विटामिन किसे कहते है, विटामिन के प्रकार | How many type of vitamin

विटामिन किसे कहते है विटामिन के कितने प्रकार होते है Type of vitamin in hindi 

हैलो दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है, हमारे इस लेख विटामिन कितने प्रकार के होते है (Type of vitamin in hindi) में। दोस्तों इस लेख में आप विटामिन किसे कहते हैं,

के साथ आप जानेंगे विटामिन कितने प्रकार के होते हैं? उनके कार्य क्या है? दोस्तो संतुलित भोजन स्वस्थ शरीर के (Neutrients) लिए बहुत आवश्यक होता है।

कियोकि उनमें मुख्य छह पोषक तत्व विद्वमान होते हैं, उनमें से एक है विटामिन होते है, जो हमारे शरीर को ऊर्जा (Energy) तो नहीं देते किंतु

अपनी उपस्थिति के कारण विभिन्न प्रकार की चयापचय क्रियाओं (Metabolism) का नियंत्रण करते है, तो दोस्तों आइए पढ़ते है, इस लेख को विटामिन किसे कहते हैं और विटामिन के कितने प्रकार होते हैं:-

विटामिन किसे कहते है


विटामिन किसे कहते है what is vitamin 

विटामिन किसे कहते हैं - विटामिन कार्बोहाइड्रेट्स  और प्रोटीन के समान ही कार्बन से निर्मित कार्बनिक योगिक (Organic compound) होते हैं।

जिनकी थोड़ी सी ही मात्रा भोजन में होती है किन्तु बहुत महत्वपूर्ण कार्य करती है, किंतु विटामिनों को संश्लेषित नहीं कर सकते हैं।

सभी प्रकार के पौधे विटामिन का संश्लेषण करते हैं। किन्तु जंतुओं में यह क्षमता नहीं होती, जंतु विटामिन की कमी को पूरा करने के लिए वनस्पतियों को खाते है।

विटा का अर्थ होता है जीवन (life) क्योंकि विटामिन एक तरह से कार्बनिक पदार्थ होते हैं, जो शरीर की उपापचय क्रियाओं (Metabolism) का नियंत्रण और रोगों से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं।

विटामिन हारमोंस (Hormonse)और उत्प्रेरक (Catalyst) की तरह कार्य करते हैं और जंतुओं की फिजियोलॉजिकल क्रियाओं का नियंत्रण करते हैं

किन्तु  विटामिन अधिक तापमान पर नष्ट भी हो जाते हैं। विटामिन की कमी पूरी करने के लिए डॉक्टर हमेशा हमें संतुलित आहार (Balanced Diet) विटामिनों से भरपूर खाद्य खाने की सलाह देते हैं।

विटामिनों की खोज सर्वप्रथम विशेष प्रकार के रासायनिक पदार्थ के रूपों में 18 वीं शताब्दी में की शुरू हुई थी। सबसे पहले विटामिनों की खोज का प्रयास  लिंड (Lind) नामक व्यक्ति ने 1753 में किया।

किंतु सही प्रकार से विटामिनों की खोज का श्रेय 1912 में फंक (funk) को जाता है। फंक ने ही विटामिन शब्द का सबसे पहले प्रयोग किया था।

फंक ने चावल की भूसी में ही सबसे पहले विटामिन की खोज की और बताया कि यह विटामिन बेरी- बेरी रोग के लिए उत्तरदायी है। इसके बाद विभिन्न वैज्ञानिकों ने फंक के इस विचार का समर्थन भी किया।

विटामिन के कितने प्रकार होते है

विटामिन कितने प्रकार के होते है Type of vitamin in hindi 

विटामिन दो प्रकार के होते है।

  1. जल में घुलनशील विटामिन water soluble vitamin 

वे विटामिन जो विटामिन जल में आसानी से घुल जाते हैं।  तथा जल में घुलनशील अवस्था में पाए जाते है, उनको जल में घुलनशील विटामिन कहते है जो दो प्रकार के होते है। विटामिन C और विटामिन बी


