जीव विज्ञान किसे कहते है | what is biology in hindi

जीव विज्ञान किसे कहते है जीवों का वर्गीकरण

जीव विज्ञान किसे कहते है,जीवों का वर्गीकरण what is biology in hindi 

हैलो दोस्तों आपका इस लेख जीव विज्ञान किसे कहते है (What is biology) में बहुत -बहुत स्वागत है। दोस्तों इस लेख में आप जीव विज्ञान किसे कहते है? जीव क्या है?

बायोलॉजी का अर्थ क्या है? तथा जीव विज्ञान के क्षेत्र आदि महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जान पाएँगे। तो दोस्तों आइये बढ़ते है, इस लेख में जीव विज्ञान किसे कहते है।

जीव विज्ञान किसे कहते है what is biology in hindi 

जीव विज्ञान किसे कहते है (what is biology) - जीव विज्ञान ( Biology ) - जीव विज्ञान को अंग्रेजी में बायोलॉजी (Biology) कहते है। ग्रीक भाषा का शब्द बायोलॉजी जो दो शब्दों "Bios"

अर्थात लाइफ, जीवन या जीव और "logos" मतलब, "अध्ययन" से मिलकर बना है। इस प्रकार बायोलॉजी Biology का अर्थ जीवों का अध्ययन करना ह। अतः

जीव विज्ञान को प्राकृतिक विज्ञान  महत्वपूर्ण शाखा कहा जाता है। जिसमें उन जीवों का अध्ययन होता है जिनमें जीवन (life) होता

अर्थात उन जीवों में जीवन सम्बन्धी सभी क्रियायें होती हैं, जैसे - उनकी उत्पत्ति, विकास, प्रजनन आदि इसप्रकार वे जीव जो अपने मातृ जीव से उत्पन्न होते है और फिर उनकी मृत्यु भी होती है।

उनका जिस शाखा में अध्धयन किया जाता है उसे जीव विज्ञान (Biology) कहते है। बायोलॉजी शब्द का सबसे पहले प्रयोग 1801 में लैमार्क फ्रांस के जंतु वैज्ञानिक और ट्रेविनेरस जर्मनी के जंतु वैज्ञानिक ने किया था। 

जीव विज्ञान को वैज्ञानिक अरस्तु ने नई शाखा के रूप में स्थापित किया तथा ज़ीव विज्ञान के क्षेत्र में विस्तृत वर्णन किया अतः अरस्तु को जीव विज्ञान का जनक (Father of Biology ) भी कहा जाता है।

प्लाज्मोडियम क्या है

जीव विज्ञान के क्षेत्र field of biology 

जीव विज्ञान को अध्ययन की सुविधा से दो शाखाओं में विभाजित किया गया है।

प्राणी विज्ञान (Zoology ) जीव विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत सभी प्राणियों की उत्पत्ति, उनका पोषण उन पर वातावरण का प्रभाव, विकास, तथा जीवन सम्बन्धी क्रियायें

जैसे - प्रजनन, मृत्यु आदि का विस्तृत अध्ययन किया जाता है। उसे प्राणी विज्ञान (zoology) कहते हैं। प्राणी विज्ञान (जंतु विज्ञान) के जनक अरस्तु हैं।

जिन्होंने प्राणी विज्ञान के संबंध में अपनी पुस्तक लिखी जिसका नाम है हिजटोरिअ एनिमेलिअ (Historia Annimalium) इसमें अरस्तु ने 500 जीव जंतुओं का वर्णन किया गया है।

वनस्पति विज्ञान  (Botany ) - जीव विज्ञान की वह शाखा जिसके अंतर्गत समस्त प्रकार के पेड़ पौधों (plant hurb) झाड़ियों आदि का अध्ययन किया जाता है। 

वनस्पति विज्ञान के पिता थियोफ्रेस्ट्स नमक वैज्ञानिक है जिन्होंने अपनी पुस्तक हिस्टोरिअा प्लान्टेरम ( Historia Plantarum) में  500 प्रकार के पौधों का विस्तृत वर्णन किया है।

