कुष्ठ रोग की दवा और जानकारी | Leprosy medicine and information in hindi

कुष्ठ रोग की दवा और जानकारी


कुष्ठ रोग की दवा और जानकारी Leprosy medicine and information 

हेलो दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, हमारे इस लेख कुष्ठ रोग की दवा लक्षण तथा जानकारी (Leprosy Medicine and Information) में।

दोस्तों इस लेख में आप जीवन द्वारा फैलने वाले एक भयंकर रोग कुष्ठ रोग के बारे में जानेंगे। साथ ही आप जानेंगे कुष्ठ रोग होता क्या है?

कुष्ठ रोग के लक्षण क्या है? और कुष्ठ रोग से हम किस प्रकार से निजात पा सकते हैं, तो दोस्तों आइए पढ़ते हैं यह लेख कुष्ठ रोग की दवा और जानकारी:-

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कुष्ठ रोग क्या है What is leprosy

कोढ या कुष्ठ रोग एक ऐसा रोग है, जिसे जड़ रोग त्वचा रोग भी कहा जाता है। कुष्ठ रोग का वाहक एक माइकोबैक्टेरियम लेपराई नामक जीवाणु होता है।

इसलिए यह एक जीवाणु कारक रोग है। यह बैक्टीरिया परिधि तंत्रिकाओ, आँखों और शरीर के कुछ अन्य भागों को भी प्रभावित करता है।

यह रोग ना तो वंशानुगत होता है और ना ही देवी प्रकृति का प्रकोप है, बल्कि यह जीवाणु (Bacteria) द्वारा फैलने वाला ही एक रोग है।

समान्यता: त्वचा (Skin) पर पाए जाने वाले पीले या ताम्र रंग के धब्बे जो सुन्न हो या रंग तथा गठन में परिवर्तन दिखाई दे।

तब यह कुष्ठ रोग के लक्षण हो सकते हैं जबकि कुष्ठ रोग छूत से नहीं फैलता है। वर्तमान में कुष्ठ रोग की दवा और उपचार उपलब्ध है, जिससे कुष्ठ रोग से छुटकारा पाया जा सकता है।

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कुष्ठ रोग की दवा और जानकारी


कुष्ठ रोग की जानकारी Leprosy information

कुष्ठ रोग की गणना संसार के प्राचीनतम ज्ञात रोगों में की जाती है, क्योंकि यह एक धीरे-धीरे फैलने वाला और घातक रोग है।

इस का सर्वप्रथम उल्लेख चरक ने अपने ग्रंथों में भी किया था। उत्तर साइबेरिया को छोड़ कर संसार का कोई भी भाग ऐसा नहीं है,

जहाँ पर यह रोग ना फैलता हो, किंतु अब ठंडे जलवायु वाले सभी देशों में इस रोग का उन्मूलन (Elimination) किया जा चुका है।

कुष्ठ रोग अधिकांशत: कर्क रेखा से लगे गर्म देशों के उत्तरी और दक्षिणी पट्टी में ही सीमित रह गया है। जबकि उत्तरी भाग की अपेक्षा दक्षिणी भाग में अधिक है।

कुष्ठ रोग भारत अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में अधिक देखा जाता है। भारत में कुष्ठ रोग उत्तर की अपेक्षा दक्षिण में देखने को ज्यादा मिलता है।

जैसे- उड़ीसा, आंध्र, तमिलनाडु और दक्षिण महाराष्ट्र में यहाँ इसे क्षेत्रीय रोग सारीखा के नाम से भी जाना जाता है, तथा उत्तर भारत में यह हिमालय की तराई में भी अधिक ज्यादा फैलता है।

कुष्ठ रोग संक्रामक रोग (Infectious disease) है, क्योंकि यह रोग गदगी में रहने वाले और समुचित भोजन के अभाव में लोगों में फैलता है।

