संचार किसे कहते हैं, इसके प्रकार what is communication, its types

संचार किसे कहते हैं, इसके प्रकार what is communication, its types

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका एक बार फिर से हमारे इस लेख संचार किसे कहते हैं इसके प्रकार (What is communication its type) में बहुत-बहुत स्वागत है।

दोस्तों इस लेख में आप संचार किसे कहते हैं? संचार के प्रकार क्या हैं? और संचार कैसे होता है? आदि के बारे में महत्वपूर्ण तथ्यों को जानेंगे।

तो दोस्तों आइए शुरू करते हैं, आज का यह लेख संचार किसे कहते हैं इसके प्रकार:-

संचार किसे कहते हैं, इसके प्रकार

संचार किसे कहते हैं What is communication

प्रत्येक जीव अपने अनुभवों अपने विचारों को एक दूसरे से प्रकट करने की कोशिश करता है, इसके लिए वह विभिन्न प्रकार के माध्यम (Medium) जैसे - एक दूसरे से सीधे वार्ता करना

एक दूसरे को कूट लेखन के माध्यम से या फिर किसी संदेश के माध्यम से अपने अनुभवों तथा विचारों को पहुँचाता है,उस प्रक्रिया को संचार कहते हैं।

साधारण शब्दों में कह सकते हैं, कि दैनिक जीवन में हम सभी एक दूसरे से सीधे बातें करते हैं, या फिर पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो, टेलीविजन टेलीफोन

आदि विभिन्न प्रकार के संचार माध्यमों के द्वारा सूचनाओं तथा अनुभवों का आदान-प्रदान एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्तियों के बीच किया जाता है। सूचनाओं के इसी आदान-प्रदान को हम संचार कहते हैं।

ई- लाइब्रेरी किसे कहते है।

संचार की परिभाषा Definition of communication

कई विद्वानों के द्वारा संचार की परिभाषाएँ दी गई है, जिनमें से कुछ निम्न प्रकार हैं:-

  1. मैकडेविड और हरारी के अनुसार -  दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच सूचना तथा अनुभवों के आदान-प्रदान को संचार कहते हैं।
  2. ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार - विचारों अनुभवों का एक इंसान से दूसरे इंसान तक पहुंचाना या विनिमय करना इसके लिए किसी भी माध्यम की जरूरत क्यों ना पड़े उसे संचार (Communication) कहते हैं। 

संचार का अर्थ Meaning of communication

संचार का अर्थ - संचार का अर्थ होता है, "साझा करना" इसलिए सूचनाओं तथा अनुभवों का एक से अन्य लोगों के बीच किसी भी संचार माध्यम से आदान प्रदान करना ही संचार कहलाता है। संचार के तीन मुख्य तत्व होते है।

सन्देशकर्ता - किसी भी बात विचार तथा सूचना को भेजनें वाले को सन्देशकर्ता कहते है, सन्देशकर्ता ही संचार की पहली कड़ी होता है।

संचार माध्यम - संचार की दूसरी कड़ी होती है, संचार माध्यम जो सूचना, विचार या अनुभवों को एक स्थान से दुसरे स्थान पर ले जाता है,

संचार माध्यम कोई भी हो सकता है, जैसे - मनुष्य, पक्षी, कोई संस्था या कोई इलेक्ट्रॉनिक माध्यम।

प्राप्तकर्ता - प्राप्तकर्ता संचार प्रक्रिया की अंतिम कड़ी के रूप में आता है। प्राप्तकर्ता वह होता है, जो किसी भी सूचना को प्राप्त करता है। 

संचार माध्यम के प्रकार types of communication

किसी भी सूचना अनुभवों तथा विचारों को अन्य तक पहुंचाने के लिए किसी न किसी प्रकार के माध्यम की आवश्यकता होती है,