जबकि जीव विज्ञान की तीन मुख्य शाखाएँ है:-

1. वनस्पति विज्ञान

2. प्राणीविज्ञान

3. सूक्ष्मजीव विज्ञान

जीवों का वर्गीकरण classification of organism 

संसार में कई प्रकार के प्राणी है, सभी प्राणियों से आकृति स्वभाव आदि के आधार पर एक दूसरे से हमेशा भिन्नता रखते हैं। 

इसलिए जीव धारियों के अध्ययन की सुविधा के लिए वर्गीकरण (Classification)बहुत ही महत्वपूर्ण हो गया था। और फिर 

जीव धारियों को उनके कुछ गुणों के आधार पर वृगीकृत करने का प्रयास कई वैज्ञानिकों ने किया लेकिन जॉन रे वैज्ञानिक ने जीव धारियों का वर्गीकरण की शुरुआत क्रमबद्ध तरीके से शुरू की।

किंतु कुछ समय पश्चात ही उनके वर्गीकरण को अमान्य घोषित मानकर एक श्वीडिश वैज्ञानिक कैरोलस लीनियस ने 1708 -1778 ई• के बीच में जंतुओं का वर्गीकरण किया

और उन्होंने अपनी कई पुस्तकों जेनेरा प्लान्टेरम सिस्टेमा नेचुरी आदि में जीव धारियों के वर्गीकरण का विस्तृत वर्णन किया।

पोलियो का इतिहास

कैरोलस लीनियस ने जीवधारियों का वर्गीकरण दो भागों में किया

1.जंतु जगत

2.पादप जगत

1.जंतु जगत Animal kingdom

कैरोलस लीनियस ने जंतु जगत में सभी कशेरुकीय (Vertibrate) तथा अकशेरूकीय (invertibrate) चलायमान तथा अचालयमान प्राणियों को तथा उन समस्त प्राणियों को समाहित किया है,

जो चलायमान होते है यहाँ वहाँ आ जा सकते हों, तथा इन जीवों का शरीर विखंडित होता है और उनमें पादप से भिन्न गुण पाए जाते हैं।

और जंतु जगत के समस्त प्राणी सभी स्थानों पर पाए जाते हैं। जल में थल में  आकाश में उड़ने वाले भी प्राणी इन्हीं में शामिल है।

2.पादप जगत Plant kingdom

पादप जगत में सभी प्रकार के पेड़ पौधे वनस्पति तथा वे छोटे-छोटे पौधे शामिल किए गए हैं।

जो अचलायमान होते तथा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं जिन्हे श्वपोषी पौधे कहा जाता है। इनमें पाये जाने वाले गुण तथा क्रियाएँ जंतुओं से भिन्न भिन्न होती हैं।

जबकि कुछ पौधे अपना भोजन स्वयं नहीं बना पाते इसलिए वे दुसरे जीवों पर आश्रित रहते है उन्हें परपोषी पौधे कहा जाता है।

पाँच जगत का वर्गीकरण Panch jagat ka vargikaran 


जीव विज्ञान किसे कहते है जीवों का वर्गीकरण


कैरोलस लीनियस ने जंतुओं के वर्गीकरण (Classification) की आधारशिला की नींव रखी और इसके पश्चात जंतुओं के वर्गीकरण मेंनई क्रांति उस समय आई जब

आर. एच. व्हिटेकर नामक वैज्ञानिक ने सभी प्राणियों को वैज्ञानिक तरीके से वर्गीकृत किया। वैज्ञानिक आरएच व्हिटेकर ने सन 1969 में समस्त प्राणियों को पांच भागों में बांटा जो निम्नप्रकार है :-

1.मोनेरा Monera  

मोनेरा जगत में उन सभी प्राणियों को रखा गया है जो एककोशिकीय है और प्रोकेरियोटिक  प्रकृति के होते हैं। अर्थात मोनेरा जगत के जीवों में  सुविकसित अंग तथा केंद्रक (Nucleus ) का अभाव होता है।

