प्लाज्मोडियम क्या है इतिहास what is plasmodium and history in hindi

प्लाज्मोडियम क्या है इतिहास

प्लाज्मोडियम क्या है इतिहास what is plasmodium and history

हेलो दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है हमारे इस लेख प्लाज्मोडियम क्या है (what is Plasmodium) में। दोस्तों इस लेख में आप प्लाज्मोडियम क्या है?

प्लाज्मोडियम का इतिहास, प्लाज्मोडियम का जीवन चक्र के साथ ही मलेरिया रोग के लक्षण, मलेरिया रोग के रोकथाम के उपाय तथा मलेरिया का उपचार कैसे करें?

आदि महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में भी जानेंगे। तो दोस्तों आइए शुरू करते हैं आज का यह लेख प्लाज्मोडियम क्या है, और प्लाज्मोडियम का इतिहास:-

लाइकेन के सामान्य लक्षण

प्लाज्मोडियम क्या है what is plasmodium 

प्लाज्मोडियम क्या है- प्लाज्मोडियम सबसे पहले धरती पर विकसित संघ प्रोटोजोआ (Phylum Protozoa) का एक जंतु है। जो मलेरिया रोग का कारक तथा एक कोशकीय जीव होता है।

प्लाज्मोडियम को मलेरिया परजीवी के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ होता है "दुर्गंध युक्त वायु वाला परजीवी" प्लाज्मोडियम

संसार के विभिन्न भागों में उष्णकटिबंधीय एवं उप उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी पाया जाता है। किंतु प्रशांत महासागर के कुछ भाग ऐसे भी हैं

जहाँ पर प्लाज्मोडियम नहीं पाया जाता जिनमें हवाई द्वीप, (Hawaiian Islands,) फीजी (Fiji) न्यू केलेडोनिया ( New caledonia) प्रमुख है।

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प्लाज्मोडियम के लक्षण Symptoms of Plasmodium

  1. प्लाज्मोडियम एक प्रकार से पूरी तरह परजीवी (Parasite) तथा माइक्रोस्कोपिक जीव होता है।
  2. प्लाज्मोडियम की पहली अवस्था जिसे वास्तविक अवस्था कहते हैं, उस अवस्था का नाम ट्रोफोजोइट (Trophozoite) है, जो एक कोशिकीय तथा आकार में गोल होता है।
  3. ट्रोफोजोइट के चारों ओर एक दोहरी झिल्ली होती है जिसके के अंदर नाभिक, कोशिका द्रव्य, एंडोप्लास्मिक रेटिकुलम, माइट्रोकांड्रिया गॉलजी उपकरण आदि अंगक पाए जाते हैं।
  4. प्लाज्मोडियम अपना अलैंगिक चक्र (Asexual cycle) मनुष्य में तथा लैंगिक चक्र (Sexual cycle) मादा एनाफिलीज मच्छर में पूरा करता है।
  5. प्लाज्मोडियम की संक्रमणकारी अवस्था स्पोरोजोइट (Sporozoite) होती है, जो मादा एनाफिलीज मच्छर की लार में पाई जाती है। मादा एनाफिलीज मच्छर मनुष्य को काटता है तो रक्त चूसते समय मनुष्य के रक्त में यह संक्रमणकारी अवस्था प्रवेश कर जाती है। 
  6. प्लाज्मोडियम की स्पोरोजोइट अवस्था का नाभिक लंबा तथा अन्य कोशिकांग फैले हुए होते हैं, तथा या तुर्क रूप के जैसा दिखाई देता है।
प्लाज्मोडियम क्या है इतिहास

प्लाज्मोडियम का वर्गीकरण classification of plasmodium 

प्लाज्मोडियम का वर्गीकरण निम्न प्रकार से हैं:-

  1. संघ ( phylum ) - प्रोटोजोआ ( protozoa )
  2. उपसंघ ( subphylum ) - प्लाज्मोड्रोमा ( plasmodroma )
  3. वर्ग ( class ) - स्पोरोज़ोआ ( sporozoa )
  4. गण ( order ) - हीमोस्पोरिड़िया ( हाइमोस्पोरिड़िआ )
  5. कुल ( Family ) - प्लाज्मोड़ायडी ( plasmodiidae)
  6. वंश (Genus) - प्लाज्मोडियम (plasmodium )
  7. जाति ( Species ) - वाइवेक्स (vivax) मलेरियाई (Malariae) फैलसिफेराम (Falciparum) ओवेल (ovale)