विटामिन सी Vitamin-C (एस्कार्बिक अम्ल) 

विटामिन सी का केमिकल नाम एस्कार्बिक एसिड है। जिसका पृथक्करण 1928 इसमें गायोर्जी (Gayorji) वैज्ञानिक ने किया था, जबकि इस विटामिन सी (Vitamin-C) का संश्लेषण सन 1933 में रीचस्टीन नामक वैज्ञानिक ने किया।

विटामिन C सफेद, रवेदार और ठोस  प्रकृति का होता है। जो क्रेब्स चक्र में सहविकार का कार्य करता है। विटामिन सी लाल रक्त कणिका (RBC) अंतरकोशिकीय मेट्रिक्स (Metrix) 

कॉलेजन युक्त पदार्थों में एंटीबॉडीज (Antibodies) दातों की डेंटीन, के निर्माण में उल्लेखनीय भूमिका निभाता है।

विटामिन सी के मुख्य स्रोत खट्टे फल, नींबू, मूली, हरी सब्जियाँ आदि है। विटामिन सी की कमी से स्कर्वी (Scurvy) नामक रोग हो जाता हैं।


विटामिन बी Vitamin -B Complex 

विटामिन बी कॉन्प्लेक्स कई  विटामिनों का समूह होता है। जिसमें आठ विटामिन मिलकर एक संयुक्त समूह बनाते हैं, जिसे विटामिन बी कांपलेक्स (Vitamin-B Complex) कहा जाता है।

इसे सबसे पहले पूंक नामक वैज्ञानिक ने 1951 में खोजा था। विटामिन बी कांपलेक्स के सभी विटामिनो के कार्य अलग-अलग होते हैं.

विटामिन बी काम्प्लेक्स के सभी विटामिन नाइट्रोजन युक्त होते हैं और उपापचय क्रियाओ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विटामिन बी कॉन्प्लेक्स के प्रमुख विटामिन निम्न प्रकार हैं:-

  1.  विटामिन B1 थायमीन
  2.  विटामिन B2 राइबोफ्लेविन
  3.  विटामिन B3 नियासीन
  4.  विटामिन B5 पैंटोथैनिक एसिड
  5.  विटामिन B6 पायरीडॉक्सिन
  6.  विटामिन B7 बायोटीन
  7.  विटामिन B9 फोलिक एसिड
  8.  विटामिन B12 साइनोकोबालामिन

  • वसा में घुलनशील विटामिन fat soluble vitamins

वे विटामिन जो वसा में आसानी घुल जाते हैं, तथा वसीय अम्ल तथा वसीय वस्तुओं में पाए जाते है। उन्हें वसा में घुलनशील विटामिन कहते है।

जो चार प्रकार के विटामिन होते है। विटामिन ए (Vitamin-A) विटामिन डी (Vitamin-D) विटामिन ई (Vitamin-E) और विटामिन के (Vitamin-K)


विटामिन ए रेटिनॉल (Vitamin- A)

विटामिन ए का रासायनिक नाम रेटिनोल (Retinol) है जबकि इसको इंटीजीरोप्थैलमिक विटामिन के नाम से भी जाना जाता है। विटामिन ए की खोज 1973 ईस्वी में मेककॉलम (Mccollum) ने की थी।

विटामिन ए केराटिन प्रोटीन का ही डाइरेटीव है, जो रतौंधी त्वचा के रोगों को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण है। दूध, मक्खन, अंडे की जर्दी, जिगर, मछली पालक, गाजर आदि विटामिन ए के मुख्य स्रोत  है।

विटामिन ए की कमी से रतौंधी (Night blindness) जीरोंथेल्मियाँ (Geronthelium) आँखों की समस्या तथा अन्य कई रोग उत्पन्न होने लगते हैं।


विटामिन डी केल्सिफेरोल (Vitamin-D)

