संघ कोर्डेटा के लक्षण Phylum chordata ke Lakshan

संघ कोर्डेटा के लक्षण

संघ कोर्डेटा के लक्षण Phylum chordata ke Lakshan 

हैलो दोस्तों आपका हमारे इस लेख संघ कोर्डेटा के लक्षण में। दोस्तों इस लेख में आप संघ कोर्डेटा के लक्षण के साथ संघ कोर्डेटा क्या है?

कोर्डेटा अर्थ, संघ कोर्डेटा के सामान्य लक्षण, संघ कोर्डेटा के विशिष्ट लक्षण के साथ 

संघ कोर्डेटा का वर्गीकरण भी जान पायेंगे। तो आइये दोस्तों पढ़ते है, संघ कोर्डेटा के बारे में:-

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संघ कोर्डेटा क्या है कोर्डेटा अर्थ what is phylum chordata 

संघ कोर्डेटा जंतु जगत का सबसे विकसित संघ है कोर्डेटा का अर्थ है, रज्जु के समान संरचना नोटोकॉर्ड को धारण करने वाला। कोर्डेटा शब्द ग्रीक भाषा का शब्द है जो दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है,

जिसमें पहला शब्द कोर्डा जिसका अर्थ होता है "रज्जु" तथा दूसरा शब्द एटा जिसका अर्थ होता है "धारण करने वाला" इस प्रकार से कोर्डेटा का अर्थ रज्जु के समान संरचना को धारण करने वाला होता है।

साधारण शब्दों में कहा जा सकता है, कि कोर्डेटा विकसित प्राणियों का वह संघ है जिनके सभी प्राणियों में शरीर की सतह की लंबाई के अनुसार शरीर को सहारा आकार देने के लिए

एक विशेष प्रकार की संरचना पाई जाती है, जिसे नोटोकॉर्ड कहा जाता है। वे सभी जीव जंतु संघ कार्डेटा के अंतर्गत आते हैं।

और जिन जीव जंतुओं में नोटोकॉर्ड अनुपस्थित होता है उन सभी जीव-जंतुओं को नॉन कोर्डेट कहा जाता है।

कार्डेटा का नामकरण

कार्डेटा का नामकरण Nomenclature of chordata 

कोर्डेटा संघ के सभी जीव जंतुओं में नोटोकार्ड जैसी संरचना पाई जाती है, इसलिए इस संघ के जीव जंतुओं को कोर्डेट कहा जाता है।

कोर्डेटा संघ के जीव जंतुओं की विशिष्ट संरचना का अध्ययन सबसे पहले बालफॉर नामक वैज्ञानिक ने किया था और उन्होंने ही इस विशिष्ट संरचना वाले जीव जंतुओं को एक संघ में रखा और उस संघ को नाम कोर्डेटा दिया।

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संघ कार्डेटा के लक्षण Phylum chordata ke Lakshan 

संघ कोर्डेटा एक विकसित प्राणियों का संघ है, इसलिए इस संघ के लक्षणों को 3 वर्गों में विभाजित कर दिया गया है जो निम्न प्रकार से है:- 

1. संघ कार्डेटा के आधारभूत लक्षण Phylum chordata ke Mukhya Lakshan 

सभी प्रकार के कोर्डेट जंतुओं में निम्न प्रकार के 3 लक्षण आधारभूत लक्षण होते हैं:-

नोटोकॉर्ड - सभी कशेरुकी जंतुओं में मध्य पृष्ठ के बीच शरीर के समानांतर एक लंबी लचीली छड़ के समान संरचना होती है। जिसे पृष्ठरज्जु या फिर नोटोकॉर्ड कहा जाता है।

फैरिंजीयल गिल छिद्र - फैरिंजीयल गिल छिद्र संरचना सभी कशेरुकी जीव जंतुओं में होते हैं। अर्थात इन जंतुओं के फेयरिंग्स में छिद्र होते हैं, जो फेरिंग्स की पाशर्व भित्ति में होते है।

जब ये विकसित हो जाते हैं तब एक गिल पाउच में स्थित होते हैं। इस प्रकार की संरचना निम्न कशेरुकी जंतुओं में अक्सर होती है। जिसका कार्य स्वसन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाना होता है।

वहीं कुछ कशेरुकी जंतुओं में फेरिंग्स भ्रूणीय परिवर्धन होने से पहले ही बंद हो जाते हैं। इनके स्थान पर फेफड़े विकसित होते हैं जो शवशन का कार्य करते हैं।

