एचआईवी एड्स के कारण तथा लक्षण Causes and symptoms of HIV AIDS

एचआईवी एड्स के कारण तथा लक्षण

एचआईवी एड्स के कारण तथा लक्षण Causes and symptoms of HIV AIDS 

हैलो नमस्कार दोस्तों आपका एक बार फिरसे बहुत-बहुत स्वागत है, हमारे इस लेख एचआईवी एड्स के कारण लक्षण (Causes and symptoms of HIV AIDS) में।

साथियों यहाँ पर आप विषाणु जनित एक ऐसी बीमारी के बारे में जाने सकेंगे जो आज के समय में सबसे घातक खतरनाक और लाइलाज बीमारी है कियोकि इसका अभी तक कोई भी सफल इलाज नहीं खोजा जा सका।

यहाँ पर आप एचआईवी एड्स क्या होता है? एचआईवी एड्स के लक्षण क्या हैं? और इनका रोकथाम कैसे किया जा सके? आदि

महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जानेंगे। तो दोस्तों आइए शुरू करते हैं, आज का यह लेख एचआईवी एड्स के कारण तथा लक्षण:-

एचआईवी एड्स कैसे होता है

एड्स क्या है इन हिंदी What is AIDS in hindi 

संसार में बढ़ती हुई वैज्ञानिकीकरण, आधुनिकीकरण और औद्योगीकरण के कारण हमारी प्रकृति पर बहुत ही घातक प्रभाव देखने को मिलते हैं।

जिसके परिणाम स्वरूप विभिन्न प्रकार के रोग और बीमारियाँ उत्पन्न होने लगती हैं। जो मनुष्य के साथ-साथ जीव जंतुओं और वनस्पतियों को भी प्रभावित करती हैं।

इन्हीं बीमारियों में से एक बीमारी है "एचआईवी एड्स" की यह बीमारी कैंसर से भी खतरनाक बीमारी होती है। क्योंकि इसमें रोगी कैंसर की उपेक्षा बहुत ही जल्दी खत्म हो जाता है।

एड्स रोग के नाम को अंग्रेजी में 4 अक्षरों से मिलाकर बनाया हुआ है। एक्वायर्ड इम्यूनोडिफिशिएंसी सिंड्रोम ( acquired immune deficiency syndrome ) एचआईवी एड्स एक ऐसी बीमारी होती है,

जिसमें संक्रमित व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती जाती है। इसमें दवाइयाँ भी अपना प्रभाव नहीं दिखाती और व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है।

एचआईवी एड्स के प्रारंभिक लक्षणों में रोगी को दस्त होते हैं, बुखार होता है, निमोनिया होता है, तथा रोगी का वजन कम होता जाता है, और बाद में रोगी की मृत्यु हो जाती है।

एचआईवी एड्स एक विषाणु द्वारा फैलने वाली बीमारी है जो मुख्यता रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट करता है। इसलिए एचआईवी का पूरा नाम हुमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस ( Human immunodeficiency virus) है।

विटामिन किसे कहते हैं प्रकार

एड्स के कारण Causes of AIDS 

एड्स कोई संक्रामक रोग नहीं है, इसलिए एड्स किसी के साथ बैठने से, खाना खाने से, उसके पास जाने से, सोने से,उसका चुंबन करने से, उसके बर्तनों का उपयोग करने से,मक्खी मच्छर या कीड़ों के द्वारा नहीं फैलता।

इसका मुख्य कारण है, "विषाणु" जब एड्स का विषाणु किसी व्यक्ति के रक्त के संपर्क में आ जाता है तब उसमे एड्स फैलता है, अर्थात किसी एड्स से संक्रमित व्यक्ति का रक्त किसी दूसरे व्यक्ति को चढ़ा दिया जाए तो,

दूसरा व्यक्ति भी एड्स से संक्रमित हो जाएगा। इसी प्रकार से एड्स पीड़ित व्यक्ति अगर किसी दूसरे के साथ यौन संबंध बनाता है, तो दूसरे व्यक्ति को भी एड्स होने की संभावना पूरी रहती है।

