वृषण और अंडाशय का कार्य function of testis and ovary

वृषण और अंडाशय का कार्य

वृषण और अंडाशय का कार्य function of testis and ovary 

हैलो दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, आज के इस लेख वृषण और अंडाशय का कार्य में। दोस्तों इस लेख में आप जानेंगे कि वृषण किसे कहते हैं?

अंडाशय किसे कहते हैं? और इनके कार्य क्या है? इसके साथ ही आप जानेंगे कि वृषण और अंडाशय से कौन से हार्मोन निकलते हैं?

तथा ये प्रजनन में किस प्रकार की भूमिका निभाते हैं? तो आइए दोस्त शुरू करते हैं, आज का यह लेख वृषण और अंडाशय का कार्य:-

थाइमस ग्रंथि किसे कहते है

वृषण किसे कहते है

वृषण किसे कहते हैं what is testis 

वृषण सभी नर स्तनधारियों में पाए जाने वाले एक के विशेष प्रकार कि प्रजनन अंग होते हैं। जो उदर गुहा की नीचे की ओर वृषण कोष में दो संख्या में स्थित होते हैं।

जिन्हे अन्तःश्रावी ग्रंथि भी कहा जाता है, कियोकि इनसे श्रावित होर्मोन्स सीधा रक्त में जाते है, अर्थात ये नालिकाविहीन ग्रंथि होते है।

इसी प्रकार से मादा में प्रजनन अंग होते हैं जो संख्या में दो होते हैं तथा उदर गुहा में स्थित होते हैं, जिन्हे अंडाशय कहते है।

वृषण जिस थैली में होते हैं उस थैली को अंडकोष कहा जाता है और यह अंडकोष गर्मियों में फैलती है तथा सर्दियों में सिकुड़ जाती है।

अंडकोष की लंबाई 5 सेंटीमीटर तथा चौड़ाई 2.5 सेंटीमीटर के आसपास होती है। इस अंडकोष में वृषण शिशन के दोनों तरफ पर एक-एक संख्या में पाए जाते हैं।

अंडकोष से एक संरचना जुड़ी होती है, जिसे शुक्राशय कहते हैं। यह शुक्राशय अंडकोष को शरीर के अन्य भागों से जोड़ता है। शुक्राशय 1 जोड़ी होती हैं जिनकी लंबाई 4 सेंटीमीटर होती है,

तथा एक थैलीनुमा होते हैं। इनमें ही शुक्राणुओं का निर्माण होता है। शुक्राशय मनुष्य में दोनों जांघों के बीच लटकी हुई अवस्था में होते हैं।

दोनों शुक्राशयों से मिलकर एक वाहिनी निकलती है जिसको संयुक्त स्खलन वाहिनी कहा जाता है। इस स्खलन वाहिनी के द्वारा ही पुरुष

शुक्राणुओं को महिला की योनि में प्रवेश कराता है तथा मूत्र विसर्जन करने के लिए भी इसी नालिका का उपयोग किया जाता है।

अग्नाशय किसे कहते है

वृषण के कार्य function of testis 

वृषण में सेमिनिफेरस नालिकाओं के बीच में इंट्रस्टीटियल कोशिकायें पायी जाती है। जो टेस्टॉस्टिंरोन होर्मोन्स श्रावण करती है।

बृषण में शुक्राणुओं का निर्माण होता है। तथा एल्डोस्टीरोन तथा एंड्राजेन वृषण से श्रावित होर्मोन्स नर में द्वीतियक लैंगिक गुणो

जैसे - दाढ़ी मुँछ का आना, आवाज का भारी होना, विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित होना आदि का विकास करते है।

अंडाशय किसे कहते है

अंडाशय किसे कहते है what is ovary 

अंडाशय मादा के प्रजनन अंग होते है। जो उदारगुहा गर्भाशय में एक जोड़ी पाए जाते है। यह अन्तःश्रावी ग्रंथि की तरह कार्य करते है,

कियोकि इनसे श्रावित होर्मोन्स सीधे रक्त में जाता है। प्रत्येक अंडाशय लगभग 3 सेंटीमीटर लंबा और 2 सेंटीमीटर मोटा होता है,

जो एक चौड़े लिगामेंट के द्वारा उदर गुहा में स्थित रहते है। अंडाशय दो भागों से निर्मित होता है जिसमें बाहरी भाग को कॉर्टेक्स और भीतरी भाग को मेडुला कहा जाता है।

अंडाशय मादा जनन अंग का सबसे प्रमुख भाग होता है, जिसमें प्रमुख हारमोंस एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन का निर्माण होता है।

अंडाशय के कार्य function of ovary 

अंडाशय से दो प्रकार की होर्मोन्स निकालते है जो मादाओं में विभिन्न प्रकार के कार्य करते हैं, जो निम्न प्रकार से हैं:- 

एस्ट्रोजन - एस्ट्रोजन हार्मोन अंडाशय की ग्राफिक पुटिकाओं से निकलने वाला हार्मोन है। जिसका सबसे महत्वपूर्ण कार्य मादा में द्वितीयक लैंगिक गुणों का विकास करना होता है।

एस्ट्रोजन हार्मोन मादाओं में  मासिक चक्र प्रारंभ करता है, मादाओं की आवाज को पतला और महीन बनाता है, स्तनों का विकास करता है,

विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित करता है, तथा नितंबों का भारी होना एस्ट्रोजन हार्मोन के द्वारा ही संभव होता है।

प्रोजेस्ट्रोन - प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन भी मादा में अंडाशय के कार्पस लुटियम के द्वारा स्रावित होने वाला हारमोंस है।

यह हार्मोन एस्ट्रोजन हार्मोन के लक्षणों को प्रभावित करता है। अगर प्रोजेस्ट्रोन हारमोंस की कमी होने लगती है, तो मादाओं में द्वीतियक लैंगिक गुणों विकास नहीं होता।

मासिक चक्र में अनियमिता देखने को मिलती हैं। तथा प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन अधिक स्रावित होने पर कैंसर की भी संभावना बढ़ जाती है।

प्रोजेस्ट्रोन हारमोंस दुग्ध श्रावण को बढ़ाने में तथा गर्भधारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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