उदाहरण के लिए - जीवाणु,,आर्किबैक्टीरिया जैसे जीवों को इस जगत में शामिल किया गया है। क़्योकी ये सभी जीव एक कोशिकीय प्रोकैरियोटिक प्रकृति के होते हैं।

2. प्रोटिस्टा Protista 

प्रॉटिस्टा जगत में उन प्राणियों को शामिल किया गया है, जो एककोशिकीय है, किंतु यूकैरियोटिक प्रकृति के हैं।

अर्थात इनमें सभी प्रकार के विकसित अंगक होते हैं तथा एक स्पष्ट केंद्रक (nucleus) पाया जाता है। प्रोटिस्टा जगत के सभी प्राणी जल में और स्थल में पाए जाते हैं, इनमें यूग्लीना पैरामीशियम आदि जीवों को शामिल किया गया है।

3. पादप Plant 

पादप जगत में उन सभी प्राणियों को शामिल किया गया है, जो रंगहीन बहूकोशिकीय तथा प्रकाश संश्लेषी उत्पादक जीव होते हैं।

अर्थात ये प्राणी अपना भोजन स्वयं बनाते हैं क़्योकी इनमें प्रकाश शंश्लेषण की प्रिक्रिया होती है और इसी कारण हरे होते हैं. इस समूह में पुष्पीय तथा अपुष्पीय आदि प्रकार के पेड़ पौधों को शामिल किया गया है।

4. कवक Fungi  

इस जगत में भी यूकैरियोटिक तथा परपोषी जीवों को शामिल किया गया है, जो अपने भोजन के लिए अन्य प्राणियों पर आश्रित होते हैं।

तथा परपोषी के रूप में अपना जीवन व्यतीत कर के अपना पोषण करते हैं। ये सभी स्थानों पर पाए जाते है।

           5. एनिमेलिया Annimelia 

बहुकोशिकीय जंतु सम्भोजी यूकैरियोटिक जीवो को रखा गया है जो उपभोक्ता होते हैं अर्थात अपने भोजन के लिए वनस्पति तथा अन्य जंतुओं पर निर्भर होते है।

एनिमलिया जगत जंतु जगत का सबसे विकसित तथा विशाल जगत है जिसमें सभी विशालकाय जीव आते है। इस जगत में

इन जीवो को मेट्रोजोआ भी कहा जाता है। इनमें मछली, पक्षी, सरीसृप, स्तनधारी आदि कशेरुकीय प्राणी है।

जीव विज्ञान का महत्त्व importance of biology 

जीव विज्ञान सभी जीव जंतुओ से सम्बंधित विज्ञान है। जीव विज्ञान के अंतर्गत ही सभी जीवित प्राणियों का अध्ययन, किया जाता है।

जीव विज्ञान के अंतर्गत जंतु तथा वनस्पतियों की लगभग 8.7 मिलियन प्रजातियाँ सिम्मिलित है। किन्तु उनमें से 1.9 मिलियन प्रजातियाँ ज्ञात है। जबकि कुछ प्रजातियाँ विलुप्त हो गई है।

इसलिए जीव विज्ञान के द्वारा धरती पर जीवन की उत्पत्ति, विकास, विविधता आदि का अध्ययन किया जाता है। मानव जीवन में जीव विज्ञान का महत्व किस प्रकार है आइये समझते है:-

शरीर में होने वाले परिवर्तन

मनुष्य के शरीर की संरचना जीवों में सबसे जटिल संरचना होती है। कियोकि मनुष्य ही धरती पर सबसे विकसित प्राणी है। इसलिए मनुष्य के शरीर में निरंतर परिवर्तन होते रहते है।

जिनके कारण और शरीर पर प्रभाव का अध्ययन जीव विज्ञान में ही होता है। इसके साथ ही अन्य जीवों की उत्पत्ति उनकी संरचना तथा शरीर में होने वाले जैविक और रासायनिक क्रियाओं का अध्ययन जीव विज्ञान में होता है। 

