शैवाल के सामान्य लक्षण | Shaival ke samanya lakshan

शैवाल के सामान्य लक्षण common symptoms of algae

हैलो दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, हमारे इस लेख  शैवाल के सामन्य लक्षण (Common symptoms of algae) में दोस्तों आज आप जीव विज्ञान के एक प्रमुख टॉपिक शैवाल के बारे में जानेंगे।

दोस्तों शैवाल पादप जगत के अंतर्गत आने वाला एक पादप समूह है। दोस्तों प्रकृति में पादपों की संख्या 3.5 लाख के करीब है। जो अपनी आकृति स्वभाव, तथा गुणों के आधार पर अन्य से भिन्नता प्रकट करते हैं।

इसलिए पादप जगत का अध्ययन को सुविधापूर्ण बनाने के पादप जगत को कई समूहों में बांट दिया गया, जिनमें शैवाल पादप जगत के थैलोफाइटा के अंतर्गत आता है।

तो आइए दोस्तों, जानते हैं विस्तार में किस शैवाल किसे कहते हैं, शैवाल के सामान्य लक्षण क्या है।

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शैवाल के सामान्य लक्षण

शैवाल किसे कहते हैं what is Algea 

शैवाल के सामान्य लक्षण - शैवाल का मतलब उस पादप संरचना से है, जो थैलोफाइटा (Thallophyta) के अंतर्गत आता है। 

अर्थात शैवाल की संरचना थैलस (Thallus) के समान होती है। थैलस का अर्थ होता है वह जीव जो पूर्ण रूप से विकसित ना हो,

अर्थात इस प्रकार से कह सकते हैं कि पादप जगत का वह समूह जो जो पूर्णता विकसित नहीं होते अर्थात इनका शरीर पत्ती तना जड़ आदि में विभक्त नहीं होता है उन पादपों को शैवाल कहा जाता है।

जीव विज्ञान किसे कहते है

शैवालों के वैज्ञानिक अध्ययन को फाईकोलॉजी (Phycology) कहते हैं। शैवाल क्लोरोफिल युक्त, (Cholorophyllous) संवहन ऊतक रहित स्वपोषी पौधे होते हैं।

जो ताजे जल समुद्री जल गर्म जल झरनों क नदी तालाबों अर्थात हर जगह पाए जाते है।

कुछ शैवाल ऐसे भी होते हैं जो गति करते हैं और इनमें गति करने के लिए फलेजिला (Flagella) नामक संरचना भी पाई जाती है, शैवाल विभिन्न स्थानों पर पाए जाने के कारण उनके नाम भी अलग-अलग हो गए हैं

जैसे बर्फ पर पाए जाने वाले सवाल को क्रिप्टोफाइट्स (Cryptophytes) कहते हैं तो वहीं चट्टानों पर पाए जाने वाले सवाल को लिथोफाइट्स (Lithophytes) कहा जाता है।

शैवाल के सामान्य लक्षण

शैवाल के सामान्य लक्षण common symptoms of algae

शैवाल के सामान्य लक्षण निम्न प्रकार हैं

  • 1. शैवाल की कोशिकाओं में सैलूलोज (Cellulose) की बनी कोशिका भित्ति पाई जाती है।
  • 2. शैवालों में भोज्य पदार्थों का संचय करने के लिए मंड (Starch) के रूप में भोजन को संचित किया जाता है।
  • 3. शैवाल अधिकांशतः स्वछ जल समुद्री जल दोनों में ही पाए जाते हैं।
  • 4. कुछ शैवाल ऐसे होते हैं जो नमी वाले स्थानों पर भी पाए जाते हैं।
  • 5. इनका जननांग प्रायः एक कोशिकीय होता है और निषेचन के बाद कोई भ्रूण नहीं बनाते यह इनकी प्रमुख विशेषता है।
  • 6. शैवालों में तीन प्रकार के वर्णक (Pigment) पाए जाते हैं, हरा लाल एवं भूरा है इनके आधार पर इनको तीन प्रकार में वर्गीकृत किया गया है।
  • 1. क्लोरोफाईसी (Chlorophyceae) इस में हरा वर्णक पाया जाता है।
  • 2. रोडोफाईसी (Rodophyceae) इसमें लाल वर्णक पाया जाता है।
  • 3. फीयोफाइसी (Pheophyceae) इसमें भूरा वर्णक पाया जाता है।
  • 7.शैवालों में प्रजनन लैंगिक जनन तथा अलैंगिक जनन दोनों ही विधियों के द्वारा होता है

शैवालों में प्रजनन Reproduction of Algea

शैवालों में मुख्यतः निम्न तीन प्रकार का प्रजनन देखने को मिलता है जो निम्न प्रकार से है:-

कायिक प्रजनन (Vegetative reproduction) -  शैवालों में इस प्रकार के प्रजनन की क्रिया कई प्रकार से होती है जिसमें खंडन, हार्मोगोन, प्रोटोनीमा तथा एकाइनेट आदि प्रमुख हैं।

अलैंगिक प्रजनन (Àsexual reproduction)  - शैवालों में अलैंगिक प्रजनन भी पाया जाता है  शैवालों में अलैंगिक प्रजनन की प्रिक्रिया चल बीजाणु अचल बीजाणु हिम्नोस्पोर, ऑक्टो और इंडोस्पोर द्वारा होती है