उन्हें संचार माध्यम कहा जाता है। संचार माध्यम निम्न तीन प्रकार के होते हैं:-

1. लिखित माध्यम - सूचना या संचार का सबसे पुराना माध्यम लिखित माध्यम ही है। प्राचीन काल में जब किसी भी प्रकार की अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी नहीं थी।

उस समय लिखित माध्यम के द्वारा ही संदेश सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने का कार्य किया जाता था।

और आज के समय में लिखित माध्यम सूचना, संदेश भेजने का एक सबसे सशक्त माध्यम बन गया है। जिनमें अखबार पत्र पत्रिकायें मैगजीन सम्मिलित हैं।

यहाँ तक कि भारतीय संविधान का चौथा खंभा अखबार को कहा जाने लगा है। क्योंकि अखबार ही वह एक ऐसा माध्यम है, जिसमें देश की प्रत्येक खबर होने के साथ ही

विदेशों तक की खबर पढ़ सकते हैं। अखबार के माध्यम से रोजगार स्वास्थ्य दैनिक जीवन प्राकृतिक घटनाएँ राजनीति आदि के बारे में महत्वपूर्ण सूचनाएँ एकत्रित करना बहुत ही आसान हो गया है।

यह एक बहुत ही सस्ता और जन-जन तक पहुँचने वाला माध्यम है। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार की पत्र, पत्रिकाएं तथा मैगजीन  भी संचार के लिखित माध्यम के अंतर्गत आते हैं।

2. श्रव्य माध्यम - श्रव्य माध्यम संचार माध्यम का दूसरा सबसे उत्तम माध्यम माना जाता है, इसके अंतर्गत रेडियो , टेप रिकॉर्डर, ऑडियो मैसेज के साथ ही एफएम

आकाशवाणी चैनल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके द्वारा देश के अंदर होने वाली गतिविधियों शिक्षा, राजनीति प्राकृतिक घटनाओं की भविष्यवाणियाँ आदि की जानकारी जन-जन तक बहुत ही कम समय में पहुँच जाती है।

3. दृश्य माध्यम - आज के समय में दृश्य माध्यम संचार का सबसे शक्तिशाली माध्यम बनकर उभरा है। जिसमें टेलीविजन, कंप्यूटर, मोबाइल आदि का महत्वपूर्ण स्थान है।

जिनके द्वारा हम देश तथा देश से बाहर होने वाली सभी घटनाओं को अपने ऑन स्क्रीन पर भी देख सकते हैं। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार की लिखित सूचना तथा दृश्य, श्रव्य सभी प्रकार की गतिविधियाँ

भी हम अपने कंप्यूटर मोबाइल और टेलीविजन के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। एजुकेशन से संबंधित, प्राकृतिक घटनाओं से संबंधित हर एक विभाग से संबंधित सूचना

हम दूरदर्शन के माध्यम से टेलीविजन पर तथा इंटरनेट के माध्यम से मोबाइल और कंप्यूटर पर कहीं पर भी किसी भी समय देख सकते हैं सुन सकते हैं और पढ़ भी सकते हैं। 

संचार प्रक्रिया क्या है what is communication process

संचार हेतु विभिन्न प्रकार की विधि तथा प्रिक्रियाओं का प्रयोग किया जाता है, और यह विधि संचार के उपकरणों के प्रयोग पर निर्भर करती हैं, इस प्रकार से संचार की प्रक्रिया को तीन भागों में बांटा गया है:- 

एकपंथी संचार प्रक्रिया - इस प्रकार की प्रक्रिया में आंकड़ों को या सूचनाओं को मात्र भेजने या ग्रहण करने का ही कार्य किया जाता है।

इस प्रक्रिया में आंकड़ों और सूचनाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजना तो संभव है, किंतु उनका उत्तर ग्रहण नहीं किया जा सकता ऐसी प्रक्रिया एक पंथी संचार प्रक्रिया के अंतर्गत आती हैं।

