विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग | University Education Commission 1948-49 in hindi

विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग University Education Commission 1948-49 

हैलो दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है। हमारे इस लेख विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग 1948-49 (University Education Commission) में। दोस्तों आज हम इस लेख में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग 1948-49 के बारे में विस्तार से जानेंगे

और जानेंगे कि उच्च शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग का गठन कब किया गया था, और इसकी मुख्य विशेषताएँ क्या क्या है?

इसके साथ ही आपको विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग की अन्य महत्वपूर्ण बातों की जानकारी भी इसी लेख में प्रदान की जाएगी, तो दोस्तों आइए शुरू करते हैं आज का यह लेख विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग 1948-49:- 

विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग


विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग की स्थापना कब हुई When was the university education commission established 

जब हमारा देश आजाद हुआ था। उस समय हमारे देश में शिक्षा का स्तर बहुत ही कम था, क्योंकि अंग्रेजी शासन काल में शिक्षा का समान अधिकार सभी व्यक्तियों के लिए नहीं था।

उच्च वर्ग के व्यक्ति ही शिक्षा के अधिकारी होते थे, किंतु जैसे ही हमारा देश स्वतंत्र हुआ पूरे भारत के प्रत्येक कोने से शिक्षा का एक विशेष प्रकार का अनुरूप

तथा आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा का ढांचा तैयार करने की मांग शुरू हो गई, और यह अनुभव किया जाने लगा कि देश के समस्त प्रकार के विकास में

शिक्षा विशेषकर जिसमें से उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए भारत में उच्च शिक्षा पर 1948 में एक आयोग की नियुक्ति की गई

जिसका नाम था विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग था और इस आयोग की अध्यक्षता की डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने इसलिए इस आयोग का नाम राधाकृष्णन आयोग (Radhakrishnan Commission) हो गया।

इस आयोग के अन्य सदस्यों में डॉक्टर ताराचंद, डॉक्टर जाकिर हुसैन, डॉक्टर लक्ष्मणस्वामी मुदालियर, डॉ मेघनाद साहा जैसे- दिग्गज विद्वान शामिल थे, जबकि इस आयोग में दो अमेरिकी विद्वान

और एक अंग्रेज विद्वान सदस्य भी सम्मिलित किए गए थे। विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग ने तत्परता से अपने कार्यों को शिक्षा के क्षेत्र में समाप्त कर 1949 में अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

जिसमें आयोग ने उप कुलपति और रजिस्ट्रारों, प्रोफेसरों, प्रिंसिपलों, विश्वविद्यालय से संबंधित वर्गों के प्रतिनिधि आदि के बारे में विचार-विमर्श भी किया और विश्वविद्यालय 1949 से अपना काम प्रारंभ कर दिया।


विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग  की सिफारिशें Recommendations of University Education Commission 1948-49

विश्वविद्यालय शिक्षा के मुख्य उद्देश्य - विश्वविद्यालय शिक्षा के मुख्य उद्देश्य मुख्यत: छै: प्रकार के हैं

  1. शिक्षा द्वारा राजनीति, शासन, व्यवसाय, व्यापार आदि समस्त क्षेत्रों में नेतृत्व करने वाले छात्र तैयार होंगे।
  2. विश्वविद्यालय संस्कृति के मूल्यांकन एवं पुन:संगठन, समानता, स्वतंत्रता एवं न्याय पर आधारित नए समाज की रचना में योगदान कर सके।
  3. विश्वविद्यालय पूर्व मानसिक विकास पर बल दे सके।
  4. विश्वविद्यालय में छात्रों में उच्चतम मूल्यों में विश्वास निर्माण कर सकें।
  5. विश्वविद्यालय का काम छात्रों को आत्म ज्ञान देना होगा।
  6. देश की सांस्कृतिक, एकता राष्ट्रीयता एवं विश्व बंधुत्व में विश्वास आदि गुणों पर चर्चा पर विकास करेंगे।

विश्वविद्यालय शिक्षा स्तर में सुधार -  विश्वविद्यालयों में भर्ती से पहले छात्रों को 12वीं तक की शिक्षा दी जाएगी। उसके पश्चात विश्वविद्यालय में छात्र प्रवेश कर पाएंगा।

तथा प्रवेश की आयु 18 वर्ष से कम ना होगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय पुस्तकालय तथा प्रयोगशालायें पूर्ण रूप से सुसज्जित और सुविधा युक्त होगी।

प्राइवेट विद्यार्थियों को निर्मित साहित्य किया जाए तथा विश्वविद्यालय शिक्षा के विकास के लिए एक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) के गठन की सिफारिश की जाए इससे विश्वविद्यालय शिक्षा के स्तर में सुधार होगा।

पढ़ाई के वर्ष - विश्वविद्यालय स्तर पर यानी कि उच्च स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी जो 12 पास कर चुके हैं।

वह स्नातक में प्रवेश लेंगे जो 3 वर्ष का पाठ्यक्रम होगा। तथा स्नातक पास करने के बाद स्नातकोत्तर में प्रवेश लेंगे जो 2 वर्ष का पाठ्यक्रम होगा।