क्योंकि वीर्य और योनि श्राव में भी एड्स के विषाणु उपस्थित होते हैं। एड्स के विषाणु दूषित इंजेक्शन की नीडल का उपयोग करने से भी फैलता है।

इसीलिए एड्स एक संक्रामक बीमारी नहीं है. एड्स विशाणु द्वारा फैलने वाली एक ऐसी बीमारी है, जिसमें एड्स का विषाणु सीधा रक्त के संपर्क में आने पर उस व्यक्ति को संक्रमित करता है।

एड्स क्यों होता है AIDS kyo hota hai 

एड्स एक ऐसी बीमारी है, कि वह तब तक नहीं होती जब तक एड्स का विषाणु किसी भी माध्यम से रक्त में प्रवेश नहीं करता।

किंतु एड्स उस स्थिति में अवश्य होता है, जब कोई भी व्यक्ति किसी संक्रमित व्यक्ति के साथ यौन संबंध स्थापित करता है। या उपयोग में किए गए ब्लड इंजेक्शन आदि के द्वारा भी एड्स फैलता है।

क्योंकि इन चीजों का संबंध भी ब्लड रक्त से होता है। एचआईवी एड्स के विशाणु रक्त के अलावा वीर्य, योनि स्राव माँ के दूध, आँसू, पसीना, मल मूत्र इत्यादि में पाए जाते हैं।

क्योंकि इन सभी का संपर्क रक्त से होता है। जो व्यक्ति असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करते हैं, जिनमें मुख्य रुप से वेश्याएं एड्स फैलाने के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं।

इसके अलावा एड्स उन स्थानों पर अधिक फैलता है, जहां पर रक्त से संबंधित कार्य होते हैं: जैसे अस्पताल रक्त जांच केंद्र आदि।

एचआईवी एड्स के लक्षण  Symptoms of hiv AIDS 

एचआईवी एड्स एक विषाणु जनित रोग होता है। जिसका उद्भभवन काल 6 माह से 5 वर्ष या इससे भी अधिक हो सकता है।

शुरुआत में एचआईवी एड्स के लक्षण हल्के मामूली होते हैं। जिनमें रोगी को भूख कम लगना, पेट साफ ना होना, आलस आना, शुरू हो जाता है।

किंतु धीरे-धीरे यह लक्षण तीव्र होने लगते हैं। जिसमें शरीर के वजन में अचानक गिरावट दिखाई देती है, तथा तीव्र ज्वर के साथ लंबे समय तक दस्त हो सकते हैं।

लसीका ग्रंथि में सूजन आ जाती है, गले में छाले होने लगते हैं तथा गिल्टीयाँ फूलने लगती हैं। रोगी को पसीना अधिक आता है, मांसपेशियों में दर्द होता है और कमजोरी होने लगती है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से और कई छोटे-छोटे रोग भी मरीज को घेर लेते हैं। मरीज में इतनी कमजोरी आ जाती है कि वह अपने बिस्तर से भी नहीं उठ पाता और अंततः उसकी मृत्यु हो जाती है।

एड्स की रोकथाम के उपाय  Measures to prevent AIDS 

एचआईवी एड्स एक ऐसा विषाणु जनित रोग है, जिसका अभी तक कोई सफल उपचार नहीं है। इसलिए एचआईवी एड्स से बचने के लिए हमें कुछ

जरूरी रोकथाम के उपाय का पालन करना चाहिए जिससे हम एचआईवी जैसे रोग से हमेशा बचे रह सकते हैं।

1. एचआईवी एड्स से बचने के लिए जो व्यक्ति इंजेक्शन के द्वारा नशा करते हैं और सुई का प्रयोग करते हैं उन्हें इनका प्रयोग बंद कर देना चाहिए।

 2. कोई भी सुई फिरसे उपयोग करने से पहले उसे अच्छी तरह 20 मिनट तक पानी में उबाल कर साफ करना चाहिए या फिर एक सिरिंज को एक बार ही प्रयोग में लाया जाना चाहिए।