तंत्रिका रज्जु - तंत्रिका रज्जु संरचना कशेरुकी और अकशेरुकी दोनों प्रकार के जंतुओं में उपस्थित होती है किंतु यह तंत्रिका रज्जु अपनी विशेषताओं स्थिति तथा संरचना के कारण कशेरुकी और अकशेरुकी जंतुओं में अलग-अलग होती है।

संघ कार्डेटा के विशिष्ट लक्षण Phylum chordata ke special Lakshan 

अधरीय ह्रदय - इस संघ के प्राणियों में ह्रदय अधर में पाया जाता है। और रक्त वाहिनीयों में रक्त का प्रवाह आगे से पीछे की दिशा में होता है।

जो उच्च कशेरुकी जंतु होते हैं, उनमें हृदय पेरिकार्डियल सीलोम युक्त गुहा में होता है। यह पेरिकार्डियल गुहा दोहरे स्तर के पेरिकार्डियम संरचना से घिरी रहती है।

उपांग - सभी कशेरुकीय प्राणियों में 2 जोड़ी उपांग पाए जाते हैं। जिन्हें अग्र और पश्च पाद कहा जाता है। यह उपाग में चलने के लिए वस्तुओं को पकड़ने के लिए तथा कार्य करने के लिए उपयोग में लाया जाते हैं।

गुदा पश्च पूँछ - कशेरुकीय प्राणियों में गुदा के पश्च अंतिम भाग को पूँछ कहा जाता है।

मुख - मुख कशेरुकी प्राणियों की विशिष्ट संरचना है, यह मस्तिष्क के नीचे तथा पास में स्थित होता है।

आहार नाल - कोर्डेटा संघ के प्राणियों की आहार नाल विकसित होती है। जो आमाशय और आंत में विभाजित रहती है। आंत के भाग से ही यकृत का विकास भी होता है।

खंडीभवन - कशेरुकी प्राणी सम खंडी भवन आंतरिक अंगों के आधार पर प्रकट करते हैं और बाहरी तथा आंतरिक खंडीभवन के रूप में प्रदर्शित होता है। 

रक्त परिसंचरण तंत्र - संघ कार्डेटा या कशेरुकी प्राणियों में अधिकतर बंद प्रकार का रक्त परिसंचरण तंत्र होता है। इनमें रक्त बंद वाहिनियों और कोशिकाओं में बहता है।

लाल रक्त कणिकाएँ - कशेरुकी प्राणियों का विशिष्ट लक्षण लाल रक्त कणिकाएँ भी होता है। सभी कशेरुकी प्राणियों में लाल रक्त कणिकाएँ पाई जाती है।

जिनमें श्वसन वर्णक हीमोग्लोबिन होता है। यह प्लाज्मा में घुली हुई अवस्था में पाया जाता है और रक्त का लाल रंग के लिए उत्तरदाई होता है।

पीयूष ग्रंथि - पीयूष ग्रंथि सभी प्रकार के कशेरुकी प्राणियों में उपस्थित होती है वयस्क प्राणियों में इस ग्रंथि को पीयूष ग्रंथि जबकि भ्रूण अवस्था में इसको हाइपोफिसिस भ्रूणीय के नाम से जाना जाता है।

कार्डेटा के सामान्य लक्षण Phylum chordata ke Samanya Lakshan 

कार्डेटा के सामान्य लक्षण सभी प्रकार के उच्च कशेरुकी प्राणियों में पाए जाते हैं।

द्वीपाशर्व सममितीय - उच्च कशेरुकी प्राणियों के जैसे अन्य कशेरुकी प्राणियों में भी द्वीपाशर्व पाई जाती है।

शीर्ष भवन - कशेरुकी की प्राणियों के सामान्य लक्षण में कुछ प्रमुख रचनाएँ जैसे कि कान, मुख, मस्तिष्क, नेत्र घृाण अंग आदि मिलकर सिर का निर्माण करते हैं।

देहगुहा - सभी कशेरुकी जंतुओं में वास्तविक प्रकार की देहगुहा पाई जाती है।

तीन जनन स्तर - इन प्राणियों में जल स्तर 3 प्रकार का होता है अर्थात समस्त अंगों का भ्रूणीय विकास एक्टोडर्म, मिजोडर्म और एंडोडर्म से होता है।

