संघ इकाइनोडर्मेटा के लक्षण Characteristics of the phylum Echinodermata

संघ इकाइनोडर्मेटा के लक्षण

संघ इकाइनोडर्मेटा के लक्षण Characteristics of the phylum Echinodermata

हैलो दोस्तों इस लेख संघ इकाइनोडर्मेटा के लक्षण में आपका बहुत - बहुत स्वागत है। दोस्तों इस लेख में आप 

संघ इकाइनोडर्मेटा क्या है, परिभाषा,नामकरण के साथ ही संघ इकाइनोडर्मेटा का वर्गीकरण भी जानेंगे। तो आइये दोस्तों पढ़ते है यह लेख संघ इकाइनोडर्मेटा के लक्षण:-

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संघ इकाइनोडर्मेटा के लक्षण

संघ इकाइनोडर्मेटा क्या है What is phylum Echinodermata

संघ इकाइनोडर्मेटा उन जीवो का संघ है, जिन जीवो की त्वचा पर कांटे पाए जाते हैं। इकाइनोडर्मेटा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है "Echinos 

जिसका अर्थ होता है, spine = कांटे तथा "dermos" जिसका अर्थ होता है, skin= त्वचा इस प्रकार से वे सभी जंतु जिनका शारीरिक आवरण कांटों का होता है,

अर्थात उनकी त्वचा कांटो की होती है। उन सभी प्राणियों को संघ इकाइनोडर्मेटा के अंतर्गत रखा गया है।

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परिभाषा defination 

वे सभी जीव जंतु जिनमें वयस्कों की शारीरिक सममिति आरीय होती है, किंतु उन जंतुओं के लारवा की सममिति द्वीपर्शावीय होती है।

जंतुओं के वयस्कों की त्वचा कठोर कैल्शियम युक्त अस्थियों और कंटिकाओं से बनी होती है। वे सभी जीव संघ इकाइनोडर्मेटा मे शामिल किए गए हैं।

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नामकरण nomenclature

संघ इकाइनोडर्मेटा के जीवो के विशिष्ट लक्षणों के आधार पर सबसे पहले लैमार्क ने जंतुओं को इकाइनोडर्मेटा नाम दिया था।

किंतु 1847 में ल्यूकार्ट नामक वैज्ञानिक ने इन सभी जंतुओं को एक संघ के रूप में व्यवस्थित किया। वर्तमान में संघ इकाइनोडर्मेटा में 6000 जीवित और 20000 विलुप्त प्रजातियाँ शामिल हैं।

संघ इकाइनोडर्मेटा के सामान्य लक्षण Sangh Echinodermata ke samanya lakshan 

आवास एवं प्रकृति - संघ इकाइनोडर्मेटा के जंतु जलीय और समुद्री जंतु होते हैं। यह जंतु समुद्र की तली में रहते हैं और मांसाहारी प्रकृति के होते हैं। संघ इकाइनोडर्मेटा के जंतु कभी-कभी स्वतंत्रप्लावी अथवा स्थानबद्ध होते है।

शारीरिक आकृति - यह जंतु गोलाकार बेलनाकार और सितारे के आकार के होते हैं, इनके शरीर के केंद्र से समान आकार की 5 भुजाएँ जुड़ी रहती है, जो अविभाजित और विभाजित प्रकार की होती हैं।

खंडी भवन - संघ इकाइनोडर्मेटा के जंतुओं का शरीर अखंडित होता है।

सममिति - इन जंतुओं में वयस्कों की शारीरिक सममिति आरीय होती है, किंतु उन जंतुओं के लारवा की सममिति द्वीपर्शावीय होती है।

देहगुहा - जंतुओं की देहगुहा एंटीरोसीलिक प्रकार की होती है। जो कशेरुकी जंतुओं के समान तथा परिवर्धन अवस्था में आहार नाल से विकसित होती है।

देहभित्ति - इन जंतुओं में त्वचा देहभित्ति का निर्माण करती है। इनमें कैल्शियम से बनी हुई प्लेट पाई जाती है जो मीसोडर्म से निर्मित होती हैं।

और इन प्लेट से कांटे जैसी संरचना विकसित होती हैं जो त्वचा बाहरी सतह पर उपस्थित रहते हैं। 

प्रचलन - इन जंतुओं में जल संवहनीय तंत्र भ्रूणीय सीलोम से विकसित होता है। जिससे प्रचलन का कार्य होता है। यह तंत्र अन्य जंतुओं में नहीं पाया जाता।

इसलिए यह इन जंतुओं का प्रमुख लक्षण है। इनमें पोड़िया और ट्यूबफीट जैसी संरचनाएँ प्रचलन का कार्य करती हैं। जबकि कुछ जंतु स्थानबद्ध भी होते हैं। 

पोषण - यह जंतु मांसाहारी प्रकृति के होते हैं, जो छोटे-छोटे जीवो को भक्षण करते हैं।

उत्सर्जन - संघ इकाइनोडर्मेटा के जंतुओं में उत्सर्जन अंग अनुपस्थित होते हैं। इन जंतुओं में उत्सर्जन का कार्य शारीरिक सतह के द्वारा ही होता है।