 3. जो महिलाएं एड्स से पीड़ित हैं, उन्हें गर्भ धारण नहीं करना चाहिए अन्यथा उनके बच्चे भी एड्स से संक्रमित होंगे।

 4. एक बार इस्तेमाल किया हुआ ब्लेड फिर इस्तेमाल में नहीं लाया जाना चाहिए।

 5. अगर रक्त की जरूरत है, तो रक्त को पहले एचआईवी टेस्ट करा लेना चाहिए। उसके बाद किसी को रक्त चढ़ाना चाहिए या फिर दान करना चाहिए।

 6. जो उपकरण शरीर गोदने के काम आते हैं या फिर नाक कान छेदने के काम आते हैं, उनको पहले कीटाणु रहित करना चाहिए। इसके बाद ही उनका उपयोग किया जाना चाहिए।

 7. यौन संबंध बनाते समय सुरक्षित यौन संबंध यानी कि कंडोम का उपयोग अवश्य किया जाना चाहिए।

एचआईवी एड्स का उपचार Treatment of hiv AIDS 

अभी तक एचआईवी एड्स का कोई भी उपचार उपलब्ध नहीं है। इसकी कोई भी असरकारक कारगर दवाइयाँ,कोई भी टीका या वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पाया है।

इसीलिए एचआईवी एड्स से बचने के लिए सुरक्षित यौन संबंध के साथ ही जागरूकता जनचेतना अवश्य होनी चाहिए।

लोगों को एड्स के लक्षण, कारण इससे बचाव के उपाय तथा एड्स के बारे में आवश्यक जानकारी होनी चाहिए। जो पढ़े-लिखे युवा है उन लोगों को अन्य अशिक्षित लोगों को

एड्स के बारे में प्रचार-प्रसार करके उन्हें एड्स से बचाव परामर्श देना चाहिए। इसके साथ ही किशोरी, किशोर को पाठ्यक्रम में पत्र-पत्रिकाओं तथा जनसंचार के माध्यम से स्वास्थ्य शिक्षा तथा जागरूकता का भी पाठ पढ़ाना चाहिए।

यौन जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम Sexually Transmitted Disease Control Program

1950 के दशक में यौन जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम संचालित किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य यौन संबंध स्थापित करने से जो रोग उत्पन्न होते हैं उन पर नियंत्रण करना है।

यह कार्यक्रम एक क्लीनिक (Clinic) आधारित कार्यक्रम है। परंतु दुर्भाग्यवश अभी 20 - 25% मरीज इसके अंतर्गत आते हैं।

जिसका कारण है, लोगों के द्वारा इन यौन जनित रोगों को छुपाना ग्रामीण क्षेत्र के लोग यौन जनित रोग होने पर इनको छुपाते हैं

और देशी इलाज करते हैं ना कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत आकर अपना उपचार कराते है।

यौन जनित कई  प्रकार की बीमारियाँ आज के समय में देखी जाती है, जिनमें सिफलिस सुजाक जैसी यौन जनित बीमारियाँ सबसे अधिक फैलती हैं। 

जबकि एड्स इनमें सबसे अधिक घातक बीमारी है. फिर भी यह यौन जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम शहरी क्षेत्र में  उल्लेखनीय काम कर रहा है।

जिसके परिणाम स्वरूप आज पहले के मुकाबलों में यौन संक्रमित रोग तथा एचआईवी संक्रमण की गिरावट बहुत कम आई है।

दोस्तों इस लेख में आपने एड्स क्या है, (What is Aids) एड्स के लक्षण, एड्स के कारण, एड्स से बचाव आदि महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में पढ़ा, आशा करता हुँ यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।

इसे भी पढ़े:-

  1. प्लाज्मोडियम क्या है इसका इतिहास
  2. कुष्ठ रोग की दवा तथा जानकारी
  3. पोलियो का इतिहास तथा जानकारी

Post a Comment

और नया पुराने
Blogger sticky
close