मांटेसरी विधि क्या है | What is montessori method in hindi

मांटेसरी विधि क्या है

मांटेसरी विधि क्या है what is the montessori method

हैलो दोस्तों आपका हमारे इस लेख मांटेसरी विधि क्या है What is the montessori method में बहुत - बहुत स्वागत है। दोस्तों आप आज इस शिक्षण विधि अर्थात मांटेसरी विधि क्या है?

के साथ मांटेसरी विधि के गुण तथा दोष के बारे में जानेंगे साथ ही आप जानेंगे कि इस विधि की उपयोगिता किसे है। तो आइये दोस्तों बढ़ते है इस लेख मांटेसरी विधि क्या है में :-

मांटेसरी विधि क्या है what is the montessori method

पुराने समय में शिक्षा अध्यापक पर केंद्रित थी। अर्थात जो अध्यापक बच्चों को सिखाता था, बच्चे को वही सीखना पड़ता था।

लेकिन आज के समय में ऐसा नहीं है, आज  यह माना जाता है, कि शिक्षा शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चे पर केंद्रित है। क्योंकि शिक्षा से ही उसके व्यक्तित्व का सर्वागीण विकास होता है।

इसलिए बालक के सभी पक्षों के विकास के लिए विभिन्न प्रकार की शिक्षण पद्धतियाँ दी गई है। उन्हीं में से एक पद्धति है मांटेसरी पद्धति जिसे हम मांटेसरी विधि के नाम से भी जानते हैं।

जो 2 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए ही उपयुक्त है। मांटेसरी ने बालक द्वारा शिक्षा ग्रहण करने की दशाओं के ऊपर गहन अध्ययन किया और एक शिक्षा पद्धति प्रतिपादित की

जिसे मांटेसरी शिक्षा पद्धति के नाम से जाना गया। इस शिक्षा पद्धति में बालक पूर्ण रूप से स्वतंत्र होता है। उसे खेलने कूदने की स्वतंत्रता होती है, तो वहीं सभी प्रकार के विचार, ज्ञान गोष्ठियों तथा

विकास सम्बन्धी क्रियाकलापों में भाग लेने की स्वतंत्रा उसे होती है। इस लिए कह सकते है कि बालक के सर्वागीण विकास के लिए मांटेसरी विधि में बालक की स्वतंत्रता शिक्षा और व्यक्तित्व की शिक्षा पर भी विकास और बल दिया गया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968

मांटेसरी विधि के जनक father of Montessori Methods

मांटेसरी शिक्षा पद्धति या मांटेसरी शिक्षा विधि एक ऐसी विधि है, जो बच्चे को स्वतंत्र रूप में देखती है और बच्चे को सभी प्रकार के खेलो, व्यक्तित्व विकास आदि के लिए प्रोत्साहित भी करती है।

ऐसी शिक्षा पद्धति के जनक इटली की मैडम डॉ. मांटेसरी हैं। मांटेसरी शिक्षा पद्धति के जनक इटली की मैडम डॉ.मांटेसरी ने बालक की विशिष्ट आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर गहन अनुसंधान कार्य किए

और इस अनुसंधान के आधार पर उन्होंने एक मनोवैज्ञानिक शिक्षण पद्धति प्रतिपादित की जिसे मांटेसरी शिक्षा पद्धति और मांटेसरी शिक्षा विधि नाम दिया गया।

मांटेसरी शिक्षा के प्रमुख लक्ष्य क्या है Main goals of Montessori education

मैडम मांटेसरी ने इस पद्धति में निम्न सिद्धांतों पर प्रमुख रूप से बल दिया है:-

बालक की स्वतंत्रता पर बल - जिसके अंतर्गत बालक को स्वतंत्रता प्रदान की जाती है, अर्थात बालक को खेलने की पूरी स्वतंत्रता होती है

और बालक अपनी प्रवृत्तियों अपनी क्षमता के अनुसार खेलना, पढ़ना, लिखना जो कुछ भी चाहे कर सकता है। इस प्रकार की क्रियाओं के माध्यम से उसे आगे शिक्षा दी जाती है।

खेल द्वारा शिक्षा पर बल देना -  इसके अंतर्गत बालक को खेल द्वारा शिक्षा प्रदान करने का प्रयत्न किया जाता है। क्योंकि कहा जाता है,

कि बालकों की दृष्टि से खेल एक ऐसी प्रभावशाली नीति है जिसमें सभी बच्चे रूचि लेते है और इसमें बाल भवन की योजना की जाती है। जिसमें छोटे बच्चों के भोजन विश्राम गोष्टी और शारीरिक क्रिया के लिए पृथक रूप से व्यवस्था रहती है।

