केंचुआ किसे कहते हैं, वर्गीकरण तथा लक्षण What is Earthworm classification Lakshan

केंचुआ किसे कहते हैं वर्गीकरण लक्षण


केंचुआ किसे कहते हैं वर्गीकरण लक्षण what is earthworm classification Lakshan

हैलो दोस्तों आपका बहुत-बहुत स्वागत है। हमारे इस लेख केंचुआ किसे कहते हैं वर्गीकरण तथा इसके लक्षण What is earthworm classification and lakshan में।

दोस्तों इस लेख में आप केंचुए के बारे में जानेंगे की केंचुआ कैसा जीव है कहाँ रहता है। इनके लक्षण क्या है तो आइए दोस्तों पढ़ते हैं हमारे इस लेख को केंचुआ किसे कहते हैं। केंचुआ का वर्गीकरण तथा लक्षण में :-

सरीसृप वर्ग के लक्षण

केंचुआ किसे कहते हैं what is Earthwarm 

केंचुआ एक प्रकार का अकशेरुकी जीव है जो संघ ऐनेलिडा के अंतर्गत आता है। केंचुए का पूरे शरीर पर छोटे-छोटे छल्ले बने हुए होते हैं अर्थात केंचुए का पूरा शरीर सम खंडों में विभाजित होता है।

केंचुए का वैज्ञानिक नाम फेरिटिमा पोस्थमा है। केचुआ के अनेक वंश Genus होते हैं, जो विश्व के प्रत्येक जगह पर लगभग सभी क्षेत्रों में वितरित होते हैं।

केंचुए की प्रजाति में लुम्ब्रीकस वंश के केंचुए यूरोप और अमेरिका में मगास्कोलेक्स, दक्षिण भारत में फेरिटिमा जापान श्रीलंका भारत ऑस्ट्रेलिया में तो

वही यूटाइफियस और पीरीओनिक्स वंश के केंचुए क्रमशः उत्तरी भारत और मध्य भारत में पाए जाते हैं।

केंचुआ किसे कहते हैं वर्गीकरण लक्षण

केंचुए का वर्गीकरण classification of Earthwarm 

केंचुआ फाइलम एनेलिडा के अंतर्गत आने वाला जीव है जिसका वर्गीकरण निम्न प्रकार है

  1. संघ (Phylum) - एनेलिडा (Ennilida)
  2. वर्ग (Class) - ओलिगोकीटा (Oligochaeta)
  3. गण (Order) - ओपीस्थोपोरा  (Opisthopora)
  4. वंश (Genus) - फेरिटिमा (Pheretima)
  1. ऐनिलिडा संघ के लक्षण
  2. संघ पोरिफेरा के लक्षण

केंचुएँ के लक्षण earthwarm ke lakshan 

केचुएँ के लक्षण निम्न प्रकार हैं

आवास एवं स्वभाव  - केंचुआ एक रात्रि में विचरण करने वाला प्राणी होता है, जो दुनिया के समस्त भागों में पाया जाता है।

केंचुआ अधिकतर नम मिट्टी में बिल बनाकर रहता है, तथा मृत कार्बनिक पदार्थों को भोजन के रूप में ग्रहण करता है।

शारीरिक आकृति - केंचुआ ऐनेलिडा संघ का प्राणी होता है, केंचुए का लक्षण, शरीर लंबा गोल तथा बेलनाकार होता है। इसका आगे का भाग नुकीला तथा पीछे का भाग गोलाकार होता है।

एक सामान्य केंचुए की लंबाई लगभग 15 सेंटीमीटर तक तथा व्यास 0.3 से 0.5 के आसपास हो सकता है।

शारीरिक विभाजन - केंचुए के शरीर में क्लाइटेलम की उपस्थिति के आधार पर इस को तीन भागों में बांटा गया है

पूर्व क्लाइटेललर प्रदेश - केंचुए का मुखीय खंड पूर्व कलाइटेलम प्रदेश कहलाता है. जो 13 खंडों से मिलकर बना होता है मुख के चारों ओर स्थित खंड को पेरीस्टोमियम कहते हैं।

मध्य क्लाइटेलर प्रदेश - केंचुए के शरीर के 14 से 16 वे खंड के मध्य क्लाइटेलर प्रदेश के नाम से जाना जाता है। इसमें 14 खंड पर मादा जनन छिद्र

