना मालविकाग्निमित्रम् में भी स्पष्ट कर दिया गया कि शुंग बैम्बिक वंश से संबंध रखते थे

और बताया जाता है, कि बैम्बिक कश्यप गोत्रीय ब्राह्मण होते हैं। हर्ष चरित्र से भी यह पता चलता है, कि पुष्यमित्र शुंग ब्राह्मण ही था। इसीलिए अधिकतर विद्वानों का मानना है, कि शुंग ब्राह्मण थे जो मौर्यों के काल में पहले ब्राह्मण का कार्य किया करते थे। 

शुंग वंश के शासक Ruler of shung dynesty 

शुंग वंश का संस्थापक और पहला सम्राट पुष्यमित्र शुंग था, जिसके 8 पुत्र थे। पुष्यमित्र शुंग ने 185 से 149 इस्वी पूर्व तक शासन किया पुष्यमित्र शुंग की मृत्यु 148 ईसवी पूर्व में हो गई थी।

इसके बाद उसका पुत्र अग्निमित्र राजगद्दी पर बैठा, जिसने 149 से 141 इस्वी पूर्व तक राज्य किया अग्निमित्र के बाद पुष्यमित्र शुंग का एक और पुत्र और जिसका नाम वजुज्येष्ठ था

सम्राट बना जो 141 से 131 इस्वी पूर्व तक शासक रहा। इसके बाद अग्निमित्र का पुत्र वसुमित्र को शासक बनाया गया जिसने 131 से 124 इस्वी पूर्व तक शासन किया। वसुमित्र एक शक्तिशाली शासक था

जिसने यवन शासकों को परास्त किया था। वसुमित्र के बाद आंध्रक, शासक हुआ। उसके बाद पुलिंडिक, घोष, वज्रमित्र भाग आदि ने शासन किया।

शुंग वंश का अंतिम शासक देवभूति था जिसने 83 से 73 इस्वी पूर्व तक शासन किया। देवभूति की हत्या उसके ही मंत्री वासुदेव ने कर दी और कंण्ड वंश की स्थापना का श्रेय प्राप्त किया। शुंग वंश के शासकों ने मगध पर 112 वर्ष तक शासन किया।

पुष्यमित्र शुंग की उपलब्धियाँ Achievements of Pushyamitra Shung

पुष्यमित्र शुंग का राज्याभिषेक 185 से 184 ईसवी पूर्व के आसपास हुआ था। और उसने 36 वर्ष तक राज्य किया। उसकी मृत्यु 148 ईसवी पूर्व में हुई थी। पुष्यमित्र शुंग का इतिहास रक्त से रंगा हुआ है। उसकी सारी उपलब्धियाँ रक्त रंजित हैं।

साम्राज्य का गठन - जब पुष्यमित्र शुंग ने बृहद्रथ की हत्या की थी। उस समय मगध का साम्राज्य छिन्न-भिन्न हो गया था अनेक राज्य स्वतंत्र हो चुके थे

और पुष्यमित्र शुंग के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य को फिर से संगठित करना था। उसने प्राची, कौशल, अवंती आदि राज्यों पर अपना आधिपत्य जमाया तथा वैशाली को अपनी राजधानी बनाया।

विदर्भ पर विजय - मौर्य सम्राट बृहद्रथ की राज्यसभा दो दलों में विभाजित थी एक दल का नेता था पुष्यमित्र शुंग और दूसरे दल का नेता एक मंत्री था।

उस मंत्री के बेटे का नाम था यज्ञसेन जब पुष्यमित्र शुंग ने राजा बृहद्रथ की हत्या की थी तो उस समय मंत्री के पुत्र यज्ञसेन ने अपने आप को विदर्भ का स्वतंत्र शासक घोषित कर दिया था।

किंतु पुष्यमित्र शुंग ने उस मंत्री को बंदी बना लिया लेकिन यज्ञसेन ने पुष्यमित्र शुंग के प्रमुख सहायक माधवसेन को बंदी बना लिया माधवसेन पहले यज्ञसेन का ही प्रमुख सहायक हुआ करता था।

अब यज्ञसेन ने पुष्यमित्र शुंग से अपने पिता को छोड़ने के लिए कहा तब पुष्यमित्र शुंग के पुत्र अग्निमित्र और यज्ञसेन के बीच युद्ध हुआ।

