स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक factors affecting health

स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक


स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक factors affecting health

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, हमारे इस लेख स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक (Fectors affecting health) में दोस्तों इस लेख में आज आप स्वास्थ्य के बारे में पड़ेंगे

कि वह कौन से कारक है जो हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। इन करकों के कारण ही हमारा स्वस्थ्य खराब (Bad health) होता है

और मनुष्य कई बीमारियों से ग्रसित हो जाता है।. तो पढ़ते है वे कौन से कारक है जो स्वस्थ्य को प्रभावित करते है:-

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स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक factors affecting health

मनुष्य के अंदर का शरीर एक प्रकार से पूरी दुनिया होती है, जिसका संपर्क निरंतर बाहरी वातावरण से बना रहता है। यह संपर्क स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है

और हानिकारक भी इसीलिए कहा जाता है, कि मनुष्य के शरीर की रचना है, अनुवांशिकी पर निर्भर करती है इसके अतिरिक्त बाहरी वातावरण के

विभिन्न प्रकार के तत्वों पर भी निर्भर करती है। इसीलिए शरीर के स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कुछ कारक होते हैं, जो निम्न प्रकार हैं:-

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स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक
स्वास्थ्य 

अनुवांशिकी Genetics

प्रत्येक शिशु के शरीर की रचना माता के गर्भ से ही होती है, और किसी भी परिस्थिति में इस संरचना को बदला नहीं जा सकता है।

चिकित्सा विज्ञान ने ऐसी विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ खोज निकाली हैं, जो अनुवांशिक (Genetics) बीमारियाँ कहलाती हैं।

ऐसी बीमारियाँ पीढ़ी दर पीढ़ी कई सालों तक चलती रहती हैं। इस प्रकार से मनुष्य के शरीर और स्वास्थ्य पर अनुवांशिकी का प्रभाव पड़ता है।

गर्भधारण के समय अगर माता के शरीर में विभिन्न प्रकार की कमियाँ या बीमारियाँ होती हैं तो उसका प्रभाव जन्म लेने वाले बच्चे पर भी पड़ता है।

इसी प्रकार अगर जन्म देने वाली माता कमजोर है तो बच्चा भी कमजोर पैदा होता है। इसलिए कह सकते हैं, कि व्यक्ति का स्वास्थ्य अनुवांशिकी पर निर्भर है तथा अनुवांशिकी के द्वारा प्रभावित होता है।

बाहरी वातावरण External environment

मनुष्य के शरीर के बाहर जो कुछ भी घटित होता है, वह बाह्य वातावरण में घटित होता है और उसे बाहरी वातावरण कहते हैं।

बाहरी वातावरण तीन घटकों से मिलकर बना होता है जिसमें भौतिक वातावरण जैविक वातावरण और सामाजिक वातावरण आते हैं।

भौतिक वातावरण (Physical Environment)- भौतिक वातावरण अपने चारों ओर फैले हुए वातावरण को कहा जाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के घटक जिनको अजैविक घटक (Abiotic components) भी कहते हैं।

जैसे- जलवायु, मौसम, मकान, कूड़ा करकट, पत्र इत्यादि शामिल किए गए हैं। अर्थात कह सकते हैं, कि समस्त प्रकार के अजैविक घटक जो निर्जीव होते हैं, सभी भौतिक वातावरण के अंतर्गत आते हैं।

जैविक वातावरण (Biological environment) - जैविक वातावरण में जैविक घटक आते हैं, जिनमें सभी प्रकार के जीवधारी सम्मिलित किए गए हैं। जैसे कि आसपास मंडराने वाले रेंगने वाले सभी प्रकार के जीव जंतु।

अर्थात साधारण शब्दों में कह सकते हैं, कि वे सभी घटक जिनमें जैविक क्रियायें (Biological activities) किसी न किसी रूप में होती हैं। उनको जैविक वातावरण के अंतर्गत रखा गया है।

सामाजिक वातावरण (Social Environment)- सामाजिक वातावरण हमारे परिवेश से मिलकर बना होता है। हमारे प्रवेश के आसपास व्यक्ति, हमारी संस्कृति, परंपरा,

राजनीति की व्यवस्था आदि सभी को सामाजिक वातावरण की श्रेणी में रखा गया है। यह सभी मिलकर सामाजिक वातावरण का निर्माण करते हैं।