तथा अंडे और शुक्राणुओं को इकठ्ठा करने के लिए तथा निषेचन के लिए एक कोष होता है जिसे कोकून कहते हैं।

पश्च क्लाइटेलर प्रदेश - यह भाग 85 से 105 खंड तक होता है. इस के 17वें और 18 खंड में एक - एक  जोड़ी सहायक ग्रंथि के छिद्र होते हैं तो वहीं 19 वे खंड में नर जनन छिद्र पाए जाते हैं।

देहभित्ति - केंचुए की देहभित्ति चार स्तरों से मिलकर बनी होती है। इसके पहला और बाहरी आवरण क्यूटिकल का बना होता है. तथा क्यूटिकल के नीचे का आवरण स्तंभआकार का होता है

वह एपिडर्मिस से बना होता है जो मोटा कोशिकीय स्तर होता है, जिसे दूसरा स्तर कहते है। जबकि एपिडर्मिस के नीचे एक और मोटा स्तर पाया जाता है जिसे पेशीय स्तर (तीसरा स्तर) कहते हैं।

पेशीय  स्तर के नीचे एक और चौथा स्तर पाया जाता है जिसे सीलोमिक स्तर कहा जाता है जो मोटा, चपटा तथा अत्यंत पतला होता है।

प्रचलन - केंचुआ में प्रचलन का कार्य देहभित्ति पेशियों और सीटी की सहायता से होता है। केंचुए के शरीर के प्रत्येक खंड के मध्य में सीटी नामक संरचना पाई जाती है. जो प्रत्येक खंड  में एक कोष में पाई जाती है जिसे सीटल कोष कहते हैं।

तंत्रिका तंत्र - केंचुए का तंत्रिका तंत्र विकसित प्रकार का होता है, जो तीन प्रकार के तंत्रों से मिलकर बना होता है

1.केंद्रीय तंत्रिका तंत्र

2.परिधीय तंत्रिका तंत्र

3.अनुकंपीय  तंत्रिका तंत्र

पाचन तंत्र - केंचुएँ का पाचन तंत्र पूर्ण रूप से विकसित तंत्र होता है। जो आहार नाल और ग्रंथियों में विभाजित होता है।

आहारनाल - आहार नाल पूरी तरह से सीधी नलिकावत होती है जो मुख, मुखगुहा, फेरिंग्स, इसोफेगस, गिजर्ड आमाशय, आंत में बंटी हुई होती है।

पाचन ग्रंथियों - पाचन ग्रंथियों में लार ग्रंथियाँ, आमाशयी ग्रंथि और आंत्रीय ग्रंथियाँ पाचन में प्रमुख कार्य करती हैं।

उत्सर्जन तंत्र - केंचुए में उत्सर्जन नेफ्रीडिया नामक संरचना के कारण होता है। नेफ्रीडिया उत्सर्जन अंग होते हैं, जो तीन प्रकार के होते हैं

1.फैरिंजीयल नेफ्रीडिया

2.त्वचीय अद्यावरणीय नेफ्रीडिया

3.पट्टीय नेफ्रीडिया

प्रजनन तंत्र - केंचुआ एक उभयलिंगी प्राणी होता है। क्योंकि एक ही प्राणी में नर और मादा जनन तंत्र पाए जाते हैं।

जिनमें नर जनन तंत्र 2 जोड़ी वृषण 10 वे और 11 वे खंड में वृषण कोष, शुक्राशय, शुक्रवाहिनी, प्रोस्टेट ग्रंथि तथा कई सहायक ग्रंथियों से मिलकर बना होता है

वही मादा जनन तंत्र भी अंडाशय अंडवाहिनी, सपरमेथीका आदि से मिलकर बना होता है।

दोस्तों इस लेख में आपने केंचुआ किसे कहते हैं (What is earthworm) केंचुए का लक्षण तथा वर्गीकरण पड़ा आशा करता हूं यह लेख आपको अच्छा लगा होगा।

इसे भी पढ़े:- 

  1. संघ सीलेन्ट्रेटा के लक्षण
  2. संघ प्रोटोज़ोआ के लक्षण
  3. निषेचन किसे कहते है

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