अर्ध द्वीपंथी संचार प्रक्रिया - संचार की यह उस प्रकार की प्रक्रिया है, जिसमें संचार दोनों दिशाओं में हो सकता है। अर्थात इस प्रक्रिया में संचार दोनों व्यक्तियों के मध्य होता है।

किंतु इस प्रक्रिया में या तो आंकड़ों को ग्रहण किया जा सकता है या फिर आंकड़ों को भेजा जा सकता है। एक साथ आंकड़ों को ग्रहण किया जाना और भेजा जाना इस प्रक्रिया में संभव नहीं है।

पूर्ण द्वीपंथी संचार प्रक्रिया - संचार की इस प्रक्रिया में सूचनाओं तथा आंकड़ों का आदान-प्रदान एक साथ होता है।

अर्थात एक व्यक्ति सूचना को भेजने के साथ ही सूचना तुरंत प्राप्त भी कर सकता है। इस प्रक्रिया को पूर्ण द्वीपंथी संचार प्रक्रिया के नाम से जाना जाता है।

संचार की विशेषताएँ Features of communication

1. संचार एक परस्पर संबंध स्थापित करने की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।

2. संचार के द्वारा एक ही समय में दो या दो से अधिक व्यक्ति जोड़कर सूचनाओं तथा ज्ञान का आदान प्रदान करते हैं।

3. संचार की प्रक्रिया एक उद्देश्य युक्त प्रक्रिया है।

4. संचार की प्रक्रिया में परस्पर विश्वास जागृत होता है।

5. संचार की प्रक्रिया में विचार-विमर्श तथा विचार विनिमय पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिसमें सूचना प्रदान करना, निर्देश, आदेश, संदेश परस्पर विश्वास और समन्वय कायम रहता है।

6.संप्रेषण प्रक्रिया में सूचनाओं, विचारों और ज्ञान को मौखिक, लिखित तथा सांकेतिक तीनों प्रकार के माध्यमों से ग्रहण किया जा सकता है, और प्रेषित भी किया जा सकता है।

7. संचार की प्रक्रिया शिक्षा के विकास के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है।

संचार का महत्व Importance of communication

मनुष्य पुराने समय से ही देश-विदेश की घटनाओं सूचनाओं को जानने का इच्छुक रहा, मनुष्य की यह अभिलाषा होती है,

कि वह अपने वातावरण से बाहर के वातावरण के बारे में भी जाने, जिसके लिए मनुष्य ने विभिन्न प्रकार के तरीकों का भी उपयोग किया,

पुराने समय में सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए मनुष्य कबूतरों का उपयोग किया करता था, धीरे-धीरे बढ़ती हुई टेक्नोलॉजी के कारण

आज मनुष्य के पास विभिन्न प्रकार के सूचना और ज्ञान एकत्र करने के साधन है। आज के समय में मनुष्य कहीं पर भी किसी भी समय संसार में होने वाली

विभिन्न घटनाओं चाहे वह शिक्षा से संबंधित हो राजनीति से संबंधित हो या फिर कोई प्राकृतिक घटना हो आदि के बारे में सूचना प्राप्त कर सकता है।

जिसका मनुष्य के जीवन में बहुत ही बड़ा महत्व है। संचार के माध्यमों के द्वारा आज मनुष्य अपने ज्ञान के भंडार को बढ़ाए जा रहा है।

ऑनलाइन तथा का इंटरनेट के जरिए विभिन्न प्रकार की ज्ञान की सामग्री अपने अनुसार खोज कर उसे पढ़कर अपने ज्ञान के भंडार में वृद्धि करते है।

जो मनुष्य के डेली जीवन में विभिन्न प्रकार से महत्वपूर्ण सिद्ध होता है। संचार मनुष्य की शिक्षा ज्ञान सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इस तकनीकी के द्वारा आज समस्त संसार एक छोटे परिवार के रूप में बदल गया है।

दोस्तों इस लेख में आपने संचार किसे कहते है, ((What is communication) के साथ अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में पड़ा, आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

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