प्लाज्मोडियम का इतिहास history of plasmodium 

प्लाज्मोडियम का इतिहास बहुत साल पुराना है, पुराने समय में तो लोग यह मानते थे, कि मलेरिया नामक रोग किसी देवी शक्ति का प्रकोप होता है।

या फिर दलदल से निकलने वाली गैसों का परिणाम। मलेरिया एक इटली भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है "बुरी या फिर दूषित हवा"

सबसे पहले लंसीसी (Lancey) नामक व्यक्ति ने 1717 में यह अनुमान लगाया था। कि मलेरिया नामक रोग मच्छर के काटने से होता है।

और इसके बाद फ्रेंच के एक चिकित्सा अधिकारी ने 1880 में यह प्रमाणित किया कि मलेरिया बुरी या अशुद्ध वायु से नहीं फैलता है।

इस चिकित्सा अधिकारी ने रक्त का अध्ययन किया और उसमें पाया कि इनमें कुछ बाहरी कण हैं, जो इस रोग का कारक होते हैं.

इसके पश्चात गॉलजी (Golji) ने मनुष्य की रक्त की लाल रक्त कणिका का अध्ययन किया और उसमें पाया कि इसमें शाईजोगोनी (schizogony) नामक एक कीटाणु है।

और अंततः 1897 में रोनाल्ड रोस (Ronald Rose)  ने सर्वप्रथम यह घोषणा की कि मलेरिया परजीवी मलेरिया का रोग कारक होता है,

जो मादा एनाफिलीज मच्छर से संबंध रखता है. इस महानतम कार्य के लिए उन्हें 1902 में नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) भी प्रदान किया गया।

इसके बाद ग्रासी (Grasi) और उनके कुछ सहयोगियों ने मादा एनाफिलीज मच्छर के आमाशय में प्लाज्मोडियम के जीवन चक्र का अध्ययन किया और पाया

कि मनुष्य में मलेरिया का रोग कारक प्लाज्मोडियम ही है। इसके पश्चात उन्होंने प्लाज्मोडियम की तीन जातियों के जीवन चक्र का वर्णन भी किया।

इसके कुछ समय के पश्चात 1948 में शार्ट एवं गार्नहम (short and garnham) ने मलेरिया परजीवी को यकृत कोशिकाओं में पाया तथा इनका विस्तृत अध्ययन करके इसकी रोकथाम के कई महत्वपूर्ण उपाय भी दिए।

इस प्रकार से प्लाज्मोडियम का इतिहास आगे बढ़ता गया और आज प्लाज्मोडियम वाइबैक्स या फल्सीफेरम तथा प्रकार से लड़ने के लिए हमारे पास पर्याप्त मात्रा में चिकित्सीय उपचार और दवाइयाँ उपलब्ध हैं।

स्वभाव एवं आवास Habit and habitat 

प्लाज्मोडियम का जीवन चक्र बड़ा ही जटिल होता है, जो मनुष्य एवं अन्य कशेरुकी प्राणियों (Vertebrate animals) के रक्त में अन्तः कोशिकीय परजीवी के रूप में उपस्थित होता है। प्लाज्मोडियम का जीवन चक्र दो पोषकों में पूर्ण होता है

और दोनों कशेरुकी और अकशेरूकीय प्रकृति के जीव होते हैं। प्लाज्मोडियम का जीवन चक्र (life cycle of plasmodium) दोनो पोषकों में भिन्न-भिन्न होता है।.

इनका लैंगिक (Sexual) जीवन चक्र मादा एनाफिलीज मच्छर में पूर्ण होता है, तो अलैंगिक (Asexual) जीवन चक्र मनुष्य और कशेरुकी जीव जंतुओं में पूर्ण होता है।

प्लाज्मोडियम का जीवन चक्र life cycle of plasmodium 

प्लाज्मोडियम प्रोटोजोआ का जीवन चक्र दो पोषको में पूर्ण होता है। अर्थात हम कह सकते हैं, कि प्लाज्मोडियम प्रोटोजोआ संघ के वे परजीवी होते हैं, जिनका जीवन चक्र दो जीवों में पूर्ण होता है।

प्राथमिक पोषक (Primary Host) - प्लाज्मोडियम प्रोटोजोआ का प्राथमिक पोषक मनुष्य होता है। इसके साथ ही कुछ अन्य कशेरुकी जीव जंतु जैसे - पक्षी, सरीसृप इत्यादि भी हो सकते हैं।