बालकों के सर्वागीण विकास पर बल - इसके अंतर्गत बालकों का सर्वागीण विकास अर्थात सभी प्रकार का विकास पर बल दिया गया है। यहाँ पर बालकों के विकास की शिक्षा से अभिप्राय

बालकों की शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और संवेगात्मक अर्थात सभी प्रकार के विकास पर बल दिया गया है।

मांटेसरी विधि क्या है

मांटेसरी स्कूल 


मांटेसरी स्कूल किसे कहते है what is Montessori school 

मांटेसरी स्कूल किसे कहते है - बालकों को शिक्षा प्रदान करने के लिए एक विशेष प्रकार की पाठशाला (स्कूल) आयोजित की जाती है। जिसका नाम ही मांटेसरी पाठशाला (स्कूल) है।

इस पाठशाला में एक बाल भवन होता है, जिसमें बाल भवन में एक बड़ा कमरा होता है, और छोटे-छोटे अन्य कमरे भी होते हैं। यह जो बड़ा कमरा होता है, इसमें सभी प्रकार की आवश्यक सामग्री उपस्थित होती है।

जबकि छोटे कमरों  में बालकों के विश्राम भोजन आदि की व्यवस्था होती है। इसके साथ ही बालकों के खेल-कूंद के लिए बगीचा उपलब्ध होता है,

तो बाल भवन में सफाई आदि का भी कार्य बालक अपने हाथ से ही करते हैं, यही सब मांटेसरी पाठशाला कहलाती है।

मांटेसरी शिक्षा पद्धति (विधि) के गुण और दोष merits and demerits of Montessori education system 

मांटेसरी शिक्षा पद्धति ऐसी शिक्षा पद्धति है, जिसमें  विशेषत: निर्देशन में वैयक्तिकता का स्थान है। इसके अतिरिक्त इस पद्धति में वैयक्तिकता को ही ध्यान में नहीं रखा जाता है।

जबकि यह कर्म इंद्रियों की शिक्षा स्वयं शिक्षा भाषा शिक्षण आदि की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। मांटेसरी पद्धति में खर्च अधिक है ।

इसलिए अधिक खर्चीली होने से निर्धन देशों के लिए मांटेसरी पद्धति उपयोग में नहीं लायी जाती है। मांटेसरी पद्धति छोटे बालकों के लिए अधिक उपयोगी होती है।

जबकि उच्च शिक्षा ग्रहण करने बाले बालकों के लिए यह प्रयोग में नहीं लायी जाती।

मांटेसरी पद्धति में इंद्रियों के प्रशिक्षण पर अधिक बल दिया जाता है। किंतु छोटे बच्चों के उच्चारण शुद्धि पर विशेष बल नहीं दिया जाता ऐसे छोटे बच्चों में तोतलापन बना रहता है।

मांटेसरी पद्धति की शिक्षण बातें निम्न प्रकार से हैं teaching points of Montessori method

भाषा की शिक्षा -  मांटेसरी शिक्षा पद्धति के हिसाब से  लिखना पढ़ने की अपेक्षा अधिक सरल है।

इसके अनुसार लिखने में उच्चारण की आवश्यकता नहीं पड़ती इसलिए  बालक लिखना सरलता से सीख सकता है किन्तु पड़ना कठिनता से 

कर्मेंद्रियों की शिक्षा -  बाल भवन में सभी कार्यों को बालक स्वयं करते हैं, इस प्रकार उनका हाथ मुंह धोना कपड़े बदलना सफाई करना आदि

सभी कार्यों का हाथ से करने के कारण उनका पूर्णरूपेण शारीरिक व्यायाम हो जाता है और शरीर की माँसपेशियाँ पुष्ट होती हैं।

ज्ञानेंद्रियों की शिक्षा -  इसमें बालकों को ज्ञानेंद्रियों द्वारा जितने अधिक अनुभव होंगे वे उतने ही अधिक सीखेंगे आता मैडम मोंटेसरी ने स्वयं कहा है

कि ज्ञानेंद्रियों की शिक्षा संबंधी क्रियाओं का यह एक उद्देश्य नहीं है कि बालकों में विभिन्न बस्तुओं के रूप गुण और वर्ण का  ज्ञान हो बल्कि उनसे उनके ज्ञानेंद्रियों को परिष्कृत करना चाहते हैं जिससे उनकी बुद्धि का विकास हो।

दोस्तों इस लेख में आपने मांटेसरी विधि क्या है? What is the montessori method मांटेसरी स्कूल किसे कहते है? मांटेसरी विधि के गुण दोष पड़े आशा करता हुँ यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।

इसे भी पढ़े:- 

  1. विकलांगता के मॉडल
  2. विकलांगजन अधिनियम 1995

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