स्वस्थ्य और पोषण का विज्ञान

जीव विज्ञान स्वस्थ्य और पोषण का विज्ञान भी है। अगर मनुष्य तथा अन्य जीवधारी वाह वातावरण से पोषण प्राप्त नहीं करता है।

तो वह दैनिक क्रियाकलापों के लिए ऊर्जा प्राप्त नहीं कर पाता है, तथा व्यक्ति अश्वस्थ्य हो जाता है। इसलिए पोषण सभी जीवों के लिए अति आवश्यक प्रक्रिया होती है।

इसलिए जीव विज्ञान में स्वास्थ्य और पोषण का अध्ययन करके मनुष्य के स्वस्थ्य सम्बन्धी विकार दूर करके मनुष्य तथा जीवों के शरीरिक स्वस्थ्य मजबूत भी बनाया जाता है। 

जीव विज्ञान में कैरियर

जीव विज्ञान कैरियर की दृष्टि से महत्वपूर्ण विज्ञान है। जीव विज्ञान को अध्ययन की सुबिधा से कई शाखाओं में विभक्त भी किया है।

अतः जीव विज्ञान की किसी एक शाखा का विशिष्ट ज्ञान आपका कैरियर बना सकता है। जीव विज्ञान में चिकित्सा विज्ञान का अध्ययन कर आप डॉक्टर बन सकते है।

तथा कई छोटे - छोटे कोर्स है जिनको करके रोजगार पा सकते है, जैसे - पैथोलॉजी, एक्सरे तकनीशियन, फार्मेसिस्ट, नर्स आदि।

जीवों के विकास का अध्ययन

जीवों का विकास कैसे हुआ किस प्रकार से हुआ आदि का अध्ययन जीव विज्ञान के अंतर्गत किया जाता है। मनुष्य एक जिज्ञासु प्राणी है

और वह जीवों के इतिहास के बारे में जानने के लिए प्राचीन काल से ही उत्सुक रहा है। इसलिए जीव विज्ञान जीवों के विकास, उत्पत्ति आदि के अध्ययन में भी महत्वपूर्ण है।

रोगकारको के अध्ययन में

जीव विज्ञान के अंतर्गत कई प्रकार के जीव आते है। कुछ सूक्ष्मजीव, बेक्टीरिया वायरस आदि होते है, जो जीवों तथा मनुष्य में कई रोगों को उत्पन्न करते है।

जीव विज्ञान में इन सूक्ष्मजीवों का अध्ययन उनसे होने वाले रोग, लक्षण आदि का अध्ययन किया जाता है, ताकि मनुष्य तथा जीवों को विभिन्न रोगों से होने वाले घातक प्रभावो से बचाया जा सके।

बीमारियों का इलाज

विज्ञान के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के रोगवाहक जीवाणु, सूक्ष्मजीव तथा उनसे फैलने वाली बीमारियों का अध्ययन किया जाता है।

मानव शरीर पर बीमारियों का प्रभाव का अध्ययन कर मनुष्य को विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाने का इलाज खोजा जाता है।

आज के समय में घातक से घातक बीमारियों से निपटने के लिए असरकारक दवाइयाँ उपलब्ध हो गई है। जिसमें जीव विज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

संपूर्ण शरीर का अध्ययन

जीव विज्ञान के द्वारा सभी जीव जंतुओं के संपूर्ण शरीर में होने वाले परिवर्तन जैविक तथा रासायनिक क्रियाओं का ज्ञान होता है।

शरीर का निर्माण किस प्रकार से हुआ पोषण किस प्रकार से होता है, शरीर के विभिन्न अंगों का कार्य संचालन आदि के बारे में जीव विज्ञान से ही हमें महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। 

दोस्तों आपको यह लेख जीव विज्ञान क्या है (What is biology कैसा लगा हमें कमेंट करके अपनी राय जरूर दीजिएगा तथा इसे अपने दोस्तों में शेयर करना ना भूलिएगा।

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