संघ कोर्डेटा का वर्गीकरण classification of phylum chordata

संघ कोर्डेटा का वर्गीकरण निम्न चार उपसंघो में किया गया है:-

1. उपसंघ - हेमीकोर्डेटा

सामान लक्षण

  1. उपसंघ हेमीकोर्डेटा के प्राणियों को अर्ध कशेरुकी कहा जाता है।
  2. यह प्राणी समुद्री प्राणी होते हैं और मांसाहारी प्रकृति के होते हैं।
  3. इन प्राणियों में नोटोकार्ड भ्रूणीय अवस्था में उपस्थित नहीं होता। जबकि नोटोकोड खोखली संरचना जैसा होता है।
  4. फेरिंगस में गिल छिद्र उपस्थित होते हैं।
  5. देहगुहा एंटोसीलिक प्रकार की अग्र मध्य और पश्च सीलोम होती है।

इस उपसंघ को दो वर्गों में बांटा गया है:- 

1 वर्ग - एंटीरोपन्युसेटा

2 वर्ग - टेरोब्रेँकिया

2. उपसंघ - ट्यूनिकेटा / यूरोकार्डेटा

सामान लक्षण

  1. इस उपसंघ के प्राणियों का शरीर एक विशेष प्रकार के प्रोटीन जिसे ट्यूनिक प्रोटीन कहते है। के आवरण से ढका रहता है। जबकि आवरण को ट्यूनिक टेस्ट कहा जाता है।
  2. इन प्राणियों में नोटोकॉर्ड लार्वा अवस्था में होता है, जबकि कायांतरण होने के मध्य यह लक्षण समाप्त हो जाते हैं।
  3. वयस्क में फेरिंग्स में गिल छिद्र पाए जाते हैं।

इस उपसंघ को तीन वर्गों में बाँटा गया है:- 

1 वर्ग - ऐसीडियेसिया

2 वर्ग - थैलियेसिया

3 वर्ग - लर्वेसिया

3. उपसंघ - सिफेलोकोर्डेटा

सामान्य लक्षण

  1. यह जंतु समुद्र के किनारे रेत में बिल बनाकर रहते है।
  2. यह जंतु छोटे, पतले, नालिकाकार इनका शरीर, बीच में मोटा उत्तल, लेंस जैसा होता है।
  3. इस संघ के प्राणियों में शरीर समखण्डी भवन प्रदर्शित करता है।
  4. तंत्रिका रज्जु और नोटोकॉर्ड संरचना शरीर के आगे वाले हिस्से से पश्च हिस्से तक रहती है।

इसे एक वर्ग में विभाजित किया गया है:-

1 वर्ग - लेप्टोकाडाई

4. उपसंघ - क्रेनियेटा/ वर्टीब्रेटा

सामान्य लक्षण

  1. यह प्राणी जल, थल, नभ सभी स्थलों पर आवासों पर पाए जाते है।
  2. यह प्राणी स्वतंत्रजीवी, परभक्षी, परजीवी, सहजीवी सभी स्वभाव के जंतु है।
  3. देहगुहा शीजोसीलिक वास्तविक प्रकार की होती है, जबकि शरीर द्वीपाशर्व सममितीय होता है।
  4. शरीर शिर, धड और पूँछ में विभाजित होता है।
  5. उपाग दो जोड़ी धड से जुड़े हुए जो प्रचलन और कई कार्यों में सहायक होते है।
  6. पाचन, परिसचरण, उत्सर्जन, तंत्रिका आदि तंत्र विकसित
  7. बाह्य कंकाल नाखून, शल्क, बाल, से तथा अन्तःकंकाल निम्नवर्टीब्रेट में उपस्थि तथा उच्च में अस्थि से निर्मित
  8. एकलिंगी जंतु परिवर्धन प्रत्यक्ष प्रकार का

इसको दो महावर्ग में बाँटा गया है

1. महावर्ग - एग्नेथा

2. महावर्ग - ग्नेथोस्टोमेटा 

दोस्तों इस लेख में आपने संघ कोर्डेटा के लक्षण के साथ संघ कोर्डेटा क्या है? कोर्डेटा अर्थ, संघ कोर्डेटा के सामान्य लक्षण,

संघ कोर्डेटा के विशिष्ट लक्षण के साथ संघ कोर्डेटा का वर्गीकरण आदि पड़ा आशा करता हुँ यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।

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