विटामिन डी का रासायनिक नाम केल्सिफेरोल (Calciferol) है, जिसकी खोज मैककॉलम ने 1992 ईस्वी में की थी। विटामिन डी कैल्शियम और फास्फोरस की उपापचय क्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

विटामिन डी को धूप का विटामिन (Sun vitamin) के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि सूर्य के प्रकाश से भी विटामिन डी प्राप्त होता है। विटामिन डी का कार्य हड्डियों तथा दातों को मजबूत बनाना होता है।

मछलियों का तेल, मक्खन, अंडा, दूध तथा सूर्य का प्रकाश  विटामिन डी के अच्छे स्रोत है। विटामिन डी की कमी से रिकेटस तथा ओस्टियोमलेशिया जैसी हड्डियों की बीमारियाँ हो जाती है।


विटामिन ई टोकोफेरोल (Vitamin- E)

विटामिन ई का वैज्ञानिक नाम टोकोफेरोल है। विटामिन ई की खोज माटेंल तथा कॉंनकलिन (Mattel and Conklin) नामक वैज्ञानिक ने 1920 में की थी।

विटामिन ई प्रमुख रूप से जनन कोशिकाओं के निर्माण तथा जनन संबंधी समस्याओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इसे जनन हार्मोन भी कहते है।

तेल अंडे का योक, जंतु ऊतक, अल्फा, पत्तियाँ चावल के छिलके, सलाद और गेहूं विटामिन ई के मुख्य स्रोत है। विटामिन ई की कमी से जनन क्षमता कम होने लगती है। हृदय की गति प्रभावित होती है, तथा  गर्भ का गिरने की समस्या बनी रहती है।


विटामिन के नेप्थाकिवनोन (Vitamin- K)

विटामिन के का केमिकल नाम नेप्थाकिवनोन (Naphthaquivanone) है, जिसकी  खोज टीम ने 1935 में की थी। विटामिन के का मुख्य कार्य खून बहने पर रक्त का थक्का जमाना है.

क्योंकि विटामिन के प्रोथ्राँबिन के निर्माण में सहयोग प्रदान करता है, जिससे रक्त का थक्का जमता है। हरी पत्ती, टमाटर, गोभी, जिगर अंडे की जर्दी सोयाबीन, पनीर आदि विटामिन के  के मुख्य स्रोत है।

विटामिन की कमी से रुधिर का थक्का (Blood clotting) नहीं जमता और रक्त बह जाने से रोगी मर जाता है।


विटामिंस के कार्य Function of vitamin 

किसी भी स्वास्थ्य शरीर की बात होती है, तो वहाँ पर विटामिन का जिक्र अक्सर होता है, कियोकि विटामिन एक स्वस्थ शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं

हालांकि हमारे शरीर को ऊर्जा नहीं देते परंतु अपनी सूक्ष्म उपस्थिति के कारण हमारे शरीर की विभिन्न उपापचय क्रियाओं का नियमन करते हैं, इसलिए हमारा शरीर स्वस्थ रहता है।

विटामिन दो प्रकार होते हैं. जो जल में घुल जाएँ जल में घुलनशील विटामिन और वसा में घुल जाएँ वसा में घुलनशील विटामिन

इनके भी कई प्रकार होते है, इसलिए अलग-अलग कार्य भी होते हैं। जैसे - विटामिन ए रतौंधी में असरकारक होता है, तो वही विटामिन बी एनीमिया, शारीरिक कमजोरी आदि को दूर भागता है।

विटामिन सी स्कर्वी रोग को रोकता है। वहीं विटामिन डी हड्डियों तथा दांतो को मजबूत बनाता है। विटामिन ई का कार्य जनन क्षमता से सम्बंधित होता है, तो वही विटामिन के रक्त का थक्का जमाने में प्रमुख भूमिका निभाना होता है।

दोस्तों आपने में विटामिन के कितने प्रकार होते हैं? (Type of vitamin) तथा विटामिन के कार्य पढ़े। आशा करता हूंँ, यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।

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