किंतु इसका अर्थ यह नहीं है, कि स्वच्छ और समृद्धिपूर्व जीवन बिताने वाले जैसे - वकील, व्यापारी अध्यापक आदि इस रोग से मुक्त हैं। स्वच्छ जीवन बताने वाले लोग भी इससे ग्रसित हो सकते हैं।

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कुष्ठ रोग का कारक Leprosy factor

कुष्ठ रोग का दूसरा नाम कोड रोग भी है, जो एक बैक्टीरिया के द्वारा फैलता है। जिसका नाम माइकरोबेक्टिरियम लैपरी है।

यह एक ऐसा जीवाणु है,जो त्वचा में प्रवेश समझा जाता है। इस जीवाणुओं की खोज लगभग 100 वर्ष पूर्व हैनसेन नामक

नॉर्वेजियन ने डेनमार्क के एक अनुसंधानशाला में की थी तथा यहीं पर अनुसंधानशाला में ही इस बात की पुष्टि की गई कि यह जीवाणु कुष्ठ रोग के उत्पत्ति के कारण हैं

जो क्षय रोग के जिवाणुओ के सामान है और क्षय रोग की औषधियाँ  कुष्ठ रोग की दवा जैसी चिकित्सा में सफल भी हुई हैं।

किंतु अभी तक यह सही ज्ञात नहीं हो पाया है, कि यह जीवाणु शरीर में किस तरह से प्रवेश करता है।

यह जीवाणु भोजन अथवा साँस के साथ शरीर में प्रवेश नहीं करते बल्कि कई अन्य तरीकों से शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।

कुष्ठ रोग के प्रकार Types of leprosy

कुष्ठ रोग के निम्नलिखित तीन प्रकार बताए गए हैं:- 

  1. तंत्रिका कुष्ठ Nervous leprosy - तंत्रिका कुष्ठ तंत्रिका तंत्र से संबंधित है इसलिए इसे तंत्रिका का कुष्ठ रोग नाम दिया गया है। इसमें शरीर के कई ऐसे अंग संवेदनशीलता (Sensitivity) में समाप्त हो जाते हैं, जहाँ पर सुई चुभाने पर किसी प्रकार का कोई कष्ट का अनुभव नहीं होता।
  2. ग्रंथि कुष्ठ Glandular leprosy - यह एक ऐसा रोग है, जहाँ पर शरीर के किसी भी भाग में त्वचा पर भिन्न - भिन्न बड़े - बड़े चकते से धब्बे से उत्पन्न हो जाते हैं और शरीर में कहीं कहीं पर गांठ भी निकल आती हैं।
  3. मिश्रित कुष्ठ Mixed leprosy - मिश्रित कुष्ठ एक ऐसा रोग है, जिसमें शरीर के कई भागों में संवेदनशीलता समाप्त हो जाती है। त्वचा पर धब्बे उत्पन्न हो जाते हैं और गांठे भी निकलने लगती हैं

कुष्ठ रोग के लक्षण तथा संक्रमण Leprosy Symptoms and Infections 

इस रोग का संक्रमण किसी रोगी पर कब और किस प्रकार होता है, इसका निर्णय करना असंभव है। अन्य कई लोगों की तरह इसके संक्रमण का तत्काल पता नहीं लगाया जा सकता।

इसकी गति बहुत ही मंद होती है, कई प्रयोग अनुसंधान के बाद यह ज्ञात हुआ है, कि कुष्ठ रोग एक ऐसा रोग है, जिसके लक्षण 2 या 3 साल के बाद ही दिखाई देते हैं,

और जब शरीर का कोई भाग संवेदनहीन हो जाता है, तब इस रोग के लक्षणों का पता चलता है। शरीर पर चकते उत्पन्न होने लगते हैं,

या काले धब्बे पड़ने लगते हैं। कान के पास और शरीर के अन्य भागों में भी गांठ पड़ जाती हैं। इस रोग का शुरुआत में कोई प्रभाव नहीं होता। इसलिए लोग इस पर ज्यादा ध्यान नहीं देते 