सरकारी नौकरी के लिए डिग्री का ना होना - सरकारी नौकरियों के लिए विश्वविद्यालय स्नातक होने की आवश्यकता नहीं रहनी चाहिए आपेक्षित हो तो भर्ती के लिए स्वतंत्र परीक्षा होनी चाहिए।

अर्थात विश्वविद्यालय डिग्री से आपको किसी प्रकार की नौकरी नहीं मिलेगी आपको नौकरी प्राप्त करने के लिए अन्य रूप से स्वतंत्र परीक्षा भी देनी होगी।

अध्यापक - आयोग ने अध्यापकों के वेतनमान तथा सेवा नियमों को उदार बनाने पर बल दिया है। जिससे उत्कृष्ट विद्यार्थी शासन एवं

अन्य क्षेत्रों की तुलना में विश्वविद्यालय शिक्षण की ओर आकर्षित हो सकें साथ ही कम से कम एक तिहाई पद रीडरों या प्रोफेसरों के ताकि पदोन्नति के समुचित अवसर भी उन्हें मिल सकें।

व्यवसायिक शिक्षा -  आयोग ने 3 नई व्यवसायिक शिक्षा पर बल दिया है। सार्वजनिक प्रबंध व्यावसायिक प्रबंध तथा श्रमिक  प्रबंधक और कारखानेदारों के संबंध में होगा।

धार्मिक शिक्षा - विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग 1948 ने विश्वविद्यालयों में धार्मिक शिक्षा देने पर भी विशेष बल दिया है। प्रतिदिन का कार्य सामूहिक मोन ध्यान के बाद आरंभ होगा।

जबकि स्नातक स्तर पर प्रथम वर्ष में महात्मा बुध, कन्फ्यूशियस से लेकर गुरु नानक और महात्मा गांधी के धार्मिक विचारों को तथा उनके चरित्र चित्रण पढ़ाए जाएंगे।

जबकि स्नातक के द्वितीय वर्ष में ही संसार की महान धार्मिक गुरुओं और उनकी पुस्तकों का अध्ययन कराया जाएगा। जबकि तृतीय वर्ष में धर्म का दर्शन और उनका अध्ययन होगा।

शिक्षा का माध्यम - विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग 1948-49 की सिफारिश थी, कि शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी नहीं होना चाहिए। उच्च शिक्षा का माध्यम क्षेत्रीय भाषा या फिर राष्ट्रीय भाषा को रखना चाहिए।

राष्ट्रीय भाषा में सभी स्रोतों से शब्द लेकर उसे समृद्ध और सुसंस्कृत किया जाए अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक टेक्निकल शब्दावली को भी स्वीकार किया जाए।

परीक्षा पद्धति - वस्तुनिष्ठ परीक्षाओं पर शोध कार्य किया जाए ताकि विश्वविद्यालयों के उपयुक्त वस्तुओं की परीक्षाओं का निर्माण हो सके।

प्रवेश - विश्वविद्यालय में प्रवेश का आधार केवल योग्यता नहीं होनी चाहिए।

अनुशासन -  विद्यार्थियों को अनुशासित रहने के लिए प्रॉक्टर तथा विद्यार्थी संगठन अनिवार्य हैं। विद्यार्थियों के समुचित देखभाल तक पाठांतर क्रियाओं का यथेष्ट प्रबंध अवश्य होना चाहिए, जिससे उनकी शक्ति रचनात्मक दिशा में प्रवाहित हो सके।

दोस्तों आपने इस लेख में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग 1948-49 (University Education Commission) राधाकृष्णन आयोग की सिफारिशें, राधाकृष्णन आयोग के सदस्य आदि के बारे में पढ़ा आशा करता हूँ, यह आपको अच्छा लगा होगा।

  • FAQ for University Education Commission

Q.1. विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग की स्थापना कब की गई थी?

Ans. भारत में उच्च शिक्षा के लिए 1948 में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग की स्थापना की गई।


Q.2. विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग का दूसरा नाम क्या है?

Ans. विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग का दूसरा नाम राधाकृष्णन आयोग था।


Q.3 राधाकृष्णन आयोग के सदस्यों के नाम क्या थे?

Ans. राधाकृष्णन आयोग के सदस्यों में डॉक्टर ताराचंद, डॉक्टर जाकिर हुसैन, डॉक्टर लक्ष्मणस्वामी मुदालियर, डॉ मेघनाद साहा जैसे दिग्गज विद्वान थे।


Q.4. विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के अध्यक्ष कौन थे?

Ans. राधाकृष्णन आयोग के सदस्यों में डॉक्टर ताराचंद, डॉक्टर जाकिर हुसैन, डॉक्टर लक्ष्मणस्वामी मुदालियर, डॉ मेघनाद साहा जैसे दिग्गज विद्वान थे।

  • इसे भी पढ़े:- 

  1. Pwd act 2016
  2. एजुसेट क्या है
  3. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग क्या है इसकी स्थापना और कार्य
  4. माध्यमिक शिक्षा आयोग का गठन और सिफारिशें
  5. कोठरी आयोग क्या है गठन और सिफारिशें

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