लैंगिक प्रजनन (Sexual reproduction) - शैवालों में लैंगिक जनन की समयुग्मक विश्मयुग्मक तथा अण्डयुग्मक के द्वारा देखी जाती है।

शैवालों का आवास Habitat of Algea

शैवाल प्रकृति में जल तथा थल दोनों जगह पर पाए जाते हैं, जैसे कि कुछ शैवाल ताजे ओर समुद्री जल में जबकि कुछ गर्म जल के झरनों में नमी युक्त स्थानों पर नदियों में तालाबों में अगर बात करें थल की

तो कुछ शैवाल पेड़ों के तनों पर और चट्टानों पर भी उग जाते हैं, कुछ शैवाल ऐसे होते हैं जो दूसरे पौधों पर भी पाये जाते हैं। उनमें सर्वप्रथम उडोगोनियम (Oedogonium) नाम का शैवाल है।

प्रोटोडरमा (Protodarma) एक ऐसा शैवाल है जो कछुए की पीठ पर उगता है तथा क्लैडोफोरा नामक शैवाल घोंघे  की पीठ पर पाया जाता है जबकि कुछ शैवाल ऐसे होते हैं जो जंतुओं के शरीर के अंदर भी पाए जाते हैं

जैसे कि जुक्लोरेला एक ऐसा शैवाल है जो निम्न वर्गीय जंतु जैसे हाइड्रा (Hydra) के अंदर पाया जाता है। इन दोनों के बीच का संबंध सहजीवी संबंध कहलाता है।

कुछ शैवाल ऐसे होते हैं जो परजीवी के रूप में भी पाए जाते हैं जिनमें, सीफेल्यूरोस (Cephaleurose) नामक  शैवाल चाय कॉफी आदि की पत्तियों पर देखा जाता है,

कहीं कुछ शैवाल पेड़ों की छाल दीवारों तथा चट्टानों आदि पर भी उग जाते हैं।

जैसे कि साइमनसिएला शैवाल आसीलिटोरिया शैवाल एक ऐसा सवाल है जो मनुष्य के आंतो में और जंतुओं के शरीर में भी पाया जाता है। 

इस प्रकार से सवाल पादप जाति का समूह है जो विभिन्न स्थानों के साथ-साथ जीवो के शरीर पर और उनके अंदर भी पाए जाते।

दोस्तों आपने इस लेख में शैवाल किसे कहते है, शैवालों के लक्षण, आवास, तथा प्रजनन आदि के बारे में पढ़ा आशा करता हुँ यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।

शैवाल के आर्थिक महत्व Economic importence of Algea

मनुष्य के लिए तथा अन्य जीव-जंतुओं के लिए शैवाल विभिन्न प्रकार से महत्व रखते हैं, जो निम्न प्रकार से हैं:-

शैवाल का प्रयोग भोजन के रूप में लंबे समय से मनुष्य तथा जीव जंतुओं के द्वारा किया जा रहा है। जैसे कि अल्वा नामक शैवाल सलाद के रूप में जापान मे उपयोग किया जाता है।

इस शैवाल को समुद्री सलाद कहा जाता है, जिसमें प्रचुर मात्रा में आयोडीन तथा खनिज पदार्थ होते हैं। नॉस्टॉक शैवाल को भोजन के रूप में जबकि रोडोमेरिया पलमेटा का उपयोग तम्बाकू की तरह उपयोग होता है।

कोंड्रस नामक शैवाल से आयरिश अगर मिलता है, जिसका उपयोग चॉकलेट उद्योग में होता है। शैवाल में कार्बोहाइड्रेट, अकार्बनिक पदार्थ तथा कई प्रकार के विटामिंस उपस्थित होते हैं।

इसलिए शैवाल भोजन के अच्छे स्रोत होते हैं। भोजन के साथ ही व्यवसाय के क्षेत्र में भी शैवालों का उपयोग बहुत बड़ी मात्रा में होता है।

अगर अगर पदार्थ लाल शैवाल से मिलता है, जिसका उपयोग प्रयोगशाला में विभिन्न प्रकार के अनुसंधान कार्य करने मे किया जाता है।

सारगासम शैवालों से कृत्रिम ऊन बनाई जाती है, जबकि अन्य कई शैवालों का उपयोग विभिन्न प्रकार के उद्योगों में होता है। कुछ शैवाल नाइट्रोजन स्थरीकरण करके मृदा की उर्वरता बढ़ाते हैं।

जैसे नॉस्टॉक और एनाबीना, नील हरित शैवाल उसर भूमि को उपजाऊ बना देते हैं। कुछ शैवालों का उपयोग औषधि के रूप में भी होता है,

जैसे नाइट्रेला क्लोरेलिन आदि। इस प्रकार कहा जा सकता है, कि शैवाल वे थैलोफाइटा हैं, जिनका उपयोग मनुष्य की आवश्यकता के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में होता है। 

इसे भी पढ़े:-

  1. जल प्रदुषण किसे कहते है?
  2. अग्नाशय किसे कहते है
  3. पादप जगत का वर्गीकरण


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