पाँच साल के बाद कुष्ठ रोग के लक्षण सामने आने लगते हैं। और रोगी थकान कार्य करने की क्षमता में कमी गर्मी धूप बरदास ना हो सकने की क्षमता, हड्डियाँ धीरे-धीरे गलने लगती हैं।

लोगों की हड्डियाँ (Bones) गलने लगती हैं, तो त्वचा में सड़न (Rotting) उत्पन्न होने लगती है। यह सभी कुष्ठ रोग के लक्षण है। इस हालत में आपको कुष्ठ रोग की दवा अवश्य लेनी चाहिए। 

कुष्ठ रोग की दवा तथा उपचार Leprosy medicine and treatment

कुष्ठ रोग के संबंध में लोगों की यह गलत धारणा है, कि यह एक असाध्य रोग है, अर्थात इसका इलाज नहीं है। कुष्ठ रोग से समाज इतना आक्रांत हो गया है

कि लोग कुष्ठ रोगी को घृणा की दृष्टि से भी देखने लगे हैं और उसकी समुचित चिकित्सा भी नहीं करते हैं। उनके साथ आमानवीय व्यवहार किया जाने लगा है.

वास्तविकता यह है, कि कुष्ठ रोग अधिक भयावह हैजा क्षय रोग और डिप्थीरिया है। कुष्ठ रोग एक ऐसा रोग है, जिसके लक्षण दिखने पर

अगर इसका उपचार लेना शुरू कर दिया जाए तो इससे हमेशा के लिए मुक्ति भी पाई जा सकती है। मनुष्य स्वास्थ्य होकर अपना पूरा काम यथावत कर सकता है।

कुष्ठ रोग आज सामाजिक समस्या भी बन गई है, इसीलिए बहुत से कुष्ठ रोगी इस रोग से निजात नहीं पा पाते और रोगी कई स्थानों पर घूमने फिरने लगते हैं।

आयुर्वेद में बताया गया कि कुष्ठ रोग की चिकित्सा में मुख्य रूप से खादिर और बावची का उपयोग किया जाता है। जबकि सुश्रुत संहिता में बताया गया है,

कि इसके लिए भल्लक तेल का उपयोग भी करना उचित है। जबकि चालमोगरा का तेल खाने और लगाने का भी विधान बताया गया है।

इथाइल एस्टर, प्रोमिन सालफ्रटोन आइसोनेक्स तथा स्ट्रेपटोमेसीन इस रोग की प्रमुख औषधियाँ हैं। जबकि रिफैंपाइसिन की एक खुराक लेने से

कुष्ठ रोग में 70% तक आराम मिल जाता है। इसी तरह बीसीजी का टीका (BCG vaccine) लगाने से भी कुष्ठ रोग से सुरक्षा प्राप्त होती है।

कुष्ठ रोग की आयुर्वेदिक दवा Ayurvedic medicine of leprosy

अगर किसी भी व्यक्ति को कुष्ठ रोग होता है तो उसे घबराना नहीं चाहिए और ना ही उसके साथ अनुचित व्यवहार करना चाहिए

क्योंकि कुष्ठ रोग का उपचार अब संभव है। कुष्ठ रोग की आयुर्वेदिक दवा भी है जिससे आप कुष्ठ रोग से काफी हद तक मुक्त हो सकते हैं।

आपको मेहंदी के पत्तों का रस 25 ग्राम लेना है जिसमे लगभग 25 ग्राम शहद को मिलाकर रोज सुबह सेवन करें।

आपको इसका सेवन लगभग  60 दिनों तक करना है। इसका सेवन करने से खून साफ होगा और चर्मरोग या कुष्ठ रोग में बहुत आराम मिलेगा।

दोस्तों इस लेख में आपने कुष्ठ रोग की दवा, जानकारी तथा लक्षण (Leprosy Medicine and Information)पढ़े। आशा करता हुँ, यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।

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