जिसमें अग्निमित्र विजय हुआ इसके बाद विदर्भ के दो हिस्से कर दिए गए जिसमें से एक हिस्से का शासक माधवसेन को बनाया गया और दूसरे हिस्से का शासक यज्ञसेन को पुष्यमित्र की अधीनता में बनाया गया।

खारवेल से युद्ध - बहुत से इतिहासकारों का कहना है कि कलिंग के प्रसिद्ध शासक खारवेल से पुष्यमित्र शुंग का युद्ध हुआ था और खारवेल ने दो बार पुष्यमित्र शुंग को पराजित भी किया था।

खारवेल ने पुष्यमित्र शुंग के राजकोष पर अधिकार कर लिया तथा भारी लूटपाट मचाई किंतु इस विषय में बहुत से इतिहासकार अभी सहमत नहीं है।

अश्वमेध यज्ञ - पुष्यमित्र शुंग ने अपने शासनकाल में दो बार अश्वमेघ यज्ञ किया था। जिसका वर्णन मालविकाग्निमित्रम् और पतंजलि द्वारा रचित ग्रन्थ में है।

पहला अश्वमेघ उसने विदर्भ पर विजय के उपलक्ष्य में जबकि दूसरा अपने जीवन के अंतिम दिनों में किया था। जिसका घोड़ा यवन शासकों ने पकड़ा था और यवन शासकों से युद्ध होने पर यवन पराजित हो गए थे।

शुंग वंश सामान्य ज्ञान shung vansh samanya gyan 

शुंग वंश की स्थापना 184 ईस्वी पूर्व में हुई थी। जबकि इस वंश का पतन 72 ईसवी पूर्व में हो गया था। इस प्रकार से शुंग राजाओं ने 112 वर्षों तक शासन किया था।

शुंग काल में इतिहास राजनीति संस्कृति कला आदि का विकास हुआ। शुंग शासकों ने मगध को विदेशी शक्तियों से बचाया तथा मगध को एक सुगठित साम्राज्य में पुनः स्थापित किया।

शुंग काल में ब्राह्मण बाद अधिक प्रचलित हो गया था इसलिए इस काल को वैदिक घर्म का पुर्नजागरण काल कहा जाने लगा इस समय हवन यज्ञ पूजा-पाठ कर्मकांड आदि प्रमुख रूप से प्रचलित थे।

विदिशा का गरुड़ध्वज भाजा का चैत्य और बिहार अजंता का नवा चैत्य मंदिर, काले के चैत्य और नासिक के चैत्य मथुरा की अनेक यक्ष और यक्षिणियों की मूर्तियाँ सब शुंग काल के है। 

भरहुत साँची और बोधगया के स्तूपों का निर्माण शुंग काल में हुआ था।

शुंग वंश प्रश्नोत्तरी shung vansh prashnottary

Q1- भरहुत स्तूप का निर्माण किसने करवाया था

A. पुष्यमित्र शुंग

B. अग्निमित्र

C. वसूमित्र

D. इनमें से कोई नहीं

उत्तर - A. पुष्यमित्र

Q2 - पुष्यमित्र शुंग था

A. क्षत्रिय

B. ब्राम्हण

C. शूद्र

D. इनमें से कोई नहीं

उत्तर - B - ब्राम्हण

Q3- हेलियोडोरस भारत आया था

A. भाग के शासनकाल में 

B. पुष्यमित्र के शासनकाल में 

C. वसूमित्र के शासनकाल में 

D. अग्निमित्र के शासनकाल में

उत्तर A. भाग के शासनकाल में 

Q4. शुंग वंश का अंतिम शासक कौन था

A. अग्निमित्र

B. घोष

C. देवभूति

D. इनमें से कोई नहीं

उत्तर C. देवभूति

Q.5 पुष्यमित्र शुंग के मगध को स्वतंत्र शुंग साम्राज्य घोषित करते समय विदर्भ पर किसका अधिपत्य था

A. अश्वसेन का

B. माधवसेन का

C. यज्ञसेन का

D. इनमें से कोई नहीं

उत्तर - C. यज्ञसेन का

दोस्तों इस लेख में आपने शुंग वंश का संस्थापक कौन था, शुंग कौन थे, शुंग वंश का अंतिम शासक कौन था, शुंग वंश का पतन आदि के बारे में आशा करता हुँ आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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