प्राथमिक पोषक में ही प्लाज्मोडियम प्रोटोजोआ अलैंगिक प्रजनन (Asexual reproduction) करता है और मलेरिया के लक्षण भी उत्पन्न करता है।

क्योंकि अलैंगिक प्रजनन उच्च तापमान पर संभव होता है, जो कशेरुकी जीव जंतुओं में तथा पक्षी और सरीसृप में आसानी से प्राप्त हो जाता है।

द्वितीय पोषक (Second Host) - प्लाज्मोडियम प्रोटोजोआ का द्वितीय पोषक मादा एनाफिलीज मच्छर होता है। मादा एनाफिलीज मच्छर में ही प्लाज्मोडियम अपना लैंगिक चक्र पूर्ण करता है।

जो कि कम तापमान पर संभव होता है, और एनाफिलीज मच्छर का तापमान भी कम होता है। इसलिए द्वितीय पोषक एनाफिलीज मच्छर उपयुक्त पोषक होता है।

मलेरिया के लक्षण symptoms of malaria

  1. मलेरिया के प्रारंभिक लक्षणों में ज्वर (Fever) प्रारंभ हो जाता है, लेकिन तापमान कम रहता है।
  2. इस अवस्था में मनुष्य को भूख लगना बंद हो जाता है और उसे चक्कर आने लगते हैं।
  3. कभी-कभी मनुष्य को कब्ज होने लगता है सिर में दर्द होता है और आंखों में जलन उत्पन्न होने लगती है।
  4. शरीर की पेशियाँ और जोड़ों में दर्द होना भूख का मर जाना और जी मचलाना आदि लक्षण में मलेरिया के लक्षण होते हैं।
  5. किंतु कुछ दिन बाद के लक्षण मलेरिया के घातक लक्षण होते हैं।
  6. जिसमें भयानक ठंड लगती है, और शरीर कापने गता है।
  7. हृदय की धड़कन में वृद्धि हो जाती है, फिर कमर दर्द होने लगता है, उल्टी होती है और शरीर का तापमान 104 से 105 फारेनहाइट तक हो जाता है।

मलेरिया की चिकित्सा और रोकथाम Treatment and prevention of malaria 

मलेरिया मनुष्य के लिए एक बहुत ही घातक और विनाशकारी रोग होता है। जिसमें बुखार के साथ बहुत तेज ठंड लगती है। मलेरिया को रोकने के लिए निम्न प्रकार से उपाय करने चाहिए:- 

  1. मलेरिया रोग से बचने के लिए वयस्क मच्छरों से सुरक्षा करनी चाहिए, मच्छरदानी का उपयोग करना चाहिए।
  2. आसपास भरे हुए पानी को निकाल देना चाहिए और मच्छरों के लार्वा (Larva) को मार देना चाहिए।
  3. जहाँ पर मच्छरों का जन्म होता है, उन स्थानों को नष्ट कर देना चाहिए, वहाँ कीटनाशक का छिड़काव किया जाना चाहिए। 
  4. सभी को फुल आस्तीन के कपड़े पहनने चाहिए तथा उपयुक्त औषधि उपचार करना चाहिए।

मलेरिया रोग का उपचार treatment of malaria 

मलेरिया रोग से बचने के लिए आपको सावधानी बरतनी चाहिए, आपको मच्छर काटने ना पाए और मच्छरों का विनाश, उन्हें नष्ट करना चाहिए फिर भी आपको मलेरिया हो जाता है,

तो मलेरिया की एक सबसे प्रभावशाली औषधि है, "कुनैन" (Quinine) जोकि सिनकोना नामक वृक्ष की छाल से प्राप्त की जाती है।

आज के समय में कुनैन के कई व्यापारिक नाम प्रचलित हैं। जिनमें क्लोरोकवीन, डैराप्रिम, कैमोकवीन, एटेब्रिंन, पैल्यूड्रिन आदि प्रमुख प्रचलित औषधियाँ है।

जिनका प्रयोग चिकित्सक के द्वारा बताए गए विधि के द्वारा किया जाना चाहिए ताकि मलेरिया से जल्द से जल्द छुटकारा पाया जा सके।

दोस्तों इस लेख में आपने प्लाज्मोडियम क्या है? (History of Plasmodium) प्लाज्मोडियम का इतिहास, प्लाज्मोडियम का जीवन चक्र के साथ ही मलेरिया रोग के लक्षण,

मलेरिया रोग के रोकथाम के उपाय तथा मलेरिया का उपचार कैसे करें? आदि के बारे में पढ़ा आशा करता हुँ आपको यह लेख पसंद आया होगा।

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