स्वास्थ्य सेवाएँ Health services

स्वास्थ्य सेवाएँ भी स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती है, जो सभी प्रकार के जीव जंतुओं को स्वस्थ रखने के लिए दी जाती हैं। यह मुख्यत: तीन भागों में विभाजित की गई हैं:-

उपचार का प्रावधान (Provision of treatment) - सभी प्रकार की छोटी बड़ी गंभीर समस्याओं तथा बीमारियों की यथोचित पहचान और उनके निदान की व्यवस्था इसमें की गई है।

निरोधक सेवाएँ (Prevention services)-निरोध सेवाओं में उन क्रियाकलापों को रखा गया है, जिसके द्वारा बीमारियों से बचाव किया जा सके ऐसे बच्चों को रोगों से बचाने के लिए विभिन्न प्रकार के टीके लगाए जाना आदि।

प्रेरक सेवाएँ (Motivational services) - प्रेरक सेवाओं में विभिन्न प्रकार की शवस्थ सम्बन्धी सेवा समाहित की गई है, जिनका मुख्य उद्देश्य लोगों को बीमारियों से बचाना है।

इसके लिए विभिन्न प्रकार के कार्य जैसे - स्वास्थ्य प्रचार हेतु प्रदर्शनी (Exhibition) प्रचार प्रसार तथा जानकारी देना आदि।

रहन-सहन का तरीका way of living

व्यक्ति के रहन-सहन का तरीका उसकी आदतें भी उसके स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती हैं. खराब आदतों के कारण जैसे - धूम्रपान, शराब का सेवन करना, नशा करना अन्य गन्दी आदतें विभिन्न प्रकार के

शारीरिक रोग उत्पन्न कर देते हैं, साथ ही समाज और घर परिवार भी बर्बाद हो जाता है। अत्यधिक तनाव में रहने से और थकान भरे काम करने से हृदय रोग होने की संभावना बनी रहती है।

एक सर्वे के अनुसार देखा गया है, कि आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य के स्वास्थ्य पर सबसे अधिक प्रभाव रहन-सहन के तरीके का ही पड़ता है।

सामाजिक आर्थिक परिप्रेक्ष्य Socioeconomic perspective

किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर सामाजिक और आर्थिक परिप्रेक्ष्य का विशेष प्रभाव पड़ता है, इसको भी हम तीन प्रकार से समझ सकते हैं:- 

आर्थिक परिप्रेक्ष्य (Economic perspective) -यह अटल सत्य है, कि जो परिवार आर्थिक रूप से जितना अधिक मजबूत होता है। अपने सदस्यों का उतना ही अधिक तथा सरलता से जीवन निर्वाह कर सकता है।

उन्हें पौष्टिक आहार (Nutritious food) खाने को मिलता है, अच्छी शिक्षा,स्वास्थ्य तथा समस्त सुविधाएँ प्राप्त होती है। जिस कारण वे स्वास्थ्य रहते है।

शिक्षा (Education) - शिक्षा हर क्षेत्र में जागरूकता उत्पन्न करने वाली होती है। इसलिए स्वास्थ्य इस क्षेत्र से अछूता नहीं रहा। शिक्षित व्यक्ति स्वम् को अज्ञानता के कारण गंभीर स्थिति में ले जाते हैं।

व्यवसाय (Bussiness) - मनुष्य का व्यवसाय कई बार उसके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। कई व्यवसाय ऐसे होते हैं, जहाँ कार्यरत व्यक्ति कुछ विशेष बीमारियों से पीड़ित देखे जाते हैं.

जैसे कि रुई उद्योग से बनने वाले संगमरमर का पत्थर का कार्य करने वाले आदि क्षय रोग टीवी होने की संभावना अधिक रहती है। पथ्थरों की मिलों में कार्य करने वाले लोगों को सिलकोसिस (Silicosis) नामक रोग हो जाता है।

दोस्तों इस लेख में आपने स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक (Fectors affecting health) पढ़े। आशा करता हुँ, आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

इसे भी पढ़े:-

  1. स्वस्थ्य क्या है इसके प्रकार
  2. मनोविज्ञान की परिभाषा तथा अर्थ
  3. शिक्षा मनोविज्ञान की परिभाषा तथा अर्थ


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