परिसंचरण तंत्र - जंतुओं में परिसंचरण तंत्र अल्प विकसित होता है जो हीमल और पेरीहीमल तंत्र के रूप में पाया जाता है। जबकि कुछ जंतुओं में सीलोमिक अवकाशों से भी संबंधित रहता है। 

स्वसन तंत्र - इन जंतुओं में श्वसन गिल्स, ट्यूब फीट, श्वसन वृद्ध और बर्सी जैसी संरचनाओं के द्वारा होता है।

तंत्रिका तंत्र - इन जंतुओं का तंत्रिका तंत्र अल्प विकसित होता है, इनमें मस्तिष्क अनुपस्थित परिमुखीयरिंग और आरीय तंत्रिकायें पाई जाती हैं।

संवेदी अंग - जंतुओं में स्पर्श संवेदी संरचनाएँ, रसायन संवेदी संरचनाएँ, प्रकाश ग्राही संरचनाएँ, के साथ ही संतुलन पट्टी और अंतस्थ संसपर्शक पाए जाते हैं।

प्रजनन तंत्र - यह जंतु एकलिंगी प्राणी होते हैं इनमें जननांग बड़े बड़े होते हैं जो संख्या में एक या अनेक उपस्थित होते हैं.

परिवर्धन - इन जंतुओं में बाहरी निषेचन जलीय माध्यम में होता है। जबकि परिवर्धन प्रत्यक्ष प्रकार का और स्वतंत्र प्लावी लार्वा अवस्थायें पाई जाती है।

संघ इकाइनोडर्मेटा का वर्गीकरण classification of phylum Echinodermata

संघ इकाइनोडर्मेटा का वर्गीकरण इन जंतुओं की शारीरिक आकृति उपस्थित कंकाल तथा जल संबंधी प्रकार के आधार पर निम्न प्रकार से किया गया है:-

1. उपसंघ - इकाइनोजोआ

सामान्य लक्षण

  1. उपसंघ इकाइनोजोआ के समस्त प्राणी समुद्री होते हैं।
  2. इन प्राणियों का शरीर गोलाकार आकृति का होता है। इन प्राणियों में सितारे के समान भुजाएँ नहीं पाई जाती हैं।
  3. मुख और गुदाद्वार शरीर के विपरीत धुरवों पर उपस्थित होते है।
  4. कंकाल में गतिशील शूल पाए जाते है। और तीन जबडे बाले बृन्तपाद होते है।
  5. जंतुओं में जनन ग्रंथियों की संख्या 5 या इससे कम होती है।

इस उपसंघ को 5 वर्गों में बांटा गया है:-

1. वर्ग - हैलिकोप्लेकॉयडिया

2. वर्ग - होलोथूरॉइडिया

3. वर्ग - एड्रियोएस्टेरोइडिया

4. वर्ग - इकिनॉइडिया

5. वर्ग - ऑफियोसिस्टयूइडिया

2. उपसंघ - होमेलोजोआ

सामान्य लक्षण

  1. इस उपसंघ में विलुप्त प्राणियों को रखा गया है।
  2. इन प्राणियों में त्रिज्या सममित का अभाव था।
  3. प्राणियों के शरीर का पृष्ठीय भाग चपटा उत्तल प्रकार का होता है, जिसे कैरापेस कहा जाता था।
  4. इन प्राणियों में मुख के प्रत्येक ओर 1 जोड़ी भुजायें उपस्थित होती थी। 
  5. इन प्राणियों की आहार नाल U आकार की थी।
  6. इन प्राणियों का गुदाद्वार साइफन के ऊपर होता था।

3. उपसंघ - क्रिनोजोआ

सामान्य लक्षण

  1. उपसंघ क्रिनोजोआ के प्राणी गोल आकृति के होते है।
  2. इन प्राणियों का शरीर प्याले जैसी आकृति का और पंच भूजीय होता है।
  3. बीथी उपमुखीय सतह पर उपस्थित होती है।
  4. इन प्राणियों में जो प्राणी विकसित होते है, उनके शरीर पर विशिष्ट संरचनायें भुजायें विकसित होती थी। और इन्हीं भुजाओं पर भोजन ग्रहण करने वाले उपांग उपस्थित होते थे।

इस उपसंघ को 3 वर्गों में बांटा गया है।

1. वर्ग - क्रिनाइडिया

2. वर्ग - ब्लास्टॉइडिया

3. वर्ग - क्रिनोइडिया 

4. उपसंघ - एस्टेरोजोआ

सामान्य लक्षण

  1. यह प्राणी स्वतंत्र रूप से चलने वाले होते है।
  2. इनका बीथी तंत्र चलन में उपयोग आता है।
  3. इन प्राणियों का शरीर तारे के समान चपटा और आरीय सममिति वाला होता है।
  4. इनमें 5 भुजाएँ होती है जो खोखली तथा इनमें देहगुहिक नालिका पायी जाती है।
  5. इन प्राणियों में मुखीय और उपमुखीय सतह अस्पष्ट जबकि मुखीय सतह नीचे की और स्पष्ट।

1. वर्ग - स्टैलेराइडिया

दोस्तों इस लेख में आपने संघ इकाइनोडर्मेटा के लक्षण के साथ नामकरण, तथा वर्गीकरण पड़ा। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा। 

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